Bank Robbery - 3 in Hindi Thriller by Arun Singla books and stories PDF | बैंक रॉबरी - 3

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बैंक रॉबरी - 3

BANK ROBBERY — PART 3

बैंक खुले एक घंटे से अधिक का समय हो चुका था। बैंक के अंदर एक अजीब-सा तनाव पसरा हुआ था। कस्टमर्स, बैंक कर्मचारी और चारों नकाबपोश अब सभी लगभग एक ही ड्रेस में दिखाई दे रहे थे। पहली नज़र में किसी के लिए यह पहचानना मुश्किल था कि कौन बैंक का कर्मचारी है और कौन लुटेरा।

फर्क सिर्फ इतना था कि नकाबपोशों के हाथों में गन थीं।

बैंक के हॉल में बैठे कस्टमर्स सहमे हुए थे। कोई चुपचाप नीचे देख रहा था, तो कोई बार-बार घड़ी की तरफ देख रहा था। कुछ लोगों के चेहरों पर डर साफ दिखाई दे रहा था। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि यह सब कब खत्म होगा।

इधर, नकाबपोश नंबर एक लॉकर रूम में गैस कटर से लॉकर्स काटने में जुटा हुआ था। उसके चेहरे पर बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी। वह लगातार समय का अंदाज़ा लगा रहा था।

उसे पता था कि बैंक का मुख्य गेट ज्यादा देर तक बंद नहीं रखा जा सकता।

उन्हें जल्द से जल्द बाहर निकलना था।

गैस कटर की तेज़ आवाज़ लॉकर रूम में गूंज रही थी। कुछ ही देर में पहला लॉकर कटकर खुल गया।

नकाबपोश नंबर एक कुछ क्षण के लिए रुक गया।

उसे खुद भी विश्वास नहीं हो रहा था।

गैस कटर उम्मीद से कहीं बेहतर काम कर रहा था।

जब उसने इस योजना के बारे में सोचा था, तब उसे पूरा यकीन नहीं था कि गैस कटर से बैंक के लॉकर्स इतनी आसानी से काटे जा सकेंगे। अगर कटर ने काम नहीं किया होता, तो पूरी योजना खतरे में पड़ सकती थी।

उसने एक ठंडी लंबी साँस ली,

“काश, हमारे पास थोड़ा और समय होता...” उसने खुद से कहा।

लेकिन समय उसके पास था ही कहाँ?

उसने तुरंत अगले लॉकर पर गैस कटर लगा दिया।


उधर, सर्किल ऑफिस में बैठे लीड बैंक मैनेजर राजीव खन्ना को जब शाखा की स्थिति के बारे में पता चलता है, तो वह तुरंत श्याम नगर शाखा के चीफ मैनेजर वरुण को फोन करता है।

फोन की घंटी बजती रहती है।

कोई जवाब नहीं देता।

राजीव फिर फोन करता है।

इस बार भी कोई जवाब नहीं।

उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें उभर आती हैं।

“कुछ गड़बड़ है,” वह बुदबुदाता है।

वह तुरंत अपने ड्राइवर को आवाज़ देता है।

“जीप निकालो। हमें अभी श्याम नगर शाखा जाना है।”

कुछ ही मिनट बाद बैंक की जीप सर्किल ऑफिस से निकल जाती है।

राजीव खन्ना के दिमाग में तरह-तरह के सवाल घूम रहे थे।

चीफ मैनेजर फोन क्यों नहीं उठा रहा था?

बैंक का गेट क्यों बंद था?

जैसे ही जीप श्याम नगर शाखा के पास पहुँचती है, राजीव खन्ना बाहर का नज़ारा देखकर सन्न रह जाता है।

बैंक के बाहर सैकड़ों ग्राहक जमा थे।

लोग गेट के सामने खड़े होकर शोर मचा रहे थे।

“गेट खोलिए!”

“हम एक घंटे से खड़े हैं!”

“अंदर क्या हो रहा है?”

जैसे ही बैंक की जीप वहाँ रुकती है, भीड़ राजीव खन्ना की तरफ दौड़ पड़ती है।

सवालों की बौछार होने लगती है।

राजीव दोनों हाथ ऊपर उठाकर भीड़ को शांत करने की कोशिश करता है।

“शांत हो जाइए... शांत हो जाइए!”

फिर वह जोर से कहता है—

“मुझे बस एक मिनट का समय दीजिए। मैं अभी गेट खुलवाता हूँ।”

वह तेजी से बैंक के मुख्य गेट की ओर बढ़ता है।

सबसे पहले वह दोबारा चीफ मैनेजर वरुण को फोन करता है।

फोन बजता रहता है।

लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता।

राजीव का माथा पसीने से भीगने लगता है।

वह गेट को जोर-जोर से खड़खड़ाता है।

“वरुण साहब!”

कोई जवाब नहीं।

“वरुण! गेट खोलिए!”

फिर वह गार्ड को आवाज़ देता है।

“गार्ड! गेट खोलो!”

लेकिन अंदर से कोई हलचल नहीं होती।

राजीव खन्ना अब समझ चुका था कि मामला गंभीर है।

वह तुरंत सर्किल हेड मिस्टर अवस्थी को फोन करता है और पूरी स्थिति की जानकारी देता है।

फोन के दूसरी तरफ कुछ क्षण के लिए खामोशी छा जाती है।

शायद सर्किल ऑफिस में इस समय स्थिति को लेकर सलाह-मशविरा चल रहा था।

फिर मिस्टर अवस्थी की गंभीर आवाज़ सुनाई देती है—

“तुरंत पुलिस को सूचना दीजिए।”

राजीव खन्ना बिना समय गंवाए श्याम नगर पुलिस स्टेशन को फोन करता है।

“बैंक का गेट अंदर से बंद है। चीफ मैनेजर फोन नहीं उठा रहे हैं। अंदर क्या हो रहा है, किसी को जानकारी नहीं है। पुलिस को तुरंत शाखा भेजिए।”


उधर, लॉकर रूम में नकाबपोश नंबर एक अपना काम तेजी से पूरा कर रहा था।

लॉकर्स से मिले सामान को वह एक बड़े बैग में रखता जाता था।

कुछ देर बाद बैग लेकर वह बैंक के हॉल में लौटता है।

वह बाकी तीनों नकाबपोशों की तरफ देखता है।

“ब्रीफकेस में नकदी भर लो।”

तीनों तुरंत काम में जुट जाते हैं।

हॉल में बैठे कस्टमर्स की नजरें उनकी हर गतिविधि पर थीं।

नकाबपोश नंबर एक धीरे-धीरे आगे बढ़ता है और सभी कस्टमर्स की तरफ देखता है।

उसकी आवाज़ में धमकी साफ झलक रही थी।

“अब बैंक का मुख्य द्वार सिर्फ दो मिनट के लिए खुलेगा।”

हॉल में सन्नाटा छा जाता है।

“जिसे अपनी जान प्यारी है, वह बैंक से बाहर निकलते ही सीधे अपने घर जाएगा। पीछे मुड़कर देखने की कोशिश मत करना।”

किसी की हिम्मत नहीं होती कि वह कुछ बोले।

नकाबपोश आगे कहता है—

“और अगर किसी ने इसे सिर्फ धमकी समझने की गलती की... तो वह ऐसा कर सकता है। क्योंकि गोली चलाने के अलावा हमारे पास भी कोई दूसरा रास्ता नहीं होगा।”

एक पल के लिए उसकी आवाज़ हॉल में गूंजती है।

फिर वह काउंटडाउन शुरू करता है।

“दस...”

सभी की साँसें थम जाती हैं।

“नौ...”

नकाबपोश नंबर तीन, जो मुख्य गेट के पास खड़ा था, उसकी ओर देखता है।

“आठ...”

नकाबपोश नंबर एक उसे इशारा करता है।

नकाबपोश नंबर तीन तुरंत मुख्य गेट खोल देता है।


बैंक के बाहर खड़ी भीड़ अब भी पुलिस का इंतजार कर रही थी।

तभी अचानक दूर से पुलिस सायरन की आवाज़ सुनाई देती है।

लोग सड़क की तरफ देखने लगते हैं।

उसी समय बैंक का शटर धीरे-धीरे ऊपर उठता है।

अंदर लगा लोहे का ग्रिल गेट भी थोड़ा-सा खोला जाता है। रास्ता इतना ही था कि एक या दो व्यक्ति एक साथ बाहर निकल सकें।

लेकिन डरे हुए कस्टमर्स के लिए इतना रास्ता ही काफी था।

अचानक भीड़ बैंक से बाहर निकलकर सड़क की ओर दौड़ पड़ती है।

लोग एक-दूसरे को धक्का देते हुए भाग रहे थे।

किसी को पीछे मुड़कर देखने की हिम्मत नहीं थी।

उसी समय पुलिस की जीप तेज़ी से वहाँ आकर रुकती है।

लेकिन जब तक पुलिसकर्मी स्थिति को समझ पाते, बैंक से निकली भीड़ बाजार की गलियों में गायब हो चुकी थी।

“ये क्या हो रहा है ?” एक पुलिसकर्मी चिल्लाता है।

लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं था।

पुलिसकर्मी तुरंत बैंक के अंदर दाखिल होते हैं।

अंदर का दृश्य देखकर सब इंस्पेक्टर अमृतलाल कुछ क्षण के लिए रुक जाता है।

अब उसे समझ में आ चुका था।

यह कोई सामान्य घटना नहीं थी।

यह बैंक रॉबरी थी।

सब इंस्पेक्टर अमृतलाल तुरंत अपने SHO, इंस्पेक्टर मोहिंदर सिंह को फोन करके पूरी जानकारी देता है।

“सर, हमें लगता है कि बैंक में रॉबरी हुई है।”

SHO के आदेश पर फॉरेंसिक टीम को तुरंत श्याम नगर शाखा पहुँचने के लिए कहा जाता है।

इसके बाद अमृतलाल बैंक कर्मचारियों की ओर मुड़ता है।

“ध्यान से सुनिए। कोई भी व्यक्ति किसी भी वस्तु को हाथ नहीं लगाएगा।”

वह सख्त आवाज़ में आगे कहता है—

“अगर किसी ने किसी चीज़ को छुआ, तो इसे सबूत से छेड़छाड़ माना जाएगा।”

फिर वह चारों ओर नजर दौड़ाता है।

“मैनेजर कौन है?”

अब के बार चीफ मैनेजर वरुण आगे आता है और सब इंस्पेक्टर से हाथ मिलाता है,

“आइए,” अमृतलाल कहता है, “हमें आपसे पूरी घटना के बारे में बात करनी है।”

दोनों चीफ मैनेजर के केबिन की ओर बढ़ते हैं।

दरवाज़ा बंद हो जाता है।

बाहर पुलिसकर्मी बैंक की छानबीन में जुट जाते हैं।

फॉरेंसिक टीम के आने का इंतजार शुरू हो चुका था।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी सामने था—

चार नकाबपोश बैंक में दाखिल कैसे हुए थे, और इतनी बड़ी रॉबरी को अंजाम देकर वे आखिर गए कहाँ?