बड़ी इच्छा थी, श्रीरामलला के दर्शन करूँ। ट्रेन से उतरते ही अयोध्या में कदम रखा। सुबह होने में वक्त था, इसलिए पहले से बुक कमरे में चला गया।आराम करके दस बजे दर्शन के लिए निकला। रास्ते भर अयोध्या की विशालता आंखों में भरता रहा। हर प्रतिमा, हर कोना याद दिला रहा था हम श्रीराम जन्मभूमि में हैं। लगा सच में श्रीरामराज्य आ गया है।
एक मुलाकात: मानस (भाग 1)
बड़ी इच्छा थी, श्रीरामलला के दर्शन करूँ। ट्रेन से उतरते ही अयोध्या में कदम रखा। सुबह होने में वक्त इसलिए पहले से बुक कमरे में चला गया।आराम करके दस बजे दर्शन के लिए निकला। रास्ते भर अयोध्या की विशालता आंखों में भरता रहा। हर प्रतिमा, हर कोना याद दिला रहा था हम श्रीराम जन्मभूमि में हैं। लगा सच में श्रीरामराज्य आ गया है।लंबी कतार के बाद एक पल ऐसा आया जब स्वयं को श्रीराम जी के सम्मुख पाया। आंखें सजल हो उठीं। कुछ कहा नहीं, बस देखता रहा।शाम को सरयू घाट की ओर चल पड़ा। हरिद्वार की तरह यहाँ ...Read More