The girl is going to patch the boy! - 4 in Hindi Love Stories by sukhvinder Singh Rai books and stories PDF | कुड़ी मुंडा पट्टण नू फिरदी ए! - 4

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कुड़ी मुंडा पट्टण नू फिरदी ए! - 4

(समर का गुस्सा और हताशा अब चरम पर थी। उसने एक झटके के साथ खुद को इरा की बाहों से छुड़ाया और तल्ख आवाज़ में दहाड़ा—'बस बहुत हुआ! इरा, छोड़ो मुझे! मुझे अब एक सेकंड भी यहाँ नहीं रुकना। मुझे अभी के अभी नीचे उतरना है!')

(इरा ने उसकी बौखलाहट को बहुत ही सहजता से लिया। उसके चेहरे पर शिकन तक नहीं आई, बल्कि आँखों में वही पुरानी जिद्दी और मादक चमक बरकरार थी। उसने धीरे से अपनी बाहें ढीली कीं और समर से अलग होते हुए एक नटखट मुस्कान के साथ कहा—'अच्छा बाबा, ठीक है... लो, छोड़ दिया तुम्हें। जाओ, जहाँ जाना है चले जाओ। कौन रोक रहा है तुम्हें?')

(समर तेजी से अपनी जगह पर सीधा हुआ। उसने झटके से अपनी कैजुअल शर्ट के कॉलर को ठीक किया, सलवटें झाड़ीं और गुस्से से इरा को घूरने लगा। उसके भीतर का देहाती स्वाभिमान इस हाई-टेक नौटंकी से पूरी तरह खौल उठा था। वह बिना एक शब्द बोले मुड़ा और कैबिन के उस पार बने ऑटोमैटिक दरवाजे के पास पहुँचा। बाहर निकलने के लिए उसने जैसे ही सेंसर वाले हैंडल पर हाथ रखना चाहा, उसकी नज़र कैबिन के उन काले, पारदर्शी और मखमली शीशों पर टिकी रह गईं।)

(बाहर का नज़ारा देखते ही समर का हाथ हवा में ठिठक गया। उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। शीशे के पार उसे बादलों के बीच से गुजरते हुए पक्षी उड़ते दिखाई दे रहे थे। वह भ्रमित होकर बड़बड़ाया—'यह क्या बकवास है? मैं तो अभी गाँव की पक्की सड़क पर खड़ा था... फिर ये उड़ते पक्षी और आसमान का नज़ारा कहाँ से आया? क्या मेरा दिमाग सच में घूम गया है?')

(हैरानी के मारे समर का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। उसने काँपते हाथों से दरवाजे के पास बने सेंसर को दबाया और नीचे की तरफ झाँका। उस काले शीशे के पार जब उसकी नज़र सैकड़ों फीट नीचे पड़ी, तो उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। नीचे नन्हा सा नूरगढ़ गाँव खिलौने की तरह दिखाई दे रहा था—पक्की गलियाँ, खेतों की पगडंडियाँ और छोटे-छोटे मकान सब आसमान से किसी नक्शे की तरह लग रहे थे। वह गाड़ी सचमुच छह-सात सौ फीट ऊपर बादलों के बीच हवा में तैर रही थी!)

(समर पीछे की तरफ लड़खड़ाया। उसने भय और अविश्वास से अपनी आँखें मटकाईं और गुस्से से काँपते हुए इरा की तरफ घूरा। वह लगभग चीखा—'इरा! यह... यह क्या मजाक है? यह गाड़ी हवा में उड़ कैसे रही है? हम ज़मीन पर क्यों नहीं हैं?')

(इरा ने बड़े आराम से अपनी सीट पर पैर समेटे और मुस्कुराते हुए कहा—'कोई मजाक नहीं है, समर। यह मेरा तुम्हारे लिए एक छोटा सा सरप्राइज था। जब तक तुम अपनी जुबान से मुझे अपना नहीं कहते, यह गाड़ी ज़मीन पर नहीं उतरेगी और हवा में ही ऐसे चक्कर काटती रहेगी। और मैं इस सफर में हर पल तुम्हारे साथ यहीं रहूँगी, तुम्हें तंग करने के लिए!')

(समर का माथा भन्ना उठा। उसने गुस्से में अपना सिर पीट लिया और खीझकर बोला—'तुम सच में किसी पागलखाने से भागकर आई हो! अरे पगली, क्या सोच रखा है तुमने? ठीक है, अगर यह गाड़ी हवा में उड़ रही है, तो इसका ईंधन या पेट्रोल कभी न कभी तो खत्म होगा ही! जब इसका पेट्रोल खत्म होगा, तब हम दोनों भी धड़ाम से नीचे ज़मीन पर गिरेंगे और हमारी ऐसी हालत होगी कि हमारे जिस्म के टुकड़े भी नहीं मिलेंगे! दोनों सीधे ऊपर पहुँचकर शहीद हो जाएंगे, समझी बात?')

(इरा ने जब 'शहीद होने' और 'नीचे गिरने' की बात सुनी, तो उसके चेहरे की मस्ती एक पल के लिए सहम में बदल गई। उसके भीतर का डर जागा, लेकिन उसने तुरंत खुद को संभाला। इरा तेजी से उठी और सीधे समर के पास दौड़कर आ गई। उसने बिना एक पल गंवाए समर को पीछे से कसकर अपनी बाहों में भींच लिया, अपना सिर उसकी चौड़ी पीठ पर टिका दिया और काँपते हुए मीठे स्वर में बोली—'अगर गाड़ी का पेट्रोल खत्म होना है और हम दोनों को नीचे गिरकर मरना ही है... तो मरने से पहले तुम मुझे अपनी हाँ क्यों नहीं कह देते, समर? सोचो, अगर हम जन्नत में भी गए, तो कम से कम एक-दूसरे के होकर तो जा सकेंगे!')

(समर उस लड़की की इस दीवानगी को देखकर पूरी तरह सुन्न पड़ गया। उसका 'मर्दाना स्वाभिमान' और अक्खड़पन एक पल के लिए पिघल गया। वह फटी आँखों से कभी इरा को देखता और कभी उस बंद कैबिन की छत को। उसने मन ही मन खुद से गिड़गिड़ाते हुए कहा—'हे भगवान! यह लड़की मुझसे आखिर चाहती क्या है? मैंने ऐसा कौन सा पाप कर दिया था जो यह बला मेरे गले लग गई? हे ऊपर वाले, मुझे इस मुसीबत से छुटकारा दिला दे... बस इस पगली को मेरे से दूर कर दे!')

(लेकिन कुदरत के मन में शायद कुछ और ही चल रहा था। ठीक उसी वक्त, आसमान में अचानक एक रहस्यमयी मौसमी घटना घटी। गाड़ी के बाहर बादलों के बीच एक हल्की सी ऊर्जा का कंपन हुआ, जिससे उस हाई-टेक पर्पल कार के थ्रस्टर्स में एक सेकंड के लिए जोरदार झटका लगा। गाड़ी हवा में बेतहाशा गोता खाने लगी।)

(उस अचानक आए झटके ने समर के भीतर दबे रक्षक वाले instinct को जगा दिया। जैसे ही गाड़ी हिचकोले खाने लगी, समर ने बिना एक पल की भी देरी किए, अपनी सारी झुंझलाहट और गुस्सा भुलाकर, अपने दोनों मजबूत हाथों से इरा को अपनी तरफ कसकर खींच लिया। उसने इरा को एकदम से अपने सीने से लगा लिया, ताकि उसे कोई झटका न लगे। उस संवेदनशील पल में, जहाँ मौत का हल्का सा खतरा मंडराया था, दोनों के दिलों की धड़कनें एक साथ मिल गईं। समर की उस अनचाही लेकिन गहरी हिफाजत को महसूस करके इरा की आँखें खुशी और प्यार से भर गईं, और उसने खुद को पूरी तरह समर के हवाले कर दिया। उसे लगा कि जन्नत का रास्ता यहीं उसकी बाहों में शुरू हो गया है।)