अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया

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चाय की एक मशहूर दुकान के सामने, शहर की व्यस्त सड़क पर गाड़ियों का शोर अपने चरम पर था। वहाँ खड़ी एक सफेद सेडान कार के बोनट से पीठ टिकाए कबीर खड़ा था। उसकी सादी सूती शर्ट की आस्तीनें कोहनी तक मुड़ी हुई थीं। चेहरे पर वही चिर-परिचित शांत और बेपरवाह सा भाव था। उसके आस-पास दोस्तों का पूरा झुंड आबाद था, जो किसी पुरानी बात पर ज़ोरदार ठहाके लगा रहा था।उसी भीड़ के एक कोने में पल्लवी खड़ी थी। हवा की एक लहर उसकी घुंघराली लटों को उड़ाकर उसके चेहरे पर डाल रही थी, लेकिन उसका ध्यान इस ओर बिल्कुल नहीं था। उस पूरे शोरगुल

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 1

चाय की एक मशहूर दुकान के सामने, शहर की व्यस्त सड़क पर गाड़ियों का शोर अपने चरम पर था। खड़ी एक सफेद सेडान कार के बोनट से पीठ टिकाए कबीर खड़ा था। उसकी सादी सूती शर्ट की आस्तीनें कोहनी तक मुड़ी हुई थीं। चेहरे पर वही चिर-परिचित शांत और बेपरवाह सा भाव था। उसके आस-पास दोस्तों का पूरा झुंड आबाद था, जो किसी पुरानी बात पर ज़ोरदार ठहाके लगा रहा था।उसी भीड़ के एक कोने में पल्लवी खड़ी थी। हवा की एक लहर उसकी घुंघराली लटों को उड़ाकर उसके चेहरे पर डाल रही थी, लेकिन उसका ध्यान इस ओर ...Read More

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 2

पल्लवी के मुँह से निकली उस कांपती हुई आवाज़—"मेरा हाथ छोड़ दो"—के बाद, सड़क के उस किनारे पर छाई कुछ सेकंड और ठहरी। फिर अचानक, ग्रुप के सबसे शरारती लड़के, रोहन ने एक ज़ोरदार नकली खांसी की।"अरे भाई कबीर, क्या बात है! एकदम साउथ की फिल्मों वाले हीरो की तरह एंट्री मारी है तूने आज। बेचारे बाइक वाले की तो रूह ही कांप गई होगी तेरी ये शक्ल देखकर!" रोहन के इतना कहते ही, वहां मौजूद सारे दोस्तों का वो दबा हुआ ठहाका एक साथ फूट पड़ा।उस हंसी ने उस भारी, दमघोंटू और अजीब सी नर्वसनेस को एक झटके ...Read More

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 3

**भाग तीन: फ़ासले दिलों के**अगले दिन की दोपहर बेहद उमस भरी थी। आसमान में मटमैले बादल डेरा डाले हुए जो बरसने का नाम नहीं ले रहे थे, बस हवा में एक दमघोंटू चिपचिपाहट घोल रहे थे। पल्लवी का मन आज अपनी उस वातानुकूलित आलीशान हवेली में बिल्कुल नहीं लग रहा था। कबीर की एक झलक पाने की वो बेताब तड़प, जो रात भर उसकी आँखों से नींद चुराती रही, अब बर्दाश्त की हदें पार कर चुकी थी। किसी भी बहाने से, बस उसे कबीर को देखना था।पल्लवी ने अपनी सफेद कार निकाली और बिना सोचे-समझे शहर के उस छोर ...Read More

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 5

**भाग पांच: हक़ीक़त की दीवार**कमरे में एक भारी खामोशी पसरी हुई थी, जिसे सिर्फ बाहर गिरती बारिश की बौछारें कोने में खड़खड़ाते कूलर की आवाज़ ही भेद पा रही थी। पल्लवी ने स्टील के गिलास से पानी का आखिरी घूंट भरा, और कबीर ने बेहद सहजता से उसके कांपते हाथों से वह गिलास वापस ले लिया।"तू लेट जा थोड़ी देर। माथे पर सूजन साफ़ दिख रही है। मैं रसोई में अदरक वाली कड़क चाय बनाता हूँ, सिर का दर्द एक झटके में गायब हो जाएगा," कबीर ने पलटते हुए अपने उसी पुराने, बेपरवाह लेकिन फिक्रमंद अंदाज़ में कहा। उसने ...Read More

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 4

**भाग तीन: फ़ासले दिलों के**अगले दिन की दोपहर बेहद उमस भरी थी। आसमान में मटमैले बादल डेरा डाले हुए जो बरसने का नाम नहीं ले रहे थे, बस हवा में एक दमघोंटू चिपचिपाहट घोल रहे थे। पल्लवी का मन आज अपनी उस वातानुकूलित आलीशान हवेली में बिल्कुल नहीं लग रहा था। कबीर की एक झलक पाने की वो बेताब तड़प, जो रात भर उसकी आँखों से नींद चुराती रही, अब बर्दाश्त की हदें पार कर चुकी थी। किसी भी बहाने से, बस उसे कबीर को देखना था।पल्लवी ने अपनी सफेद कार निकाली और बिना सोचे-समझे शहर के उस छोर ...Read More

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 6

**भाग छ: टूटे ख़्वाब, बिखरी दुनिया**कमरे के उस घुटन भरे सन्नाटे को पीछे छोड़कर कबीर बाहर उस तेज़ बारिश आ खड़ा हुआ था। आसमान जैसे आज पूरी ताकत से रो रहा था और बारिश की मोटी, सर्द बूंदें कबीर के चेहरे पर किसी बेरहम चाबुक की तरह पड़ रही थीं। उसकी शर्ट पूरी तरह भीग कर उसके शरीर से चिपक गई थी, लेकिन वह अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिला। उसने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं और अपना चेहरा आसमान की तरफ उठा लिया।कबीर के चेहरे पर बहता हुआ पानी सिर्फ बारिश का नहीं था। उसकी ...Read More

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 7

**भाग सात: हवेली की चौखट पर**दरवाज़े पर पड़ने वाली वो ज़ोरदार दस्तक और पल्लवी के माता-पिता की वो घबराई आवाज़ें अब पल्लवी के कानों तक नहीं पहुँच रही थीं। वह कमरे के फर्श से उठी और किसी बेजान मशीन की तरह घिसटते हुए अपने मखमल के बिस्तर तक पहुँची। उसने अपने भीगे हुए कपड़े नहीं बदले, न ही अपने बालों को सुलझाया। वह बस उसी हालत में बिस्तर पर गिर पड़ी। उसकी आँखें छत पर टंगे उस कीमती झूमर को घूर रही थीं, लेकिन उसे वहां सिर्फ कबीर की वह सर्द आँखें और उसके वे चुभते हुए लफ़्ज़ नज़र ...Read More

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 8

**भाग आठ: एक बाप की चेतावनी**कबीर अभी उस आलीशान ड्रॉइंग रूम के बीचों-बीच खड़ा ही था कि हवेली का भारी सन्नाटा एक भयंकर गूंज से टूट गया। इससे पहले कि रोहन या सुमन कुछ बोल पाते, पल्लवी के पिता राजेश किसी घायल शेर की तरह आगे बढ़े। उनका चेहरा गुस्से, डर और एक पिता की बेबसी से एकदम सुर्ख लाल हो चुका था।बिना एक पल की देरी किए, राजेश ने अपने दोनों कांपते हुए, लेकिन मज़बूत हाथों से कबीर की उस पुरानी सूती शर्ट का कॉलर पूरी ताकत से जकड़ लिया। उनकी उंगलियों की नसें साफ़ तन गई थीं।"क्या ...Read More

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 9

**भाग नौ: शिकवे और आँसू**उस विशाल गलियारे में, पल्लवी के कमरे का वह भारी ओक का दरवाज़ा किसी ठोस की तरह खड़ा था। कबीर उस दरवाज़े के ठीक सामने आकर रुक गया। उसने एक गहरी सांस ली, अपने हाथों को मुट्ठी में बांधा और बहुत ही भारी आवाज़ में पुकारा, "पल्लवी..."दरवाज़े के उस पार कोई हलचल नहीं हुई।कमरे के अंदर, पल्लवी अपने विशाल बिस्तर के किनारे, फर्श पर घुटनों को मोड़कर बैठी थी। उसका चेहरा आंसुओं से चिपका हुआ था, बाल बिखरे थे और होंठ सूख चुके थे। पिछले चौबीस घंटों से वह उसी एक जगह पर बैठी थी। ...Read More

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 10

**भाग दस: हक़ीक़त का सौदा**"कबीर... हाँ या ना?" पल्लवी की आवाज़ में अपनी आख़िरी उम्मीद को बचाने की एक तड़प थी। उसकी आँखें कबीर के चेहरे पर जमे उस कटे हुए होंठ के खून को देख रही थीं।कबीर ने अपनी आँखें बंद कीं। बंद आँखों के पीछे उसे नीचे खड़े राजेश के वो तीन थप्पड़ और उनकी वो खौफनाक धमकी सुनाई दी— *'मैं तुझे इसी हवेली के फर्श के नीचे ज़िंदा दफना दूंगा।'* कबीर डरता नहीं था, ना अपनी जान से और ना राजेश की दौलत से। लेकिन वह इस 'छोटे दिमाग वाली' लड़की के उस मासूम भविष्य से ...Read More

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 11

**भाग दस: हक़ीक़त का सौदा**कमरे की वह भारी खामोशी अब पल्लवी की सिसकियों में टूट रही थी। उसने अपना कबीर की पहुँच से दूर खींच लिया था और अपनी सूजी हुई, लाल आँखों से उसे घूर रही थी।"मैं नहीं आउंगी नीचे," पल्लवी ने किसी ज़िद्दी बच्ची की तरह अपना सिर हिलाया। उसकी आवाज़ अभी भी कांप रही थी।कबीर ने एक गहरी, थकी हुई सांस छोड़ी। उसने अपनी कमर पर दोनों हाथ रखे और पल्लवी को घूरते हुए पूछा, "और क्यों नहीं जाएगी तू नीचे? नीचे तेरे माँ-बाप की जान सूख रही है तेरी फिक्र में, और तुझे यहाँ ज़िद ...Read More

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 12

**भाग बारह: आंसुओं का सैलाब और टूटी उम्मीद**हवेली के उस आलीशान कमरे में छाई वह खौफनाक, अजीब सी खामोशी टूट ही गई। दीवार के उस सूने कोने को एकटक घूरती पल्लवी की आँखों में अचानक जैसे चेतना लौट आई। कबीर के जाने का वह कड़वा एहसास और दिल के पूरी तरह टूटने का दर्द अब उसके पूरे वजूद पर हावी हो चुका था।"मॉम..." पल्लवी के सूखे होठों से एक बहुत ही बेजान और दर्दभरी चीख निकली।अगले ही पल, पल्लवी बिस्तर से लगभग घिसटती हुई आगे बढ़ी और सामने बैठी अपनी माँ सुमन के गले से जाकर बुरी तरह चिपक ...Read More

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 13

**भाग तेरह: दवा का असर और गहराता सस्पेंस**हवेली के बाहर डॉक्टर मल्होत्रा की गाड़ी के टायर चीखते हुए रुके। खुद दौड़कर उन्हें सीढ़ियों से ऊपर पल्लवी के कमरे में लेकर आए। कमरे के अंदर का माहौल किसी आईसीयू (ICU) जैसा गंभीर हो चुका था। सुमन पल्लवी का हाथ पकड़े लगातार रोए जा रही थीं और रोहन एक कोने में खामोश खड़ा था।डॉक्टर मल्होत्रा ने तुरंत अपना स्टेथस्कोप निकाला और पल्लवी की नब्ज़ जांची। उन्होंने उसकी आँखों की पुतलियों को देखा और फिर उसके टखने पर आई उस मोच का मुआयना किया। पूरे पांच मिनट तक कमरे में सिर्फ डॉक्टर ...Read More

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 14

**भाग चौदह: अंधेरी रात और तन्हाई की कसक**कबीर अपनी पुरानी बुलेट पर सवार होकर शहर की उस अँधेरी और सड़क पर बढ़ा जा रहा था, जहाँ सन्नाटा भी शोर मचाता हुआ महसूस हो रहा था। बुलेट के इंजन की भारी और गूँजती हुई दहाड़ सन्नाटे को चीर रही थी, और ठंडी हवा के तेज़ थपेड़े उसके चेहरे पर किसी नुकीले कांटों की तरह पड़ रहे थे। लेकिन कबीर का पूरा वजूद इस सब से कोसों दूर, किसी और ही ख्यालों की दुनिया में खोया हुआ था।सड़क के मोड़ पर जैसे ही स्ट्रीट लाइट की पीली, मद्धम रोशनी उसकी आँखों ...Read More

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 15

**भाग पंद्रह: मासूम दिल की ज़िद और आँसुओं की विदाई**अगली सुबह जब हवेली के ऊँचे कमरों में सूरज की किरण पहुँची, तो वह पल्लवी के जीवन में कोई रोशनी नहीं ला सकी। इंजेक्शन के असर से जब उसकी भारी पलकें धीरे-धीरे खुलीं, तो कमरे की दीवारें उसे किसी जेल की तरह चुभने लगीं। उसने अपनी सूजी हुई आँखों से अपने बिल्कुल बगल में बैठी माँ सुमन को देखा, जो रात भर जागने के कारण बेहद थकी हुई लग रही थीं।"मॉम..." पल्लवी की आवाज़ में अब रोने की ताकत भी नहीं बची थी, सिर्फ एक गहरा खालीपन था।"बेटा! तू उठ ...Read More

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 16

**भाग सोलह: अजनबी राहें और वो अनजान आँखें**वक़्त किसी के लिए नहीं रुकता, चाहे दिल में कितनी ही गहरी क्यों न लगी हो। देखते ही देखते छह महीने गुज़र चुके थे। इन छह महीनों में मौसम बदले, कॉलेज के सेमेस्टर बदले, और बदल गईं उन दो दिलों की ज़िदंगियां जो कभी एक-दूसरे के बिना सांस लेने से भी डरती थीं। हवेली के उस बंद कमरे का तूफ़ान अब शांत हो चुका था। पल्लवी शारीरिक रूप से बिल्कुल ठीक हो गई थी। उसने कॉलेज जाना फिर से शुरू कर दिया था, वह हंसती थी, दोस्तों से बातें करती थी, लेकिन ...Read More

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अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 17

**भाग सत्रह: जंगल की वो खामोश गवाही**सिटी ऑडिटोरियम की उस चकाचौंध और हज़ारों की भीड़ से भागकर कबीर अपनी पर सवार हुआ। पल्लवी के उन अजनबी लफ़्ज़ों ने उसके सीने में एक ऐसा नासूर पैदा कर दिया था जो अब बर्दाश्त से बाहर था। वह बाइक को पागलों की तरह दौड़ाते हुए शहर के सबसे आखिरी छोर पर उस वीरान जंगल में ले आया, जहाँ पुरानी यादों का साया भी डरता था।बरगद के उस विशाल पेड़ के नीचे बैठकर कबीर का वह सख्त मुखौटा चकनाचूर हो चुका था। वह अपनी गलती के बोझ तले दबकर दहाड़ें मार-मार कर रो ...Read More