अधूरापन

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समर्पित उन सभी स्त्रियों को जो किसी न किसी बंधन में जकड़ी हुई हैं। प्रस्तावना यह कहानी मेरा पहला सह-लेखन प्रयास है। मेरे और पृथ्वी गोहेल के विचारों को प्रस्तुत करने की एक कोशिश है। हम दोनों आशा करते हैं कि हमारा यह लेखन "अधूरापन"आपके जीवन में उत्पन्न होने वाले कई प्रश्नों के उत्तर खोजने में मददगार साबित होगा... परिकल्पना फाल्गुनी दोस्त

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अधूरापन - 1

समर्पितउन सभी स्त्रियों को जो किसी न किसी बंधन में जकड़ी हुई हैं।प्रस्तावनायह कहानी मेरा पहला सह-लेखन प्रयास है। और पृथ्वी गोहेल के विचारों को प्रस्तुत करने की एक कोशिश है। हम दोनों आशा करते हैं कि हमारा यह लेखन "अधूरापन"आपके जीवन में उत्पन्न होने वाले कई प्रश्नों के उत्तर खोजने में मददगार साबित होगा...परिकल्पनाफाल्गुनी दोस्तअध्याय - १भार्गवी... हां, बिल्कुल सही सुना आपने। लक्ष्मी समान भार्गवी। भार्गवी यानी लक्ष्मी। जिसके नाम में ही लक्ष्मी समाई हो, वह तो मानो साक्षात देवी का ही अवतार हो!वह अमृता की गोद में सिर रखकर फूट-फूटकर रो रही थी। उसका रोना किसी का ...Read More

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अधूरापन - 2

अध्याय-२भार्गवी अपनी जेठानी के गले लग गई और मानो दोनों एक-दूसरे का साथ देते हुए मूक सहमति दे रही दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और दोनों के भीतर एक अटूट ऊर्जा का संचार हुआ। मानो दोनों एक ही माँ की बेटियाँ हों, वैसा ही एक जैसा अनुभव कर रही थीं। हाँ, लेकिन जो भार्गवी के साथ हुआ, उसका मलाल तो दोनों के मन में था ही और उससे उपजा दर्द मानो दोनों के अंदर शूल की तरह चुभ रहा था। लेकिन अब आगे ऐसा कुछ भी नहीं होने देंगे, इस विचार पर दोनों का मन पक्का हो चुका ...Read More

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अधूरापन - 3

अध्याय-३गायत्री सभी के चेहरे देखकर समझ गई कि सब इस बात से उलझन में हैं कि अचानक यह क्या गया? गायत्री ने बात का खुलासा करते हुए कहा, "मैंने आप सभी से एक बात छिपाई है।"गायत्री इतना ही बोली थी कि उसके मम्मी, पापा और दोनों भाई तुरंत भवें तानकर धैर्य खो बैठे और एक साथ बोल पड़े, 'क्या छिपाया है तुमने? ऐसा क्या डर था कि तुम्हें ऐसे कुछ छिपाना पड़े?'गायत्री अभी कह ही रही थी कि परिवार गुस्से में आकर उसकी उलझन बढ़ाने लगा था। उसे समझ नहीं आया कि, 'अभी तो मैंने कोई बात भी नहीं ...Read More

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अधूरापन - 4

अध्याय-૪भार्गवी की बात सुनकर अपूर्व को भी लगा कि, वह खुद अपनी बहन को ही नहीं समझ पाया... जन्म अपनी बहन के साथ है, फिर भी दोनों भाभियाँ हम सबसे ज़्यादा विश्वास बहन पर और इस घर की परवरिश पर रखती हैं। अपूर्व महसूस कर रहा था कि, रिश्ता चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, लेकिन वह रिश्ता कितना मज़बूत है, यह बात ज़्यादा मायने रखती है। अपूर्व ऐसा सोचकर तुरंत बोल पड़ा, 'गायत्री बहन, मुझे माफ़ कर दो। मुझसे आज बहुत बड़ी भूल हो गई... तुमने मेरे हाथ पर जो राखी बाँधी है, मैं उसकी भी लाज ...Read More

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अधूरापन - 5

अध्याय - ५गायत्री अपनी दिनचर्या समाप्त करके घर के मंदिर में दीपक जलाते हुए प्रार्थना कर रही थी। उसे अफ़सोस हो रहा था। उसके मन-मस्तिष्क पर लगातार अमृता भाभी की स्थिति ही छाई हुई थी। अब तक उसके मन में भाभी के लिए सिर्फ़ सम्मान था, लेकिन आज से जैसे भाभी के प्रति विशेष सम्मान उमड़ रहा था... और इसका एकमात्र कारण यह था कि उसकी भाभी पिछले १२ वर्षों से इस दर्द को दिल में दबाकर अपने मायके और ससुराल की इज़्ज़त बचाकर बैठी हैं, वरना बिना किसी कारण के अपने चरित्र पर लगे आक्षेप भला कौन सह ...Read More

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अधूरापन - 6

अध्याय-६अमृता और भार्गवी दोनों ने मानसकुमार के घर में प्रवेश किया। उनके मन में जो डर था और उस के आधार पर जो उनकी धारणा थी, वह बिल्कुल सच साबित हुई। उन दोनों का मानसकुमार की तरफ से कोई अच्छा स्वागत नहीं हुआ। इसके बावजूद, अपनी ननद का भविष्य सुधर जाए—इसी इरादे और मन में एक आशा लेकर, मानसकुमार के उस दुर्व्यवहार को नजरअंदाज करते हुए भी वे दोनों मानसकुमार के घर के अंदर आ गईं।"ओह! तो आ गईं आप दोनों! दोनों भाभियां अपनी ननद की वकालत करने आई हैं। आपको उसे समझा-बुझाकर अपने साथ यहाँ लेकर आना चाहिए ...Read More

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अधूरापन - 7

अध्याय-७मानसकुमार को अमृताभाभी की एक-एक बात दिल को छू गई। भाभी तो चली गईं, लेकिन उनकी बातें मानसकुमार के में बार-बार गूंज ही रही थीं। उनके मन में अमृताभाभी के वे शब्द बार-बार प्रतिध्वनित हो रहे थे। वे अमृता की बातों पर मंथन करने लगे और उस आत्ममंथन के परिणामस्वरूप आज उन्होंने ऑफिस में भी छुट्टी के लिए ईमेल भेज दिया। उनका मन कहीं लग ही नहीं रहा था। मन में एक अलग ही प्रकार की पीड़ा महसूस हो रही थी। कभी वे कमरे में टहलते, तो कभी मोबाइल चलाते, लेकिन मन को शांति नहीं मिल रही थी। उनके ...Read More

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अधूरापन - 8

अध्याय - 8अमृता को अचानक चक्कर आ गए और इससे पहले कि वह गिरती, राजेश ने उसे अपनी बांहों थाम लिया। आज तक कभी उसे अमृता की चिंता नहीं हुई थी और उसका कारण सिर्फ एक ही था—अमृता मेरी भावनाओं के साथ खेल रही है और घर के सभी सदस्यों के सामने अच्छी बनने की कोशिश कर रही है... लेकिन उसकी आंखों के सामने का पर्दा कुदरत ने अब गायत्री के माध्यम से हटा दिया था। राजेश की बहन गायत्री, राजेश की आंखें खोलने का जरिया बनी थी।राजेश को एक तो उस दीवार का बहुत पछतावा था, जो उसने ...Read More

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अधूरापन - 9

अध्याय - 9अमृता अपने बेडरूम में दाखिल हुई। कमरे में कदम रखते ही उसके मन में विचार आया कि के मुंह से उसने कभी माफी शब्द नहीं सुना था, और आज अचानक पहली बार वह यह शब्द सुन रही थी, इसीलिए आधी तो वह ऐसे ही पिघल गई थी। अब तक बर्फ बनकर जी रही थी और परिवार को ठंडक दे रही थी, फिर भी उसकी कोई कद्र नहीं करता था; लेकिन आज अमृता अचानक राजेश के प्यार से पिघल गई थी। हर शादीशुदा औरत अपने पति के मुंह से ज़रा सी भी प्यार भरी बात सुन ले, तो ...Read More

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अधूरापन - 10

अध्याय - 10गायत्री और मानस के बीच एक बार फिर प्यार का नया पुल बंध गया था। 'सब्र का मीठा होता है' की कहावत के अनुसार गायत्री ने सब्र रखा और उसे उसका मीठा फल चखने को मिल ही गया। यही नहीं, गायत्री ने समझदारी दिखाते हुए बड़ा दिल रखा और रिश्ते में घमंड को दूर रखकर रिश्ते को जीत लिया। रिश्तों में अक्सर पहल हमेशा औरत को ही करनी पड़ती है, क्योंकि शायद औरत के पास ही वह कुदरती ताकत है।नारी तू नारायणी, कभी न तू हारी।खट्टी-मीठी, तीखी, कड़वी और कभी खारी!तेरी जिंदगी है अनेक स्वादों से भरी-भरी,नवरसों ...Read More

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अधूरापन - 11

अध्याय - ११अमृता की समझदारी और चतुराई भरे निर्णय के कारण मानसकुमार और गायत्री के बीच का रिश्ता बहुत हो गया था। दोनों ने अपने इस रिश्ते को अपनी समझदारी और एक-दूसरे के प्रति प्रेम से अच्छी तरह सुलझा लिया था। और उसी का परिणाम था कि गायत्री और मानसकुमार दोनों आज साथ थे। गायत्री ने अब आज अपने घर हंसते हुए चेहरे के साथ लौटने का निर्णय लिया था और अपने इस निर्णय से वह बहुत खुश थी। और उसकी यह खुशी उसके चेहरे पर मुस्कुराहट के रूप में झलक रही थी।आज झलक रही है खुशी मेरे रोम-रोम ...Read More

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अधूरापन - 12

अध्याय - १२राजेश और अमृता डॉक्टर के पास पहुँचते तब तक दोनों मन ही मन विचारों में उलझे हुए दोनों के मन में एक अनजाना डर भी था। राजेश का तो मानो पूरा व्यक्तित्व ही बदल गया था। अमृता ने अब तक जो कुछ भी उसके परिवार के लिए किया था, वह सब एक के बाद एक मानो किसी फिल्म की रील की तरह उसके अंतर्मन में चलचित्र की भांति उभर रहा था। इन सभी बातों के कारण राजेश के मन में एक सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न हो गया था। इधर अमृता भी राजेश में आए इस बदलाव से खुश ...Read More

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अधूरापन - 13

अध्याय - १३अमृता को यह समझने में देर न लगी कि रिपोर्ट अच्छी नहीं आई है, क्योंकि इस तरह राजेश अमृता से लिपट गया, यह इतने सालों में आज पहली बार ही हुआ था। राजेश के इस व्यवहार के कारण उसके मन में अनजाना डर बैठ ही गया था।राजेश के पास शब्द ही नहीं थे कि वह अमृता से क्या कहे?अमृता ने खुद ही फाइल लेकर रिपोर्ट पढ़ ली। रिपोर्ट पढ़ते ही एक पल के लिए उसका दिल एक धड़कन भूल गया। आंखों की पलकों तक आंसू आकर रुक गए। उसका गला भर आया, लेकिन कुछ ही क्षणों में ...Read More

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अधूरापन - 14

अध्याय - १४शोभाबहन अपने पति की आंखों का गुस्सा देखकर पूरी तरह सन्न रह गईं। इतने सालों में रमेशभाई कभी गुस्से में पलटकर जवाब तक नहीं दिया था, और आज सारे सालों का हिसाब रमेशभाई के शोभाबहन के गाल पर पड़े एक थप्पड़ ने चुकता कर दिया। यह जरूरी नहीं कि हर बात शांति से कहने पर सुनने वाला समझ ही जाए, लेकिन जब सही समय पर कड़ा विरोध होता है, तो व्यक्ति दोबारा अनाप-शनाप बोलने से पहले सोचता जरूर है।राजेश ने अपनी चिंता जताते हुए कहा, "अमृता को गर्भाशय के मुख का कैंसर है, तुरंत ऑपरेशन कराना पड़ेगा ...Read More

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अधूरापन - 15

अध्याय - १५भार्गवी को पलटकर जवाब देकर अपूर्व तो चला गया, लेकिन भार्गवी मन ही मन सोचती हुई खुद कोसती रही कि, "एक औरत बच्चे को जन्म देती है, लेकिन वह बच्चा बेटा होगा या बेटी, यह सिर्फ और सिर्फ पुरुष पर ही निर्भर करता है; क्योंकि पुरुष के गुणसूत्रों (क्रोमोसोम) की संरचना पर ही बच्चे का लिंग निर्भर होता है। ईश्वर ने स्त्री को इस संसार को चलाने का दर्जा दिया है, पुरुष उसका सम्मान तो नहीं करता, बल्कि कभी-कभी अपनी कमियों का दोष भी स्त्री पर ही मढ़ देता है। जो इस २१वीं सदी के लोगों के ...Read More

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अधूरापन - 16

अध्याय-१६विनय अपूर्व के मन की बात जानकर उसे सही सलाह देकर, दोनों अपने-अपने घर जाने के लिए निकल पड़े घर पहुँचा तो उसकी पत्नी नीला ऑफिस से आ चुकी थी और टेबल पर डिनर तैयार रखकर विनय का इंतज़ार कर रही थी। जैसे ही विनय आया, उसने उसे प्यार से गले लगा लिया और पूछा, "क्यों जान आज देर हो गई? ऑफिस में सब ठीक तो है न?"विनय ने भी नीला के माथे पर चूमा और अपने गले की टाई ढीली करते हुए कहा, "हाँ डार्लिंग! सब ठीक है।"विनय अभी अपूर्व की बात बताता, उससे पहले ही नीला बोल ...Read More

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अधूरापन - 17

अध्याय-१७अपूर्व जब अपने कमरे में गया, तब भार्गवी अलमारी में कपड़े व्यवस्थित रख रही थी। वह पीठ फेरकर खड़ी अपना काम कर रही थी, इसलिए उसे अंदाज़ नहीं था कि अपूर्व दरवाज़े के पास खड़ा होकर उसे ही निहार रहा है। भार्गवी कपड़े रखकर अलमारी का दरवाज़ा बंद करने ही वाली थी कि उसकी नज़र अपूर्व के उस कोट पर पड़ी, जो उसने अपनी शादी के समय पहना था। उसने उस कोट पर हाथ फेरा और बोली, "अपूर्व, मैं आपकी विरोधी नहीं हूँ, लेकिन हमारे विचार अलग होने के कारण आज रात खाना खाते समय मैं अमृता भाभी और ...Read More

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अधूरापन - 18

अध्याय-१८भार्गवी अपने ससुर की माला पूरी होने के इंतज़ार में विचारों में डूब गई थी। भार्गवी को अचानक महसूस कि, अपूर्व सुबह तो बहुत गुस्से में ऑफिस गया था, और घर आया तो एकदम शांत होकर समझदारी से व्यवहार करने लगा है। यह ज़रूर पापा की प्रार्थना का ही फल है। ऐसा सोचकर भार्गवी खुद भी मंदिर में एक दिया जलाकर भगवान को नमन करती है, और मन ही मन कहती है, 'भगवान हमारी तो अभी बहुत ज़िंदगी बाकी होगी, लेकिन मेरे ससुर को तो अब ढलती उम्र में शांति दीजिए।'भार्गवी की आँखें आँसुओं से धुँधली हो गईं। उसकी ...Read More