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“कभी-कभी हम इसलिए नहीं थकते कि ज़िंदगी बहुत मुश्किल है। हम इसलिए थक जाते हैं क्य...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 68 अपनी ही कहानी की कीमत“और वह कहानी... आपक...
उन्हें अपना...
भाग ६ — परीक्षा की शुरुआतलेखिका: अलोका पटेलसुबह के लगभग पाँच बज रहे थे।बाहर अभी...
Episode 2:- महल में विवाह या षड्यंत्र ?चन्द्रभवन के महल में विवाह की तैयारी जोर-...
चैप्टर 5: समीर का डर। समीर के सामने हवा में तैरती हुई उस सफेद स्क्रीन पर अचानक क...
लंदन की सड़क पर जब वह काली बिल्ली अपनी खौफनाक मौत मरी, ठीक उसी समय भारत के देवपु...
पितादीपा अपने किसी पारिवारिक काम से भैया से मिलने उनके घरगई थी। उसने ड्राइंग रूम...
🪷 अध्याय 20लोगस्स सूत्र — प्रत्येक गाथा का अर्थ एवं 24 तीर्थंकरों का आध्यात्मिक...
सुनो! सुनो! कब से इंतजार में बैठा हूँ अपनी व्यथा सुनाने को। सब राही बिना रुके ही...
हमारा समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ रूढ़िवादिता और अंधविश्वास का खौफ इस कदर फैल गया है कि लोग इससे बाहर निकलना ही नहीं चाहते। मैं देखता हूँ कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए बड़ी...
सेठ रत्नाकर अपने समय के धनाढ्य व्यक्तियों में से थे। अच्छा खासा नाम था उनका। सब कुछ घर मे था, नौकर चाकर घर जायदाद घोड़े गाड़ियों के अंबार! और प्रभु महादेव जी की अपार कृपा थी कि किस...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
कई वर्षों से देश मे एक नैरेटिव सेट कर दिया गया कि, की राणा पूंजा एक भील थे. जो सभी ने आसानी से मान लिया . जबकिं राणा पूंजा ,भीलों की सेना प्रतिनिधित्व करते थे, भीलों के राणा थे,...
जिंदगी किस मोड़ पर कैसे और कब बदल जाए ये कह नही सकते, ऐसा ही कुछ राजपुरोहित जी के साथ हुआ। हीरालाल जी बहुत ही संपन्न और प्रतिष्ठित कारोबारी थे। हर ओर उनकी प्रतिष्ठा, वैभवता की ख्या...
एक दिन मैं लिख रहा था कि 'मोहब्बत सभी को मिलती है', तभी अचानक मेरी कलम की नोक (निब) टूट गई। वह मुझसे कहने लगी— "तुम अभी नादान हो। जितनी मोहब्बत सुनने में अच्छी लगती है,...
नैना और आरव की शादी को पाँच साल हो चुके थे। बाहर से देखने पर उनका रिश्ता बिल्कुल परफेक्ट लगता था — बड़ा घर, अच्छी नौकरी, मुस्कुराते चेहरे… लेकिन उस घर की दीवारें जानती थीं कि वहा...
अब मान भी जाओ राधे ...!! राधा और देव कभी पड़ोसी हुआ करते थे। दोनों के पारिवारिक सबंध भी बहुत अच्छे थे। दोनों के पापा बिजनेसमैन थे।. दोनों साथ में खेलते ,कभी लड़ाई करते तो कभी...
(1) लाइक एंड कॉमेंट्स रात के लगभग साढ़े ग्यारह बजे रामलाल जी का हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। उनका बड़ा बेटा शंकरलाल गाँव से सैकड़ों मील दूर एक शहर में अफसर था। छोटे बेटे भोल...
तीस साल की दिव्या, श्वेत साड़ी में लिपटी एक ऐसी लड़की, जिसके कदमों में घुंघरू थे, पर कंधों पर सालों से एक अदृश्य बोझ। घर में उसका नाम अब एक गाली की तरह बोला जाता। सुबह सात बजे...
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