शादी के तीन साल बाद जब नेहा अपने गांव वाले पुश्तैनी घर पहुंची, तो उसकी सांसों में बचपन की वही पुरानी और जानी-पहचानी खुशबू भर गई। गाड़ी से उतरते ही उसने देखा कि मां दरवाजे पर कब से खड़ी उसी की राह तक रही थीं। नेहा बिना पल गंवाए दौड़कर मां के गले से लिपट गई। मां ने उसके माथे को चूमते हुए अपनी छाती से लगा लिया और उनकी आंसुओं से भरी आंखों में एक असीम सुकून तैरने लगा। पापा के अचानक चले जाने के बाद मां के उदास चेहरे पर ऐसी सच्ची खुशी नेहा ने बरसों बाद देखी थी।
लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक टिक न सकी। जैसे ही नेहा ने अपने भारी सूटकेस के साथ आंगन में कदम रखा, सामने खड़ी उसकी भाभी रीना के चेहरे पर एक अजीब सी नापसंदगी और तल्खी साफ छलक आई। रीना ने नेहा के हाथ में बड़ा सूटकेस देखा और बेहद रूखे स्वर में तंज कसते हुए कहा, "अच्छा, आखिरकार आ ही गईं तुम? हमें तो लगा था कि शहर की चकाचौंध में जाने के बाद तुम्हें अपना यह पुराना मायका और यहां के लोग याद ही नहीं रहते होंगे।"
नेहा ने माहौल को हल्का करने की कोशिश की और चेहरे पर एक फीकी सी मुस्कान लाकर बोली, "भाभी, मम्मा की बहुत याद आ रही थी। कई दिनों से दिल बेचैन था, इसलिए सोचा कुछ दिन आप सब के साथ बिता आऊं।"
रीना ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और मुंह बनाते हुए जोर-जोर से बर्तन पटकते हुए रसोई की तरफ चली गई। रात के खाने के वक्त घर का माहौल बहुत भारी और अजीब सा खिंचाव भरा था। नेहा का भाई अमित जब दिनभर के काम के बाद थका-हारा घर लौटा, तो उसने अपनी बहन को देखकर बहुत खुशी जाहिर की और उसका हाल-चाल पूछा। लेकिन रीना की तीखी और घूरती नज़रें लगातार अमित पर टिकी थीं, मानो वह उसे चेतावनी दे रही हो कि बहन के प्रति ज्यादा लाड-प्यार न दिखाए।
अगली सुबह जब नेहा अपनी मां के लिए गरम चाय बनाने रसोई में गई, तो रीना ने जानबूझकर अलमारी के दरवाजे जोर से बंद किए और कड़े शब्दों में कहा, "नेहा, तुम्हारे इस तरह अचानक आ जाने से घर का पूरा बजट और रोज़ का रूटीन बिगड़ जाता है। शादीशुदा बेटियों को इतना तो समझना ही चाहिए कि अब उनका असली घर उनका ससुराल ही है। बार-बार मायके आकर महीनों डेरा जमाने से भाई का घर नहीं चलता, ना ही गृहस्थी संभलती है।"
भाभी के ये ज़हरीले और तीखे शब्द नेहा के सीधे दिल में तीर की तरह जा चुभे। जिस घर की एक-एक ईंट पर कभी उसका अधिकार था, जहां उसने हंसते-खेलते अपना बचपन बिताया था, आज उसी घर में वह एक बिन बुलाए और अवांछित मेहमान की तरह महसूस कर रही थी। उसकी आंखों से आंसुओं की धार बह निकली, लेकिन उसने किसी तरह खुद को संभाला और अपने आंसुओं को पोंछ लिया। तभी पीछे से मां की कांपती हुई और भारी आवाज़ सुनाई दी...
(भाग 2 में जारी... क्या नेहा भाभी के इन तानों से तंग आकर तुरंत अपने ससुराल लौट जाएगी, या अपनी अकेली मां की खातिर इस अपमान को सहकर रुकेगी?)
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