Namumkin Ishq in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | नामुमकिन इश्क - एपिसोड 51

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नामुमकिन इश्क - एपिसोड 51

एपिसोड 51— रुद्रा का चेहरा
“नहीं... अर्जुन। मैं उसे नहीं जानती।”
आयत की आवाज कांप रही थी।
फोन के दूसरी तरफ अर्जुन कुछ नहीं बोला।
वह मंदिर से वापस लौट रहा था, लेकिन उसके दिमाग में इमरान की कही बात गूंज रही थी—
“रुद्रा तुम्हारे अपने परिवार से जुड़ा हुआ है।”
और अब आयत के कमरे में मिली तस्वीर...
छोटी-सी आयत...
उसके पिता नासिर खान...
और उनके साथ खड़ा एक अनजान आदमी।
वही आदमी जिसे तस्वीर के पीछे सिर्फ एक नाम से पहचाना गया था—
रुद्रा।
“आयत।”
अर्जुन की आवाज पहले से ज्यादा गंभीर थी।
“हां?”
“तुम्हें यकीन है कि तुम उसे नहीं जानती?”
“मैंने कहा ना... नहीं जानती।”
“लेकिन तुम्हारे पास उसकी तस्वीर कैसे आई?”
आयत कुछ पल चुप रही।
“मुझे नहीं पता।”
“और ये तस्वीर तुम्हें किसने दी?”
“मेरे कमरे के बाहर एक लिफाफे में मिली।”
अर्जुन ने गहरी सांस ली।
“तुमने किसी को देखा?”
“नहीं।”
“कोई आवाज? कोई निशान?”
“नहीं, अर्जुन।”
फिर आयत की आवाज टूट गई।
“लेकिन तुम मुझसे ऐसे सवाल क्यों कर रहे हो जैसे मैं ही कुछ छिपा रही हूं?”
अर्जुन ने आंखें बंद कर लीं।
वह जानता था कि उसकी आवाज आयत को चोट पहुंचा रही है।
लेकिन उसके पास भी सवाल बहुत थे।
“मैं सिर्फ सच जानना चाहता हूं।”
“और मैं भी!”
आयत अचानक तेज आवाज में बोली।
“मेरे पापा की मौत कैसे हुई, मेरे बचपन में क्या हुआ, ये आदमी कौन है... मुझे खुद कुछ नहीं पता। लेकिन जब भी मैं तुम्हारे पास जवाब ढूंढने आती हूं, तुम्हारी आंखों में भी मेरे लिए शक दिखाई देता है।”
अर्जुन चुप रहा।
आयत ने धीरे से कहा—
“मुझे लगा था... कम से कम तुम मुझ पर भरोसा करोगे।”
फोन कट गया।
अर्जुन काफी देर तक फोन को देखता रहा।
उसके चेहरे पर पछतावा था।
लेकिन तभी उसे इमरान की बात याद आई—
“अगर मैं पकड़ा गया, तो आयत कभी सुरक्षित नहीं रहेगी।”
अर्जुन ने बाइक की रफ्तार बढ़ा दी।
अब उसे सिर्फ एक चीज करनी थी।
रुद्रा को ढूंढना।
---
अगली सुबह City Hospital में सभी छात्र अपने-अपने काम में व्यस्त थे।
लेकिन आयत और अर्जुन के बीच अजीब-सी खामोशी थी।
आयत मरीजों की फाइल देख रही थी।
अर्जुन सामने खड़ा था।
दोनों एक ही टीम में थे, लेकिन दोनों एक-दूसरे से नजरें चुरा रहे थे।
Reeva ने यह बदलाव तुरंत महसूस कर लिया।
वह आयत के पास आई।
“क्या हुआ है?”
“कुछ नहीं।”
“मुझे बेवकूफ मत समझो।”
आयत ने उसकी तरफ देखा।
“बस अर्जुन से थोड़ी बहस हो गई।”
“किस बात पर?”
आयत ने जवाब नहीं दिया।
Reeva ने उसका हाथ दबाया।
“जो भी हुआ है, उसे अकेले मत झेलना।”
आयत ने हल्की मुस्कान देने की कोशिश की।
“मैं ठीक हूं।”
लेकिन वह ठीक नहीं थी।
उसकी आंखों में साफ दर्द था।
---
उधर Rohan अस्पताल की पार्किंग में खड़ा अपने फोन को देख रहा था।
उसे रात में फिर एक मैसेज आया था।
“तुम्हारे पिता ने A-27 को खत्म नहीं किया था।”
Rohan का चेहरा गंभीर हो गया।
“तो फिर क्या किया था?”
कुछ सेकंड बाद दूसरा मैसेज आया।
“उन्होंने उसे अपने पास रखा था।”
Rohan ने तुरंत अपने पिता Raghav Mehra के बारे में सोचना शुरू किया।
अगर उसके पिता का A-27 से संबंध था, तो उन्होंने उसे छिपाया क्यों?
और अगर Nasir Khan भी उसी मामले में शामिल थे...
तो उनकी मौत सच में हादसा नहीं थी?
Rohan ने उसी समय अर्जुन को फोन किया।
अर्जुन ने फोन उठाया।
“बोल।”
“मुझे तुमसे मिलना है।”
“कहां?”
“अस्पताल की पुरानी पार्किंग में।”
“अभी आता हूं।”
कुछ मिनट बाद दोनों आमने-सामने थे।
Rohan ने अपना फोन अर्जुन की तरफ बढ़ाया।
“मुझे ये मैसेज मिले हैं।”
अर्जुन ने सब पढ़ा।
“तुम्हारे पिता के पास A-27 था?”
“मुझे नहीं पता।”
“पता करना पड़ेगा।”
Rohan ने अर्जुन को गौर से देखा।
“तुम आयत से दूर क्यों हो?”
अर्जुन ने नजरें फेर लीं।
“ये हमारा मामला है।”
“मैं समझ सकता हूं।”
“क्या?”
“जब किसी से प्यार हो और उसी इंसान पर शक होने लगे... तो इंसान सबसे ज्यादा खुद से लड़ता है।”
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।
Rohan के चेहरे पर इस बार कोई मजाक नहीं था।
अर्जुन कुछ बोलता, उससे पहले Rohan ने कहा—
“लेकिन एक बात याद रखना। मुझे आयत पर शक करने की वजह मिली है, फिर भी मैं मानता हूं कि शायद कोई हमें गुमराह कर रहा है।”
अर्जुन कुछ सेकंड चुप रहा।
“मैं भी यही सोच रहा हूं।”
---
दोपहर में अर्जुन को एक जरूरी काम से Records Department जाना पड़ा।
वहां पहुंचते ही उसे वही अधिकारी मिला।
“सर, कल वाली A-27 फाइल के बारे में कुछ और मिला है।”
अर्जुन तुरंत सतर्क हो गया।
“क्या?”
“जिस ID से फाइल access हुई थी... वो Ayat Khan की ID थी, लेकिन login जिस कंप्यूटर से हुआ, वह computer उस वक्त बंद था।”
अर्जुन की आंखें सिकुड़ गईं।
“क्या?”
“हां। सिस्टम लॉग में login दिख रहा है, लेकिन उस कंप्यूटर की physical activity का कोई रिकॉर्ड नहीं है।”
अर्जुन ने तुरंत समझ लिया।
किसी ने ID clone की थी।
“क्या आप पता लगा सकते हैं कि login किस device से हुआ?”
अधिकारी ने कुछ देर कंप्यूटर पर देखा।
फिर उसका चेहरा बदल गया।
“सर...”
“क्या?”
“Login hospital network से नहीं हुआ।”
“तो?”
“बाहर से हुआ था।”
अर्जुन की आंखों में गुस्सा उतर आया।
“मतलब किसी ने आयत को फंसाने के लिए उसकी ID इस्तेमाल की।”
“शायद।”
अर्जुन तुरंत बाहर निकल गया।
लेकिन तभी उसके फोन पर एक वीडियो आया।
अनजान नंबर से।
उसने वीडियो खोला।
वीडियो में अस्पताल का एक पुराना कमरा दिखाई दे रहा था।
कमरे में एक लड़की खड़ी थी।
उसने वही कपड़े पहने थे जो आयत ने कल सुबह पहने थे।
अर्जुन का दिल रुक-सा गया।
वीडियो में लड़की एक टेबल से कुछ उठा रही थी।
और टेबल पर साफ लिखा था—
A-27
अर्जुन ने वीडियो रोक दिया।
“ये आयत है?”
उसने वीडियो दोबारा चलाया।
चेहरा पूरी तरह साफ नहीं था।
लेकिन कपड़े वही थे।
दुपट्टा वही।
बाल भी वही।
अर्जुन के मन में फिर शक पैदा होने लगा।
तभी वीडियो के आखिर में एक आवाज सुनाई दी—
“अब अर्जुन को ये यकीन हो जाएगा कि आयत सच छिपा रही है।”
वीडियो खत्म।
अर्जुन कुछ सेकंड बिल्कुल स्थिर खड़ा रहा।
उसने वीडियो फिर चलाया।
इस बार उसने आवाज ध्यान से सुनी।
उसे आवाज कहीं सुनी हुई लगी।
बहुत परिचित।
लेकिन वह पहचान नहीं पा रहा था।
---
उधर आयत अकेली हॉस्टल के कमरे में बैठी थी।
उसने कल मिली तस्वीर को फिर से देखा।
छोटी आयत अपने पिता का हाथ पकड़े खड़ी थी।
और उनके बगल में रुद्रा।
आयत ने तस्वीर को पलटा।
पीछे कुछ और लिखा था।
पहले उसकी नजर नहीं गई थी।
अब उसे एक छोटा-सा निशान दिखाई दिया।
V
आयत ने सोचा—
“V...?”
उसके दिमाग में अचानक अर्जुन का नाम आया।
Vashisht.
क्या यह निशान वशिष्ठ परिवार से जुड़ा था?
तभी कमरे का दरवाजा खटखटाया।
आयत ने तस्वीर जल्दी से छिपा दी।
“कौन?”
कोई जवाब नहीं आया।
फिर दोबारा दस्तक हुई।
आयत ने दरवाजा खोला।
बाहर कोई नहीं था।
सिर्फ जमीन पर एक छोटा-सा डिब्बा रखा था।
उसने डिब्बा उठाया।
अंदर एक पुरानी घड़ी थी।
और घड़ी के पीछे खुदे हुए शब्द—
“तुम्हारे पिता ने तुम्हें बचाने के लिए तुम्हें झूठ बताया था।”
आयत की आंखें भर आईं।
“पापा... आपने मुझसे क्या छिपाया था?”
---
शाम को अर्जुन आयत के पास गया।
आयत ने उसे देखते ही अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया।
“मुझे तुमसे बात करनी है।”
“मुझे काम है।”
“आयत।”
वह रुकी।
अर्जुन ने फोन उसकी तरफ बढ़ाया।
“ये देखो।”
आयत ने वीडियो देखा।
वीडियो खत्म होते ही उसने अर्जुन की तरफ देखा।
“ये मैं नहीं हूं।”
अर्जुन कुछ नहीं बोला।
“तुम्हें सच में लगता है कि मैं ये सब कर सकती हूं?”
“नहीं।”
आयत चौंकी।
“तो फिर ये मुझे क्यों दिखा रहे हो?”
अर्जुन ने धीमे से कहा—
“क्योंकि मुझे लगता है कोई तुम्हें फंसा रहा है।”
आयत की आंखों में राहत की हल्की चमक आई।
“तो तुम मुझ पर भरोसा करते हो?”
अर्जुन ने उसकी आंखों में देखा।
“मैं करना चाहता हूं।”
आयत की मुस्कान गायब हो गई।
“करना चाहते हो... लेकिन करते नहीं।”
अर्जुन के पास कोई जवाब नहीं था।
तभी आयत ने अपनी मुट्ठी खोली।
उसमें वह पुरानी तस्वीर थी।
“मुझे ये मिली।”
अर्जुन ने तस्वीर देखते ही उसे पकड़ लिया।
उसकी नजर तस्वीर के पीछे बने निशान पर पड़ी।
V
अर्जुन के चेहरे का रंग बदल गया।
“ये निशान...”
“तुम जानते हो इसे?”
अर्जुन ने तुरंत जवाब नहीं दिया।
उसे अपने दादाजी की डायरी याद आ गई।
उसी डायरी के एक पन्ने पर भी यही निशान था।
लेकिन उसके नीचे एक नाम लिखा था—
“विक्रम।”
अर्जुन ने धीमी आवाज में कहा—
“आयत... हमें घर जाना होगा।”
“क्यों?”
“क्योंकि मुझे लगता है मेरे दादाजी ने रुद्रा का नाम कहीं छिपाया था।”
“और विक्रम?”
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।
“शायद रुद्रा का असली नाम यही है।”
दोनों वहां से निकलने ही वाले थे कि अर्जुन का फोन बजा।
एक अनजान नंबर।
उसने कॉल उठाई।
दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक खामोशी रही।
फिर एक भारी आवाज आई—
“अर्जुन वशिष्ठ... अगर तुम रुद्रा का सच जानना चाहते हो, तो आज रात अपने घर की पुरानी हवेली के पीछे वाले मंदिर में जाना।”
अर्जुन ने पूछा—
“तुम कौन हो?”
आवाज आई—
“वही... जिसने तुम्हारे दादाजी को आखिरी बार रुद्रा से बचाने की कोशिश की थी।”
कॉल कट गया।
अर्जुन और आयत एक-दूसरे को देखने लगे।
लेकिन उन्हें नहीं पता था कि अस्पताल के बाहर खड़ी काली कार में बैठा रघुवीर उनकी पूरी बातचीत सुन चुका था।
उसने फोन कान से हटाया और मुस्कुराया।
“अब अर्जुन को मंदिर तक पहुंचने दो।”
उसके सामने बैठे आदमी ने पूछा—
“और उसके बाद?”
रघुवीर ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा—
“उसके बाद उसे अपने ही परिवार का ऐसा सच दिखेगा... जिससे वह आयत से हमेशा के लिए दूर हो जाएगा।”
काली कार धीरे-धीरे अंधेरे में गायब हो गई।
और दूसरी तरफ अर्जुन ने आयत का हाथ थाम लिया।
“जो भी होगा... इस बार हम साथ में सच ढूंढेंगे।”
आयत ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आंखों में डर था।
लेकिन इस बार—
अर्जुन का हाथ उसने नहीं छोड़ा।
जारी रहेगा...