Shakti ke Shiv - 23 in Hindi Women Focused by sheetal books and stories PDF | Shakti ke Shiv - 23

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Shakti ke Shiv - 23

एसीपी विक्रम और अलीशा ने उन तीनों पर बंदूक तान दी।


“मैडम, आप ठीक हैं?” विक्रम ने चिंता से पूछा।


शक्ति ने खुद को संभालते हुए कहा—

“मैं ठीक हूँ। इन्हें ले जाओ और लॉकअप में बंद कर दो।”


दो कॉन्स्टेबल आगे आए। उन्होंने तीनों लड़कों को कॉलर से पकड़कर उनके हाथों में हथकड़ी लगाई और उन्हें पुलिस जीप की ओर ले जाने लगे।

और शक्ति के इशारे पर पुलिस की जीप थाने के लिए रवाना हो गई। अब वहाँ सिर्फ शक्ति, अलीशा और शिवानी रह गए थे


शिवानी अचानक शक्ति के गले से आ लगी। वह बुरी तरह रो रही थी और उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।


शक्ति ने उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरा और उसे ढांढस बंधाया। तभी उसकी नज़र शिवानी की फटी हुई बाँह पर पड़ी। शक्ति ने बिना कुछ कहे अपना दुपट्टा उतारा और शिवानी के चारों ओर लपेट दिया, ताकि वह खुद को सहज महसूस कर सके।


तभी…

वहाँ एक कार आकर रुकी।

शक्ति की नज़र तुरंत उस कार पर जा टिकी।

कार की ड्राइविंग सीट से रुद्र बाहर निकला। उसके पीछे की सीट से कामाक्षी और कार्तिक भी उतर आए। रुद्र गुस्से में तेज़ी से शिवानी की ओर बढ़ा।


उसने शिवानी को अपनी ओर खींचा और गुस्से में उसे एक जोरदार थप्पड़ मार दिया।

यह देखकर वहाँ मौजूद सभी लोग स्तब्ध रह गए। शिवानी ने काँपते हुए अपना हाथ गाल पर रख लिया।


“रुद्र भैया…” कहते हुए उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।


रुद्र गुस्से में बोला—

“कमाल है! हम तुम्हें कब से ढूँढ़ रहे हैं। घर पर किसी को बताना तक ज़रूरी नहीं समझा? कहाँ थी तुम अब तक? कितने फोन किए, देखा तुमने? बस, जो मन में आया वही करना ज़रूरी है?”


“भैया, आप गलत—”


शिवानी की बात बीच में काटते हुए रुद्र ने कहा—

“बस, शिवानी! एक दिन तुम्हारी यही ज़िद तुम्हें कहीं का नहीं छोड़ेगी।”


तभी वहाँ एक और कार आकर रुकी।


कार से शिवाय और कुशल बाहर निकले।

शक्ति भी उसे देखकर एक पल के लिए चुप रह गई।

 शिवाय की नज़र शिवानी पर पड़ी। उसकी आँखों में आँसू थे और शक्ति का दुपट्टा उसके चारों ओर लिपटा हुआ था।

“शिवानी…”

शिवाय तेज़ कदमों से उसकी ओर बढ़ा।

शिवाय की नज़र तुरंत पुलिस जीप की ओर गई। फिर वह शिवानी के पास पहुँचा।

“तुम ठीक हो?”

शिवानी ने सिर हिलाया, लेकिन उसकी आँखों से फिर आँसू निकल पड़े।

तभी उसकी नज़र रुद्र पर गई।

रुद्र अभी भी गुस्से में शिवानी को घूर रहा था।

शक्ति ने कुछ पल उसे देखा। फिर अचानक उसके पास जाकर—

चटाक!

शक्ति का हाथ रुद्र के गाल पर पड़ा।

वहाँ मौजूद हर व्यक्ति सन्न रह गया।

शिवानी ने हैरानी से शक्ति को देखा, जबकि शिवाय की आँखें भी शक्ति पर टिक गईं।

रुद्र ने अविश्वास से शक्ति की ओर देखा।

“तुमने मुझे थप्पड़ मारा?”

शक्ति ने बिना डरे उसकी आँखों में देखते हुए कहा—

“हाँ। क्योंकि किसी लड़की को उसकी गलती समझाने के लिए हाथ उठाना ज़रूरी नहीं होता।”

रुद्र का गुस्सा और भड़क उठा।

शिवाय गुस्से में शक्ति के करीब आया और उसका हाथ पकड़ लिया। अचानक हुए इस हरकत से शक्ति एक पल के लिए दर्द से चीख उठी।


“तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे भाई को थप्पड़ मारने की?”


शक्ति ने गुस्से से उसकी ओर देखा।


“क्योंकि उसने बिना वजह जाने शिवानी पर हाथ उठाया था।”


शिवाय का गुस्सा और बढ़ गया।


“तुम हमें समझाओगी कि हमें क्या करना चाहिए? वो हमारे घर की लड़की है। हम उसके साथ जो चाहें करें!”


शक्ति कुछ कह पाती, उससे पहले ही शिवाय ने उसकी मुड़ी हुई कलाई पर अपनी पकड़ और कस दी।


लेकिन इस बार शक्ति ने कोई आवाज़ नहीं की। वह बस दर्द भरी नज़रों से शिवाय को देखती रही।

उसकी आँखों में ऐसा दर्द था, जैसे वह वर्षों से अपने भीतर कोई अनकहा दर्द समेटे बैठी हो।

शिवाय की नज़र उसकी आँखों से मिली तो एक पल के लिए उसके चेहरे का गुस्सा भी ठिठक गया।


शिवाय की पकड़ अब शक्ति की कलाई पर हल्की पड़ गई थी। शक्ति ने अपना हाथ छुड़ाया। उसकी कलाई में पहनी चूड़ियाँ टूट चुकी थीं और उनके कुछ टुकड़े उसकी हथेली में चुभ गए थे।

शिवानी ने शिवाय का हाथ पकड़ते हुए कहा—

“भैया, चलिए यहाँ से।”

शिवाय जाने के लिए मुड़ा ही था कि पीछे से रुद्र की आवाज़ आई—

“शिवाय, तुम इस लड़की को ऐसे ही जाने दोगे?”

शिवाय ने गुस्से से रुद्र की ओर देखा। उसकी एक नज़र ही काफी थी। रुद्र ने तुरंत अपनी नज़रें झुका लीं।

शिवाय के इशारे पर सभी अपनी-अपनी गाड़ियों में बैठे और वहाँ से निकल गए। कुछ ही पल बाद शक्ति भी अलीशा के साथ वहाँ से रवाना हो गई।


---

कुछ देर बाद शक्ति अपने कमरे में बिस्तर पर बैठी थी। अलीशा उसके हाथ से टूटी हुई चूड़ियों के टुकड़े सावधानी से निकालकर उसकी कलाई पर पट्टी बाँध रही थी।

अलीशा ने नाराज़गी से कहा—

“दीदी, आपने शिवाय को बताया क्यों नहीं कि आपने उसकी बहन की इज़्ज़त बचाई थी?”

शक्ति के होंठों पर हल्की-सी मुस्कान आई।

“रहने दो… सब परेशान हो जाएँगे। इज़्ज़त का सवाल है। फिर चाहे वो लड़की की हो या उसके घरवालों की।”

अलीशा ने तुरंत कहा—

“अरे, लेकिन ऐसा भी कोई करता है? बहन है वो उनकी! उन्हें तो आकर पूछना चाहिए था कि ‘बहन, तू कैसी है? कहाँ थी? क्या हुआ? तेरे साथ कुछ गलत तो नहीं हुआ?’ लेकिन वो लोग तो उल्टा उसी को धमका रहे थे और मार रहे थे।”

शक्ति कुछ नहीं बोली।

उसने अपनी पट्टी बंधी कलाई की ओर देखा और फिर धीमे से नज़रें झुका लीं।

“जाने दो, अलीशा… सब लोग एक जैसे नहीं होते।”

अलीशा ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा—

“खैर, अँधेरा हो रहा है। तुम कमरे में जाकर आराम करो। काफ़ी देर से भागदौड़ कर रही हो। जाकर कुछ खा लेना और सो जाना।”

“और दीदी, आप?”

शक्ति ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—

“तुम मेरी फ़िक्र मत करो। मुझे जब भूख लगेगी, मैं खा लूँगी।”

“ठीक है, दीदी… और याद से कुछ खा लेना।”

शक्ति ने हाँ में सिर हिला दिया।

अलीशा के जाने के बाद शक्ति अपनी अलमारी के पास गई और उसमें से हल्के सफेद रंग की साड़ी निकाली। फिर वह कपड़े बदलने चली गई।


---

दूसरी ओर, जब शिवाय अपने घर पहुँचा तो शिवानी बिना एक पल गँवाए अपने कमरे की ओर जाने लगी।

“शिवानी, रुको।”

शिवानी वहीं रुक गई और धीरे-धीरे पलटकर शिवाय की ओर देखने लगी।


“अब तुम हमें बताओ कि हुआ क्या है और तुम गई कहाँ थी?”

शिवानी ने नाराज़गी से शिवाय की ओर देखा।

“क्या फ़र्क पड़ता है, भैया? आप सबने तो अपने दिमाग में एक अलग ही थ्योरी बना ली है। तो उसी के साथ रहिए और मुझे अकेला छोड़ दीजिए।”

इतना कहकर वह अपने कमरे में चली गई।

कामाक्षी ने रुद्र की ओर देखते हुए कहा—

“रुद्र, तुम्हें शिवानी पर हाथ नहीं उठाना चाहिए था।”

इतना कहकर वह भी अपने कमरे की ओर चली गई।

शिवाय ने रुद्र को घूरते हुए कहा—

“मैंने तुम्हें कितनी बार कहा है कि अपने गुस्से पर काबू रखा करो। तुम्हें समझ नहीं आता? आज तुम्हारे इसी गुस्से की वजह से तुम्हारी पत्नी तुम्हारे साथ नहीं है।”

शिवाय की बात सुनकर रुद्र हैरानी से उसे देखने लगा।

“मेरी वजह से वो मेरे साथ नहीं है? आपको ऐसा क्यों लगता है? मैंने उस पर ऐसा कौन-सा गुस्सा किया था?”

शिवाय ने गहरी साँस ली।

“तुम कभी कुछ गलत करते हो, रुद्र? मैंने तुमसे कितनी बार कहा है कि शिवानी हमारी इकलौती बहन है। उस पर हाथ मत उठाना। आज तक मैंने उस पर हाथ नहीं उठाया और न ही घरवालों को कभी उस पर हाथ उठाने दिया। फिर तुम्हें ये हक किसने दिया?”

वह एक पल के लिए रुका, फिर सख्त स्वर में बोला—

“Sorry to say, रुद्र… लेकिन तुम्हें लड़कियों से बात करने की बिल्कुल तमीज़ नहीं है।”

इतना कहकर शिवाय ने अपना चेहरा दूसरी ओर घुमा लिया।

रुद्र की आँखों में अब नमी उतर आई थी।

“शिवाय, तुम मुझे ये सब इसलिए कह रहे हो क्योंकि मैंने शिवानी पर हाथ उठाया। लेकिन तुमने उसके पीछे मेरा intention नहीं देखा। तुम्हें पता है न, मिष्टी के साथ क्या हुआ था… तुम्हारी अपनी पत्नी के साथ क्या हुआ था। उसके बाद भी तुम इतने normal कैसे रह सकते हो?”

उसकी आवाज़ भर्रा गई।

“शिवाय, मैं लड़कियों के साथ rude नहीं हूँ। मैं बस अपनी बहन की फ़िक्र करता हूँ। मैं नहीं चाहता कि जो मिष्टी या तुम्हारी पत्नी के साथ हुआ… वो शिवानी के साथ भी हो।”

“शिवानी मेरी भी बहन है। और तुम्हारी तरह मैं भी उसे अपनी बहन नहीं, पहली बच्ची की तरह ही treat करता हूँ।”

शिवाय ने उसकी बात बीच में ही रोक दी।

“अगर ऐसा है… तो माफ़ी माँगो शिवानी से।”

इतना कहकर शिवाय बिना कुछ और कहे अपने कमरे की ओर चला गया।

कुछ देर बाद, शिवानी अपने कमरे में खुद को बंद किए रो रही थी। लेकिन अब उसे उस कमरे में घुटन-सी महसूस होने लगी, इसलिए वह बाहर निकल आई।

आस-पास किसी को न देखकर वह सीधे छत पर चली गई। पास के मंदिर से आती घंटियों की आवाज़ उसे कुछ सुकून दे रही थी।

आँखों में अब भी आँसू लिए वह छत की मुंडेर के पास खड़ी होकर पास के मंदिर में चल रही हलचल को देख रही थी।

तभी पीछे से किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा।

शिवानी ने चौंककर पीछे पलटकर देखा।

वहाँ कामाक्षी खड़ी थी।

“क्या हुआ है तुम्हें, शिवानी? मुझे बताओ।”

कामाक्षी को देखते ही शिवानी उसके सीने से जा लगी और फूट-फूटकर रोने लगी।

कामाक्षी ने घबराकर उसके सिर पर हाथ फेरते हुए पूछा—

“शिवानी, बताओ मुझे क्या हुआ? तुम क्यों रो रही हो? किसी ने कुछ किया है तुम्हारे साथ? या फिर किसी ने गलत नज़र से तुम्हें…”

वह आगे नहीं बोल पाई।

शिवानी ने रोते हुए उसकी बात पूरी की—

“हाँ… गलत नज़र से मुझे छुआ है।”

इतना कहकर शिवानी ने अपने ऊपर लिपटा शक्ति का दुपट्टा उतारकर कामाक्षी को दिखाया। उसकी बाँह फटी हुई थी और बाजू पर कुछ खरोंचों के निशान थे।

कामाक्षी घबराकर बोली—

“ये सब क्या है, शिवानी? और तुमने वहाँ किसी को बताया क्यों नहीं?”

शिवानी का गुस्सा फिर उभर आया।

“कोई सुनता है मेरी? रुद्र भैया तो वहाँ आते ही मुझे ही blame करने लगे। शिवाय भैया ने भी एक बार नहीं पूछा कि ‘शिवानी, क्या हुआ? क्या बात हुई? किसने किया?’ मैं किसे बताती?”

कामाक्षी ने उसे संभालते हुए पास रखे लोहे के झूले पर बैठाया और अपने सीने से लगा लिया।

“शांत हो जाओ, शिवानी… पहले शांत हो जाओ।”

कुछ देर तक शिवानी रोती रही। फिर धीरे-धीरे उसने कामाक्षी को अपने साथ बीती पूरी घटना बतानी शुरू कर दी—शक्ति से मिलने से लेकर उस सुनसान जगह पर हुई पूरी घटना तक।

कामाक्षी बिना कुछ कहे उसकी बात सुनती रही। उसके चेहरे पर चिंता और आँखों में नमी साफ दिखाई दे रही थी।


वहीं दूसरी ओर, दरवाज़े के पीछे खड़ा शिवाय उनकी सारी बातें सुन रहा था।

शिवानी की आपबीती सुनकर उसका खून खौल उठा। उसके चेहरे पर गुस्सा साफ दिखाई देने लगा।

लेकिन जैसे ही उसने सुना कि शक्ति ने शिवानी की मदद की थी और उन लड़कों से उसकी रक्षा की थी, उसके मन में शक्ति के लिए एक अनकहा सम्मान जागा।

उसे अच्छा भी लगा कि शक्ति सही वक्त पर शिवानी के साथ खड़ी हुई थी… और उसी के साथ अपने किए पर पछतावा भी होने लगा।

उसे याद आया कि कुछ देर पहले उसने शक्ति के साथ कैसा व्यवहार किया था।

शिवाय ने धीरे से अपनी मुट्ठियाँ भींच लीं।

उसके मन में बस एक ही सवाल था—

“मैंने उसके साथ इतना गलत कैसे कर दिया?”

अब क्या करेगा शिवाय? क्या वह शक्ति से अपने किए की माफ़ी माँगेगा, या सीधा उन लड़कों के खिलाफ कुछ करेगा?

जानने के लिए पढ़ते रहिए shakti ke shiv....