Kahani Pyar ki - 27 in Hindi Fiction Stories by Dr Mehta Mansi books and stories PDF | कहानी प्यार कि - 27

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कहानी प्यार कि - 27

अनिरूद्ध और सौरभ होटल पर पहुंच चुके थे...
अनिरूद्ध भागता हुआ सीधा अपने रूम की तरफ जाने लगा... पर रूम पर पहुंचते ही उसे पता चला की रूम तो बंध था.. संजना वहा पर आई ही नहीं थी...

" संजू यहां भी नही है तो फिर वो गई कहा ? " अनिरूद्ध परेशान होता हुआ बोला...

" तुम टेंशन मत लो .. संजना मिल जायेगी.. एक काम करते है होटल के मेनेजर से पूछते है शायद उनको कुछ पता हो ..." सौरभ ने अनिरुद्ध को दिलासा देते हुए कहा..

" हा ..." अनिरूद्ध ने कहा और दोनो नीचे रिसेप्शन की और जाने लगे...

उन्होंने वहा जाकर मेनेजर से बात की पर उनके मुताबिक संजना होटल आई ही नहीं थी...

इस तरफ करन सी एन टावर से कुछ दूर आए एक पार्क में लेक के पास बनी बेंच पर बैठा था.. वो बस पानी में देखता हुआ अपने ख्यालों में खोया हुआ था... तभी किसीने उसके कंधे पर हाथ रखा...

वो तुरंत अपने ख्यालों में से बाहर आया.. और उसने पीछे मुड़ कर देखा... और उस इंसान को देखते ही वो हैरान रह गया...
वहा पर संजना थी....

" संजना तुम यहां कैसे ? " करन ने आश्चर्य के साथ पूछा..

" वो में टेक्सी में तुम्हारे पीछे पीछे यहां तक आई हु..." संजना ने अपनी नजरे जुकाये हुए ही कहा...

" अनिरुद्ध कहा है ? " करन ने चारो तरफ नजरे घुमाते हुए पूछा..

" वो नही है .. में अकेली ही आई हु ..."

" व्हाट ? तुम अकेली यहां मेरे पीछे पीछे आ गई ! पर क्यों ? अनिरूद्ध तुम्हारे लिए परेशान हो रहा होगा .." करन के चहेरे पर चिंता संजना को साफ दिखाई दे रही थी..

" इतनी फिक्र करते हो उसकी .. पर उस पर भरोसा नहीं कर सकते वाह ! "

" तुम कहेना क्या चाहती हो...? " करन थोड़ा गुस्से में बोला...

" यही की तुम चाहे जो भी कहो... और कोई भी वीडियो मुझे बताओ ... पर में जानती हु की मेरा अनिरुद्ध ऐसा कुछ नही कर सकता... खुद से भी ज्यादा भरोसा है मुझे मेरे अनिरुद्ध पर ..." संजना की बातो मे और उसकी आंखो में उसका भरोसा करन को साफ नजर आ रहा था...

" ओह... इतना अंधा विश्वास ! अपनी आंखों से ये पट्टी हटाओ और सच्चाई को देखो... मुझे भी पहले यही लगता था की अनिरुद्ध ऐसा कुछ नही कर सकता पर मैंने खुद उस दिन उसे मोनाली के साथ देखा था.. "

" मैं नहीं जानती की ये वीडियो सच है या जूठ और मुझे इससे कुछ फर्क भी नही पड़ता .. पर तुम जब वहा गए थे तब क्या तुमने अपनी आखों से अनिरुद्ध को मोनाली के साथ बत्तमीज़ी करते देखा था ? "

" नही ... पर ..."

" तो तुम ये कैसे कह सकते हो की अनिरुद्ध गलत है और मोनाली सही... और हर बार आंखें देखी चीज सही ही हो ये ज़रूरी नही होता... और सिर्फ मोनाली लड़की है इस वजह से वो सही ही होगी और अनिरुद्ध लड़का है इसीलिए उसने ही कुछ किया होगा .. ये कह देना सही है क्या? " संजना गुस्से में बोली...

करन यह सुनकर चुप था.. उसने कुछ भी कहा नही...

" देखो करन में नही जानती की उस दिन क्या हुआ था .. और ना ही में मोनाली को जानती हु .. पर हा में अनिरुद्ध को बहुत अच्छे से जानती हु .. और ये मेरे लिए काफी है ..." संजना ने इतना कहा और वो जाने लगी..

" ये सब तुम इसीलिए कह रही हो क्योंकि तुम्हारा प्यार तुम्हारे साथ है... तुम नही जानती हो की प्यार को खो देने का दर्द क्या होता है ? "

करन के इतना बोलने पर संजना को वो दिन याद आ गए जब उसे लगता था की उसने अनिरुद्ध को खो दिया है.... वो दर्द आज फिर से ताजा हो गया था संजना की आंखे नम हो गई...

संजना ने मुड़ कर करन की तरफ देखा जिसके चहेरे पर वही दर्द की झलक संजना को साफ नजर आ रही थी..

" करन तुम ऐसा क्यों कह रहे हो ? क्या मोनाली अब तुम्हारे साथ नही है ? " संजना ने धीमी आवाज से पूछा..

" उस दिन के बाद में मोनाली से कभी नही मिला .." करन ने उदासी के साथ कहा...

" पर क्यों ? " संजना हैरान थी यह सुनकर ..

करन ने उस रात जो हुआ था वो संजना को बताना शुरू किया...

" उस रात में मोनाली को गाड़ी में घर छोड़ने जा रहा था... वो बहुत परेशान थी.. बस रोए जा रही थी... तब मोनाली ने अचानक से कहा..."

" करन गाड़ी रोको...."

" क्या हुआ मोनाली ...? " करन को कुछ समझ नहीं आया..

" प्लीज गाड़ी रोको करन ..."
करन ने गाड़ी रोकी .. मोनाली तुरंत गाड़ी में से बाहर निकली ... करन भी बाहर आया..

" क्या हुआ मोनाली कुछ तो बोलो ..." करन को अब फिक्र होने लगी थी

" मैने अब डिसाइड कर लिया है " मोनाली ने कहा

" क्या डिसाइड कर लिया है ? "

" देखो करन ... में जब तक इस शहर में रहूंगी में यह सब बाते भुला नहीं पाऊंगी ..."

" हा तो हम कुछ दिनों के लिए कही बाहर घूमने के लिए चले जाते है .. तुम्हारा माइंड भी फ्रेश हो जायेगा ..." करन ने मोनाली का हाथ पकड़ते हुए कहा...

" नही करन तुम समझ नही रहे... मुझे थोड़ा ब्रेक चाहिए.. इन सबसे... "

" हा इसीलिए तो में कह रहा हु की हम दोनो ..."

" हम दोनो नही करन सिर्फ में " मोनाली ने करन की बात काटते हुए कहा...

" में ब्रेक लेना चाहती हूं... हमारे रिश्ते से भी... "
इतना सुनते ही करन के हाथ से मोनाली का हाथ छूट गया...

" तुम कहना क्या चाहती हो ...? " करन ने घबराते हुए पूछा...

" वही जो तुम समझ रहे हो .....करन " मोनाली रोती हुई बोली

" तुम ब्रेकअप करना चाहती हो ...? " करन की आंखे लाल हो चुकी थी...यह बोलते हुए उसका गला भर आया था...

" हा ... " इतना बोलने के बाद मोनाली रोते हुए वहा से जाने लगी...

करन कुछ नही बोल पाया .. उसे यकीन ही नहीं आ रहा था की यह सब सच में हो रहा है .. उसे यह सब एक बुरे सपने की तरह लग रहा था... तभी उसे होश आया.. उसने सामने देखा तो मोनाली वहा नही थी...

वो तुरंत गाड़ी में बैठा और मोनाली जिस तरफ गई थी उस और जाने लगा... थोड़े दुर उसे मोनाली रास्ते पर जाति हुई दिखाई दी उसने उसके पास जाकर गाड़ी रोकी और गाड़ी में से बाहर आकर उसने मोनाली का हाथ पकड़ लिया...

" मोनाली प्लीज मुझे छोड़ कर मत जाओ... हम तो एकदूसरे से प्यार करते है ना... हम साथ मिलकर सब सुलझा देंगे ... " करन ने रोते हुए कहा...

" कैसे करन ? अनिरूद्ध तो तुम्हारा दोस्त है ... तुम उसके खिलाफ तो कभी जाओगे नही...तो फिर कैसे सुलझाओगे सब ? " मोनाली गुस्से से बोली...

यह सुनकर करन चुप हो गया...
" में जानती थी ... इसीलिए मैंने यह फैसला लिया है ..." इतना बोलकर मोनाली फिर से जाने लगी...

" रुको मोनाली... प्लीज ... हमारे प्यार का क्या होगा ? " करन ने चिल्लाकर कहा...

" कभी कभी प्यार से भी ज्यादा इंपोर्टेंट कुछ होता है और वो है सेल्फ रिस्पेक्ट " मोनाली इतना बोलकर वहा से चली गई...करन ने इस बार मोनाली को रोकने की कोशिश नही की ...

करन की बात सुनकर संजना की आंखे भी नम हो गईं ...

" करन अगर वो तुमसे प्यार करती होती तो ऐसे तुम्हे छोड़कर कभी नही जाती " संजना ने करन को समझाते हुए कहा...

" सीरियसली ... संजना ? अब भी तुम यही कह रही हो की मोनाली गलत है ? तुम यह क्यों नहीं समझ रही हो की अनिरुद्ध की वजह से में और मोनाली अलग हुए है... " करन को अब गुस्सा आ गया था...

" ठीक है करन अभी तुम सही और में गलत ... पर हा... समय आने पर में इस बात को तुम्हे गलत साबित करके दिखाऊंगी ..." इतना बोलकर संजना वहा से चली गई..वो जानती थी की इस वक्त करन से बहस करने का कोई मतलब नहीं था.. और वो यह भी जानती थी की करन उसकी बातो पर भी यकीन नहीं करेगा... इसीलिए उसने अभी कुछ ना बोलना ही बैटर समझा..

संजना का फोन स्विच ऑफ हो गया था... इसीलिए वो अनिरुद्ध को फोन नही कर पाई.. वो सीधा अपनी होटल चली गई..

होटल के बाहर अनिरुद्ध और सौरभ परेशान से खड़े थे .. संजना ने जैसे ही उन्हें देखा वो उनके पास चली गई.. संजना ने अनिरुद्ध के कंधे पर हाथ रखा ...

अनिरूद्ध तुरंत मुड़ा और संजना को देखकर उसके गले लग गया...
थोड़ी देर तक दोनो कुछ बोले नही...
" थैंक गॉड ... संजू तुम आ गई... में बहुत डर गया था..."



" आई एम फाइन अनिरुद्ध... देखो अब में तुम्हारे सामने हु .. और वेरी वेरी सॉरी.. की में तुम्हे बिना बताए चली गई .. और मेरा फोन भी स्विच ऑफ हो गया था... पर किसीको जवाब देना ज्यादा जरूरी था..." संजना ने प्यार से अनिरुद्ध को कहा...

ये सुनकर अनिरूद संजना की और ना समझ के भाव से देखने लगा... संजना समझ गई...
" वो में करन के पीछे गई थी... "

" आई एम सोरी संजू में तुम्हे सब बताने ही वाला था पर पर मेरी हिम्मत ही नहीं हो रही थी और अचानक से यह सब हो जाने के बाद में उस वक्त तुम्हारे सामने कुछ बोल नहीं पाया... तुम मुझे जो भी सजा देना चाहती हो में उसके लिए तैयार हु.. पर प्लीज मुझे छोड़कर मत जाना " अनिरूद्ध बिना रुके बोलता ही जा रहा था...

" काम डाउन अनिरुद्ध... में कही नही जा रही हूं तुम्हे छोड़कर ... और जब तुमने कुछ किया ही नहीं तो फिर सजा किस बात की ? " संजना ने अनिरुद्ध के गालों पर प्यार से हाथ रखकर उसे शांत करते हुए कहा..

अनिरूद्ध यह सुनकर नम आंखों से संजना को देखने लगा
" तुम्हे क्या लगा की में सिर्फ वो एक वीडियो देखकर तुम्हे गलत समझूंगी... नही.. एकबार मैंने तुम पर भरोसा ना करने की गलती की थी पर इस बार नही... में नही जानती की यह सब कैसे हुआ... क्यों हुआ... पर इतना जानती हु की तुम कुछ गलत नहीं कर सकते हो ..."
संजना के इतना बोलते ही अनिरुद्ध फिर से संजना के गले लग गया... सौरभ के चेहरे पर भी मुस्कुराहट आ गई..

" थैंक यू संजू मुझ पर भरोसा करने के लिए.. मुझे सिर्फ तुम्हे खोने का डर था पर अब तुम मेरे साथ हो तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता की कौन मेरे बारे में क्या सोचता है .."

" नही अनिरुद्ध.. फर्क पड़ता है...मुझे फर्क पड़ता है और तुम्हे भी पड़ता है ... मैने देखा है तुम्हारे चहेरे पर ... जब करन तुमसे कुछ भी कहता है... और में करन को यह साबित करके दिखाना चाहती हू की वो गलत है और तुम सही..."

" पर कैसे ? मेरे पास मेरी बेगुनाही साबित करने का कोई भी प्रुफ नही है... " अनिरूद्ध ने लाचारी के साथ कहा..

" वो हम कुछ कर लेंगे पर पहले में सब कुछ जानना चाहती हू.. की यह सब कैसे हुआ .? "

" में तुम्हे सब कुछ बता दूंगा संजू ... पर पहले अपने कमरे में चलते है "

" ठीक है ..." संजना ने मुस्कुराते हुए कहा...

" अरे ! सौरभ तुम यहां कैसे ? " संजना ने सौरभ की तरफ देखते हुए पूछा..

" ये भी लंबी कहानी है... कमरे में जाकर बताता हु " सौरभ ने हस्ते हुए कहा...

" फिर ठीक है चलो..."
तीनो हस्ते हुए ऊपर कमरे की तरफ जाने लगे..

" एक काम करते है हम कल बात करते है अभी बहुत रात हो चुकी है .. अभी सो जाते है ..." करन ने कमरे के पास पहुंचते हुए कहा...

" हा ये सही है..." सौरभ इतना बोलकर कमरे की अंदर जाने लगा...
यह देखकर अनिरुद्ध उसे घूरने लगा...
" अरे तुम लोग बाहर क्यों खड़े हो अंदर आओ.." सौरभ अंदर कमरे में जाते हुए बोला..

अनिरूद्ध उसे अभी भी घूर रहा था यह देखकर सौरभ की स्माइल एक पल में गायब हो गई...

वो अनिरुद्ध के पास आया...
" क्या हुआ..." सौरभ थोड़ा डरते हुए बोला..

" नही नही तुम जाकर सो जाओ ना .. अब तुम्हारे हनीमून में हमारा क्या काम ?" अनिरूद्ध ने सौरभ को टोंट मरते हुए कहा...

यह सुनकर सौरभ को याद आया की यह कमरा अनिरुद्ध और संजना का हनीमून स्वीट है ... वो शर्म के मारे लाल हो गया...

" ओह सॉरी ... में तो भूल ही गया था.. तुम दोनो सो जाओ .. में कोई और रुम बूक कर लेता हु " इतना बोलकर वो वहा से खिसक कर चला गया...

" पागल कही का " अनिरूद्ध मुस्कुराता हुआ बोला... संजना भी सौरभ की हरकत पर हसने लगी....

" वैसे नया रुम बूक करने की जरूरत नहीं थी सौरभ यही हमारे साथ रह जाता तो क्या फर्क पड़ता.. ? हम कुछ एडजस्ट कर लेते..." संजना को कुछ शरारत सूझी थी...

" सीरियसली ? ये हमारा हनीमून है ...और यहां हमारे साथ वो सोए ये क्या अच्छा लगता है भला ? " अनिरूद्ध मुंह बिगड़ता हुआ बोला...

" पर कुछ घंटे की ही तो बात थी ना ..." संजना फिर से बोली...

" क्या संजू तुम भी... एक तो मेरी इतनी रोमेंटिक सरप्राईज का रायता बन गया और अब कुछ पल हमे साथ में मिल रहे है उसमे भी तुम उस लॉलीपॉप को बीच में लाना चाहती हो ! "

" हा... तो क्या हुआ !" संजना ऐसे बोली की जैसे अनिरुद्ध की बात का उस पर कुछ असर ही ना हुआ हो...

" ओके कोई बात नही में अभी उसे वापस बुला लेता हु... " अनिरूद्ध ने फोन लिया और सौरभ को कोल करने लगा...

" हेलो सौरभ..." अनिरूद्ध इतना ही बोला था की संजना ने उसके हाथ में से फोन ले लिया...

" क्या कर हो... में तो सिर्फ मजाक कर रही थी बुद्धू..."
संजना घबरा गई थी...

" हा तो में भी मजाक ही कर रहा था..." अनिरूद्ध हसता हुआ बोला...
तब संजना ने फोन में देखा तो ... सौरभ को फोन लगा ही नहीं था...

" तुम भी ना अनिरुद्ध ... ! "

" हा बोलो .. में क्या ? "

" तुम ना बड़े ही शैतान हो गए हो..." संजना जुठा गुस्सा दिखाती हुई बोली..

" अच्छा ... और तुम ..? " अनिरूद्ध संजना के पास जाते हुए बोला..

" में कहा शैतानी करती हु ? " इतना बोलते ही संजना भागने लगी...

अनिरूद्ध भी उसके पीछे भागा..

" अच्छा.. अब में तुम्हे दिखाता हु की शैतानी किसे कहते है ..." अनिरूद्ध भागता हुआ बोला..

" पहले पकड़ के तो दिखाओ..."

दोनो पूरे कमरे में इधर से उधर भाग रहे थे...
संजना बेड पर चढ़कर भाग ही रही थी की उसका पैर कंबल में फस गया और वो जमीन पर गिरने ही वाली थी की अनिरुद्ध ने उसे अपनी गोद में पकड़ लिया...

" तुम ठीक हो...? " अनिरूद्ध ने संजना की और देखकर पूछा..
" हा... " संजना सिर्फ अनिरुद्ध की आंखों में देख रही थी..

" क्या जरूरत थी ऐसे भागने की ? "

" सोरी ..." संजना ने क्यूट फेस बनाते हुए कहा..

" ऐसे क्यूट फेस बनाने से तुम बच नहीं जाओगी..." अनिरूद्ध के चहेरे पर अब शरारती स्माइल आ चुकी थी..

" अब प्लीज मुझे नीचे उतारो..."

" नही...अभी मेरी शैतानी मैंने तुम्हे दिखाई ही कहा है ...! " अनिरुद्ध ने आंखो को छोटी छोटी करके संजना की तरफ देखते हुए कहा..

" क्या तुम भी हर बात सीरियसली ले लेते हो..! "

" तुमसे ही सीखा है "

" अनिरूद्ध..." संजना मुंह बिगाड़ती हुई बोली..

" अच्छा ठीक है बाबा ... "
अनिरूद्ध ने हल्के से संजना को बिस्तर पर लेटा दिया.. फिर उसे कंबल ओढ़ाया और उसके माथे को हल्के से चूमा
" गुड नाइट अब सो जाओ " अनिरूद्ध ने कहा और फिर वो भी सो गया...

🥰 क्रमश: 🥰