wisdom is power in Hindi Motivational Stories by Vandna Sharma books and stories PDF | बुद्धिमानी ही अचूक अस्त्र है

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बुद्धिमानी ही अचूक अस्त्र है

बुद्धिमानी ही अचूक अस्त्र है 

आशीष आज हमेशा की तरह समय पर ऑफिस पहुँचा था। लैपटॉप ऑन किया ही था कि इंटरकॉम बजा। HR का मैसेज था - "सर आपको अपने केबिन में बुला रहे हैं।"

आशीष का दिल एकदम से धक् से रह गया। ऐसा क्या हो गया? अभी कल ही तो उसने एक बड़ी डील क्लोज की थी। डर और घबराहट से उसकी धड़कन तेज हो गई। वो धीरे-धीरे उठा और बॉस के केबिन का दरवाजा खटखटाया।

"जी सर, आपने बुलाया?"

बॉस ने लैपटॉप से नज़र भी नहीं उठाई और सीधा बोला, "हाँ, अभी रिजाइन कर दो।"

इतना कहकर बॉस अपने काम में व्यस्त होने का नाटक करने लगे। आशीष को लगा जैसे किसी ने उसके पैरों के नीचे से ज़मीन खींच ली हो। वो कुछ बोल ही नहीं पाया। चुपचाप केबिन से बाहर आ गया।

उसका मूड पूरी तरह ऑफ हो गया था। बिना किसी से कुछ कहे, बिना लंच बॉक्स उठाए, वो सीधा ऑफिस से बाहर निकल गया। पार्क में एक बेंच पर बैठकर उसने अपने सबसे करीबी दोस्त राहुल को फोन लगाया और सारी बात रोते हुए बता दी।

राहुल को भी बात समझ नहीं आई। आशीष तो कंपनी का स्टार सेल्स मैनेजर था। कंपनी का कमाऊ पूत, जिसे हर महीने बेस्ट परफॉर्मर का अवॉर्ड मिलता था, उसे कोई बिना कारण क्यों निकालेगा? "तू टेंशन मत ले, मैं कुछ करता हूँ," कहकर राहुल ने फोन काट दिया।

राहुल ने उसी वक्त अपनी पत्नी जाह्नवी को फोन किया। जाह्नवी बहुत बुद्धिमान और शांत स्वभाव की थी। उसकी विश्लेषण क्षमता अद्भुत थी। वो किसी भी घटना को सिर्फ भावना से नहीं, बल्कि हर पहलू से देखकर सही निर्णय देती थी। जाह्नवी दूरदर्शी थी और हर विषय पर उसकी पकड़ गहरी थी।

सारी बात सुनकर जाह्नवी मुस्कुराई और बोली, "राहुल, इसमें घबराने की कोई बात नहीं है। कई बार बॉस अपने प्रेशर में, या बिना पूरी बात समझे ऐसा बोल देते हैं। तुम अपने दोस्त से कहो - ऐसे समय में घबराते नहीं हैं, हिम्मत और धैर्य से सोचते हैं।"

फिर उसने एक बहुत काम की सलाह दी - "आशीष को वापस जाकर अपने बॉस से विनम्रतापूर्वक बात करनी चाहिए। कोई भी बड़ा संस्थान बिना नोटिस दिए और बिना ठोस आधार के अपने कर्मचारी को ऐसे नहीं निकाल सकता। ये नियम के खिलाफ है। उसे डरना नहीं, अपनी बात रखनी चाहिए। और साथ में अपने किए हुए कामों को भी याद दिलाना चाहिए, जिनसे कंपनी को फायदा हुआ है।"

राहुल ने तुरंत आशीष को जाह्नवी की सारी बात बताई। जाह्नवी की बातों में एक अजीब सी हिम्मत थी। आशीष ने गहरी सांस ली, अपने आँसू पोंछे और वापस ऑफिस की तरफ चल पड़ा।

इस बार वो डरकर नहीं, आत्मविश्वास के साथ केबिन में गया।

"सर, क्या मैं दो मिनट बात कर सकता हूँ? सर, मैं पिछले तीन साल से इस कंपनी में हूँ। मैंने कभी काम में लापरवाही नहीं की। पिछले महीने ही मैंने 20 लाख की डील करवाई है। अगर मुझसे कोई गलती हुई है तो प्लीज बताइए, मैं उसे सुधारूँगा। लेकिन बिना कारण के रिजाइन..."

आशीष की विनम्रता और उसके आत्मविश्वास से भरी बातों ने बॉस को प्रभावित कर दिया। बॉस ने सिर उठाया और कहा, "बैठो आशीष। दरअसल बात ये थी कि एक क्लाइंट ने तुम्हारी शिकायत की थी, इसलिए गुस्से में मैंने ऐसा कह दिया। पर अब तुम्हारी बात सुनकर लग रहा है कि पूरी बात समझनी चाहिए थी।"

बॉस ने न सिर्फ आशीष को रोका, बल्कि उसकी ईमानदारी के लिए उसे शाबासी भी दी और कहा, "आज से तुम अपने फैसले स्वतंत्र रूप से ले सकते हो। मुझे तुम पर भरोसा है।"

केबिन से बाहर आकर आशीष की आँखों में खुशी के आँसू थे। उसने सबसे पहले राहुल को गले लगाया और कहा, "धन्यवाद दोस्त। और भाभी को भी दिल से धन्यवाद कहना। आज उनकी बुद्धिमत्ता ने मेरी नौकरी ही नहीं, मेरा आत्मविश्वास भी बचा लिया।"

*सीख:* जीवन में मुश्किल समय आता है, तब घबराकर भागने से नहीं, बल्कि हिम्मत, धैर्य और विनम्रता से अपनी बात रखने से ही रास्ता निकलता है।
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली