Aadhuri mohabbat - 1 in Hindi Love Stories by ashwin books and stories PDF | अधूरी मोहब्बत - 1

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अधूरी मोहब्बत - 1

अधूरी मोहब्बत

Episode 1 — पहली मुलाकात

Page 1

शहर में शाम धीरे-धीरे उतर रही थी।

सड़क पर गाड़ियों की आवाज़, दुकानों की रोशनी और लोगों की भीड़ के बीच आरव अपने हाथ में कुछ किताबें लिए तेज़ी से चल रहा था।

उसे आज कॉलेज की एक जरूरी assignment जमा करनी थी।

तभी अचानक—

धड़ाम!

किसी से टकराने के कारण उसकी सारी किताबें नीचे गिर गईं।

आरव ने तुरंत नीचे देखा।

“Sorry!”

सामने एक लड़की खड़ी थी।

उसके हाथ में भी कुछ किताबें थीं और चेहरे पर हल्की घबराहट।

“Actually… मेरी गलती थी,” लड़की ने कहा।

आरव कुछ सेकंड उसे देखता रहा।

फिर बोला—

“कोई बात नहीं।”

लड़की नीचे बैठकर किताबें उठाने लगी।

आरव भी उसकी मदद करने लगा।

लेकिन दोनों में से किसी को नहीं पता था…

कि यह छोटी-सी मुलाकात उनकी जिंदगी बदलने वाली थी।

---

Page 2

“ये आपकी किताब।”

लड़की ने एक किताब आरव की तरफ बढ़ाई।

“Thanks.”

आरव ने किताब ले ली।

फिर उसकी नजर लड़की की किताब पर पड़ी।

उस किताब के ऊपर उसका नाम लिखा था—

काव्या शर्मा।

आरव ने नाम पढ़ा।

“काव्या…”

काव्या ने तुरंत पूछा—

“क्या?”

आरव थोड़ा झेंप गया।

“कुछ नहीं।”

काव्या मुस्कुराई।

“आप मेरा नाम पढ़ रहे थे ना?”

आरव ने हंसते हुए कहा—

“बस ऐसे ही।”

“अच्छा?”

“हाँ।”

“तो फिर मैं भी आपका नाम पढ़ सकती हूँ।”

उसने आरव के हाथ में रखी किताब की तरफ देखा।

उस पर लिखा था—

आरव मेहरा।

काव्या मुस्कुराई।

“आरव।”

दोनों कुछ पल चुप रहे।

फिर काव्या बोली—

“अब हिसाब बराबर।”

---

Page 3

काव्या ने अपनी किताबें संभालीं।

“मुझे देर हो रही है।”

“कहाँ?”

काव्या ने उसकी तरफ देखा।

“आपको क्यों बताऊँ?”

आरव मुस्कुरा दिया।

“सही बात है।”

काव्या जाने लगी।

कुछ कदम बाद वह अचानक रुकी।

पीछे मुड़ी और बोली—

“वैसे…”

“हाँ?”

“आपकी किताब नीचे गिर गई है।”

आरव ने नीचे देखा।

एक छोटी सी notebook जमीन पर पड़ी थी।

वह उसे उठाने लगा।

लेकिन काव्या तब तक जा चुकी थी।

आरव ने दूर जाते हुए उसे देखा।

पता नहीं क्यों…

उसे लगा जैसे वह लड़की पहले भी उसकी जिंदगी में कहीं थी।

हालाँकि वह उसे पहली बार मिला था।

---

Page 4

अगली सुबह कॉलेज का campus हमेशा की तरह भीड़ से भरा था।

आरव अपने दोस्तों के साथ बैठा था।

उसका दोस्त रोहन बोला—

“भाई, कल कहाँ गायब था?”

“काम था।”

“कौन सा काम?”

आरव ने चुपचाप चाय पी।

रोहन ने उसे घूरा।

“कुछ तो हुआ है।”

“कुछ नहीं हुआ।”

“तेरे चेहरे से लग रहा है कुछ हुआ है।”

आरव हंस पड़ा।

“तू detective बनना बंद कर।”

तभी पीछे से एक लड़की की आवाज आई—

“Excuse me…”

आरव ने पलटकर देखा।

वही लड़की।

काव्या।

आरव कुछ बोल नहीं पाया।

काव्या ने कहा—

“कल आपकी notebook मेरे पास रह गई थी।”

उसने notebook उसकी तरफ बढ़ाई।

आरव ने उसे लिया।

“ओह… Thanks.”

काव्या मुस्कुराई।

“Welcome, Mr. Aarav Mehra.”

---

Page 5

रोहन दोनों को देखने लगा।

फिर आरव को देखकर मुस्कुराया।

काव्या वहाँ से चली गई।

रोहन तुरंत बोला—

“ओहो!”

आरव ने उसे देखा।

“क्या?”

“कुछ नहीं।”

“बोल।”

“कल वाली लड़की?”

आरव चुप रहा।

रोहन हंसने लगा।

“समझ गया।”

“क्या समझ गया?”

“कुछ नहीं भाई।”

आरव ने उसकी तरफ notebook फेंकने का नाटक किया।

दोनों हंस पड़े।

लेकिन आरव की नजर अभी भी उसी तरफ थी…

जहाँ काव्या गई थी।

---

Page 6

उस दिन दोनों कई बार एक-दूसरे के सामने आए।

कभी library में।

कभी corridor में।

कभी canteen के पास।

हर बार उनकी नजरें मिलतीं।

और हर बार…

दोनों हल्का-सा मुस्कुरा देते।

लेकिन कोई बात शुरू नहीं करता।

शाम को library लगभग खाली थी।

आरव एक किताब खोज रहा था।

तभी ऊपर वाली shelf से एक किताब निकालने की कोशिश करते हुए काव्या का हाथ फिसला।

किताब नीचे गिरने ही वाली थी—

आरव ने उसे पकड़ लिया।

काव्या ने हैरानी से उसे देखा।

“आप?”

आरव मुस्कुराया।

“लगता है आपकी किताबों को गिरने की आदत है।”

काव्या हंस पड़ी।

“और आपको उन्हें बचाने की।”

---

Page 7

दोनों एक ही table पर बैठ गए।

कुछ देर तक दोनों पढ़ते रहे।

फिर काव्या ने पूछा—

“आप हमेशा इतने शांत रहते हैं?”

“शायद।”

“क्यों?”

“पता नहीं।”

“आपको ज्यादा बोलना पसंद नहीं?”

आरव ने किताब बंद कर दी।

“गलत इंसान के सामने नहीं बोलता।”

काव्या ने भौंहें उठाईं।

“और सही इंसान?”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

“उसके सामने शायद बहुत बोलूँ।”

काव्या कुछ पल उसे देखती रही।

फिर मुस्कुरा दी।

“Interesting.”

---

Page 8

बारिश शुरू हो गई।

Library से बाहर निकलते समय काव्या दरवाजे पर रुक गई।

उसके पास umbrella नहीं था।

आरव ने अपना umbrella खोला।

“चलें?”

काव्या ने उसकी तरफ देखा।

“आपके umbrella में दोनों आ जाएंगे?”

“कोशिश कर लेते हैं।”

दोनों एक ही umbrella के नीचे चलने लगे।

बारिश तेज़ होती जा रही थी।

काव्या बोली—

“आपको बारिश पसंद है?”

आरव ने कहा—

“बहुत।”

“क्यों?”

“क्योंकि बारिश में शहर थोड़ा शांत हो जाता है।”

काव्या मुस्कुराई।

“मुझे भी।”

कुछ कदम तक दोनों चुप रहे।

लेकिन वह चुप्पी अजीब नहीं थी।

वह अच्छी लग रही थी।

---

Page 9

अचानक काव्या का पैर पानी में पड़ा।

वह थोड़ा लड़खड़ाई।

आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।

दोनों रुक गए।

कुछ सेकंड तक दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।

फिर काव्या ने धीरे से अपना हाथ पीछे कर लिया।

“Thanks.”

“Welcome.”

काव्या ने नजरें झुका लीं।

आरव भी कुछ नहीं बोला।

बारिश के शोर के बीच…

उन दोनों के बीच कुछ बदल चुका था।

उन्हें अभी उसका नाम नहीं पता था।

लेकिन वह एहसास मौजूद था।

---

Page 10

अगले दिन काव्या कॉलेज नहीं आई।

आरव ने खुद को समझाया—

“मुझे क्या फर्क पड़ता है?”

लेकिन दिन में कई बार उसकी नजर college gate की तरफ चली जाती।

रोहन ने पूछा—

“किसका इंतजार है?”

“किसी का नहीं।”

“फिर बार-बार gate क्यों देख रहा है?”

आरव ने कोई जवाब नहीं दिया।

शाम को उसे काव्या का message मिला।

“आज कॉलेज नहीं आ पाई। कल मिलते हैं।”

आरव कुछ सेकंड screen देखता रहा।

फिर उसने reply किया—

“Okay. Take care.”

Message भेजने के बाद वह मुस्कुराया।

और उसे खुद समझ नहीं आया कि सिर्फ चार शब्द लिखकर…

उसे इतनी खुशी क्यों हुई।

---

Page 11

अगले दिन काव्या वापस आई।

लेकिन इस बार वह सीधे आरव के पास गई।

“Hi.”

आरव ने मुस्कुराकर कहा—

“Hi.”

“कल मेरा सिर दर्द कर रहा था।”

“अब ठीक हो?”

“हाँ।”

फिर काव्या ने पूछा—

“आपने message क्यों किया था?”

आरव थोड़ा चौंका।

“आपने ही message किया था।”

“मैंने?”

“हाँ।”

काव्या हंसने लगी।

“अच्छा… तो आप reply करने का इंतजार कर रहे थे?”

आरव चुप हो गया।

काव्या मुस्कुराई।

“समझ गई।”

---

Page 12

उस दिन दोनों पहली बार college के बाहर साथ बैठे।

एक छोटी-सी café में।

काव्या ने पूछा—

“आपका सपना क्या है?”

आरव ने कुछ सोचकर कहा—

“अपना काम शुरू करना।”

“और?”

“बस।”

“Family?”

आरव की मुस्कान थोड़ी कम हो गई।

“Family… complicated है।”

काव्या ने ज्यादा सवाल नहीं किया।

“ठीक है। जब बताना चाहो तब बताना।”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

“तुम बाकी लोगों जैसी नहीं हो।”

काव्या ने पूछा—

“मतलब?”

“तुम जल्दी judge नहीं करती।”

काव्या ने मुस्कुराकर कहा—

“शायद क्योंकि मुझे भी कोई जल्दी judge न करे, ये पसंद है।”

---

Page 13

धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती गहरी होने लगी।

अब सुबह का पहला message—

Good morning.

दोपहर में—

Lunch किया?

शाम को—

आज कहाँ हो?

और रात को—

Good night.

उनकी जिंदगी में कुछ बदला नहीं था।

लेकिन दोनों की रोजमर्रा की जिंदगी में…

एक-दूसरे की जगह बन गई थी।

एक रात काव्या ने message किया—

“आरव, अगर कोई इंसान आपकी जिंदगी में अचानक आए तो क्या उसे हमेशा के लिए अपनी जिंदगी में रखा जा सकता है?”

आरव ने काफी देर बाद जवाब दिया—

“अगर वह इंसान सच में अपना बन जाए… तो शायद।”

काव्या ने सिर्फ एक heart emoji भेजा।

---

Page 14

कुछ दिन बाद college में festival की तैयारी शुरू हुई।

सभी students decorations में लगे थे।

काव्या ladder पर खड़ी थी।

आरव नीचे से उसे देख रहा था।

“सावधान!”

“मैं ठीक हूँ।”

“फिर भी।”

काव्या ने decoration लगाते हुए कहा—

“आपको मेरी इतनी चिंता क्यों रहती है?”

आरव ने बिना सोचे कहा—

“क्योंकि…”

वह रुक गया।

“क्योंकि?”

आरव ने नजरें हटा लीं।

“कुछ नहीं।”

काव्या नीचे उतर आई।

वह उसके सामने खड़ी हुई।

“एक दिन आपको पूरा जवाब देना पड़ेगा।”

आरव मुस्कुराया।

“शायद।”

---

Page 15

Festival की रात पूरा college रोशनी से जगमगा रहा था।

Music चल रहा था।

लोग dance कर रहे थे।

आरव और काव्या थोड़ी दूर खड़े थे।

काव्या ने पूछा—

“आज खुश हो?”

“हाँ।”

“क्यों?”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

“पता नहीं।”

काव्या मुस्कुराई।

“मुझे पता है।”

“क्या?”

“आपको मेरे साथ रहना अच्छा लगता है।”

आरव कुछ नहीं बोला।

काव्या ने धीरे से कहा—

“मुझे भी।”

पहली बार…

दोनों ने अपनी feelings को बिना नाम दिए स्वीकार किया।

---

Page 16

कुछ दिन सब अच्छा चलता रहा।

फिर एक शाम काव्या के घर में अचानक माहौल बदल गया।

उसके पिता ने कहा—

“काव्या, तुम्हें आरव से दूर रहना होगा।”

काव्या हैरान रह गई।

“क्या?”

“मैंने कहा, उससे दूर रहो।”

“लेकिन क्यों?”

उसके पिता कुछ पल चुप रहे।

फिर बोले—

“क्योंकि वह मेहरा परिवार से है।”

काव्या के चेहरे का रंग बदल गया।

“तो?”

उसके पिता ने कठोर आवाज़ में कहा—

“तुम नहीं जानतीं कि उस परिवार ने हमारे साथ क्या किया था।”

काव्या चुप हो गई।

---

Page 17

काव्या के पिता ने एक पुरानी तस्वीर निकाली।

तस्वीर में दो परिवार साथ खड़े थे।

एक तरफ शर्मा परिवार।

दूसरी तरफ मेहरा परिवार।

काव्या ने तस्वीर को गौर से देखा।

“ये कब की है?”

“बहुत साल पुरानी।”

“लेकिन इसमें आरव के पिता भी हैं।”

“हाँ।”

काव्या ने पूछा—

“क्या हुआ था?”

उसके पिता ने जवाब नहीं दिया।

बस इतना कहा—

“उस परिवार से हमारा रिश्ता खत्म हो चुका है।”

काव्या के मन में एक ही सवाल घूम रहा था—

क्यों?

---

Page 18

अगले दिन काव्या कॉलेज पहुँची।

आरव उसके पास आया।

“क्या हुआ? तुम परेशान लग रही हो।”

काव्या ने उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखों में बहुत सारे सवाल थे।

“आरव…”

“हाँ?”

“तुम्हारे पिता का नाम?”

“राजीव मेहरा।”

काव्या चुप हो गई।

आरव ने पूछा—

“क्यों?”

काव्या ने सिर हिला दिया।

“कुछ नहीं।”

आरव ने उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की।

लेकिन काव्या ने अपना हाथ पीछे कर लिया।

आरव हैरान रह गया।

“काव्या?”

वह बिना कुछ कहे वहाँ से चली गई।

---

Page 19

उस रात आरव को काव्या का message नहीं आया।

उसने खुद message किया।

“क्या हुआ?”

कोई जवाब नहीं।

फिर—

“मुझसे कोई गलती हुई है?”

फिर भी कोई जवाब नहीं।

रात के लगभग बारह बजे phone पर एक message आया।

काव्या का।

सिर्फ एक लाइन—

“हमें कुछ समय के लिए एक-दूसरे से दूर रहना चाहिए।”

आरव screen देखता रह गया।

उसने तुरंत call किया।

Phone बंद था।

उसके मन में एक सवाल था—

आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ?

---

Page 20

दूसरी तरफ काव्या अपने कमरे में बैठी थी।

उसके सामने वही पुरानी तस्वीर रखी थी।

उसने तस्वीर के पीछे लिखा हुआ एक वाक्य पढ़ा—

“जिस दिन ये सच सामने आएगा, दो परिवार फिर आमने-सामने होंगे।”

काव्या की आँखों में आँसू आ गए।

उसे अब समझ आ चुका था…

आरव से उसका रिश्ता सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं था।

उसके पीछे उसके परिवार का एक बहुत पुराना राज छिपा था।

और उस राज का संबंध सीधे आरव के पिता से था।

लेकिन काव्या को अभी यह नहीं पता था—

कि उस राज का सबसे बड़ा सच…

आरव खुद भी नहीं जानता था।

Episode 1 समाप्त।

आगे — Episode 2: “वो राज़”अधूरी मोहब्बत

Episode 1 — पहली मुलाकात

Page 1

शहर में शाम धीरे-धीरे उतर रही थी।

सड़क पर गाड़ियों की आवाज़, दुकानों की रोशनी और लोगों की भीड़ के बीच आरव अपने हाथ में कुछ किताबें लिए तेज़ी से चल रहा था।

उसे आज कॉलेज की एक जरूरी assignment जमा करनी थी।

तभी अचानक—

धड़ाम!

किसी से टकराने के कारण उसकी सारी किताबें नीचे गिर गईं।

आरव ने तुरंत नीचे देखा।

“Sorry!”

सामने एक लड़की खड़ी थी।

उसके हाथ में भी कुछ किताबें थीं और चेहरे पर हल्की घबराहट।

“Actually… मेरी गलती थी,” लड़की ने कहा।

आरव कुछ सेकंड उसे देखता रहा।

फिर बोला—

“कोई बात नहीं।”

लड़की नीचे बैठकर किताबें उठाने लगी।

आरव भी उसकी मदद करने लगा।

लेकिन दोनों में से किसी को नहीं पता था…

कि यह छोटी-सी मुलाकात उनकी जिंदगी बदलने वाली थी।

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Page 2

“ये आपकी किताब।”

लड़की ने एक किताब आरव की तरफ बढ़ाई।

“Thanks.”

आरव ने किताब ले ली।

फिर उसकी नजर लड़की की किताब पर पड़ी।

उस किताब के ऊपर उसका नाम लिखा था—

काव्या शर्मा।

आरव ने नाम पढ़ा।

“काव्या…”

काव्या ने तुरंत पूछा—

“क्या?”

आरव थोड़ा झेंप गया।

“कुछ नहीं।”

काव्या मुस्कुराई।

“आप मेरा नाम पढ़ रहे थे ना?”

आरव ने हंसते हुए कहा—

“बस ऐसे ही।”

“अच्छा?”

“हाँ।”

“तो फिर मैं भी आपका नाम पढ़ सकती हूँ।”

उसने आरव के हाथ में रखी किताब की तरफ देखा।

उस पर लिखा था—

आरव मेहरा।

काव्या मुस्कुराई।

“आरव।”

दोनों कुछ पल चुप रहे।

फिर काव्या बोली—

“अब हिसाब बराबर।”

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Page 3

काव्या ने अपनी किताबें संभालीं।

“मुझे देर हो रही है।”

“कहाँ?”

काव्या ने उसकी तरफ देखा।

“आपको क्यों बताऊँ?”

आरव मुस्कुरा दिया।

“सही बात है।”

काव्या जाने लगी।

कुछ कदम बाद वह अचानक रुकी।

पीछे मुड़ी और बोली—

“वैसे…”

“हाँ?”

“आपकी किताब नीचे गिर गई है।”

आरव ने नीचे देखा।

एक छोटी सी notebook जमीन पर पड़ी थी।

वह उसे उठाने लगा।

लेकिन काव्या तब तक जा चुकी थी।

आरव ने दूर जाते हुए उसे देखा।

पता नहीं क्यों…

उसे लगा जैसे वह लड़की पहले भी उसकी जिंदगी में कहीं थी।

हालाँकि वह उसे पहली बार मिला था।

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Page 4

अगली सुबह कॉलेज का campus हमेशा की तरह भीड़ से भरा था।

आरव अपने दोस्तों के साथ बैठा था।

उसका दोस्त रोहन बोला—

“भाई, कल कहाँ गायब था?”

“काम था।”

“कौन सा काम?”

आरव ने चुपचाप चाय पी।

रोहन ने उसे घूरा।

“कुछ तो हुआ है।”

“कुछ नहीं हुआ।”

“तेरे चेहरे से लग रहा है कुछ हुआ है।”

आरव हंस पड़ा।

“तू detective बनना बंद कर।”

तभी पीछे से एक लड़की की आवाज आई—

“Excuse me…”

आरव ने पलटकर देखा।

वही लड़की।

काव्या।

आरव कुछ बोल नहीं पाया।

काव्या ने कहा—

“कल आपकी notebook मेरे पास रह गई थी।”

उसने notebook उसकी तरफ बढ़ाई।

आरव ने उसे लिया।

“ओह… Thanks.”

काव्या मुस्कुराई।

“Welcome, Mr. Aarav Mehra.”

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Page 5

रोहन दोनों को देखने लगा।

फिर आरव को देखकर मुस्कुराया।

काव्या वहाँ से चली गई।

रोहन तुरंत बोला—

“ओहो!”

आरव ने उसे देखा।

“क्या?”

“कुछ नहीं।”

“बोल।”

“कल वाली लड़की?”

आरव चुप रहा।

रोहन हंसने लगा।

“समझ गया।”

“क्या समझ गया?”

“कुछ नहीं भाई।”

आरव ने उसकी तरफ notebook फेंकने का नाटक किया।

दोनों हंस पड़े।

लेकिन आरव की नजर अभी भी उसी तरफ थी…

जहाँ काव्या गई थी।

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Page 6

उस दिन दोनों कई बार एक-दूसरे के सामने आए।

कभी library में।

कभी corridor में।

कभी canteen के पास।

हर बार उनकी नजरें मिलतीं।

और हर बार…

दोनों हल्का-सा मुस्कुरा देते।

लेकिन कोई बात शुरू नहीं करता।

शाम को library लगभग खाली थी।

आरव एक किताब खोज रहा था।

तभी ऊपर वाली shelf से एक किताब निकालने की कोशिश करते हुए काव्या का हाथ फिसला।

किताब नीचे गिरने ही वाली थी—

आरव ने उसे पकड़ लिया।

काव्या ने हैरानी से उसे देखा।

“आप?”

आरव मुस्कुराया।

“लगता है आपकी किताबों को गिरने की आदत है।”

काव्या हंस पड़ी।

“और आपको उन्हें बचाने की।”

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Page 7

दोनों एक ही table पर बैठ गए।

कुछ देर तक दोनों पढ़ते रहे।

फिर काव्या ने पूछा—

“आप हमेशा इतने शांत रहते हैं?”

“शायद।”

“क्यों?”

“पता नहीं।”

“आपको ज्यादा बोलना पसंद नहीं?”

आरव ने किताब बंद कर दी।

“गलत इंसान के सामने नहीं बोलता।”

काव्या ने भौंहें उठाईं।

“और सही इंसान?”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

“उसके सामने शायद बहुत बोलूँ।”

काव्या कुछ पल उसे देखती रही।

फिर मुस्कुरा दी।

“Interesting.”

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Page 8

बारिश शुरू हो गई।

Library से बाहर निकलते समय काव्या दरवाजे पर रुक गई।

उसके पास umbrella नहीं था।

आरव ने अपना umbrella खोला।

“चलें?”

काव्या ने उसकी तरफ देखा।

“आपके umbrella में दोनों आ जाएंगे?”

“कोशिश कर लेते हैं।”

दोनों एक ही umbrella के नीचे चलने लगे।

बारिश तेज़ होती जा रही थी।

काव्या बोली—

“आपको बारिश पसंद है?”

आरव ने कहा—

“बहुत।”

“क्यों?”

“क्योंकि बारिश में शहर थोड़ा शांत हो जाता है।”

काव्या मुस्कुराई।

“मुझे भी।”

कुछ कदम तक दोनों चुप रहे।

लेकिन वह चुप्पी अजीब नहीं थी।

वह अच्छी लग रही थी।

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अचानक काव्या का पैर पानी में पड़ा।

वह थोड़ा लड़खड़ाई।

आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।

दोनों रुक गए।

कुछ सेकंड तक दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।

फिर काव्या ने धीरे से अपना हाथ पीछे कर लिया।

“Thanks.”

“Welcome.”

काव्या ने नजरें झुका लीं।

आरव भी कुछ नहीं बोला।

बारिश के शोर के बीच…

उन दोनों के बीच कुछ बदल चुका था।

उन्हें अभी उसका नाम नहीं पता था।

लेकिन वह एहसास मौजूद था।

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Page 10

अगले दिन काव्या कॉलेज नहीं आई।

आरव ने खुद को समझाया—

“मुझे क्या फर्क पड़ता है?”

लेकिन दिन में कई बार उसकी नजर college gate की तरफ चली जाती।

रोहन ने पूछा—

“किसका इंतजार है?”

“किसी का नहीं।”

“फिर बार-बार gate क्यों देख रहा है?”

आरव ने कोई जवाब नहीं दिया।

शाम को उसे काव्या का message मिला।

“आज कॉलेज नहीं आ पाई। कल मिलते हैं।”

आरव कुछ सेकंड screen देखता रहा।

फिर उसने reply किया—

“Okay. Take care.”

Message भेजने के बाद वह मुस्कुराया।

और उसे खुद समझ नहीं आया कि सिर्फ चार शब्द लिखकर…

उसे इतनी खुशी क्यों हुई।

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अगले दिन काव्या वापस आई।

लेकिन इस बार वह सीधे आरव के पास गई।

“Hi.”

आरव ने मुस्कुराकर कहा—

“Hi.”

“कल मेरा सिर दर्द कर रहा था।”

“अब ठीक हो?”

“हाँ।”

फिर काव्या ने पूछा—

“आपने message क्यों किया था?”

आरव थोड़ा चौंका।

“आपने ही message किया था।”

“मैंने?”

“हाँ।”

काव्या हंसने लगी।

“अच्छा… तो आप reply करने का इंतजार कर रहे थे?”

आरव चुप हो गया।

काव्या मुस्कुराई।

“समझ गई।”

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Page 12

उस दिन दोनों पहली बार college के बाहर साथ बैठे।

एक छोटी-सी café में।

काव्या ने पूछा—

“आपका सपना क्या है?”

आरव ने कुछ सोचकर कहा—

“अपना काम शुरू करना।”

“और?”

“बस।”

“Family?”

आरव की मुस्कान थोड़ी कम हो गई।

“Family… complicated है।”

काव्या ने ज्यादा सवाल नहीं किया।

“ठीक है। जब बताना चाहो तब बताना।”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

“तुम बाकी लोगों जैसी नहीं हो।”

काव्या ने पूछा—

“मतलब?”

“तुम जल्दी judge नहीं करती।”

काव्या ने मुस्कुराकर कहा—

“शायद क्योंकि मुझे भी कोई जल्दी judge न करे, ये पसंद है।”

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Page 13

धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती गहरी होने लगी।

अब सुबह का पहला message—

Good morning.

दोपहर में—

Lunch किया?

शाम को—

आज कहाँ हो?

और रात को—

Good night.

उनकी जिंदगी में कुछ बदला नहीं था।

लेकिन दोनों की रोजमर्रा की जिंदगी में…

एक-दूसरे की जगह बन गई थी।

एक रात काव्या ने message किया—

“आरव, अगर कोई इंसान आपकी जिंदगी में अचानक आए तो क्या उसे हमेशा के लिए अपनी जिंदगी में रखा जा सकता है?”

आरव ने काफी देर बाद जवाब दिया—

“अगर वह इंसान सच में अपना बन जाए… तो शायद।”

काव्या ने सिर्फ एक heart emoji भेजा।

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कुछ दिन बाद college में festival की तैयारी शुरू हुई।

सभी students decorations में लगे थे।

काव्या ladder पर खड़ी थी।

आरव नीचे से उसे देख रहा था।

“सावधान!”

“मैं ठीक हूँ।”

“फिर भी।”

काव्या ने decoration लगाते हुए कहा—

“आपको मेरी इतनी चिंता क्यों रहती है?”

आरव ने बिना सोचे कहा—

“क्योंकि…”

वह रुक गया।

“क्योंकि?”

आरव ने नजरें हटा लीं।

“कुछ नहीं।”

काव्या नीचे उतर आई।

वह उसके सामने खड़ी हुई।

“एक दिन आपको पूरा जवाब देना पड़ेगा।”

आरव मुस्कुराया।

“शायद।”

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Page 15

Festival की रात पूरा college रोशनी से जगमगा रहा था।

Music चल रहा था।

लोग dance कर रहे थे।

आरव और काव्या थोड़ी दूर खड़े थे।

काव्या ने पूछा—

“आज खुश हो?”

“हाँ।”

“क्यों?”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

“पता नहीं।”

काव्या मुस्कुराई।

“मुझे पता है।”

“क्या?”

“आपको मेरे साथ रहना अच्छा लगता है।”

आरव कुछ नहीं बोला।

काव्या ने धीरे से कहा—

“मुझे भी।”

पहली बार…

दोनों ने अपनी feelings को बिना नाम दिए स्वीकार किया।

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Page 16

कुछ दिन सब अच्छा चलता रहा।

फिर एक शाम काव्या के घर में अचानक माहौल बदल गया।

उसके पिता ने कहा—

“काव्या, तुम्हें आरव से दूर रहना होगा।”

काव्या हैरान रह गई।

“क्या?”

“मैंने कहा, उससे दूर रहो।”

“लेकिन क्यों?”

उसके पिता कुछ पल चुप रहे।

फिर बोले—

“क्योंकि वह मेहरा परिवार से है।”

काव्या के चेहरे का रंग बदल गया।

“तो?”

उसके पिता ने कठोर आवाज़ में कहा—

“तुम नहीं जानतीं कि उस परिवार ने हमारे साथ क्या किया था।”

काव्या चुप हो गई।

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Page 17

काव्या के पिता ने एक पुरानी तस्वीर निकाली।

तस्वीर में दो परिवार साथ खड़े थे।

एक तरफ शर्मा परिवार।

दूसरी तरफ मेहरा परिवार।

काव्या ने तस्वीर को गौर से देखा।

“ये कब की है?”

“बहुत साल पुरानी।”

“लेकिन इसमें आरव के पिता भी हैं।”

“हाँ।”

काव्या ने पूछा—

“क्या हुआ था?”

उसके पिता ने जवाब नहीं दिया।

बस इतना कहा—

“उस परिवार से हमारा रिश्ता खत्म हो चुका है।”

काव्या के मन में एक ही सवाल घूम रहा था—

क्यों?

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अगले दिन काव्या कॉलेज पहुँची।

आरव उसके पास आया।

“क्या हुआ? तुम परेशान लग रही हो।”

काव्या ने उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखों में बहुत सारे सवाल थे।

“आरव…”

“हाँ?”

“तुम्हारे पिता का नाम?”

“राजीव मेहरा।”

काव्या चुप हो गई।

आरव ने पूछा—

“क्यों?”

काव्या ने सिर हिला दिया।

“कुछ नहीं।”

आरव ने उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की।

लेकिन काव्या ने अपना हाथ पीछे कर लिया।

आरव हैरान रह गया।

“काव्या?”

वह बिना कुछ कहे वहाँ से चली गई।

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उस रात आरव को काव्या का message नहीं आया।

उसने खुद message किया।

“क्या हुआ?”

कोई जवाब नहीं।

फिर—

“मुझसे कोई गलती हुई है?”

फिर भी कोई जवाब नहीं।

रात के लगभग बारह बजे phone पर एक message आया।

काव्या का।

सिर्फ एक लाइन—

“हमें कुछ समय के लिए एक-दूसरे से दूर रहना चाहिए।”

आरव screen देखता रह गया।

उसने तुरंत call किया।

Phone बंद था।

उसके मन में एक सवाल था—

आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ?

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दूसरी तरफ काव्या अपने कमरे में बैठी थी।

उसके सामने वही पुरानी तस्वीर रखी थी।

उसने तस्वीर के पीछे लिखा हुआ एक वाक्य पढ़ा—

“जिस दिन ये सच सामने आएगा, दो परिवार फिर आमने-सामने होंगे।”

काव्या की आँखों में आँसू आ गए।

उसे अब समझ आ चुका था…

आरव से उसका रिश्ता सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं था।

उसके पीछे उसके परिवार का एक बहुत पुराना राज छिपा था।

और उस राज का संबंध सीधे आरव के पिता से था।

लेकिन काव्या को अभी यह नहीं पता था—

कि उस राज का सबसे बड़ा सच…

आरव खुद भी नहीं जानता था।

Episode 1 समाप्त।

आगे — Episode 2: “वो राज़”