Varian's Skies' Dread Crown - 6 in Hindi Thriller by sukhvinder Singh Rai books and stories PDF | वेरियन के आसमान का खूंखार ताज - 6

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वेरियन के आसमान का खूंखार ताज - 6

### बर्फीले सफर की तैयारीब्लडस्टोन कैसल के उस विशाल कक्ष में रॉक्स की बात सुनकर एक पल के लिए सन्नाटा छा गया। आग की लपटें अभी भी दीवारों पर टिमटिमा रही थीं, और रॉक्स की लाल आँखें उस बर्फीले खजाने के सपने पर टिकी हुई थीं। लेकिन तभी रॉक्स के दिमाग में एक व्यावहारिक सवाल आया। उसने अपनी भारी गर्दन को घुमाया और विक्रम की तरफ देखते हुए गंभीर स्वर में कहा—"विक्रम, तुम्हारी बात बिल्कुल सही है कि वह खजाना हमारी ताकतों को कई गुना बढ़ा सकता है और हमें उस मुकाम तक पहुँचा सकता है। लेकिन जरा यह तो सोचो... फ्रॉस्टपिक रीज यहाँ से मीलों दूर उस अज्ञात और भयानक बर्फीली दुनिया में है, जिसका रास्ता किसी को नहीं पता। हम वहाँ तक पहुँचेंगे कैसे? हमारे पास तो उस रास्ते का कोई नक्शा भी नहीं है।"रॉक्स की इस बात पर विक्रम के चेहरे पर एक शांत और आश्वस्त करने वाली मुस्कान आ गई। उसने अपनी मस्कुलर टाइगर जैसी छाती को थोड़ा उचकाया और अपने पंजों से अपनी जादुई थैली को टटोला।"अरे रॉक्स भाई, तुम किस बात की फिक्र कर रहे हो? जब तुम्हारा यह भाई विक्रम तुम्हारे साथ है, तो रास्ते की चिंता करना भूल जाओ!"कहते हुए विक्रम ने अपनी थैली के अंदर हाथ डाला और एक पल की तलाश के बाद एक अजीब सा चमकता हुआ, गोल और पारदर्शी पत्थर बाहर निकाला। वह पत्थर किसी नीले तारे की तरह भीतर से जगमगा रहा था और उसकी सतह पर अजीब सी रेखाएँ तैर रही थीं।विक्रम ने वह जादुई पत्थर रॉक्स के सामने हथेली पर रखकर दिखाया और गर्व से बोला— "यह देखो भाई! यह साधारण पत्थर नहीं है। यह वेरियन ग्रह का एक प्राचीन दिशारी रत्न (Compass Stone) है।"रॉक्स ने उस पत्थर को ध्यान से देखा और उसकी आँखें चमक उठीं। उसने हैरान होते हुए कहा— "अरे... क्या यह वही पत्थर है जिसके बारे में मैंने सुना है? जिस तरफ भी जाना हो, बस मन में उस जगह या चीज के बारे में सोचना पड़ता है और यह पत्थर खुद ब खुद हमें सही रास्ता और दिशा बता देता है?"विक्रम ने तेजी से सिर हिलाया और उत्साह के साथ बोला— "बिल्कुल सही समझे, रॉक्स भाई! तुम सौ प्रतिशत सही कह रहे हो। बस हमें अपनी आँखें बंद करके फ्रॉस्टपिक रीज और उस छिपे हुए खजाने के बारे में सोचना है, और यह जादुई पत्थर अपने आप चमककर हमें सही दिशा का इशारा कर देगा। हमें भटकने की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ेगी।"रॉक्स के चेहरे पर एक गहरी और संतोषजनक मुस्कान फैल गई। उसने अपने विशाल पंखों को थोड़ा समेटा और दृढ़ स्वर में पूछा— "यह तो कमाल की चीज है, विक्रम। फिर देर किस बात की है? यह बताओ कि हमें इस सफर के लिए कब निकलना चाहिए?"विक्रम ने बिना एक पल गँवाए तुरंत जवाब दिया— "कल सुबह सूरज उगने से ठीक पहले, जब यहाँ का तापमान सबसे कम होता है और हवा शांत रहती है, हम यहीं से अपनी उड़ान शुरू करेंगे। तब तक हम अपनी सारी तैयारियाँ पूरी कर लेंगे।"तभी कमरे के एक कोने से एक सहमी हुई और काँपती सी आवाज गूँजी—"वो... वो... रॉक्स भाई... विक्रम भाई... क्या मैं भी तुम दोनों के साथ उस बर्फीले नरक... मतलब उस बर्फीली वादी में चल सकता हूँ?"रॉक्स और विक्रम ने चौंककर उस दिशा में देखा। वह वीर था। उसका छोटा सा मिनी घोड़े जैसा शरीर डर के मारे काँप रहा था, और उसकी छोटी सी चिड़िया वाली गर्दन नीचे झुकी हुई थी। उसने अपनी चोंच को आपस में रगड़ते हुए हिम्मत जुटाने की कोशिश की।रॉक्स ने अपनी बड़ी लाल आँखों को घुमाया, वीर की तरफ देखा और थोड़ी हैरानी और व्यंग्य भरे लहजे में कहा— "वीर? तुम? इतनी दूर उस खतरनाक बर्फीले तूफान और खूंखार जानवरों के बीच... तुम हमारे साथ चल पाओगे? वहाँ तो जम जाने वाली ठंड है!"वीर ने तुरंत अपनी गर्दन ऊपर उठाई, थोड़ा सीना फुलाया और अपनी टाँपों को जमीन पर पटकते हुए जोश में बोला— "अरे रॉक्स भाई! तुम मेरी ताकत को कम मत समझो! ठंड से भले ही मेरे पंख सुन्न पड़ जाएँ, लेकिन मैं अपनी जादुई मरहम और जड़ी-बूटियों के साथ हर वक्त तुम्हारे काम आऊँगा!"यह कहते हुए वीर ने थोड़ा ओवर एक्टिंग करना शुरू कर दिया। वह अपनी छोटी सी चिड़िया जैसी गर्दन को अजीब अजीब एंगल पर मटकाने लगा, कभी एक टाँग हवा में उठाने लगा तो कभी खुद को ही चक्कर कटाकर दिखाने लगा कि वह कितना फुर्तीला है। उसकी इन बचकानी और उल्टी सीधी हरकतों को देखकर कमरे का सारा तनाव पल भर में छूमंतर हो गया।रॉक्स और विक्रम दोनों के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गई।विक्रम अपनी हँसी को रोक नहीं पाया और जोर से मुस्कुराते हुए वीर की पीठ थपथपाते हुए बोला— "ओए वीर! तुम्हारी ये उल्टी सीधी हरकतें और नौटंकियाँ हमें किसी दिन रास्ते में सचमुच किसी बड़ी मुसीबत में फँसाकर मरवाएंगी जरूर!"कमरे में मौजूद तीनों दोस्त—रॉक्स, विक्रम और वीर—खुलकर हँस पड़े। उस कैसल की ठंडी दीवारों के बीच वह हँसी गूँज उठी।हँसी थमने के बाद, रॉक्स ने अपने दोनों दोस्तों की तरफ देखा। उसकी लाल आँखों में इस बार रुखापन नहीं, बल्कि अपनों वाला गहरा अपनापन और भरोसा साफ झलक रहा था। उसने अपने विशाल पंखों को फैलाकर विक्रम और वीर को हल्के से अपने पास समेटा और एक बेहद भावुक और मजबूत आवाज में कहा—"हाँ दोस्तों... अब हम जो भी करेंगे, साथ मिलकर करेंगे। इस वेरियन ग्रह पर इस अंधेरे और वीरान दुनिया में तुम्हारे अलावा मेरा अपना कौन है? कल सुबह हम तीनों मिलकर उस फ्रॉस्टपिक रीज के रास्ते पर निकलेंगे, और कोई ताकत हमें रोक नहीं सकती!"