संयोगिता ने दरवाजे पर कदम रखा, लेकिन तभी रुक गई। उसने पीछे मुड़कर विराट को देखा। उसकी आँखों में अब कोई आंसू नहीं थे, बस एक गहरा, ठंडा संकल्प था।
संयोगिता (धीमी, लेकिन दृढ़ आवाज में) बोली-
और मैं उस शिकारी को खत्म कर ही डालूंगी। फिर खुद को भी खत्म कर लूंगी।
पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया। गंगा जी की चीख निकल गई।
गंगा जी बोलीं-
नहीं! संयोगिता, ऐसा मत कहो!
विराट दौड़कर संयोगिता के पास आया। उसने उसका हाथ पकड़ लिया।
विराट (घबराहट से) बोला-
संयोगिता, तुम क्या कह रही हो? तुम अपने आप को क्यों खत्म करोगी?
संयोगिता ने विराट की आँखों में देखा। उसकी मुस्कान में इतना दर्द था कि विराट का दिल टूट गया।
संयोगिता बोली -
क्योंकि मिस्टर विराट... मैं थक गई हूँ। मैंने इतने लोगों को मारा, इतना खून बहाया... अब मेरे हाथों में सिर्फ मौत है। मैं विवान को एक ऐसी माँ नहीं दे सकती जो एक किलर हो। और मैं आपको एक ऐसी पत्नी नहीं दे सकती जिसके साथ सोना भी खतरे से खाली न हो।
विराट की आँखों में आंसू आ गए।
विराट बोला -
संयोगिता, तुम पागल हो गई हो। तुम बीमार हो। तुम्हें इलाज की जरूरत है।
संयोगिता ने सिर हिलाया।
संयोगिता बोली-
नहीं विराट। मैं पागल नहीं हूँ। मैं बस सच बोल रही हूँ। मैंने जो किया, वह गलत था। लेकिन मेरे पास कोई और रास्ता नहीं था। और अब... अब मेरे पास जीने का कोई कारण नहीं बचा।
उसने विराट का हाथ छुड़ाया और दरवाजे की तरफ बढ़ी।
काजल चिल्लाई -
जाओ! चली जाओ! लेकिन विवान को अपने साथ मत ले जाना!
संयोगिता रुकी। उसने पीछे मुड़कर काजल को देखा।
संयोगिता बोली-
डरो मत काजल। मैं विवान को कभी नुकसान नहीं पहुंचाऊंगी। वह मेरा बच्चा है। मेरी आखिरी निशानी।
वह फिर से आगे बढ़ी।
विराट ने आवाज दी -
संयोगिता, रुको! प्लीज!
लेकिन संयोगिता नहीं रुकी। वह अंधेरी रात में गायब हो गई।
विराट वहीं जमीन पर बैठ गया, उसका सिर हाथों में था। वह रो रहा था। गंगा जी उसके पास आईं और उसे गले लगा लिया।
गंगा जी बोलीं-
बेटा... हमने गलत किया। हमें उसे नहीं जाने देना चाहिए था।
विराट बोला -
माँ, अब बहुत देर हो चुकी है। वह जा चुकी है। और शायद... शायद यही बेहतर है।
लेकिन विराट झूठ बोल रहा था। वह जानता था कि संयोगिता के बिना उसकी जिंदगी अधूरी है। और विवान... विवान अपनी माँ को खो चुका था। ऊपर, विवान के कमरे से रोने की आवाज आ रही थी।
विवान बोला-
मम्मा... मम्मा वापस आओ...
लेकिन संयोगिता नहीं लौटी। वह अंधेरे में कहीं खो गई थी, अपने आखिरी मिशन पर। उस शिकारी को खत्म करने, जो अभी भी शहर में आजाद घूम रहा था। और फिर... खुद को खत्म करने के लिए। क्योंकि उसके लिए अब कोई और रास्ता नहीं बचा था। तभी ऊपर से सीढ़ियों की आवाज़ आई।
विवान, जिसका चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था और आँखें डर और बेचैनी से लाल थीं, धीरे-धीरे सीढ़ियां उतरकर नीचे आया। उसने चारों तरफ देखा। खून के धब्बे, टूटी हुई चीजें, और डरे हुए चेहरे... लेकिन उसे वो शख्स नहीं दिखा जिसे वह सबसे ज्यादा ढूंढ रहा था।
विवान (सिसकते हुए, कांपती आवाज़ में) बोला -
पापा... मम्मा कहां हैं? मुझे मम्मा के पास जाना है।
यह सवाल विराट के लिए किसी हथौड़े की चोट से कम नहीं था। उसका दिल टूटकर चकनाचूर हो गया। वह 'साइको किलर' वाला डर, परिवार का दबाव, सब कुछ उस पल धूल में मिल गया। उसके सामने सिर्फ एक टूटा हुआ बच्चा था, जिसकी दुनिया उसकी माँ थी।
विराट दौड़कर विवान के पास गया और उसे अपनी बांहों में भर लिया। विवान ने विराट की कमीज़ मुट्ठी में भींच ली और फूट-फूट कर रोने लगा।
विवान बोला-
पापा, मम्मा ने मुझे छोड़ दिया? क्या मैंने कुछ गलत किया? उन्होंने तो कहा था ना कि हमेशा साथ रहेंगे... पापा, मुझे मम्मा के पास ले चलो ना... मुझे डर लग रहा है।
विराट की आँखों से आंसू बह निकले। उसने विवान के सिर को अपने सीने से लगा लिया।
विराट (गले में दर्द के साथ) बोला-
नहीं बेटा... तुमने कुछ गलत नहीं किया। मम्मा... मम्मा थोड़ी देर के लिए बाहर गई हैं। लेकिन पापा वादा करते हैं, पापा उन्हें वापस ले आएंगे।
पीछे खड़ा पूरा परिवार यह नजारा देखकर स्तब्ध था। गंगा जी के हाथ मुंह पर थे और उनकी आँखों से आंसुओं की धारा बह रही थी। काजल और वर्षा की आँखों में अब डर नहीं, बल्कि गहरा अपराधबोध था। उन्होंने जिस औरत को 'राक्षस' कहकर भगाया, वही औरत इस बच्चे की जान और दिल की रक्षक थी।
गंगा जी (रोते हुए) बोलीं-
विराट... हमने गलत किया बेटा। हमने डर के मारे उसे भगा दिया। लेकिन वो तो हमारी रक्षक थी। उसे वापस ले आओ। प्लीज...
विराट ने विवान को प्यार से गंगा जी की गोद में सौंपा।
विराट बोला -
माँ, विवान का ख्याल रखना। मैं अभी आता हूँ।
काजल ने हिचकिचाते हुए कहा -
भैया... अकेले मत जाओ। वो... वो खतरनाक है।
विराट ने पलटकर काजल को देखा। उसकी आँखों में अब वह पुरानी नरमी नहीं, बल्कि एक लोहे जैसा संकल्प था।
विराट बोला-
वो खतरनाक नहीं है, काजल। वो टूटी हुई है। और उस टूटे हुए इंसान को बचाने की जिम्मेदारी अब मेरी है। अगर उसने कहा है कि वो उस शिकारी को मारकर खुद को खत्म कर लेगी, तो मैं उसे ऐसा करने नहीं दूंगा।
विराट ने अपनी कार की चाबियां उठाईं और तेजी से मुख्य दरवाजे की तरफ बढ़ा। बाहर घना अंधेरा था और हवा में खौफ था। लेकिन विराट के मन में अब कोई डर नहीं था। उसे पता था कि संयोगिता शहर के उस सुनसान इलाके में गई होगी, जहाँ से सब शुरू हुआ था।
विराट (मन में) बोला-
रुकी रहना, संयोगिता। मैं आ रहा हूँ। इस बार मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ूंगा। चाहे मुझे उस शिकारी से लड़ना पड़े, या तुम्हारे उस पागलपन से। मैं तुम्हें वापस लाऊंगा... हमारे बेटे के लिए, और मेरे लिए।
कार का इंजन गरजा और विराट अंधेरी रात में तेजी से निकल गया। अब दौड़ शुरू हो चुकी थी। एक तरफ संयोगिता, जो मौत के मुंह में कूदने जा रही थी। और दूसरी तरफ विराट, जो अपनी पत्नी की जान और उसकी रूह को बचाने के लिए सब कुछ दांव पर लगाने को तैयार था।