💗💗💗 हुक्म और हसरत 💗💗💗
एपिसोड 26 —
#Arsia
"अब आगे…”
"ये तो..."
अर्जुन की आवाज़ उसके गले में ही अटक गई।
उसकी उँगलियाँ तस्वीर के उस चेहरे पर ठहर गईं, जो आधा पुरानी तह के पीछे छिपा हुआ था।
वो चेहरा उसे जाना-पहचाना लग रहा था।
बहुत ज़्यादा।
लेकिन यादों की धुंध उसे साफ़ पहचानने नहीं दे रही थी।
अर्जुन ने तस्वीर को दोबारा सीधा किया।
उसी वक्त पीछे से विवेक की आवाज़ आई—
"अर्जुन?"
अर्जुन ने तुरंत तस्वीर फाइल के अंदर रख दी।
विवेक उसके पास आया।
"क्या हुआ?"
अर्जुन ने उसकी तरफ़ देखा।
"कुछ नहीं।"
विवेक ने उसकी आँखों में देखा।
वो जानता था—अर्जुन के लिए कुछ नहीं का मतलब अक्सर बहुत कुछ होता था।
"तुमने कुछ देखा है।"
अर्जुन ने फाइल बंद कर दी।
"मैंने एक बात समझी है।"
"क्या?"
अर्जुन की आवाज़ बेहद शांत थी।
"जिसने सिया पर हमला किया है, वो सिर्फ़ उसे नुकसान नहीं पहुँचाना चाहता।"
विवेक ध्यान से सुनने लगा।
"वो उससे कुछ छिपाना चाहता है।"
कुछ पल की खामोशी।
फिर अर्जुन बोला—
"और शायद सिया को खुद नहीं पता कि वो क्या जानती है।"
---
उधर सिया के कमरे में...
सिया की हालत पहले से थोड़ी बेहतर थी।
वो तकिए से टिककर बैठी थी।
रोशनी उसके पास बैठी फल काट रही थी और काव्या दवाइयों का समय लिख रही थी।
सिया की माँ ने उसके माथे पर हाथ रखा।
"अब दर्द कैसा है?"
सिया ने हल्की मुस्कान दी।
"पहले से कम है।"
रोशनी ने तुरंत कहा—
"तो अब ये फल खाना पड़ेगा। डॉक्टर ने कहा है कमजोरी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।"
सिया ने फल की तरफ़ देखा।
फिर मुँह बना लिया।
"मेरा मन नहीं है।"
काव्या हँस पड़ी।
"बीमारी में भी आपकी नखरे करने की आदत नहीं गई।"
सिया ने उसे घूरा।
"काव्या!"
तीनों के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। ❤️
कुछ पल के लिए कमरे से सारी चिंता जैसे दूर हो गई।
तभी दरवाज़ा खुला।
अर्जुन अंदर आया।
सिया की नज़र तुरंत उस पर गई।
उसकी आँखों में हल्की चमक आ गई।
"आप आ गए?"
अर्जुन ने सिर हिलाया।
"हाँ।"
वो उसके पास आया।
सिया ने उसे ध्यान से देखा।
"आपने खाना खाया?"
अर्जुन कुछ पल चुप रहा।
रोशनी तुरंत बोली—
"नहीं। ये खुद का ध्यान रखने के नाम पर सिर्फ़ दूसरों को आदेश देते हैं।"
अर्जुन ने उसे एक नज़र देखा।
रोशनी चुप हो गई। 😶
सिया के होंठों पर हल्की मुस्कान आई।
"आप भी ना..."
अर्जुन उसके पास बैठ गया।
"आपको आराम करना चाहिए। मेरी चिंता मत कीजिए।"
सिया ने धीरे से कहा—
"मैं आपकी चिंता नहीं करूँगी तो कौन करेगा?"
अर्जुन कुछ पल उसे देखता रहा।
फिर उसके चेहरे पर बहुत हल्की मुस्कान आई।
"आप पहले ठीक हो जाइए। फिर मेरी चिंता करने का पूरा अधिकार है आपको।" ❤️
सिया ने उसकी उँगलियाँ पकड़ लीं।
"वादा?"
अर्जुन ने उसकी उँगलियों को हल्के से दबाया।
"वादा।"
लेकिन उसके चेहरे की शांति के पीछे...
एक तूफ़ान पहले ही तैयार हो चुका था।
---
कुछ देर बाद अर्जुन अपने प्राइवेट ऑफिस में था।
विवेक, वीर, राज और यश उसके सामने खड़े थे।
टेबल पर महल का नक्शा फैला हुआ था।
अर्जुन ने सबकी तरफ़ देखा।
"अब हम उसका इंतज़ार नहीं करेंगे।"
वीर ने पूछा—
"तो क्या करेंगे?"
अर्जुन ने नक्शे पर एक जगह उँगली रखी।
"उसे बाहर निकालेंगे।"
राज समझ गया।
"बेट?"
अर्जुन ने सिर हिलाया।
"हाँ।"
विवेक ने पूछा—
"कैसे?"
अर्जुन ने एक फाइल खोली।
"महल में ये खबर फैलाओ कि सिया को कल सुबह इलाज के लिए शहर से बाहर ले जाया जाएगा।"
वीर की आँखें फैल गईं।
"लेकिन सिया को कहीं नहीं ले जाया जाएगा?"
"बिल्कुल नहीं।"
अर्जुन की आवाज़ ठंडी थी।
"ये सिर्फ़ खबर होगी।"
यश मुस्कुराया।
"और अगर अपराधी सच में सिया की आवाजाही पर नज़र रख रहा है, तो वो प्रतिक्रिया देगा।"
अर्जुन ने सिर हिलाया।
"यही चाहिए।"
राज ने पूछा—
"सिक्योरिटी?"
"दोगुनी। लेकिन ऐसे कि उसे दिखे नहीं।"
फिर अर्जुन ने वीर की तरफ़ देखा।
"महल के सारे कम्युनिकेशन चैनल्स मॉनिटर करो। खासकर वो नंबर जिससे आकाश को इंस्ट्रक्शन्स मिल रही थीं।"
वीर ने सिर हिलाया।
"जी।"
अर्जुन ने यश की तरफ़ देखा।
"आकाश पर नज़र रखो। अगर वो एक कदम भी महल से बाहर निकला..."
यश ने बात पूरी की—
"तो मैं उसके पीछे रहूँगा।"
अर्जुन ने राज से कहा—
"पुराने सिक्योरिटी स्टाफ की लिस्ट फिर से देखो। राघव के साथ काम करने वाले हर आदमी को ढूँढो।"
राज ने सिर हिलाया।
"और अगर कोई मिसिंग हो?"
अर्जुन की आँखें ठंडी हो गईं।
"तो सबसे पहले उसी को ढूँढेंगे।"
---
कुछ घंटों बाद...
महल में धीरे-धीरे वही खबर फैलने लगी।
सिया को कल सुबह शहर से बाहर ले जाया जाएगा।
किसी को नहीं पता था कि ये खबर अर्जुन ने जानबूझकर फैलाई थी।
लेकिन खबर...
आकाश तक पहुँच चुकी थी।
आकाश ने फोन निकाला।
उसकी उँगलियाँ काँप रही थीं।
उसने एक नंबर डायल किया।
"उसे कल बाहर ले जाया जा रहा है।"
दूसरी तरफ़ से कुछ सेकंड खामोशी रही।
फिर वही ठंडी आवाज़ आई—
"नहीं। उसे महल से बाहर नहीं जाने देना है।"
आकाश घबरा गया।
"लेकिन अगर मैंने कुछ किया तो अर्जुन—"
"तुम्हें अर्जुन की चिंता करने की ज़रूरत नहीं।"
आवाज़ और कठोर हो गई।
"बस अपना काम करो।"
कॉल कट।
आकाश ने गहरी साँस ली।
उसने चारों तरफ़ देखा।
उसे नहीं पता था...
कि सामने वाले कमरे की दीवार के पीछे यश उसकी हर बात सुन रहा था।
यश ने तुरंत अर्जुन को मैसेज किया—
"बॉस... जाल में मछली फँस गई।"
अर्जुन ने मैसेज पढ़ा।
उसकी आँखों में हल्की चमक आई।
"अब देखते हैं... कौन जाल में आता है।" 🔥
---
अगली सुबह...
महल असामान्य रूप से शांत था।
बाहर दो गाड़ियाँ खड़ी थीं।
कुछ सिक्योरिटी पर्सोनल जानबूझकर ऐसे घूम रहे थे, जैसे सिया को बाहर ले जाने की तैयारी हो रही हो।
लेकिन असली सिया...
अपने कमरे में सुरक्षित थी।
अर्जुन दूर से पूरे ऑपरेशन पर नज़र रख रहा था।
विवेक उसके पास आया।
"सब तैयार है।"
अर्जुन ने सिर हिलाया।
"किसी को जल्दबाज़ी नहीं करनी है।"
उधर...
आकाश किचन में काम करने का नाटक कर रहा था।
लेकिन उसकी नज़र बार-बार खिड़की की तरफ़ जा रही थी।
फिर उसने किसी को एक छोटा-सा इशारा किया।
महल के दूसरे हिस्से में खड़ा एक सिक्योरिटी गार्ड अचानक फोन पर बात करने लगा।
यश ने उसे देख लिया।
"बॉस..."
उसने धीमे से कहा—
"हमें दूसरा आदमी भी मिल गया।"
अर्जुन की नज़र उस गार्ड पर गई।
उसकी कलाई पर...एक काली घड़ी थी।
अर्जुन कुछ पल उसे देखता रहा।फिर उसकी नज़र घड़ी के नीचे छिपी कलाई पर गई।
कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
अर्जुन ने धीरे से कहा—
"उसे अभी मत पकड़ना।"
विवेक ने हैरानी से पूछा—
"क्यों?"
अर्जुन की आँखें उस आदमी पर टिकी थीं।
"क्योंकि अगर वो अकेला नहीं है..."
उसने धीमे से कहा—
"तो हमें उसके पीछे वाले तक पहुँचना है।"
उसी वक्त...
सिया के कमरे की खिड़की के बाहर हल्की-सी हलचल हुई।
काव्या ने पर्दा हटाकर देखा।
कोई नहीं था।
लेकिन खिड़की की चौखट पर एक छोटी-सी चीज़ रखी थी।
काव्या ने उसे उठाया।
एक काला धागा।
उसके बीच में वही छोटा-सा निशान बना हुआ था। 😨
काव्या के चेहरे का रंग उड़ गया।
"ये..."
उसने तुरंत अर्जुन को बुलाया।
अर्जुन कमरे में आया।
उसने धागा देखा।
उसकी आँखों में गुस्सा उतर आया।
"किसने रखा?"
काव्या ने सिर हिलाया।
"पता नहीं।"
अर्जुन ने धागे को ध्यान से देखा।
फिर उसकी नज़र सिया पर गई।
सिया उसे देख रही थी।
अचानक उसके चेहरे पर डर छा गया।
उसने काँपती आवाज़ में कहा—
"अर्जुन..."
अर्जुन उसके पास गया।
"क्या हुआ?"
सिया ने उस निशान की तरफ़ देखा।
उसकी आँखें फैल गईं।
"मैंने इसे..."
उसकी साँस अटक गई।
"उस रात... उसकी कलाई पर देखा था।" 😨
अर्जुन ने तुरंत विवेक की तरफ़ देखा।
अब ये सिर्फ़ एक निशान नहीं था।
ये एक मैसेज था।
किसी ने जानबूझकर सिया के कमरे तक पहुँचकर उन्हें ये दिखाया था।
और तभी...
महल की सारी लाइट्स एक साथ बंद हो गईं।
पूरी हवेली अँधेरे में डूब गई।
एक सेकंड...
दो सेकंड...
फिर दूर से किसी के चीखने की आवाज़ आई—
"सिक्योरिटी!"
अर्जुन ने तुरंत सिया की तरफ़ देखा।
और उसी पल उसके फोन की स्क्रीन पर एक मैसेज चमका—
«"अगर सिया को बचाना है... तो अकेले पुराने मंदिर तक आइए।"»
अर्जुन की आँखों में खतरनाक चमक आ गई।
विवेक ने पूछा—
"क्या हुआ?"
अर्जुन ने फोन बंद किया।
उसकी आवाज़ बेहद शांत थी।
"वो हमें बुला रहा है।"
बाहर अँधेरा और गहरा हो चुका था।
और महल के किसी कोने में...
किसी ने बहुत धीमे से मुस्कुराते हुए कहा—
"अब असली खेल शुरू होगा..." 😈🔥
जारी रहेगा... 💗
© Diksha
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