50 Din ka Sannata - 4 in Hindi Drama by Priya Chaudhary books and stories PDF | 50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 4

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50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 4


(साउंड इफेक्ट: कालकोठरी की जंजीरों की झंकार और हवेली के अंदर गूंजती आयशा की चीख। बाहर का तूफान अब एक भयावह गर्जना में बदल चुका है।)
आर्यन मल्होत्रा कालकोठरी के भीतर घुटनों के बल गिरा था। एपिसोड 3 में जो सच कबीर ने उसके सामने उछाला था—कि आयशा उसकी बेटी नहीं, बल्कि माया की बेटी है—वह सच अब उसके कानों में नहीं, उसके पूरे अस्तित्व में गूँज रहा था। उसने कबीर की ओर देखा, जिसकी आँखों में एक ठंडी विजय चमक रही थी। आर्यन के लिए यह सिर्फ एक शारीरिक कैद नहीं थी, बल्कि उसके बीस साल के झूठ का कारावास था।
सीन 1: कालकोठरी का काला कोना
आर्यन ने हिम्मत जुटाकर कबीर पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन कबीर के गार्ड्स ने उसे कसकर दबोच लिया। कबीर ने आर्यन के चेहरे पर एक फाइल दे मारी। "इसे पढ़ो, आर्यन! ये आयशा के गोद लेने के कागज़ नहीं हैं। ये माया के उस अस्पताल के रिकॉर्ड्स हैं जहाँ उसे 'एक्सीडेंट' के बाद भर्ती कराया गया था। क्या तुम्हें सच में लगता था कि वह उस रात मर गई थी?"
आर्यन ने कांपते हाथों से फाइल खोली। रिपोर्ट के पन्ने पीले पड़ चुके थे, लेकिन लिखावट साफ थी। उस रात, माया की मौत नहीं हुई थी, उसे किसी और ने वहाँ से निकाला था। आर्यन का सिर चकराने लगा। वह जो बीस साल तक अपनी सफलता का जश्न मना रहा था, वह दरअसल एक अधूरी साजिश का हिस्सा था। तभी, कालकोठरी के कोने में रखे उस रिकॉर्ड प्लेयर से आयशा की वही लोरी फिर से शुरू हुई, लेकिन इस बार वह आवाज़ रिकॉर्डेड नहीं थी—ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसके ठीक पीछे बैठकर उसे गुनगुना रहा हो।
आर्यन ने पीछे मुड़कर देखा, लेकिन वहां कोई नहीं था। उसे सिर्फ ठंडी हवा का एक झोंका महसूस हुआ।
सीन 2: हवेली की दीवारों का कातिल रहस्य
तभी, ऊपर हवेली से आयशा की एक और चीख आई। कबीर के चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान आई। "समय पूरा हो रहा है, आर्यन। सन्नाटा अब बोलेगा। और तुम बस देखते रह जाओगे।" कबीर वहां से बाहर निकल गया, लेकिन कालकोठरी का दरवाज़ा खुला छोड़ दिया।
आर्यन ने कोई मौका नहीं गंवाया। उसने भागना शुरू किया। वह हवेली की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए अपने कमरे की तरफ भागा। हवेली अब बिल्कुल बदल चुकी थी। दीवारों पर लगे पोर्ट्रेट्स में आर्यन की अपनी तस्वीरें गायब हो रही थीं और उनकी जगह माया की वे तस्वीरें आ रही थीं, जो उसने सालों पहले फाड़ दी थीं। हॉल की दीवारें अब एक अजीब सी लाल तरल पदार्थ से पसीज रही थीं।
वह अपने कमरे में पहुँचा और उसने अपनी अलमारी के पीछे का वह 'गुप्त लॉकर' खोला, जिसमें उसने अपनी सबसे बड़ी संपत्ति रखी थी—वह लॉकर, जिसमें माया के एक्सीडेंट वाली रात की असल फुटेज वाली चिप थी। लेकिन जैसे ही उसने लॉकर खोला, वह अंदर से खाली था। वहां सिर्फ एक छोटा सा नोट था जिस पर लिखा था: "तुमने जिसे अपना बनाया, वह कभी तुम्हारा था ही नहीं।"
सीन 3: आयशा और माया का संगम
आर्यन भागते हुए आयशा के कमरे की तरफ गया। दरवाजा खुला था। आयशा वहां बैठी थी, लेकिन उसकी पीठ आर्यन की तरफ थी। वह अपने बालों को सँवार रही थी, और उसके हाथ में वही लॉकेट था जो आर्यन ने पहले एपिसोड में स्टेज पर पाया था।
"आयशा... मेरी बच्ची, तुम ठीक तो हो?" आर्यन ने कांपती आवाज में पूछा।
वह लड़की धीरे-धीरे मुड़ी। उसकी आँखें पूरी तरह सफेद थीं—वही आँखें जो उसने उस वीडियो में माया की देखी थीं। "पापा?" उसने एक ठंडी और भारी आवाज़ में कहा। "आप उसे 'बेटी' कहते हैं? आप जानते हैं कि सन्नाटा क्या होता है? सन्नाटा वह शोर है, जो हम उन लोगों के लिए पैदा करते हैं जिन्हें हम मारना चाहते हैं।"
आर्यन के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वह आयशा नहीं थी। या शायद, आयशा के अंदर कोई और था। वह लड़की उठी और आर्यन की ओर बढ़ने लगी। कमरे के अंदर का तापमान शून्य के करीब पहुंच गया था। तभी, आईने में आर्यन ने देखा कि आयशा के पीछे एक परछाई खड़ी है—माया की परछाई, जिसके हाथ में वही चाकू था जो कबीर के पास था।
सीन 4: 47वां दिन और मौत का सन्नाटा
आर्यन को एहसास हुआ कि कबीर और माया की रूह एक ही उद्देश्य के लिए काम कर रहे हैं। आर्यन ने कमरे से बाहर भागने की कोशिश की, लेकिन दरवाज़ा गायब हो चुका था। वहां सिर्फ दीवार थी। हवेली उसे निगल रही थी।
तभी, कमरे की छत से पानी टपकना शुरू हुआ। वह पानी नहीं था, वह खून था जो छत से रिसकर पूरे कमरे को भिगो रहा था। आर्यन ने अपनी डायरी निकाली, जो उसने कालकोठरी से उठाई थी। उसने आखिरी पन्ने पर लिखा देखा: "47वें दिन, आर्यन अपनी ही बनाई हवेली में दफन होगा।"
हवेली की दीवारें अंदर की तरफ सिमटने लगीं। आर्यन ने जोर से चिल्लाकर कहा, "मैं मरना नहीं चाहता! मुझे माफ कर दो!" लेकिन उसके जवाब में उसे सिर्फ एक ही आवाज़ सुनाई दी—उसके अपने पिता की आवाज़, जो बीस साल पहले एक हादसे में मर चुके थे।
(साउंड इफेक्ट: हवेली के धंसने की गड़गड़ाहट और बिजली की तेज गूँज।)
नैरेटर: 47 दिन शेष हैं। आर्यन का सच अब उसका कातिल बन चुका है। क्या आयशा कभी वापस आएगी? और कबीर इस पूरी हवेली के केंद्र में कैसे बैठा है?
(सस्पेंस पॉइंट: आर्यन ने जब खिड़की से बाहर देखा, तो उसे हवेली के चारों तरफ पुलिस की गाड़ियां नहीं, बल्कि हज़ारों लोग खड़े दिखाई दिए—वही लोग जिन्हें आर्यन ने अपने बिजनेस के लिए बर्बाद किया था। वे सब एक साथ मिलकर चिल्ला रहे थे—"सन्नाटा बोलेगा!" और अचानक, पूरी हवेली की रोशनी बुझ गई।)
लेखक: प्रिया