पंद्रह मिनट बाद चौहान हवेली का दरवाज़ा खुला। संयोगिता तेज़ी से अंदर आई। उसके आते ही विवान की नजर उस पर पड़ी। वो तुरंत दौड़कर उसके पास आया और उससे लिपट गया।
विवान बोला -
मम्मा!
संयोगिता ने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और गोद में उठा लिया। उसके चेहरे पर पहली बार खुली हुई प्यारी मुस्कान आई।
संयोगिता बोली -
अरे मेरा राजा बाबू… क्या चाहिए आपको?
विवान ने अपनी छोटी-छोटी बाँहें उसके गले में डाल दीं।
विवान बोला -
मिल्कशेक…
संयोगिता हँस पड़ी।
संयोगिता बोली -
बस इतनी सी बात के लिए मेरा राजा बाबू इतना रो रहा था?
विवान ने मासूमियत से कहा—
आपके हाथों का चाहिए।
संयोगिता कुछ पल उसे देखती रही। उसके चेहरे की मुस्कान और गहरी हो गई।
संयोगिता बोली -
अच्छा! तो पापा का बनाया हुआ नहीं चाहिए?
विवान ने तुरंत सिर हिला दिया।
विवान बोला -
नहीं।
पास खड़ा विराट हँस पड़ा।
विराट बोला -
वाह बेटा… पापा की तो कोई इज्जत ही नहीं है।
विवान संयोगिता की गोद में छिप गया।
विवान बोला -
मुझे सिर्फ मम्मा का चाहिए।
संयोगिता ने उसके माथे को चूम लिया।
संयोगिता बोली -
ठीक है। आज मम्मा अपने राजा बाबू के लिए सबसे अच्छा मिल्कशेक बनाएगी।
विवान खुश होकर बोला—
याय!
संयोगिता उसे गोद में लिए रसोई की तरफ बढ़ गई। विराट वहीं खड़ा उन्हें देखता रहा। उसकी आँखों में एक अजीब सी शांति थी। कभी यही दृश्य संपूर्णा और विवान के साथ हुआ करता था। लेकिन आज…संपूर्णा की जगह कोई और थी। और फिर भी, उस पल में घर की खाली पड़ी दीवारों को पहली बार लगा जैसे उनमें फिर से किसी बच्चे की हँसी लौट आई हो।
रसोई में काजल खाना बनाने में व्यस्त थी। संयोगिता विवान को गोद में लिए अंदर आई। विवान अभी भी उसके गले से चिपका हुआ था।
संयोगिता ने काजल की तरफ देखकर पूछा—
आपको पता है, विवान को कौन-सा फ्लेवर पसंद है? बता दीजिए मुझे, प्लीज़।
काजल के चेहरे पर अपने आप मुस्कान आ गई। उसे संयोगिता का विवान के लिए इतना परेशान होना अच्छा लग रहा था।
काजल बोली -
उसे चॉकलेट मिल्कशेक बहुत पसंद है। लेकिन उसमें थोड़ी-सी स्ट्रॉबेरी डाल दो तो और भी खुश हो जाता है।
संयोगिता ने तुरंत सिर हिलाया।
संयोगिता बोली -
अच्छा… चॉकलेट और स्ट्रॉबेरी।
विवान खुशी से बोला—
हाँ मम्मा! वही चाहिए!
संयोगिता हँस दी।
संयोगिता बोली -
ठीक है, राजा बाबू।
उसने उसे नीचे उतारा और मिल्कशेक बनाने लगी। लेकिन विवान वहीं नहीं रुका। वो संयोगिता के पीछे-पीछे घूमने लगा।
कभी उसके दुपट्टे को पकड़ता…कभी उसके पास खड़ा होकर उसे देखता… और कभी स्टूल पर चढ़ने की कोशिश करता।
संयोगिता ने पीछे मुड़कर देखा।
संयोगिता बोली -
अरे! इधर मत आओ।
विवान मासूमियत से बोला—
मैं देख रहा हूँ मम्मा क्या बना रही हैं।
संयोगिता ने उसे प्यार से समझाया—
दूर खड़े रहो। गर्म चीज़ है।
विवान फिर एक कदम आगे बढ़ा। संयोगिता तुरंत उसके पास गई और उसका हाथ पकड़ लिया।
संयोगिता बोली -
अरे बाबा… लग जाएगी, बाबू।
विवान ने उसकी तरफ देखा।
विवान बोला -
लेकिन मैं आपकी मदद करूँ?
संयोगिता मुस्कुराई।
संयोगिता बोली -
अच्छा, मदद करनी है?
विवान ने जोर से सिर हिलाया। संयोगिता ने उसे एक छोटा चम्मच दिया।
संयोगिता बोली -
तो ये पकड़ो और यहीं खड़े रहो। बस मेरी मदद करो।
विवान खुशी से चम्मच पकड़कर खड़ा हो गया। काजल दूर से दोनों को देख रही थी। उसकी आँखों में एक अलग ही खुशी थी। उसे कुछ पल के लिए लगा जैसे घर में फिर से वही पुरानी रौनक लौट आई हो। और रसोई के दरवाज़े पर खड़ा विराट भी चुपचाप ये दृश्य देख रहा था। उसकी नजर संयोगिता पर टिक गई।
वो मन ही मन सोचने लगा—
तुम्हें विवान की इतनी आदत कब हो गई, संयोगिता?
संयोगिता ने मिल्कशेक तैयार करके एक सुंदर-सा गिलास विवान के सामने रख दिया।
संयोगिता बोली -
लो राजा बाबू… तुम्हारा मिल्कशेक।
विवान की आँखें चमक उठीं।
विवान बोला -
वाह!
उसने गिलास दोनों हाथों से पकड़ा और थोड़ा-सा पीते ही मुस्कुरा दिया।
विवान बोला -
मम्मा! बहुत अच्छा है।
संयोगिता के चेहरे पर प्यारी-सी मुस्कान आ गई।
संयोगिता बोली -
सच में?
विवान ने जल्दी-जल्दी सिर हिलाया।
विवान बोला -
हाँ!
संयोगिता उसके बाल सहलाने लगी।
फिर दूध का पैकेट देखकर अचानक बोली—
वैसे इस ज़माने में असली दूध भी नहीं मिलता… पता नहीं लोग इतना पानी क्यों मिलाते हैं।
काजल हँस पड़ी।
काजल बोली -
बिल्कुल सही कह रही हैं भाभी—
काजल की बात अचानक बीच में रुक गई। उसे याद आया कि संयोगिता…संपूर्णा नहीं थी। काजल थोड़ी झेंप गई।
काजल बोली -
सॉरी दीदी… मुँह से गलती से निकल गया।
संयोगिता कुछ पल चुप रही।
फिर उसने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
अरे, कोई बात नहीं।
काजल ने राहत की साँस ली। लेकिन उसके चेहरे पर थोड़ी उदासी आ गई। उसे संपूर्णा की याद आ गई थी। विवान को कुछ पता नहीं था। वो तो बड़े मजे से अपना मिल्कशेक पी रहा था।
विवान बोला -
चाची, मम्मा सबसे अच्छा मिल्कशेक बनाती हैं!
काजल मुस्कुराई।
काजल बोली -
हाँ… अब तो मुझे भी मानना पड़ेगा।
संयोगिता ने विवान के गाल पर हल्की-सी चपत लगाई।
संयोगिता बोली -
बस-बस, ज्यादा तारीफ मत करो। वरना रोज़ मिल्कशेक माँगोगे।
विवान हँस पड़ा। रसोई में एक पल के लिए सब कुछ सामान्य लगने लगा।
लेकिन काजल के मन में एक ही बात घूम रही थी—
संपूर्णा के जाने के बाद… पहली बार विवान किसी के साथ इतना खुश दिख रहा है।