रंक से राजा: साहस और आत्मविश्वास का खेल.

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यह बात लगभग 7,000 वर्ष पूर्व की है। जब एक ओर संपूर्ण संसार में मनुष्य केवल भटक-भटक कर जीवन जीना सीख रहा था, वहीं दूसरी ओर भारत और चीन जैसे देशों में पूरी सभ्यता स्थापित हो चुकी थी। उस समय मनुष्य केवल वस्तुओं का आदान-प्रदान नहीं करते थे, बल्कि एक-दूसरे की भावनाओं को समझते थे। उस युग में मानवता आज की तुलना में 100 गुना अधिक थी; लोग इतने समझदार और निष्ठावान थे कि लेने से अधिक देने पर विश्वास करते थे।

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रंक से राजा: साहस और आत्मविश्वास का खेल - 3

यह कहानी मेरी पहली कहानी है जो हिन्दी में है। इस दुनिया में हर लोगो अनेकों अवसर मिलने के उसका उपयोग नहीं कर पाते। साहस किसी से श्रेष्ठ बनाने में नहीं, बल्कि अपने मुसीबत से मुकाबला में है। शारीरिक बल ईश्वर प्रदत्त है, लेकिन बुद्धि, आत्मविश्वास, साहस मनुष्य का व्यक्तिगत स्वभाव का विषय है। एक हाथी को एक चींटी भी मार सकता है, यदि वह भी साहस करें। इस कहानी में भी उसी का ही एक काल्पनिक चरित्र है। आशा करता हूं आप सभी को अच्छा लगेगा। ‌‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌ ‌धन्यवाद।।। ...Read More