Return of the King - 5 in Hindi Love Stories by Aparajita Tripathi books and stories PDF | रिटर्न ऑफ़ द किंग - 5

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रिटर्न ऑफ़ द किंग - 5

शिव, देव और वह नर्स अस्पताल से बाहर निकल चुके थे। रात पूरी तरह उतर चुकी थी। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और ठंडी हवा लगातार बह रही थी। अस्पताल की इमारत की सफेद रोशनी पीछे छूटती जा रही थी, जबकि आगे अंधेरे में खड़ी काली एसयूवी किसी अनजाने खतरे की तरह दिखाई दे रही थी।

नर्स के चेहरे पर डर साफ झलक रहा था।

कुछ देर पहले ही उसे पता चल चुका था कि डॉक्टर ने  शिव के कंधे से गोली निकाली थी। वह समझ चुकी थी कि यह कोई साधारण दुर्घटना नहीं थी। जिस तरह गोली शरीर में धंसी हुई थी, जिस तरह दोनों आदमी अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहे थे और जिस तरह वे अस्पताल के रिकॉर्ड में अपना नाम तक दर्ज नहीं करवाना चाहते थे, उससे उसे अंदाजा हो गया था कि मामला बेहद गंभीर है।

उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

"मैं आपके साथ नहीं जा सकती," उसने एक बार फिर हिम्मत जुटाकर कहा।

देव ने उसकी तरफ देखा लेकिन कुछ नहीं बोला।

वहीं शिव की आंखें ठंडी और भावहीन थीं।

"तुम्हें सिर्फ कुछ दिनों के लिए हमारे साथ रहना होगा," देव ने शांत स्वर में कहा, "जब तक शिव पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता।"

"लेकिन मैं एक नर्स हूं, कोई कैदी नहीं। मेरा परिवार है, मेरा घर है।"

नर्स की आवाज कांप रही थी।

"मैं कहीं नहीं जाऊंगी।"

उसने पीछे हटने की कोशिश की।

तभी शिव ने धीरे-धीरे अपनी जैकेट के अंदर हाथ डाला।

अगले ही पल एक पिस्टल उसके हाथ में थी।

नर्स का चेहरा सफेद पड़ गया।

उसकी सांस जैसे गले में अटक गई।

शिव ने बंदूक सीधे उसकी तरफ नहीं तानी, लेकिन इतना जरूर था कि वह साफ दिखाई दे रही थी।

"देखो..." शिव की आवाज बेहद शांत थी, "मैं किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं चाहता।"

उसने एक कदम आगे बढ़ाया।

"लेकिन अभी हमारे पास दूसरा विकल्प भी नहीं है।"

नर्स घबरा गई।

"प्लीज... मुझे जाने दीजिए।"

"अगर तुम चुपचाप हमारे साथ चलोगी तो तुम्हें कोई नुकसान नहीं होगा।"

शिव की आंखों में ऐसी कठोरता थी कि नर्स का विरोध वहीं खत्म हो गया।

उसे समझ आ गया कि इन लोगों से बहस करना बेकार है।

उसने कांपते हुए सिर झुका लिया।

देव ने कार का पिछला दरवाजा खोल दिया।

"बैठ जाओ।"

नर्स धीरे-धीरे जाकर पिछली सीट पर बैठ गई।

कुछ सेकंड बाद शिव और देव भी कार में बैठ गए।

इंजन स्टार्ट हुआ और कार अस्पताल की पार्किंग छोड़कर अंधेरी सड़क पर दौड़ने लगी।

पूरे रास्ते कार के अंदर खामोशी छाई रही।

नर्स बार-बार खिड़की से बाहर देख रही थी।

उसका दिमाग तेजी से काम कर रहा था।

क्या वह किसी अपराधी गिरोह के साथ फंस गई थी?

क्या यह लोग उसे मार देंगे?

क्या वह कभी अपने घर वापस जा पाएगी?

हजारों सवाल उसके दिमाग में घूम रहे थे।

वहीं दूसरी तरफ शिव खामोशी से सीट पर बैठा था।

गोली निकल चुकी थी लेकिन दर्द अभी भी बना हुआ था।

उसके कंधे पर मोटी पट्टी बंधी हुई थी।

कभी-कभी दर्द की वजह से उसकी भौंहें सिकुड़ जातीं लेकिन उसने एक बार भी शिकायत नहीं की।

देव बीच-बीच में उसकी तरफ देख लेता था।

"दर्द ज्यादा हो रहा है?"

शिव ने हल्के से सिर हिला दिया।

"मैं ठीक हूं।"

देव जानता था कि शिव झूठ बोल रहा है।

गोली लगने का दर्द इतना आसान नहीं होता।

लेकिन वह यह भी जानता था कि शिव कभी अपनी कमजोरी किसी के सामने जाहिर नहीं करता।

करीब चालीस मिनट बाद शहर का भीड़भाड़ वाला इलाका पीछे छूट गया।

अब कार एक बेहद आलीशान और सुरक्षित इलाके में प्रवेश कर रही थी।

सड़कें चौड़ी थीं।

हर तरफ हरियाली थी।

ऊंची दीवारों से घिरे भव्य बंगले दिखाई दे रहे थे।

नर्स ने खिड़की से बाहर देखा और हैरान रह गई।

यह शहर का सबसे महंगा इलाका था।

कुछ मिनट बाद कार एक विशाल काले गेट के सामने जाकर रुकी।

गेट कम से कम बीस फीट ऊंचा था।

उसके ऊपर अत्याधुनिक सुरक्षा कैमरे लगे हुए थे।

दोनों तरफ हथियारबंद सुरक्षा गार्ड तैनात थे।

जैसे ही उन्होंने कार को देखा, तुरंत सतर्क हो गए।

अगले ही पल गेट अपने आप खुलने लगा।

नर्स की आंखें फैल गईं।

कार अंदर दाखिल हुई।

अंदर का दृश्य देखकर उसकी सांसें थम गईं।

उसके सामने किसी फिल्मी महल जैसा विला खड़ा था।

तीन मंजिला विशाल इमारत।

संगमरमर से बना भव्य प्रवेश द्वार।

चारों तरफ खूबसूरत बगीचे।

फव्वारे।

लक्जरी कारों की लंबी कतार।

और हर कोने पर सुरक्षा गार्ड।

नर्स कुछ क्षणों तक उस दृश्य को देखती रह गई।

उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि जिन लोगों को वह अपराधी समझ रही थी, वे इतने बड़े और प्रभावशाली लोग हो सकते हैं।

कार मुख्य प्रवेश द्वार के सामने जाकर रुकी।

तुरंत कई कर्मचारी बाहर आ गए।

"सर!"

सबने एक साथ सिर झुकाकर अभिवादन किया।

देव बाहर निकला।

उसके बाद शिव कार से उतरा।

जैसे ही उसने जमीन पर पैर रखा, दर्द की एक तेज लहर उसके कंधे में दौड़ गई।

उसका संतुलन हल्का-सा बिगड़ा।

लेकिन इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उसने खुद को संभाल लिया।

फिर भी देव की नजरों से यह बात छिप नहीं सकी।

"आराम से।"

देव उसके करीब आ गया।

शिव ने कोई जवाब नहीं दिया।

उसकी नजरें सीधे विला पर टिकी थीं।

कुछ पल बाद उसकी नजर पीछे खड़ी डरी हुई नर्स पर गई।

वह अभी भी कार के पास खड़ी थी।

उसके चेहरे पर डर और उलझन दोनों थे।

"इसे अंदर ले चलो," शिव ने कर्मचारियों से कहा।

दो महिला स्टाफ सदस्य तुरंत आगे बढ़ीं।

"मैम, कृपया हमारे साथ आइए।"

नर्स ने एक बार शिव और देव की तरफ देखा।

उसे अभी भी उन पर भरोसा नहीं था।

लेकिन अब उसके पास कोई और रास्ता भी नहीं था।

वह चुपचाप उन महिलाओं के साथ अंदर चली गई।

विला के भीतर का वैभव देखकर उसकी आंखें एक बार फिर हैरानी से फैल गईं।

चारों तरफ चमकता हुआ संगमरमर।

महंगे झूमर।

दुर्लभ पेंटिंग्स।

लकड़ी की नक्काशी वाला शानदार फर्नीचर।

सब कुछ किसी राजमहल जैसा लग रहा था।

उधर देव और शिव भी अंदर आ चुके थे।

"नर्स को गेस्ट विंग में कमरा दे दो," देव ने आदेश दिया।

"और जो भी उसे चाहिए, उसकी व्यवस्था की जाए।"

"जी सर।"

स्टाफ ने तुरंत सिर झुका दिया।

नर्स यह सब देख रही थी।

अब उसके मन में डर के साथ-साथ जिज्ञासा भी पैदा हो चुकी थी।

आखिर यह लोग थे कौन?

गोली किसने चलाई थी?

और इतना बड़ा साम्राज्य होने के बावजूद ये लोग अपनी पहचान क्यों छिपा रहे थे?

उसे महसूस हो रहा था कि वह अनजाने में किसी बहुत बड़े रहस्य का हिस्सा बन चुकी है।

और शायद उसकी जिंदगी अब पहले जैसी कभी नहीं रहने वाली थी।


To be continued......