Pahli Mulakat Devil se Pyar - 1 in Hindi Love Stories by goldi books and stories PDF | पहली मुलाकात डेविल से प्यार - 1

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पहली मुलाकात डेविल से प्यार - 1

इंदौर के सबसे बड़े और महंगे कॉलेज में अगर किसी एक नाम से सबकी रूह कांपती थी, तो वो था - मान सिंह राठौर।

मान को सब डेविल कहते थे। वजह सिर्फ उसका गुस्सा नहीं था, बल्कि उसकी वो खामोश आँखें थी जो किसी को भी घायल कर सकती थी। वो कॉलेज का सबसे अमीर लड़का था, उसके कपड़े, उसकी गाड़ी, उसका एटीट्यूड सब रॉयल था। वो किसी से बात नहीं करता था, और जो उससे बात करने की कोशिश करता, वो अगले दिन कॉलेज छोड़ देता था। हर लड़की उसे चाहती थी, पर उसकी आँखों में देखने की हिम्मत किसी में नहीं थी।

और ठीक उसी कॉलेज में, स्कॉलरशिप पर एडमिशन हुआ था तृषा का। एक छोटे से गाँव से आई हुई, गुलाबी सूट और चोटी वाली, आँखों में डॉक्टर बनने का सपना लिए एक बहुत ही सीधी-साधी और भोली लड़की। उसे फैशन, अमीरी, इन सब से कोई मतलब नहीं था।

पहली मुलाकात कॉलेज की बड़ी सी लाइब्रेरी में हुई।

तृषा अपनी मेडिकल की किताब ढूंढ रही थी। उसे पहली लाइन की बुक चाहिए थी जो सबसे ऊपर रखी थी। वो उछल कर किताब निकालने की कोशिश कर रही थी, तभी पीछे से एक मजबूत हाथ आया और उसने वो किताब निकाल दी।

तृषा ने पीछे मुड़कर देखा, वो मान था। काले शर्ट में, आँखों में गुस्सा लिए।

तृषा का हाथ गलती से उसके हाथ से टकरा गया और उसके हाथ की सारी किताबें नीचे गिर गईं। पूरी लाइब्रेरी में सन्नाटा छा गया।

"अंधी हो क्या? दिखाई नहीं देता?" मान जोर से चिल्लाया, उसकी आवाज से पूरी लाइब्रेरी गूंज उठी।

तृषा की आँखों में तुरंत आँसू आ गए। उसने कभी किसी को इतने गुस्से में नहीं देखा था। वो कांपते हुए बोली, "सॉ... सॉरी, वो मैं..."

मान ने बिना कुछ बोले नीचे गिरी किताबें उठाईं और गुस्से में टेबल पर पटक दीं। और जाते-जाते उसने तृषा की आँखों में देखकर कहा, "आज के बाद मेरी नजरों के सामने मत आना, समझी? वरना इस कॉलेज में टिक नहीं पाओगी।"

तृषा वहीं खड़ी रोती रही। उस रात वो हॉस्टल में बहुत रोई। उसने अपनी माँ को फोन किया और कहा कि यहाँ सब बहुत बुरे हैं। उसने भगवान से प्रार्थना की, "हे भगवान, कैसा इंसान है ये, क्या इसके दिल में थोड़ा सा भी प्यार, थोड़ी सी भी इंसानियत नहीं है?"

पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

अगले दिन कॉलेज में साल का सबसे बड़ा फेस्ट था। पूरे कॉलेज को दुल्हन की तरह सजाया गया था। मान उस फेस्ट का चीफ गेस्ट था क्योंकि उसके पापा ने कॉलेज को डोनेशन दिया था।

तृषा ने भी फेस्ट में हिस्सा लिया था। उसने स्टेज पर एक कविता बोलने का फैसला किया था। वो बहुत डरी हुई थी, क्योंकि सामने हजारों लोग बैठे थे और सबसे आगे मान बैठा था।

जैसे ही तृषा ने अपनी कविता शुरू की, "मोहब्बत क्या है, मुझे नहीं पता..." उसकी आवाज में इतना दर्द, इतनी सच्चाई थी कि पूरा हॉल एकदम शांत हो गया। हर कोई बस उसे ही सुन रहा था।

और सबसे आगे, कोने वाली कुर्सी पर बैठा मान, पहली बार किसी को इतने ध्यान से देख रहा था। उसकी आँखें तृषा पर टिकी थीं। उसे पहली बार किसी की आवाज ने छुआ था। पहली बार उस डेविल की पत्थर जैसी आँखों में नमी आई थी। किसी ने ध्यान नहीं दिया, पर मान ने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया था।

कविता खत्म होते ही सबने तालियाँ बजाईं। तृषा को फर्स्ट प्राइज मिला।

शाम को जब फेस्ट खत्म हुआ, तृषा अकेली कॉलेज के गार्डन में बैठी थी और अपने प्राइज को देख रही थी। तभी हवा में उड़ता हुआ एक कागज का टुकड़ा उसके पास आया।

तृषा ने वो कागज उठाया। उस पर अंग्रेजी में कुछ लिखा था, लिखावट बहुत ही सुंदर थी -

"तुम्हारी आवाज में सुकून है। आज तक किसी ने मुझे इतना शांत नहीं किया। कल शाम 5 बजे, वहीं लाइब्रेरी में मिलो। तुम्हारा इंतजार करूंगा।
- डेविल"

तृषा का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। ये खत किसका हो सकता है? क्या ये मान ने भेजा है? जो लड़का कल उसे डांट रहा था, वो आज उसे मिलने क्यों बुला रहा है?

क्या तृषा उस डेविल से मिलने लाइब्रेरी में जाएगी? क्या नफरत से शुरू हुई ये कहानी प्यार में बदलेगी?