एक दिन गाँव के सबसे बड़े सेठ पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उसका इकलौतो बेटो अचानक गुजर गओ।
सेठ के घर कोहराम मच गया। औरतन के रोने की आवाज दूर तक सुनाई दे रही थी। सेठ का तो रो-रोकर बुरा हाल था। वो उसको इकलौता सहारा हतों , व सेठ को तो पूरा संसार ही खत्म हो गयो I
उस जमाने में गाँव में एक पुरानी रीति थी। अगर काऊ की मौत शाम में हो जाए, तो अंतिम संस्कार अगले दिन भोर में किया जाता था। पर लाश पूरी रात घर में नई रखी जाती थी I
लोग अर्थी को उठाकर श्मशान में रख कर पूरा गांव के आदमी बारी बारी से रखवाली करते थे I
गाँव वाले सेठ के बेटे की अर्थी श्मशान ले गए और उसे ऊँचे चबूतरे पर रख दिया।
तय हुआ कि रातभर कोई न कोई उसके पास बैठकर रखवाली करेगा । लेकिन सर्दी बड़ी कड़ाके की थी।
ऐसी ठंड कि बाहर निकलो तो दाँत अपने आप खटर-पटर करने लगें। ऊपर से गाँव में कई साल से एक बात मशहूर थी—श्मशान में दाना रहत है। रात में तो छोड़ो दिन में भी लोग वहाँ अकेले जाने से बचते थे।
सेठ ने अपने रिश्तेदारों से कहा, "कोई रातभर मेरे बेटे के पास बैठ जाओ।" एक आदमी बोला, "सेठ जी, मैं पहली पहर बैठ जाऊँगा। उसके बाद मोए घर जाना है।"एक बोला "मोए तो बुखार-सा लग रहो है।"एक बोला "मेरे घर छोटे-छोटे बच्चा है । आखिर सेठ ने पूरे गाँव को बुला लिया। सब आँगन में खड़े थे। तभी एक बूढ़ा बोला,
"सेठ जी, हमसे तो न हो पाएगो । श्मशान, रात, ठंड... ऊपर से वो दानों!"हाँ, कोई ऐसा चाहिए जिसे डर-वगर कुछ न हो। ऐसा तो गाँव में एक ही है। सेठ ने पूछा,"कौन?"सबने एक साथ कहा,"रांड का संड! सेठ ने माथा पकड़ लिया।"वो निकम्मो? "हाँ। वही तो रोज कहतो है—'जो कोई न कर पाए, वो मैं करूँगा।' एक आदमी बोला,"अब बखत आ गओ है करने का।"सेठ ने लंबी साँस ली।"ठीक है। बुलाओ वाय।सेठ का आदमी गाँव के बाहर पुलिया पर पहुँचा। बाने देखो—रांड का संड कंबल में मुँह ढाँपे पड़ा है। वाको लट्ठ सिरहाने रखो है।आदमी ने दूर से आवाज लगाई,"अरे ओ रांड के संड!" कोई जवाब नहीं।"अरे उठो! सेठ जी ने बुलाओ है।"आदमी डरते-डरते पास गया और कंधा हिलाया।"भइया... उठो।"अचानक रांड के संड की आँख खुली।उसने सामने आदमी को देखो।पहले वाय कुछ समझ नहीं आओ। फिर उसकी नजर अपने लट्ठ पर गई।अगले ही पल लट्ठ हाथ में आया।"कौन है बे तू?"एक कहहवात है , ठस आदमी से उलझोगे तो लड्ड तो खाना ही पड़े। आदमी पीछे हट गया।"हाथ जोड़ मैं... मैं सेठ जी का आदमी हूँ!""मोए तुममें सोते में छेड़ने को कोई मतलब नहीं है I "सेठ जी ने बुलाओ है तुम्हें! "तो पहले बता मोऐ एसे आदमी को जगावत हैं?"इतना कहकर उसने लट्ठ उठाया और आओ देखा ना ताओ आदमी के पीछे दौड़ पड़ा।"अरे भाग कहाँ रहो है!"आदमी चिल्लाया,"भैया मारो मत!"भइया! सेठ जी ने बुलाया बहुत जरूरी काम है है!"रांड का संड लट्ठ उठाए खड़ा रहा।"पहले क्यों न बताओ?"आदमी ने काँपते हुए कहा, भईया अब तो बता रहो हूँ!"चल। दो कदम चलकर रांड का संड रुक गओ।"सेठ ने मुझे बुलाया किस काम से?"आदमी बोला,"वो सेठ जी खुद बताएँगे। रांड का संड ने शक से उसे देखा।"कहीं ब्याह-विहा की बात तो नहीं?"आदमी ने माथा पीट लिया।
मोई नहीं पतो "तो फिर चल।" सेठ के घर पहुँचते ही रांड का संड ने भारी भीड़ देखी। लोग चारों तरफ खड़े थे।
उसने आँखें बड़ी कर लीं।"ओहो!"फिर अपनी बिना उगी मूँछ पर हाथ फेरकर बोला,"मोए तो लग रओ है, बात कुछ खास है।"भीड़ में से किसी ने धीरे से कहा,"हाँ, बहुत खास है।"रांड का संड ने तुरंत आवाज ऊँची कर दी,"अरे मेरी अम्मा को पूछे बिना मेरो ब्याह मत करियो!"पहले मेरी अम्मा को बुला ओ तब मेरो विहा करियो। पूरा आँगन एकदम शांत हो गया "हे भगवान..."रांड का संड बोला,"मैं सुंदर हूँ, मानतो हूँ... पर अम्मा से पूछे बिना ब्याह न करूँगा।" सेठ ने सिर पकड़ लिया।"अरे कोई ब्याह नहीं हो रओ!"तो फिर इत्ते लोग काहे जमा हैं?"सेठ भारी आवाज में बोला, "अरे मेरो बेटा मर गायों है।"रांड का संड कुछ पल चुप रहा।फिर बोला,"अच्छा... मोये माफ़ कारियों मोये पतो नहीं था, इस बार उसके चेहरे पर पहली बार थोड़ी गंभीरता आई। सेठ ने हाथ जोड़ते हुए कहा,
"आज रात मेरे बेटे की श्मशान में रखवाली कर दोगे क्या?।"रांड का संड बोला,"बस इत्तो काम?"सेठ ने सिर हिलाया।"हाँ। "तो इसमें इत्तो इतना बड़ा कहा कम है ,काहे हल्ला मचा रखो है?"सेठ ने उसकी तरफ देखा।
"तुझे पता है वहाँ रात में क्या है?"का?"श्मशान।"रांड का संड बोला,"वो तो पता है।"सेठ ने धीरे से कहा,"और दाना भी।"रांड का संड दो पल चुप रहा।फिर बोला,"दाने को पता नहीं है, की रांड को सांड को है I लोगों की हँसी छूटते-छूटते बची। सेठ ने कहा,"तू कर पाएगो?" रांड का संड ने लट्ठ कंधे पर रखा।"करूँगा। लेकिन पहले मुआवजा बताओ। सेठ बोला,"जो माँगेगो, दूँगा।""सोना,चाँदी,जमीन,जायदाद. सेठ ने थके हुए स्वर में कहा, बस मेरे बेटे की रखवाली कर दे।"रांड का संड कुछ देर सोचता रहा। बोला, इन मेसे मोये कछु नहीं चाहिए मोये तो कछु ओर चाही
सेठ ने उसे देखा।"क्या?"मोये तो तू ठुस कर कलेऊ करा दे ओर रात को बंध दे, खाली पेट मो से कछु नहीं हो पायेगा "इसे खाना दे दो सेठ जी, नहीं तो दाने से पहले यही हमको खा जाएगा।"रांड का संड ने उसकी तरफ देखा।"मोए ज्यादा बोलने वाले पसंद नहीं।"आदमी चुप हो गओ। बेचारे सेठ के घर तो मातम पसरा था ऐसे में खाना कहा से बनता ,सेठ ने पड़ोसी के घर से खाना बनवाया। रांड का सांड बैठ कर खाने लगा वने ठूस कर खाया
और जो बचा, उसे कपड़े में बाँध लिया खाना खाकर उसने जोर की डकार ली।फिर पड़ोसी से तेल माँगा और अपने लट्ठ पर मलने लगा "ये काम की चीज है। चमकती रहे तो मन भी खुश रहतो है।"फिर लट्ठ कंधे पर रखकर बोला,
"चलो। अब श्मशान दिखाओ।"गाँव वाले अर्थी लेकर श्मशान पहुँचे।सेठ ने बेटे की अर्थी चबूतरे पर रखवाई।
एक-एक करके सब वापस जाने लगे।आखिर में सेठ ने रांड के संड की ओर देखा।"ध्यान रखना।"रांड का संड बोला,"तुम चिंता न करो।"गाँव वाले लौट गए।अब चारों तरफ सन्नाटा था।ठंडी हवा चल रही थी। पास की बुझती चिता से लाल-लाल अंगारे चमक रहे थे। रांड का संड कंबल में दुबका बैठा था। दाँत कटकटा रहे थे।वह खुद से बोला,"इतनी ठंड में तो अम्मा भी बाहर सोने न देती।"फिर उसकी नजर चिता पर गई।"आग तो बढ़िया है।"
उसने अर्थी को धीरे-धीरे खींचकर चिता के पास कर लिया।कंबल ओढ़कर वहीं लेट गया।कुछ देर बाद भी ठंड लगी रही।उसने अर्थी की तरफ देखा।"अरे भैया..."शव को देखते हुए बोला,"तू पूरी अर्थी घेरके अकेला सो रहो है और मोए नीचे ठंड में सुला रहो है?"जरा खिसक जा।"फिर खुद ही बोला,"अरे हाँ... तू तो बोलेगो नाय।"उसने शव को थोड़ा सरकाया और खुद अर्थी पर चढ़ गया।"अब ठीक है।"कंबल ओढ़कर लेट गया। कुछ देर बाद उसने शव की तरफ देखा।"देख, ज्यादा जगह नहीं घेरी मैने ।"फिर आँख बंद कर ली।लेकिन अचानक उसके मन में ख्याल आया।
"कहीं रात में ये उठके भाग गओ तो?"वह उठ बैठा।"फिर गाँव वाले कहेंगे रखवाली न कर पाओ।"उसने कपड़े की पट्टी से शव को अपनी कमर से बाँध लिया।"अब जा के दिखा!"उसे पता था रात में शब गायब हो जाते हैं उसे पूरा यकीन था ,कि शब जलने के दर्द से बचने को भाग जाते होंगे ! अब वो चैन से लेट गया। थोड़ी ही देर में उसके खर्राटे गूँजने लगे! आधी रात बीत चुकी थी। श्मशान में सन्नाटा पसरा था।बस चिता के अंगारों की चट-चट सुनाई दे रही थी। और कभी कभी जिगुरो की आवाज सुनाई देती,तभी जंगल की तरफ से एक भारी परछाईं धीरे-धीरे श्मशान में दाखिल हुई। वह एक दानव था। कई दिनों से भूखा। आँखें लाल, लंबे दाँत। मुँह से लार टपक रही थी।
उसकी नजर अर्थी पर पड़ी। वह मुस्कुराया। "आज तो मेरी किस्मत खुल गई।" वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा।"दो-दो इंसान!"अर्थी के पास पहुँचकर उसने गौर से देखा।"हूँ...""मरा हुआ"और ये... जिंदा!" दानव की आँखों में चमक आ गई। क्यों न इसको भी जिंदा कर लूं "दोऊ जिंदा खाने में खूब मजा आएगा।"उसने अपनी जेब से एक चमचमाती जादुई चूड़ी निकाली। उसमें जड़े रत्न अँधेरे में चमक रहे थे। दानव ने चूड़ी मृत युवक के माथे से लगाई।
आँखें बंद कीं। मंत्र पढ़ने लगा।"ॐ... ह्रूं... फट्... स्वाहा...चूड़ी चमकने लगी। उसकी रोशनी रांड के संड के चेहरे पर पड़ी। रांड के संड की नींद खुली। उसने आँख पूरी नहीं खोली। बस एक आँख की दरार से देखा। सामने दानव खड़ा था। रांड के संड के मन में आया, "अच्छा...मोये खाबे आयो है। उसने फिर आँख बंद कर ली देखते हैं क्या करोगो। दानव मंत्र पढ़ता रहा। कुछ देर बाद वह एक पत्थर पर जाकर बैठ गया। उसने अपने दाँत पत्थर पर घिसने शुरू किए। घर्र...घर्र...घर्र...रांड का संड अंदर ही अंदर सोचने लगा, "बड़ो शौक है इसे दाँत चमकाने का।"दानव बड़बड़ाया,"आज दोनों को चबा जाऊँगा बहुत मजा आएगा ।"रांड का संड ने धीरे से आँख खोली। दानव की पीठ उसकी तरफ थी।उसने अपना लट्ठ टटोला।फिर बहुत धीरे से उठाया एक पल रुका। और— धड़ाम लट्ठ सीधे दानव की कमर पर पड़ा। दानव उछल पड़ा। "आऽऽऽह!" रांड का संड गरजा, "चबा मोये अब दिखा कैसे खायेगा !" दानव पीछे मुड़ा।"तू... तू .....रांड का संड बोला, और अगले ही पल— धड़ाम, धड़ाम दे देना दान मर लगा दी! दानव भागने लगा। रांड का संड पीछे। "रुक!" धप्प! "अरे छोड़!" धड़ाम! "बचाओ!" रांड का संड गरजा, "इतनी रात गए तोय को बचाएगा, बचाओ-बचाओ कर रहो हो!" दानव जमीन पर गिर पड़ा। "बस! बस! मारो मत!"रांड का संड लट्ठ लेकर उसके ऊपर खड़ा हो गया।"काहे आए थे?"दानव काँपते हुए बोला,"खाने..." का?"तुम दोनों को..."
रांड का संड ने लट्ठ उठाया।दानव तुरंत बोला,"लेकिन अब नाय खाऊँगा!"कसम? "कसम!"दानव ने जेब से दो चमचमाती जादुई चूड़ियाँ निकालकर उसके सामने रख दीं।"ये ले लो। बस मोए छोड़ दो।"रांड का संड ने चूड़ियाँ उठाईं अपनी जेब में डाल ली। फिर बोला, "सिर्फ इस श्मशान की कसम नहीं।" दानव ने सिर हिलाया।"इस गाँव में कभी कदम न रखियो।"हाँ।"किसी जिंदा आदमी को न खाइयो।"हाँ।"और अगर फिर दिखाई दियो..."रांड का संड ने अपना लट्ठ उठाया। दानव ने तुरंत हाथ जोड़ दिए। "नाय! फिर कभी न आऊँगा!" रांड का संड बोला,"ठीक है। भाग।"दानव उठा और जंगल की तरफ दौड़ पड़ा। रांड का संड भी पीछे दौड़ा।काफी दूर जाने के बाद दानव एक गहरी बावाड़ी के पास पहुँचा। उसने इधर-उधर देखा और फटाक से बावाड़ी में कूद गया। रांड का संड वहीं खड़ा रह गया। "ओहो..."उसने बावाड़ी को गौर से देखा।"तो यहाँ रहतो है?"उसने पास पड़ा एक बड़ा पत्थर उठाया और बावाड़ी के पास रख दिया। फिर पत्थर पर निशान बनाया। "अब याद रहैगो।"थोड़ी देर बाद वह वापस श्मशान लौट आया। अर्थी के पास बैठकर उसने दोनों जादुई चूड़ियाँ देखीं। फिर मृत युवक की तरफ देखा। "भैया..."धीरे से बोला, "तेरी रखवाली में आज बड़ो माजा हो गओ।" फिर कंबल ओढ़कर लेट गया। दो पल बाद उसे कुछ याद आया।वह उठ बैठा।"अरे!"उसने कमर से बँधी कपड़े की पट्टी देखी।"मैं तो इसे बाँधना ही भूल गओ था!"उसने पट्टी कसकर बाँधी और फिर लेट गया।"अब देखता हूँ कौन भागतो है।"और कुछ ही देर में फिर उसके खर्राटे पूरे श्मशान में गूँजने लगे। तभी किसी की आवाज आई भैया मोये खोल दौड़ो का मोये सांस नहीं आ रही है , बहुत जोर से बंधा है !!!!