BLACK MONKEY — THE UNYIELDING
Origin Story — Chapter 1: “जो झुका नहीं”
मुंबई की एक पुरानी बस्ती में रहने वाला आरव कभी किसी superhero बनने का सपना नहीं देखता था।
उसकी दुनिया बहुत छोटी थी।
एक छोटी-सी workshop, जहाँ वह अपने पिता के साथ काम करता था… घर का किराया… पिता की दवाइयाँ… और हर महीने किसी तरह जिंदगी चलती थी।
आरव की एक खासियत थी।
वह हार मानना नहीं जानता था।
लोग उसे कई बार बेवकूफ कहते थे।
“जब सामने वाला तुमसे दस गुना ताकतवर हो, तो पीछे हट जाना चाहिए।”
आरव हमेशा एक ही जवाब देता—
“पीछे हटना और हार मानना… दोनों अलग चीजें हैं।”
एक रात शहर के बाहर एक construction site पर अचानक जमीन धंस जाती है।
लेकिन वो कोई सामान्य हादसा नहीं था।
मलबे के नीचे मजदूरों को एक काला पत्थर मिलता है।
पत्थर के ऊपर बंदर जैसी एक प्राचीन आकृति बनी थी।
जैसे ही एक मजदूर उसे उठाता है…
उसके हाथ पर काले निशान फैल जाते हैं।
और कुछ सेकंड बाद—
वह आदमी बेहोश होकर गिर जाता है।
उसी रात आरव को खबर मिलती है कि उसके पिता उसी construction site पर फँसे हुए हैं।
वह बिना सोचे वहाँ पहुँच जाता है।
चारों तरफ पुलिस, आग और गिरती हुई इमारत।
एक अधिकारी उसे रोकता है।
“अंदर जाना मना है!”
आरव पीछे देखता है।
फिर मलबे की तरफ।
“मेरे पिता अंदर हैं।”
“हम उन्हें निकाल रहे हैं।”
आरव धीरे से कहता है—
“आप कोशिश कर रहे हैं… मैं उन्हें लेकर आऊँगा।”
और वह मलबे के अंदर चला जाता है।
अंदर उसे अपने पिता मिलते हैं।
लेकिन उनके ऊपर भारी लोहे की बीम गिरी होती है।
आरव पूरी ताकत लगाता है।
बीम हिलती तक नहीं।
उसके हाथ खून से भर जाते हैं।
वह गिर जाता है।
फिर उठता है।
दोबारा कोशिश करता है।
फिर गिरता है।
उसका पिता कमजोर आवाज में कहता है—
“आरव… छोड़ दे बेटा।”
आरव अपने आँसू पोंछता है।
“मैंने जिंदगी में बहुत कुछ छोड़ा है, पापा… आपको नहीं छोड़ सकता।”
उसी वक्त उसकी नजर उस काले पत्थर पर पड़ती है।
पत्थर हल्का-सा चमकता है।
आरव उसे छू देता है।
और…
सब कुछ शांत हो जाता है।
उसके कानों में सिर्फ अपने दिल की धड़कन सुनाई देती है।
धक…
धक…
धक…
अचानक उसके शरीर पर काले निशान फैलने लगते हैं।
उसकी आँखें खुलती हैं।
इस बार उसके अंदर कुछ बदल चुका था।
आरव बीम को दोनों हाथों से पकड़ता है।
और…
उसे अकेले उठा देता है।
लेकिन यह शक्ति कोई वरदान नहीं थी।
यह एक कर्ज था।
अगले कुछ दिनों में आरव को पता चलता है कि उसके शरीर में असाधारण ताकत आ चुकी है।
वह कई टन वजन उठा सकता है।
गोलियाँ उसके शरीर को रोक नहीं पातीं।
हड्डियाँ टूटने के बाद भी वह खड़ा हो सकता है।
लेकिन हर बार जब वह अपनी शक्ति इस्तेमाल करता है…
उसके शरीर पर काले निशान और गहरे होते जाते हैं।
और उन निशानों के साथ उसे अजीब सपने आने लगते हैं।
एक विशाल काला बंदर…
एक प्राचीन युद्ध…
और हजारों साल पुराना एक सवाल—
“तुम शक्ति के योग्य हो… या शक्ति तुम्हें खा जाएगी?”
लेकिन असली खतरा अभी सामने नहीं आया था।
उस construction site का हादसा accident नहीं था।
एक underground organization उस प्राचीन शक्ति की तलाश में थी।
उस organization का leader था रुद्र।
रुद्र का मानना था कि इंसान कमजोर पैदा होता है और समाज उसे और कमजोर बना देता है।
उसका लक्ष्य था—
उस प्राचीन शक्ति को अपने शरीर में डालकर ऐसा इंसान बनना जिसे कोई हरा न सके।
लेकिन उसे नहीं पता था कि शक्ति ने पहले ही अपना host चुन लिया है।
आरव।