Impossible Ishq - Episode 29 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | नामुमकिन इश्क - एपिसोड 29

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नामुमकिन इश्क - एपिसोड 29

एपिसोड 29 – धमकी के पीछे कौन?

रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे।

हॉस्पिटल की बिल्डिंग दिन के मुकाबले काफी शांत हो चुकी थी। इमरजेंसी यूनिट में कुछ डॉक्टर और नर्स अपनी ड्यूटी पर थे, जबकि बाकी ट्रेनी स्टूडेंट्स अपने कमरों में जा चुके थे।

लेकिन अर्जुन के कमरे में अब भी लाइट जल रही थी।

वह अपनी कुर्सी पर बैठा उसी अनजान नंबर से आई कॉल के बारे में सोच रहा था।

"अर्जुन वशिष्ठ... अगर अपनी जिंदगी में शांति चाहते हो, तो आयत खान से दूर रहो।"

आखिर कौन था?

और सबसे बड़ा सवाल...

उसे आयत के बारे में कैसे पता था?

अर्जुन ने मोबाइल उठाकर उस नंबर पर वापस कॉल करने की कोशिश की।

नंबर स्विच ऑफ था।

उसने मोबाइल टेबल पर रखा और कुर्सी से टिक गया।

तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई।

"अर्जुन?"

गौरव की आवाज़ थी।

"आ जा।"

गौरव अंदर आया और अर्जुन का चेहरा देखकर रुक गया।

"क्या हुआ?"

"कुछ नहीं।"

"तू मुझे बचपन से जानता है, और मैं तुझे। तेरे चेहरे पर जब 'कुछ नहीं' होता है ना, तब समझ आता है कि कुछ बहुत बड़ा है।"

अर्जुन कुछ पल चुप रहा।

फिर उसने सारी बात गौरव को बता दी।

गौरव का चेहरा भी गंभीर हो गया।

"आयत से दूर रहने की धमकी?"

"हाँ।"

"तुझे शक किस पर है?"

अर्जुन ने बिना देर किए कहा,

"रोहन।"

गौरव ने सिर हिलाया।

"मुझे भी उसी पर शक है। लेकिन बिना सबूत के हम कुछ नहीं कर सकते।"

अर्जुन कुर्सी से उठ गया।

"मैं भी यही सोच रहा हूँ। लेकिन एक बात तय है... अगर किसी ने आयत को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की, तो मैं चुप नहीं बैठूँगा।"

अगली सुबह

आयत हमेशा की तरह समय पर हॉस्पिटल पहुँची।

उसने इमरजेंसी के बाहर अर्जुन को खड़े देखा।

"गुड मॉर्निंग।"

अर्जुन ने उसकी तरफ़ देखा।

"गुड मॉर्निंग।"

आयत ने गौर किया कि आज अर्जुन सामान्य से ज्यादा शांत था।

"क्या हुआ?"

"कुछ नहीं।"

आयत ने भौंहें सिकोड़ लीं।

"आप भी गौरव की तरह 'कुछ नहीं' बोलने लगे हैं।"

अर्जुन हल्का-सा मुस्कुराया।

"तुम्हें हर बात नोटिस करनी ज़रूरी है?"

आयत ने हँसते हुए कहा,

"शायद... अब आदत हो गई है।"

अर्जुन एक पल के लिए उसकी आँखों में देखता रह गया।

आदत।

वही शब्द उसके दिमाग में फिर घूम गया।

उसे सच में आयत की आदत हो चुकी थी।

उसकी आवाज़ सुनने की।

उसे देखने की।

उसके आसपास होने की।

लेकिन वह इस एहसास को अभी तक नाम नहीं देना चाहता था।

अचानक आई खबर

दोपहर के समय हॉस्पिटल के नोटिस बोर्ड पर नई सूचना लगी।

"सभी ट्रेनी स्टूडेंट्स को कल सुबह छह बजे से ट्रॉमा यूनिट में विशेष प्रशिक्षण के लिए उपस्थित होना अनिवार्य है।"

रीवा ने नोटिस पढ़कर कहा,

"सुबह छह बजे?"

गौरव ने माथा पकड़ लिया।

"इतनी सुबह तो मेरी आत्मा भी नहीं उठती।"

आरिफ हँस पड़ा।

"डॉक्टर बनना है भाई, नींद का बिज़नेस नहीं।"

सब हँसने लगे।

आयत भी मुस्कुरा रही थी।

लेकिन तभी उसकी नज़र सामने खड़े अर्जुन पर पड़ी।

अर्जुन उसे ही देख रहा था।

दोनों की नज़रें मिलीं।

आयत ने तुरंत अपनी नज़रें दूसरी तरफ़ कर लीं।

रीवा ने यह सब देख लिया।

वह आयत के कान के पास जाकर बोली,

"कुछ चल रहा है क्या?"

आयत चौंक गई।

"क्या?"

"तुम दोनों के बीच।"

"कुछ भी तो नहीं!"

रीवा हँस दी।

"अच्छा? तो फिर आज तुम्हारा चेहरा इतना लाल क्यों हो रहा है?"

आयत ने उसे हल्का-सा धक्का दिया।

"चुप करो।"

दूसरी तरफ़ रोहन

रोहन अस्पताल के पीछे वाले कॉरिडोर में खड़ा था।

समर उसके सामने था।

"अब क्या करने वाला है?"

रोहन ने धीमी आवाज़ में कहा,

"मैंने अभी कुछ किया ही कहाँ है?"

"तो फिर कल रात वो कॉल..."

रोहन ने तुरंत उसकी तरफ़ देखा।

समर समझ गया कि उसकी बात सही थी।

"तूने अर्जुन को फोन किया था?"

रोहन मुस्कुराया।

"सिर्फ़ चेतावनी दी थी।"

"और अगर उसने नहीं मानी?"

रोहन की आँखों में गुस्सा आ गया।

"तो फिर अगला कदम उठाना पड़ेगा।"

समर कुछ बोल पाता, उससे पहले करण वहाँ आ गया।

"किस बात का अगला कदम?"

रोहन तुरंत शांत हो गया।

"कुछ नहीं।"

करण ने दोनों को संदेह से देखा।

"तुम दोनों आजकल कुछ ज्यादा ही सीरियस रहने लगे हो।"

समर ने बात बदल दी।

"चल, ड्यूटी का टाइम हो रहा है।"

दोनों वहाँ से निकल गए।

करण उन्हें जाते हुए देखता रहा।

उसे पहली बार लगा कि जरूर कुछ गड़बड़ है।

ट्रॉमा यूनिट में प्रशिक्षण

अगले दिन सुबह छह बजे सभी स्टूडेंट्स ट्रॉमा यूनिट में मौजूद थे।

डॉ. कबीर ने कहा,

"आज आप लोगों को एक सिमुलेशन दिया जाएगा। आपको दुर्घटना के बाद आने वाले मरीजों की प्राथमिक जाँच और टीम मैनेजमेंट सीखना है।"

अर्जुन ने अपनी टीम की तरफ़ देखा।

"सब तैयार?"

"यस!"

ट्रेनिंग शुरू हुई।

आयत मरीज की रिपोर्ट पढ़ रही थी।

अर्जुन उसके पास आया।

"क्या मिला?"

"कुछ खास नहीं... लेकिन इस रिपोर्ट में एक चीज़ मिसिंग है।"

"क्या?"

"मरीज का एलर्जी हिस्ट्री।"

अर्जुन ने तुरंत डॉ. कबीर को बताया।

डॉक्टर ने मुस्कुराकर कहा,

"गुड। इसी तरह ध्यान रखना है।"

आयत ने अर्जुन की तरफ़ देखा।

"आपको कैसे पता चला कि मैं सही कह रही हूँ?"

अर्जुन ने मुस्कुराकर कहा,

"क्योंकि अब मुझे तुम पर भरोसा है।"

आयत कुछ पल के लिए बिल्कुल चुप रह गई।

उसके दिल की धड़कन जैसे अचानक तेज़ हो गई।

एक छोटी-सी मुलाकात

दोपहर में आयत अकेली कॉरिडोर में जा रही थी।

तभी अयान सामने से आया।

"हाय।"

आयत मुस्कुराई।

"हाय।"

"कैसी हो?"

"अच्छी हूँ। तुम?"

"मैं भी ठीक। वैसे कल की ट्रेनिंग में तुमने अच्छा किया।"

"थैंक यू।"

अयान ने कहा,

"अगर कभी कोई मेडिकल केस डिस्कस करना हो, तो बता देना।"

"ज़रूर।"

अयान चला गया।

लेकिन दूर खड़ा अर्जुन यह सब देख रहा था।

उसके चेहरे पर कोई खास भाव नहीं था, लेकिन मन में हल्की बेचैनी जरूर थी।

उसी समय रीवा उसके पास आई।

"क्या हुआ?"

"कुछ नहीं।"

रीवा मुस्कुराई।

"फिर वही कुछ नहीं?"

अर्जुन ने उसे देखा।

रीवा ने मज़ाक में कहा,

"आपको आयत के आसपास कोई दूसरा लड़का बिल्कुल पसंद नहीं आता, है ना?"

अर्जुन ने तुरंत कहा,

"ऐसी कोई बात नहीं है।"

"अच्छा?"

"हाँ।"

"तो फिर इतना परेशान क्यों हो?"

अर्जुन कुछ जवाब नहीं दे पाया।

रीवा मुस्कुराती हुई वहाँ से चली गई।

शाम होते-होते हॉस्पिटल में एक और खबर फैल गई।

रात की ड्यूटी के दौरान स्टोर रूम से कुछ जरूरी मेडिकल सामान गायब हो गया था।

डॉ. कबीर ने तुरंत सभी ट्रेनी स्टूडेंट्स को बुलाया।

"यह छोटी बात नहीं है। जब तक सामान नहीं मिलता, कोई भी स्टूडेंट हॉस्पिटल से बाहर नहीं जाएगा।"

सभी एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे।

अर्जुन ने तुरंत आयत की तरफ़ देखा।

आयत भी परेशान थी।

लेकिन उसी समय...

स्टोर रूम के कैमरे की फुटेज सामने आई।

स्क्रीन पर एक व्यक्ति दिखाई दे रहा था।

उसने चेहरा ढका हुआ था।

लेकिन उसके हाथ में एक ऐसी चीज़ थी जिसे देखकर अर्जुन की आँखें सिकुड़ गईं।

वह चीज़...

रोहन की थी।

अर्जुन ने स्क्रीन से नज़र हटाई और सीधे रोहन की तरफ़ देखा।

रोहन भी उसे देख रहा था।

और पहली बार...

दोनों की आँखों में खुली चुनौती दिखाई दे रही थी।

क्रमशः...