love crime revenge in Hindi Crime Stories by Renu Chaurasiya books and stories PDF | अंश, कार्तिक, आर्यन - 20

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अंश, कार्तिक, आर्यन - 20


मल्होत्रा की हवेली बाहर से जितनी आलीशान और शांत दिखाई देती थी, उसके भीतर छिपा तहखाना उतना ही भयावह हैं 
हवेली की संगमरमर की सीढ़ियों, झूमरों और कीमती चित्रों के नीचे एक ऐसी दुनिया दबी हुई है, जिसके बारे में हवेली के अधिकांश लोगों को कुछ भी पता नहीं था।
तहखाने तक जाने का रास्ता किसी साधारण दरवाज़े से नहीं खुलता था।
विक्रम के निजी अध्ययन-कक्ष की दीवार पर लगी एक पुरानी, काले शीशे वाली घड़ी के पीछे एक गुप्त बटन था। उसे दबाने पर दीवार का एक हिस्सा बिना किसी आवाज़ के पीछे सरक जाता। उसके पीछे नीचे जाती हुई लंबी सीढ़ियाँ थीं—काली, ठंडी और इतनी गहरी कि उनकी अंतिम सीढ़ी दिखाई तक नहीं देती थी।
जैसे-जैसे कोई नीचे उतरता, हवेली की दुनिया पीछे छूटती जाती।
ऊपर की गर्म रोशनी की जगह दीवारों पर लगी हल्की पीली लाइटें थीं। हवा में सीलन, लोहे, पुराने धुएँ और किसी अनजाने खतरे की मिली-जुली गंध तैरती रहती। पत्थर की दीवारों पर नमी की पतली धारियाँ जमी थीं, लेकिन उनके बीच जगह-जगह आधुनिक सुरक्षा कैमरे और लाल रोशनी वाले सेंसर लगे हुए थे।
यह कोई पुराना तहखाना नहीं था।
यह एक सुनियोजित साम्राज्य का भूमिगत केंद्र था।
सीढ़ियों के अंत में एक भारी लोहे का दरवाज़ा था। उस पर कोई नाम नहीं लिखा था, केवल एक छोटा-सा चिह्न बना था—मल्होत्रा परिवार का प्रतीक।
दरवाज़े के दोनों ओर हथियारबंद आदमी खड़े रहते थे। उनके चेहरे निर्विकार होते, आँखें सामने और हाथ हमेशा हथियारों के पास।
विक्रम की अनुमति के बिना उस दरवाज़े को पार करना असंभव था।
यहाँ तक कि आर्यन भी बिना अनुमति के तहखाने के अंदर नहीं जा सकता था।
दरवाज़ा खुलते ही सामने एक लंबा गलियारा दिखाई देता था। उसकी छत इतनी ऊँची थी कि आवाज़ कई क्षणों तक लौटकर आती। गलियारे के दोनों ओर मोटे लोहे के दरवाज़े थे—कुछ बंद, कुछ पर इलेक्ट्रॉनिक ताले लगे हुए, और कुछ के बाहर केवल लाल रंग की चेतावनी बत्ती जलती रहती।
कहीं अंदर से मशीनों की धीमी आवाज़ आती।
कहीं धातु के बक्सों के खिसकने की आवाज़।
कहीं किसी आदमी की दबाई हुई चीख अचानक उठती और फिर ध्वनिरोधक दीवारों में खो जाती।
तहखाने का एक बड़ा हिस्सा अवैध हथियारों के भंडार के लिए इस्तेमाल होता था। दीवारों से लगे रैक में बंदूकें, गोलियाँ, धारदार हथियार और छोटे-बड़े धातु के बक्से करीने से रखे रहते। हर बक्से पर कोड लिखा होता, नाम नहीं।
दूसरे हिस्से में नशीले पदार्थों की खेपों का हिसाब रखा जाता था। वहाँ हमेशा दो-तीन आदमी कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठे रहते, जिनकी उंगलियाँ लगातार कीबोर्ड पर चलती रहतीं। स्क्रीन पर शहरों के नाम, तारीखें, रकम और गुप्त संकेत दिखाई देते।
एक और कमरा ऐसा था जहाँ बड़े-बड़े नक्शे दीवारों पर लगे थे।
शहरों के नक्शे।
सीमाओं के नक्शे।
बंदरगाहों, गोदामों, जंगलों और गुप्त रास्तों के नक्शे।
हर नक्शे पर अलग-अलग रंगों के निशान बने थे। लाल निशान खतरे के स्थानों को दर्शाते थे, काले निशान विक्रम के नियंत्रण वाले इलाकों को और सफेद निशान उन लोगों को, जो अभी उसके रास्ते में बाधा बने हुए थे।
तहखाने के सबसे अंदरूनी हिस्से में एक विशाल नियंत्रण-कक्ष था।
वहाँ दर्जनों स्क्रीन एक साथ जलती रहती थीं। हवेली के हर कोने, शहर के अलग-अलग हिस्सों, गोदामों, सड़कों और जंगल की सीमा तक लगे कैमरों की लाइव तस्वीरें उन स्क्रीन पर दिखाई देती थीं।
कमरे के बीचोंबीच एक लंबी काली मेज थी, जिस पर फाइलें, नक्शे, फोन और कुछ बंद धातु के केस रखे रहते।
उस कमरे की दीवार पर केवल एक वाक्य खुदा हुआ था—
"यहाँ कानून नहीं, केवल आदेश चलता है।"
और उस आदेश का मालिक था—विक्रम मल्होत्रा।
तहखाने का सबसे भयावह हिस्सा उसके पीछे बना एक गुप्त सुरंग-मार्ग था।
वह सुरंग हवेली के नीचे से निकलकर जंगल की ओर जाती थी। बाहर से देखने पर वहाँ घनी झाड़ियाँ और पुराने पेड़ों के अलावा कुछ नहीं दिखाई देता था, लेकिन जमीन के भीतर बना वह रास्ता कई किलोमीटर तक फैला हुआ था।
उस सुरंग का इस्तेमाल माल पहुँचाने, लोगों को गुप्त रूप से लाने-ले जाने और जरूरत पड़ने पर किसी को बिना निशान छोड़े गायब करने के लिए किया जाता था।
सुरंग के अंतिम हिस्से में एक भारी लोहे का दरवाज़ा था, जो जंगल की चट्टानों के बीच खुलता था।
वहाँ हमेशा अंधेरा रहता।
पेड़ों के बीच हवा सरसराती रहती।
और कभी-कभी रात के सन्नाटे में दूर से किसी गाड़ी के इंजन की आवाज़ सुनाई देती।
तहखाने में कई कमरे ऐसे भी थे जिनके बारे में केवल विक्रम जानता था।
कुछ कमरे पूछताछ के लिए थे।
कुछ कैदियों के लिए।
कुछ ऐसे, जिनके दरवाज़ों पर कोई नंबर तक नहीं था।
उन कमरों के सामने से गुजरते समय वहाँ तैनात आदमी भी अपनी निगाहें झुका लेते थे। कोई सवाल नहीं करता था। कोई भीतर झाँकने की कोशिश नहीं करता था।
क्योंकि मल्होत्रा हवेली का सबसे बड़ा नियम था—
विक्रम की अनुमति के बिना तहखाने के किसी भी हिस्से में प्रवेश करना मौत को बुलावा देना था।
ऊपर हवेली में लोग विक्रम को एक शक्तिशाली उद्योगपति, कठोर पिता और प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में जानते थे।
लेकिन नीचे...
नीचे वह केवल एक उद्योगपति नहीं था।
वह एक ऐसा आदमी था जिसके इशारे पर सौदे होते थे, लोग गायब होते थे, हथियार चलते थे और शहरों की किस्मत बदल जाती थी।
ऊपर उसकी दुनिया संगमरमर और रोशनी से बनी थी।
नीचे उसकी असली दुनिया खून, डर, राज़ और सत्ता पर टिकी थी।
और उस अंधेरे तहखाने की हर दीवार जैसे एक ही बात कहती थी—
मल्होत्रा हवेली का मालिक विक्रम नहीं था... विक्रम स्वयं उस हवेली का सबसे बड़ा रहस्य था

आर्यन कार्तिक को सीधे अपने कमरे में ले आया।दरवाज़ा बंद होते ही आर्यन ने उसे पीछे से अपनी बाहों में भर लिया।बेहद हक और प्यार से।वही आर्यन, जिसके नाम से पूरा शहर कांपता था।जिसका परिवार एक खूंखार माफिया साम्राज्य चलाता था।और वह खुद? एक बेपरवाह प्लेबॉय।जिसने कभी किसी से सच्चा प्यार नहीं किया था।पर आज, उसकी आँखों में कार्तिक के लिए दीवानगी थी।कार्तिक चुपचाप उसकी बाहों में खड़ा रहा।वह यह सब होने दे रहा था।सिर्फ अपने प्रतिशोध  के लिए।जैसे ही आर्यन के मजबूत हाथों ने कार्तिक की कमर को कसा।कार्तिक के शरीर में एक खौफनाक लहर दौड़ गई।एक बेहद खतरनाक अहसास।उसे महसूस हुआ जैसे उसकी नाजुक त्वचा पर कोई दो बड़े और नुकीले कांटे ज़ोर से चुभो रहा हो।गहरा, चीर देने वाला दर्द।उसका रोम-रोम उस छुअन से तड़प उठा।लेकिन कार्तिक ने अपनी मुट्ठियाँ भींच लीं।उसने अपने चेहरे पर नफ़रत का एक कतरा भी आने नहीं दिया।आर्यन ने उसके गले पर अपनी गर्म साँसें छोड़ते हुए बेहद धीमी आवाज़ में कहा—"तुम मुझे छोड़कर इतनी जल्दी क्यों चले आए थे, कार्तिक? अब मैं तुम्हें खुद से दूर नहीं जाने दूँगा।"कार्तिक ने अंदर उठते दर्द के तूफ़ान को दबाया।वह पलटा और उसने आर्यन की आँखों में देखा।एक नकली, सम्मोहक मुस्कान के साथ।वह बोला—"मैं कहीं नहीं जा रहा आर्यन... अब तो मैं हमेशा तुम्हारे पास ही रहूँगा।"आर्यन के हाथ अचानक रुक गए।बस एक पल के लिए।उसे लगा कि कार्तिक की साँसें असामान्य रूप से भारी हो रही हैं।माफिया का वो शातिर दिमाग कुछ भांप पाता, उससे पहले कार्तिक ने उसे गले लगा लिया।अपने शरीर में चुभते उन दो कांटों के दर्द को सहते हुए।
आर्यन कार्तिक के होठों के बेहद करीब आ चुका था।उसकी साँसें कार्तिक के चेहरे को छू रही थीं।उसने धीरे से कार्तिक का चेहरा ऊपर उठाया।आर्यन की आँखों में वह बेबसी थी, जो उसने अपनी पूरी ज़िंदगी में कभी महसूस नहीं की थी।एक खूंखार माफिया का वारिस, आज किसी के सामने घुटनों पर था।उसने कार्तिक के होठों पर अपने होंठ रख दिए।एक गहरा, जुनूनी चुंबन।आर्यन वह सब कर रहा था जो वह हमेशा से चाहता था—कार्तिक को पूरी तरह अपना बनाना।लेकिन कार्तिक के लिए?यह एक खौफनाक दुःस्वप्न  जैसा था।जैसे ही आर्यन ने उसे चूमा, वे दो अदृश्य नुकीले कांटे कार्तिक की त्वचा को फाड़कर सीधे उसके दिल के अंदर धंस गए।दर्द का एक ऐसा झटका लगा कि कार्तिक के पैर लड़खड़ा गए।उसे लगा जैसे उसकी रीढ़ की हड्डी के टुकड़े-टुकड़े हो रहे हों।उसकी आँखों के कोने से एक आँसू छलक कर बह निकला।आर्यन ने उस आँसू को महसूस किया।उसने चुंबन को थोड़ा धीमा किया, पर कार्तिक को छोड़ा नहीं।आर्यन को लगा कि यह कार्तिक का उसके प्रति गहरा भावुक समर्पण है।वह कार्तिक के आँसू को प्यार समझ बैठा।शहर का सबसे शातिर प्लेबॉय, अपने ही शिकार के बिछाए जाल में अंधा हो चुका था।कार्तिक ने भीतर तक चीर देने वाले उस कांटों के दर्द को बर्दाश्त किया।उसने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं।और अपने हाथ आर्यन की पीठ पर कस दिए।वह आर्यन को वह सब करने दे रहा था, जो आर्यन चाहता था।ताकि जब आर्यन का दिल पूरी तरह उसके कब्ज़े में आ जाए...तो वह उसे इतनी बेरहमी से तोड़े कि पूरा माफिया साम्राज्य हिल उठे।बदले की यह आग, कार्तिक के जिस्म के हर एक दर्द से कहीं ज़्यादा बड़ी थी।जैसे ही आर्यन कमरे से बाहर गया।कार्तिक ने तुरंत खुद को बाथरूम में बंद कर लिया।उसका पूरा वजूद थर-थर कांप रहा था।उसने बेसिन का सहारा लिया और उसकी साँसें बेकाबू होने लगीं।आर्यन का हर एक स्पर्श...कार्तिक को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसके शरीर पर हज़ारों ज़हरीली चींटियाँ एक साथ काट रही हों।वह खौफनाक चुभन और जलन उसके बर्दाश्त के बाहर थी।उसने गुस्से और नफ़रत में आकर शावर चालू किया।ठंडा पानी उसके ऊपर गिरने लगा।पर उसके बदन की जलन शांत नहीं हुई।कार्तिक ने हाथ में नहाने वाला स्क्रबर  उठाया।और वह पागलों की तरह अपनी त्वचा को रगड़ने लगा।जहाँ-जहाँ आर्यन ने उसे छुआ था, वह उन हिस्सों को मिटा देना चाहता था।उसने अपने हाथों, अपनी गर्दन और अपनी छाती को तब तक बेरहमी से रगड़ा...जब तक कि उसकी गोरी त्वचा पर नीले और लाल निशान नहीं पड़ गए।दर्द से उसकी आँखें लाल हो गईं।पर यह शारीरिक दर्द उस नफ़रत के सामने कुछ भी नहीं था, जो उसके दिल में थी।वह आईने के सामने खड़ा हुआ।अपने शरीर पर पड़े उन नीले निशानों को देखते हुए उसकी आँखों में प्रतिशोध की आग चमक उठी।वह अपने होंठों को पोंछते हुए मन ही मन बुदबुदाया—"आर्यन... तुम्हारी हर एक छुअन का हिसाब मैं तुम्हारी बर्बादी से करूँगा।"बाथरूम के बाहर, आर्यन सोफे पर बैठा उसी के ख्यालों में खोया हुआ था।उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि जिस कार्तिक को वह अपना सब कुछ मान चुका है...वह अंदर अपने ही जिस्म को लहूलुहान कर रहा है, सिर्फ उससे बदला लेने के लिए।कार्तिक ने आईने में अपने शरीर पर पड़े उन नीले निशानों को देखा।उसकी आँखें दर्द से नम थीं, पर उनमें कमज़ोरी का एक कतरा भी नहीं था।उसने गहरी सांस ली और अपने बिखरे बालों को ठीक किया।वह बेहद बहादुर है।वह अपने इस दर्द को, अपनी इस बेबसी को किसी के सामने आने नहीं दे सकता था।दुनिया के सामने वह कमज़ोर नहीं पड़ सकता।खासकर आर्यन के सामने तो बिल्कुल भी नहीं।कार्तिक ने फुर्ती से फुल-स्लीव्स की शर्ट उठाई।और बटन बंद करने लगा।उसने कॉलर को थोड़ा ऊपर किया ताकि गर्दन के नीले निशान छिप सकें।यह हिस्सा कोई नहीं देख सकता।यह उसकी लड़ाई थी, उसका दर्द था, और उसका अपना निजी नरक था।जिसके बारे में सिर्फ वही जानता था।अपनी शर्ट के आखिरी बटन को बंद करते हुए उसने अपने चेहरे पर एक बार फिर वही शांत मुखौटा पहन लिया।वही सम्मोहक मुस्कान।वही मासूमियत।उसने बाथरूम का दरवाज़ा खोला और बाहर आ गया।आर्यन बिस्तर पर लेटा हुआ था, उसकी आँखों में कार्तिक को देखते ही एक अलग सी चमक आ गई।माफिया का वो बेपरवाह वारिस इस बात से बिल्कुल अनजान था...कि उसके ठीक सामने जो लड़का खड़ा है, वह कितना फौलादी और बहादुर है।और वह किस हद तक गुज़रने के लिए तैयार है।