Mr. & Ms. Fake
Episode 45 – तीन बहनें, तीन सच
धड़ाम!
मिल का भारी लोहे का दरवाजा उनके पीछे बंद हो गया।
सान्वी ने तुरंत पलटकर देखा।
राघव बाहर खड़ा था।
उसका चेहरा शांत था, जैसे वह पहले से जानता हो कि अब जो होने वाला है, उससे कोई वापस नहीं जा सकेगा।
सान्वी ने दरवाजे की तरफ बढ़ना चाहा।
“राघव!”
कोई जवाब नहीं।
“नैना कहाँ है?”
कुछ सेकंड बाद अंधेरे में उसकी आवाज गूँजी—
“आगे बढ़ो।”
“वहीं है।”
सान्वी ने आर्यवीर का हाथ कसकर पकड़ लिया।
“मुझे इस आदमी पर बिल्कुल भरोसा नहीं है।”
आर्यवीर ने धीमे से कहा—
“मुझे भी नहीं।”
“फिर?”
“लेकिन नैना को ढूँढना है।”
दोनों आगे बढ़े।
पुरानी मिल के अंदर हर तरफ जंग लगी मशीनें थीं।
फर्श पर धूल की मोटी परत थी।
लेकिन एक बात अजीब थी।
कुछ मशीनों पर अब भी बिजली की छोटी-छोटी लाइटें जल रही थीं।
सान्वी ने चारों तरफ देखा।
“ये जगह इतने सालों से बंद है ना?”
आर्यवीर ने कहा—
“ऐसा लगता तो नहीं।”
अचानक पीछे से आवाज आई—
“क्योंकि ये बंद नहीं थी।”
सान्वी पलटी।
राघव सामने खड़ा था।
“तुम कब आए?”
“जब तुम आगे बढ़ रही थीं।”
आर्यवीर ने कहा—
“सीधा बताओ। नैना कहाँ है?”
राघव ने सामने बने एक कमरे की तरफ इशारा किया।
“वहाँ।”
सान्वी दौड़कर दरवाजे तक पहुँची।
दरवाजा खुला।
अंदर नैना कुर्सी पर बैठी थी।
उसके हाथ बंधे नहीं थे।
वह बिल्कुल सुरक्षित थी।
सान्वी ने उसे देखते ही गले लगा लिया।
“नैना!”
नैना भी रो पड़ी।
“दीदी…”
आरोही वहाँ नहीं थी।
सान्वी ने पूछा—
“तुम ठीक हो?”
“हाँ।”
“इसने तुम्हें कुछ किया?”
नैना ने सिर हिलाया।
“नहीं।”
सान्वी ने राघव को देखा।
“तो फिर तुम्हें यहाँ क्यों लाया?”
नैना ने धीरे से कहा—
“क्योंकि इसे मुझसे कुछ पूछना था।”
“क्या?”
नैना ने अपनी जेब से एक छोटा कार्ड निकाला।
उस पर तीन नाम लिखे थे—
Saanvi
Aarohi
Naina
और तीनों के नाम के सामने अलग-अलग नंबर।
सान्वी ने पूछा—
“ये क्या है?”
राघव ने कहा—
“Project S-21 के original records।”
आर्यवीर ने कार्ड उसके हाथ से ले लिया।
“और इन नंबरों का मतलब?”
“इनका मतलब है कि तुम तीनों को अलग-अलग वजहों से चुना गया था।”
सान्वी ने तुरंत पूछा—
“चुना गया था?”
“हाँ।”
“लेकिन क्यों?”
राघव ने कहा—
“यही तुम्हें जानना है।”
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तीन जन्म, तीन राज
राघव ने मिल के बीचोंबीच लगी एक पुरानी स्क्रीन चालू की।
स्क्रीन पर पुराना अस्पताल दिखाई दिया।
वही अस्पताल…
जहाँ तीनों बहनों का जन्म हुआ था।
सान्वी की साँस रुक गई।
“ये वही रात है।”
राघव ने वीडियो आगे बढ़ाया।
स्क्रीन पर डॉक्टरों की आवाजें सुनाई दीं।
“पहली बच्ची…”
फिर कुछ सेकंड बाद—
“दूसरी बच्ची…”
और फिर—
“तीसरी बच्ची।”
सान्वी की आँखें नम हो गईं।
“हम सच में एक ही रात पैदा हुई थीं।”
राघव ने कहा—
“हाँ।”
“लेकिन…”
उसने स्क्रीन रोक दी।
“तीनों का biological record अलग था।”
आर्यवीर ने पूछा—
“मतलब?”
राघव ने कहा—
“सान्वी और आरोही जुड़वाँ थीं।”
सान्वी ने नैना की तरफ देखा।
“और मैं?”
राघव ने कहा—
“तुम्हारी माँ वही थी जिसने तीनों को जन्म दिया।”
सान्वी चौंक गई।
“लेकिन आपने अभी कहा था कि…”
“मैंने कहा था कि तुम तीनों एक ही माँ की बेटियाँ नहीं हो।”
राघव ने कहा—
“और वो बात आधी सच थी।”
आर्यवीर ने भौंहें सिकोड़ लीं।
“आधी?”
“हाँ।”
राघव ने स्क्रीन पर एक रिपोर्ट दिखाई।
उसमें तीन अलग-अलग नाम थे।
Mother: Meera Malhotra
Biological Mother: Unknown
Guardian: Ananya Sharma
सान्वी ने रिपोर्ट को देखा।
“ये क्या है?”
राघव बोला—
“तुम तीनों को जन्म देने वाली औरत का नाम Meera था।”
सान्वी की आँखें फैल गईं।
“तो माँ?”
“वो तुम्हारी biological mother नहीं थी?”
राघव ने सिर हिलाया।
“मीरा ने तुम्हें जन्म दिया था।”
“लेकिन Ananya Sharma…”
सान्वी की साँस अटक गई।
“ये मेरी…”
राघव ने कहा—
“तुम्हारी माँ नहीं।”
“लेकिन वही औरत थी जिसने तुम्हें बचपन में पाला।”
सान्वी कुछ नहीं समझ पा रही थी।
“तो मेरी माँ कौन थी?”
राघव ने उसकी तरफ देखा।
“ये सवाल अभी भी पूरी तरह हल नहीं हुआ।”
सान्वी की आँखों से आँसू निकल आए।
“इतने साल…”
“मैं जिसे माँ समझती रही…”
“वो मेरी माँ थी ही नहीं?”
आर्यवीर ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।
“सान्वी।”
“मुझे छोड़ दो।”
“नहीं।”
“आर्यवीर…”
“मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ूँगा।”
सान्वी उसकी तरफ देखने लगी।
आर्यवीर ने कहा—
“तुम्हारी पहचान किसी कागज से तय नहीं होती।”
सान्वी की आँखों में आँसू थे।
“लेकिन मैं हूँ कौन?”
आर्यवीर ने बिना हिचके कहा—
“मेरे लिए?”
वह थोड़ा करीब आया।
“तुम सान्वी हो।”
“बस।”
सान्वी कुछ बोल नहीं पाई।
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Aarohi का राज
तभी मिल के बाहर से किसी गाड़ी के रुकने की आवाज आई।
राघव तुरंत सतर्क हो गया।
“कोई आ गया।”
नैना ने पूछा—
“कौन?”
राघव ने जवाब नहीं दिया।
अचानक दरवाजा खुला।
Aarohi अंदर आई।
लेकिन उसके साथ कोई और भी था।
Saanvi की आँखें फैल गईं।
“पापा?”
राजवीर और अमन दोनों अंदर आए।
राजवीर ने सान्वी को देखते ही राहत की साँस ली।
“तुम ठीक हो?”
सान्वी ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
फिर उसने पूछा—
“आप लोग यहाँ कैसे पहुँचे?”
अमन ने कहा—
“तुम्हारे पीछे आए थे।”
राघव ने कहा—
“तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था।”
राजवीर ने जवाब दिया—
“अब हमारी बेटियों से जुड़े हर सच के बीच मैं रहूँगा।”
राघव हल्का-सा मुस्कुराया।
“बहुत देर से याद आया।”
राजवीर ने उसकी तरफ देखा।
“राघव…”
“क्या?”
“तुमने जो कहा था…”
“कि तीनों एक माँ की बेटियाँ नहीं हैं…”
राजवीर रुक गया।
“वो सच नहीं है।”
राघव का चेहरा बदल गया।
“तुमने क्या कहा?”
राजवीर ने कहा—
“तीनों को जन्म देने वाली औरत एक ही थी।”
सान्वी की नजर दोनों भाइयों के बीच घूमने लगी।
“तो कौन झूठ बोल रहा है?”
कुछ सेकंड तक कोई नहीं बोला।
तभी अमन ने कहा—
“दोनों पूरी सच्चाई नहीं बता रहे।”
सान्वी ने उसकी तरफ देखा।
“आप जानते हैं?”
अमन ने सिर झुका लिया।
“हाँ।”
“तो बोलिए।”
अमन ने कहा—
“तुम्हारी माँ…”
“अनन्या…”
“वो सिर्फ तुम्हारी guardian नहीं थी।”
सान्वी ने कहा—
“तो?”
“वो तुम्हारी माँ की बहन थी।”
सान्वी चौंक गई।
“क्या?”
अमन ने कहा—
“तुम्हारी biological mother मीरा थी।”
“लेकिन तुम्हारी परवरिश अनन्या ने की।”
“और इसी वजह से सारे records बदल दिए गए।”
नैना ने पूछा—
“तो हम तीनों की माँ कौन?”
अमन ने कहा—
“मीरा।”
तीनों बहनों की आँखों में आँसू आ गए।
सान्वी ने धीरे से कहा—
“तो माँ ने हमें छोड़ा नहीं था?”
राजवीर ने कहा—
“नहीं।”
“वो तुम्हें बचा रही थी।”
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मीरा की आखिरी रिकॉर्डिंग
राघव ने स्क्रीन पर एक फाइल खोली।
“अगर तुम्हें सच चाहिए…”
उसने कहा—
“तो इसे देखो।”
स्क्रीन पर एक महिला दिखाई दी।
मीरा।
तीनों बहनों की नजर स्क्रीन पर जम गई।
वह थकी हुई थी।
लेकिन उसके चेहरे पर एक माँ की ममता साफ दिखाई दे रही थी।
“मेरी बेटियों…”
उसने कहा।
सान्वी के होंठ काँपने लगे।
“अगर तुम ये वीडियो देख रही हो…”
“तो शायद मैं तुम्हारे पास नहीं हूँ।”
“मैंने तुम्हें तीन अलग-अलग जगहों पर इसलिए भेजा…”
“क्योंकि मैं जानती थी कि वो लोग तुम्हें ढूँढ रहे हैं।”
मीरा की आँखों में आँसू आ गए।
“लेकिन एक बात हमेशा याद रखना।”
“तुम तीनों अलग नहीं हो।”
“तुम तीनों…”
वह कुछ पल रुकी।
“एक-दूसरे की ताकत हो।”
वीडियो में अचानक एक आदमी कमरे में आया।
उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।
मीरा ने घबराकर कहा—
“तुम यहाँ कैसे आए?”
आदमी की आवाज आई—
“तुम्हें लगा तुम मुझे रोक सकती हो?”
मीरा ने अपनी तीनों बेटियों को देखा।
फिर कैमरे की तरफ।
“अगर कभी ये आदमी तुम्हारे सामने आए…”
“तो इससे दूर रहना।”
आदमी धीरे-धीरे कैमरे के करीब आया।
उसकी उंगली में वही…
नागमुद्रा वाली अंगूठी थी।
सान्वी ने स्क्रीन की तरफ इशारा किया।
“यही है!”
वीडियो में मीरा की आवाज आई—
“इसका नाम…”
स्क्रीन अचानक रुक गई।
सब हैरान रह गए।
“क्या हुआ?”
राघव ने सिस्टम को दोबारा चलाने की कोशिश की।
कुछ नहीं हुआ।
फिर स्क्रीन पर सिर्फ एक लाइन दिखाई दी—
FILE CORRUPTED
आर्यवीर ने कहा—
“किसी ने जानबूझकर आखिरी हिस्सा हटाया है।”
राघव ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
अचानक नैना के हाथ की अंगूठी चमक उठी।
उसकी आँखें बंद हो गईं।
और उसके मुँह से एक आवाज निकली—
“विक्रम…”
सभी चौंक गए।
नैना ने आँखें खोलीं।
“क्या?”
उसने अपना सिर पकड़ लिया।
“मुझे…”
“कुछ याद आया।”
सान्वी उसके पास गई।
“क्या?”
नैना ने काँपते हुए कहा—
“जिस आदमी ने मुझे बचपन में अंगूठी दी थी…”
“वो राघव नहीं था।”
राघव का चेहरा बदल गया।
“तो कौन था?”
नैना ने धीरे से उसकी तरफ देखा।
“विक्रम।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
राजवीर ने कहा—
“लेकिन विक्रम तो…”
नैना ने कहा—
“वही आदमी मुझे बचपन से देख रहा था।”
अमन ने तुरंत पूछा—
“उसने तुम्हें क्या कहा था?”
नैना की आँखों में डर उतर आया।
“उसने कहा था…”
वह रुक गई।
फिर धीरे से बोली—
“तुम्हें अपनी बहनों के पास वापस जाना होगा… क्योंकि तुम्हारे बिना Project S-21 कभी पूरा नहीं होगा।”
आर्यवीर ने सान्वी की तरफ देखा।
सान्वी ने अपनी बहनों का हाथ पकड़ लिया।
तीनों पहली बार एक साथ खड़ी थीं।
लेकिन उसी पल…
मिल की सारी लाइटें बंद हो गईं।
अंधेरे में एक आवाज गूँजी—
“अब तीनों मेरे पास हैं।”
सान्वी ने घबराकर पूछा—
“कौन है?”
अंधेरे में किसी ने धीरे से कहा—
“विक्रम नहीं…”
“उससे भी बड़ा नाम।”
फिर एक स्क्रीन अपने आप जल उठी।
उस पर सिर्फ एक नाम लिखा था—
THE FOUNDER
और उसके नीचे—
“Project S-21 was never about the sisters.”
सान्वी की धड़कन रुक गई।
“It was about the person who would control them.”
स्क्रीन फिर बंद हो गई।
और अंधेरे में…
किसी के कदमों की आवाज धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ने लगी।
क्रमशः…