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  • 11 ટાસ્ક્સ - Chapter 24

    1સવારે આશુતોષ વહેલો ઉઠ્યો હતો. મોર્નિંગ વોક માટે જવું કે નહીં એમ વિચારતા એણે પોત...

  • ચંદા

    ચંદા'       થાળી મૂકતા જ ખ્યાલ આવ્યો આજે એ જોવા ના મળી, હાથ ધોઈને પાછું એ બા...

  • Mitalika - Ek Adhuri Prem Kahani - Part 8

    वही चेहरा. वही आँखें. वही कपडे. यहाँ तक कि उसके माथे पर मौजूद छोटा- सा निशान भी....

  • ರಕ್ತ ಲಿಪಿಯ ಚಿರಂಜೀವಿ - 68

    ಕಾಲದ ಲಯವನ್ನು ಅರಿತ ಆದರ್ಶ್ ಮತ್ತು ರಶ್ಮಿ ಈಗ ಪ್ರವೇಶಿಸುತ್ತಿರುವುದು ಪ್ರಜ್ಞೆಯ ಅಖಂಡ ಕಲೆ -...

  • શ્રી હનુમાન ચાલીસા: એક નવા અર્થ સાથે

    શ્રી હનુમાન ચાલીસા (અર્થ સહિત)દોહરોપંક્તિ: શ્રી ગુરુ ચરન સરોજ રજ, નિજ મનુ મુકુરુ...

  • खेल के पार

                     मेरे मन में उस डर...

  • Best Of AP (Part-2)

    पुस्तक समीक्षा: समय – आचार्य प्रशांतआचार्य प्रशांत की पुस्तक समय एक सामान्य टाइम...

  • બાળપણની એ રફનોટ - 11

    પ્રકરણ ૧૧: રાજકુમાર નિખિલનો જન્મદિવસ વર્ષ ૨૦૦૦ના એ ઉનાળાની એક નવી જ ભાસ્કર-કિરણો...

  • Devil की दास्तान - 25

    (सिमरन धीरे-धीरे आँखें खोलती है।वो करवट बदलती है — तभी देखती है, सामने करण खड़ा...

  • बंद बंगल्याचे गूढ - भाग 4

    प्रकरण १: महामार्गावरील शर्यत आणि भीतीचे सावट दुपारचे तीन वाजायला आले होते. आकाश...

એક પુરુષ- બધાની વચ્ચે એકલો By Aloka Patel

એક દિવસ, ઘણી જવાબદારીઓ

સવારે છ વાગ્યાનો એલાર્મ વાગ્યો.

મિહિરે આંખો ખોલી, પણ થોડી ક્ષણો માટે પથારીમાં જ પડ્યો રહ્યો.

બાજુમાં તેની પત્ની નિશા હજુ ઊંઘતી હતી. સામેની દિવાલ પર...

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निषाद पर्व By Prof Shriram V Kale

“प्रभासक्षेत्री यादव वीरांचा संहार झाला. बलराम, श्रीकृष्ण यांचीही अवतार समाप्ती झाली. सिंधुसागर कणाकणाने द्वारकापुरी आपल्या उदरात घेऊ लागला. यादवीतून वाचलेले वृध्द, नारीजन आणि बालक...

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बांसुरी की धुन By prem chand hembram

भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे।
देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...

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पवित्र बहु By archana

रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी।

चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया।

वह...

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कोकणातले भोरपी By Prof Shriram V Kale

लावणी सुरू होण्याचा हंगाम आलेला होता. त्यावेळी सकाळ संध्याकाळ दोन वेळा शाळा भरायची. नऊ वाजता लघवीची सुटी झाली नी आम्ही वर्गा बाहेर पडून देवराईकडे दडदडत निघालो. ग्रामपंचायती...

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खोटा सिक्का By prem chand hembram

खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । By miss k

क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...

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सूर्यकुल का सूर्यास्त By ALLA NOOR KHAN

क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...

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लिंग्या गुरवाला लॉटरी लागली By Prof Shriram V Kale

कालवीतून टेंबवलीत जाणाऱ्या रस्त्यावर भिड्यांच्या घराकडून जरा पुढे गेल्यावर मळे जमीन सुरू व्हायची. तिथे सड्यावरून आलेल्या व्हाळावरची मोरी ओलांडून जरा पुढे गेलं की जवळ जवळ दीडेक फ...

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धर्मराज की सभा By prem chand hembram

धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल, कपट और अन्याय का ऐसा अंधकार फैल चुका था कि धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था। मनुष्य अपनी बुद्धि और चत...

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એક પુરુષ- બધાની વચ્ચે એકલો By Aloka Patel

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સવારે છ વાગ્યાનો એલાર્મ વાગ્યો.

મિહિરે આંખો ખોલી, પણ થોડી ક્ષણો માટે પથારીમાં જ પડ્યો રહ્યો.

બાજુમાં તેની પત્ની નિશા હજુ ઊંઘતી હતી. સામેની દિવાલ પર...

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निषाद पर्व By Prof Shriram V Kale

“प्रभासक्षेत्री यादव वीरांचा संहार झाला. बलराम, श्रीकृष्ण यांचीही अवतार समाप्ती झाली. सिंधुसागर कणाकणाने द्वारकापुरी आपल्या उदरात घेऊ लागला. यादवीतून वाचलेले वृध्द, नारीजन आणि बालक...

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पवित्र बहु By archana

रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी।

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कोकणातले भोरपी By Prof Shriram V Kale

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खोटा सिक्का By prem chand hembram

खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...

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क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...

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लिंग्या गुरवाला लॉटरी लागली By Prof Shriram V Kale

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धर्मराज की सभा By prem chand hembram

धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल, कपट और अन्याय का ऐसा अंधकार फैल चुका था कि धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था। मनुष्य अपनी बुद्धि और चत...

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