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Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultur...Read More


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वो वैसा नहीं जैसे सोचा था By Aarika Shadow

एक सुनसान सड़क पर एक बस जा रही थी...बस में कई लोग बैठे थे — उन्हीं में से एक थी Manini, एक 22-year-old खूबसूरत और मासूम सी लड़की वो अपने घर जा रही थी, उसने हल्का सा डेनिम सूट पहन र...

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चक्रवात By Deepak sharma

                 1 शशि की बेहोशी जब टूटी तो उस ने अपने को सोफ़े पर पाया ।                 &nbsp...

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द्वितिय महायुद्ध - भाग 28 By Siddhesh Chaudhari

  मे १९४५. युरोपच्या भूमीवर हिटलरच्या मृत्यूसह आणि नाझी जर्मनीच्या शरणागतीसह महायुद्धाचा एक भयंकर अध्याय संपला होता. युरोपमधील शहरे आता शांत झाली होती. पण जगाच्या दुसऱ्या टोकाला, प...

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पीपल ड्योढ़ी By Deepak sharma

                  यह वृतांत बीसवीं सदी के साठवें और आठवें दशकों के बीच की एक बीती है।              ...

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રાહ હૃદયની - 2 By Harsh Jethva

બે દુનિયા કેટલાક સંબંધો વચ્ચે અંતર કિલોમીટરમાં નથી હોતું. એ અંતર ઘરની પરિસ્થિતિમાં હોય છે. પરિવારની સ્થિતિમાં હોય છે. સામાજિક વર્ગમાં હોય છે. અને ક્યારેક તો બે લોકોના જીવનને મળતા ર...

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तुम हो तो सब कुछ है - भाग 15 By Ankit Khatri

समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता।कभी जिंदगी इंसान को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है, जहां आगे का रास्ता दिखाई नहीं देता। और कभी वही जिंदगी धीरे-धीरे उन रास्तों को आसान कर देती है, जिन...

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चुन्नू और मुन्नू - एक खट्टी-मीठी दोस्ती ( भाग - 3) By Vishakha Pareek

मुन्नू एक गहरी सांस लेकर दरवाजा खोलता है। सामने पुलिस खड़ी होती है! पुलिस को देखकर चुन्नू और मुन्नू की तो होश और हवाइयां दोनों ही उड़ जाती हैं। मुन्नू हकलाते हुए बोलता है—"आप... आप...

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Surviving or Living? By Shreeya Desai

A question that has bugged me since I joined college. I was very excited, like every other person I watched student of the year and channeled  the inner Shanaya, there was so much...

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Honey Trap By S Sinha

                                                      Honey Trap    Kimaya was born in a lower middle class family . Both her parents used to work in a private factory making plast...

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बुकनी By Deepak sharma

                “कुछ चाहिए क्या?” अपने पति बलवान के पाश्र्व घाट पर बुकनी हर रात टपक लेती है….        ...

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आत्मग्लानि By S Sinha

                                                                           आत्मग्लानि        कॉलेज के अंतिम दिनों में रजनी और उसकी सहेली विभा आपस में बातें कर रहीं थीं  .  रजनी बहु...

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पत्थर तले By Deepak sharma

                  उस बृहस्पतिवार के बाद से मैं अब चौकन्नी रहने लगी हूं। अपने बक्से के प्रति।अपनी आलमारी के प्रति।अपने खाने के प्रति।अपन...

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મરદ કસુંબલ By Sugha Bapodara

️ મરદ કસુંબલ: સવાજી ગોહિલનું અમર બલિદાન​આશરે ત્રણસો વરસ પહેલાં, પાલિતાણાની ગારિયાધારવાળી ગાદી ઉપર કાંધાજીના કુંવર સવાજી ગોહિલ રાજ કરતા હતા. અઢારેક વરસની અવસ્થા હતી. લોહીના ટીપેટીપા...

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जग्गू - द डिटैक्टिव - 1 By Rakesh Kumar Sharma

‘‘हे भगवान इसको भी अभी टूटना था’’ - हाथ से पुराना शिशा गिरने पर जग्गू बड़बड़ाया। टेबल पर रखा शिशा उसके हाथ लगने से नीचे गिरकर चकनाचूर हो गया। ‘‘पता नहीं मेरे ही साथ ऐसा क्यों होता...

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એક પુરુષની આઝાદી! - 1 By Ashoksinh jadeja

પ્રકરણ ૧: નળિયાવાળું ઘર, ગણતરીની જિંદગી અને વણબોલાયેલો પ્રેમ   ગામડાના એક શાંત, ધૂળિયા ખૂણામાં એ નાનકડું ઘર ઊભું હતું. કાચી માટીથી ચણેલી દીવાલો અને માથા પર વર્ષો જૂનાં, કાળાં પડી ગ...

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The Slightly Forgotten Traders Of Perfidy Town By Sameer Khan Brohi

The SlightlyForgotten Traders Of Perfidy TownSameer Khan Brohi      Sameer Khan Brohi aka Sam crafts mostly satirical fables when he is not doing Raja Yoga Meditation, reading Rusk...

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બેસ્ટ મિત્ર - 2 By bhuri

પછી એમ કરતા કરતા કૉલેજ બી પૂરી થઈ .અને પછી અમે બે ઓ એમ માં ગયા . ત્યારે એમે બે મિત્ર સાથે જતેલા. પછી એમે બે ઓ વાત કરવા નું ચાલુ કર્યું.પછી મારી વાત ચીત ચાલુ થી જી અને સાથે બે વર્ષ...

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सुख-चैन By Rajeev kumar

मंगरू ने बैठे-बैठे सोचा कि घर के लोगों के सुख-चैन की पूर्ति करना ही नियती है, क्या यही जीवन है। अगर यही जीवन है तो कैसा यह जीवन है। अपनी पसंद का कुछ कर नहीं सकता, कुछ खरीद नहीं सकत...

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काल-दोष By Deepak sharma

                सर्द दिसंबर की उस तेरहवीं तारीख को विलंब के कारण हिमगिरि एक्सप्रेस पठानकोट से लखनऊ रात में नौ पैंतीस पर पहुंची।   &nbsp...

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Coffee ના Cup માં Cha By Dhatri Vaghadiya C.

ચાના રસિયાઓ તો ઘણા મળી જાય. પરંતુ કોફી પીતા માણસને ચા પીવી ગમે, એવી વાત ગળે ઊતરે ખરું? ચા અને કોફી - બંને એક પ્રકારનું વ્યસન જ છે. પરંતુ મને તો શરૂઆતથી જ ચાની આદત. જેમ જેમ કામ વધતુ...

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શાંતિનો અભિગમ By yeash shah

      એક ગામમાં સાજીભાઈ નામના એક વૃદ્ધ ખેડૂત રહેતા હતા. તેઓ તેમના શાંત અને સરળ સ્વભાવ માટે આખા ગામમાં જાણીતા હતા. ગમે તેવી પરિસ્થિતિ હોય, તેમના ચહેરા પરથી શાંતિ ક્યારેય ઓછી થતી નહો...

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कर्त्तव्य By Rajeev kumar

  भयंकर गर्मी से निजात पाने के लिए सब अपने-अपने तरह से कोशिश कर रहे थे। सुर्यदेव की उग्रता के सामने सब नतमस्तक थे। आलम यह था कि सुर्यदेव जो सुबह उग्र होते थे तो उनका गुस्सा शाम को...

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अल्गोरिदमच्या हातात आपले जग By Mayuresh Patki

आपण मोबाईल हातात घेतो आणि काही सेकंदांत आपल्या आवडीच्या बातम्या, व्हिडीओ, जाहिराती, राजकीय चर्चा, मनोरंजनाचे कार्यक्रम किंवा एखाद्या उत्पादनाची माहिती आपल्यासमोर येते. आपण त्यापैकी...

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स्कूल की छुट्टी और बारिश By Vandna Sharma

अदिति किचन में जल्दी-जल्दी हाथ चला रही थी। दीवार घड़ी में एक बज रहा था। डेढ़ बजे अर्णव की छुट्टी होनी थी।बाहर सुबह से झिम-झिम बारिश हो रही थी, जो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। का...

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आज्ञा By Rajeev kumar

  प्रताप ने कुछ देर रूक कर कुछ गहरा सोचा और आगे बढ़ गया, धड़कन सामान्य हो चली थी और पसीने की बुंदे उसके रूमाल में समा चुकी थीं लेकिन कुछ सोच तो वह अब भी रहा था। प्रताप के ललाट के ऊपर...

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raja virandr ki love story By Dheeraj kumar Kashyap

राजा वीरेंद्र और रानी देविकाएक समय की बात है, सुंदरवन नाम का एक खुशहाल राज्य था। वहाँ के राजा वीरेंद्र और रानी देविका अपनी प्रजा से प्रेम करते थे। राजा बहादुर और न्यायप्रिय थे, जबक...

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સત્યા નું સત્ય By Nirali

અરવ મારી જિંદગીનું પહેલું અને છેલ્લું સરનામું હતો. અમે બંને એક જ શેરીમાં મોટાં થયાં. મને આજે પણ યાદ છે કે જ્યારે અમે પા-પા પગલી ભરતાં શીખતાં હતાં, ત્યારથી જ અરવ મારો હાથ પકડીને ચાલ...

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खरी खरी By Dr Sandip Awasthi

वैचारिकी :-     धार्मिकता,लेखक और हिप्पोक्रेट बुद्धिजीवी ---------------------------------------   एक लेखक ,विचारक की धार्मिक दृष्टि भी होती ही है।भले ही बाद में चार...

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कुर्सी के कवि By Deepak sharma

                    “श्री विशेश्वर नाथ घर पर हैं क्या?” बाहर चूड़ियों की खनखनाहट के साथ मधुर एक स्त्री- स्वर खनका। &nb...

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उलगुलान २०२६ By Mayuresh Patki

नाशिकच्या अनंत कान्हेरे मैदानातून हजारो पावलं मुंबईच्या दिशेने निघाली, तेव्हा तो फक्त १८० किलोमीटरचा प्रवास नव्हता. त्या पावलांसोबत डोंगर होते, जंगल होतं, आश्रमशाळा आणि वसतिगृहं हो...

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અધૂરી મુલાકાત, પૂર્ણ પ્રેમ By Aloka Patel

વરસાદની એ સાંજ કંઈક અલગ જ હતી.આકાશમાં કાળા વાદળો છવાયેલા હતા અને રસ્તાઓ પર વરસાદના ટીપાં જાણે કોઈ જૂની યાદોને ફરી જીવંત કરી રહ્યા હતા. શહેરની એક નાની કેફેની બારી પાસે આરોહી એકલી બે...

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वो वैसा नहीं जैसे सोचा था By Aarika Shadow

एक सुनसान सड़क पर एक बस जा रही थी...बस में कई लोग बैठे थे — उन्हीं में से एक थी Manini, एक 22-year-old खूबसूरत और मासूम सी लड़की वो अपने घर जा रही थी, उसने हल्का सा डेनिम सूट पहन र...

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चक्रवात By Deepak sharma

                 1 शशि की बेहोशी जब टूटी तो उस ने अपने को सोफ़े पर पाया ।                 &nbsp...

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  मे १९४५. युरोपच्या भूमीवर हिटलरच्या मृत्यूसह आणि नाझी जर्मनीच्या शरणागतीसह महायुद्धाचा एक भयंकर अध्याय संपला होता. युरोपमधील शहरे आता शांत झाली होती. पण जगाच्या दुसऱ्या टोकाला, प...

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બે દુનિયા કેટલાક સંબંધો વચ્ચે અંતર કિલોમીટરમાં નથી હોતું. એ અંતર ઘરની પરિસ્થિતિમાં હોય છે. પરિવારની સ્થિતિમાં હોય છે. સામાજિક વર્ગમાં હોય છે. અને ક્યારેક તો બે લોકોના જીવનને મળતા ર...

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तुम हो तो सब कुछ है - भाग 15 By Ankit Khatri

समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता।कभी जिंदगी इंसान को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है, जहां आगे का रास्ता दिखाई नहीं देता। और कभी वही जिंदगी धीरे-धीरे उन रास्तों को आसान कर देती है, जिन...

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चुन्नू और मुन्नू - एक खट्टी-मीठी दोस्ती ( भाग - 3) By Vishakha Pareek

मुन्नू एक गहरी सांस लेकर दरवाजा खोलता है। सामने पुलिस खड़ी होती है! पुलिस को देखकर चुन्नू और मुन्नू की तो होश और हवाइयां दोनों ही उड़ जाती हैं। मुन्नू हकलाते हुए बोलता है—"आप... आप...

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Honey Trap By S Sinha

                                                      Honey Trap    Kimaya was born in a lower middle class family . Both her parents used to work in a private factory making plast...

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बुकनी By Deepak sharma

                “कुछ चाहिए क्या?” अपने पति बलवान के पाश्र्व घाट पर बुकनी हर रात टपक लेती है….        ...

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आत्मग्लानि By S Sinha

                                                                           आत्मग्लानि        कॉलेज के अंतिम दिनों में रजनी और उसकी सहेली विभा आपस में बातें कर रहीं थीं  .  रजनी बहु...

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पत्थर तले By Deepak sharma

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મરદ કસુંબલ By Sugha Bapodara

️ મરદ કસુંબલ: સવાજી ગોહિલનું અમર બલિદાન​આશરે ત્રણસો વરસ પહેલાં, પાલિતાણાની ગારિયાધારવાળી ગાદી ઉપર કાંધાજીના કુંવર સવાજી ગોહિલ રાજ કરતા હતા. અઢારેક વરસની અવસ્થા હતી. લોહીના ટીપેટીપા...

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जग्गू - द डिटैक्टिव - 1 By Rakesh Kumar Sharma

‘‘हे भगवान इसको भी अभी टूटना था’’ - हाथ से पुराना शिशा गिरने पर जग्गू बड़बड़ाया। टेबल पर रखा शिशा उसके हाथ लगने से नीचे गिरकर चकनाचूर हो गया। ‘‘पता नहीं मेरे ही साथ ऐसा क्यों होता...

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એક પુરુષની આઝાદી! - 1 By Ashoksinh jadeja

પ્રકરણ ૧: નળિયાવાળું ઘર, ગણતરીની જિંદગી અને વણબોલાયેલો પ્રેમ   ગામડાના એક શાંત, ધૂળિયા ખૂણામાં એ નાનકડું ઘર ઊભું હતું. કાચી માટીથી ચણેલી દીવાલો અને માથા પર વર્ષો જૂનાં, કાળાં પડી ગ...

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પછી એમ કરતા કરતા કૉલેજ બી પૂરી થઈ .અને પછી અમે બે ઓ એમ માં ગયા . ત્યારે એમે બે મિત્ર સાથે જતેલા. પછી એમે બે ઓ વાત કરવા નું ચાલુ કર્યું.પછી મારી વાત ચીત ચાલુ થી જી અને સાથે બે વર્ષ...

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सुख-चैन By Rajeev kumar

मंगरू ने बैठे-बैठे सोचा कि घर के लोगों के सुख-चैन की पूर्ति करना ही नियती है, क्या यही जीवन है। अगर यही जीवन है तो कैसा यह जीवन है। अपनी पसंद का कुछ कर नहीं सकता, कुछ खरीद नहीं सकत...

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                सर्द दिसंबर की उस तेरहवीं तारीख को विलंब के कारण हिमगिरि एक्सप्रेस पठानकोट से लखनऊ रात में नौ पैंतीस पर पहुंची।   &nbsp...

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ચાના રસિયાઓ તો ઘણા મળી જાય. પરંતુ કોફી પીતા માણસને ચા પીવી ગમે, એવી વાત ગળે ઊતરે ખરું? ચા અને કોફી - બંને એક પ્રકારનું વ્યસન જ છે. પરંતુ મને તો શરૂઆતથી જ ચાની આદત. જેમ જેમ કામ વધતુ...

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      એક ગામમાં સાજીભાઈ નામના એક વૃદ્ધ ખેડૂત રહેતા હતા. તેઓ તેમના શાંત અને સરળ સ્વભાવ માટે આખા ગામમાં જાણીતા હતા. ગમે તેવી પરિસ્થિતિ હોય, તેમના ચહેરા પરથી શાંતિ ક્યારેય ઓછી થતી નહો...

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राजा वीरेंद्र और रानी देविकाएक समय की बात है, सुंदरवन नाम का एक खुशहाल राज्य था। वहाँ के राजा वीरेंद्र और रानी देविका अपनी प्रजा से प्रेम करते थे। राजा बहादुर और न्यायप्रिय थे, जबक...

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खरी खरी By Dr Sandip Awasthi

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उलगुलान २०२६ By Mayuresh Patki

नाशिकच्या अनंत कान्हेरे मैदानातून हजारो पावलं मुंबईच्या दिशेने निघाली, तेव्हा तो फक्त १८० किलोमीटरचा प्रवास नव्हता. त्या पावलांसोबत डोंगर होते, जंगल होतं, आश्रमशाळा आणि वसतिगृहं हो...

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