hukm aur hasarat in Hindi Love Stories by Diksha mis kahani books and stories PDF | हुक्म और हसरत -37

Featured Books
Categories
Share

हुक्म और हसरत -37

🔥♥️ हुक्म और हसरत 🔥♥️

#Arsia
एपिसोड 37 — नकाब के पीछे कौन? 

अवॉर्ड समारोह आगे बढ़ रहा था।

एक के बाद एक नाम मंच से पुकारे जा रहे थे, लेकिन सिया का ध्यान अब भी उसी एक आवाज़ पर अटका हुआ था।

Mr. S.

उसका चेहरा उसने अभी तक नहीं देखा था।

सिर्फ आवाज़ सुनी थी।

और वही आवाज़ उसके मन में बार-बार घूम रही थी।

“मैंने ये आवाज़ कहीं तो सुनी है…”

सिया ने खुद से कहा।

काव्या ने तुरंत उसकी बात सुन ली।

“आप भी यही सोच रही हैं न?”

सिया ने उसकी तरफ देखा।

“क्या?”

“कि Mr. S. की आवाज़ कितनी अच्छी है।”

सिया कुछ बोलती, उससे पहले पीछे से रोशनी की आवाज आई।

“अच्छी? बहुत ज्यादा अच्छी!”

दोनों ने पलटकर देखा।

रोशनी उत्साहित होकर उनके पास आ चुकी थी।

“मैंने आज तक इतनी गहरी आवाज़ नहीं सुनी।”

काव्या ने तुरंत हामी भरी।

“सही कहा! ऐसा लग रहा था जैसे वो बोल नहीं रहे थे… आदेश दे रहे हों।”

सिया हंस पड़ी।

“तुम दोनों को उनकी आवाज़ पसंद आ गई?”

रोशनी ने बिना झिझक कहा,

“पसंद? मुझे तो उनसे मिलने की इच्छा हो रही है।”

काव्या ने मुस्कुराकर कहा,

“मुझे भी।”

फिर उसने थोड़ा नाटकीय अंदाज़ में कहा,

“वैसे उनकी आवाज़…”

वह कुछ पल रुकी।

“बहुत ही आकर्षक है।”

रोशनी खिलखिलाकर हंस पड़ी।

सिया भी मुस्कुरा दी।

लेकिन उसकी नजर फिर सामने मंच पर चली गई।

“लेकिन वो खुद आए क्यों नहीं?”

काव्या ने कहा,

“यही तो रहस्य है।”

तभी मंच पर अचानक रोशनी बदल गई।

पूरा सभागार कुछ पल के लिए शांत हो गया।

स्क्रीन पर फिर वही नाम दिखाई दिया।

MR. S.

इस बार स्क्रीन पर कोई चेहरा नहीं था।

सिर्फ काले रंग की पृष्ठभूमि और सफेद अक्षरों में लिखा नाम।

फिर स्क्रीन पर एक धुंधली-सी तस्वीर उभरी।

एक आदमी।

काले कपड़ों में।

चेहरे पर काला नकाब।

तस्वीर इतनी धुंधली थी कि उसके चेहरे की कोई पहचान साफ नहीं हो रही थी।

सिया ने ध्यान से स्क्रीन को देखा।

“ये…”

काव्या की आंखें फैल गईं।

“ये Mr. S. हैं?”

रोशनी ने धीमे से कहा,

“शायद।”

सिया की नजर उस तस्वीर पर टिक गई।

काले कपड़े…

चेहरे पर नकाब…

और आंखों में ऐसी गंभीरता, जिसे तस्वीर की धुंधलाहट भी छुपा नहीं पा रही थी।

तस्वीर कुछ ही सेकंड बाद गायब हो गई।

सभागार फिर सामान्य हो गया।

सिया ने तुरंत काव्या से पूछा,

“बस इतनी-सी तस्वीर?”

काव्या ने सिर हिलाया।

“हां।”

“और किसी ने उनका चेहरा नहीं देखा?”

“बहुत कम लोगों ने।”

सिया ने हैरानी से पूछा,

“ऐसा क्यों?”

काव्या ने धीमे से कहा,

“क्योंकि Mr. S. अपनी पहचान सामने नहीं आने देते।”

सिया ने फिर मंच की तरफ देखा।

“अजीब आदमी है।”

पास खड़ा अर्जुन चुपचाप सब सुन रहा था।

सिया ने उसकी तरफ देखा।

“खड़ूस, आपको नहीं लगता ये बहुत रहस्यमयी है?”

अर्जुन ने शांत स्वर में कहा,

“हर इंसान की अपनी पसंद होती है, राजकुमारी।”

“मतलब आपको कोई दिलचस्पी नहीं?”

“नहीं।”

सिया ने आंखें सिकोड़ लीं।

“आपको दुनिया की किसी चीज़ में दिलचस्पी है भी?”

अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।

“है।”

सिया थोड़ी उत्सुक हुई।

“किसमें?”

अर्जुन ने बिना किसी भाव के कहा,

“आपकी सुरक्षा में।”

सिया कुछ पल उसे देखती रही।

फिर मुंह बनाकर बोली,

“आप ना… कभी सामान्य जवाब दे ही नहीं सकते।”

अर्जुन ने कोई उत्तर नहीं दिया।

वह फिर सभागार पर नजर रखने लगा।

---

कुछ देर बाद पुरस्कार समारोह समाप्त होने लगा।

लोग आपस में बातचीत करते हुए बाहर जाने लगे।

काव्या और रोशनी अब भी Mr. S. की चर्चा में लगी थीं।

“मुझे तो लगता है वो बहुत प्रभावशाली होंगे।”

रोशनी ने कहा।

काव्या ने तुरंत जवाब दिया,

“और मुझे लगता है कि वो बहुत कम बोलते होंगे।”

सिया मुस्कुराई।

“ये दोनों बातें तुमने सिर्फ उनकी आवाज़ सुनकर कैसे तय कर लीं?”

काव्या ने कहा,

“कभी-कभी आवाज़ बहुत कुछ बता देती है।”

सिया ने कुछ नहीं कहा।

क्योंकि वह भी यही महसूस कर रही थी।

उस आवाज़ में कुछ ऐसा था…

जो उसे बार-बार अपनी ओर खींच रहा था।

अचानक पीछे से किसी ने कहा,

“अगर आप चाहें तो Mr. S. से मिलना मुश्किल नहीं होगा।”

तीनों ने पलटकर देखा।

समारोह में मौजूद एक बड़े कारोबारी उनके पास खड़े थे।

सिया ने तुरंत पूछा,

“सच?”

“जी। लेकिन उनसे मिलना आसान नहीं है। उनके प्रतिनिधि से संपर्क करना पड़ता है।”

सिया की आंखों में उत्सुकता चमक उठी।

“तो फिर मैं उनसे मिलना चाहूंगी।”

अर्जुन ने तुरंत उसकी तरफ देखा।

“राजकुमारी।”

सिया ने उसकी तरफ देखा।

“क्या?”

“पहले उनके बारे में पूरी जानकारी लेना जरूरी है।”

सिया मुस्कुराई।

“आप हर चीज़ को इतना गंभीर क्यों बना देते हैं?”

“क्योंकि हर चीज़ को हल्के में लेना सही नहीं होता।”

सिया ने कुछ जवाब नहीं दिया।

लेकिन उसके चेहरे की उत्सुकता कम नहीं हुई।

उसने एक बार फिर उस स्क्रीन की तरफ देखा, जिस पर कुछ देर पहले नकाब पहने हुए उस रहस्यमयी आदमी की तस्वीर दिखाई दी थी।

Mr. S.

वह मन ही मन सोचने लगी—

“आखिर आप हैं कौन?”

और उसी समय…

सभागार की दूसरी मंजिल पर बने एक निजी कक्ष की खिड़की के पीछे कोई खड़ा था।

काले कपड़े।

चेहरे पर वही काला नकाब।

नीचे जाती हुई भीड़ पर उसकी नजर थी।

उसकी नजर कुछ पल के लिए सिया पर जाकर ठहर गई।

फिर उसने धीरे से अपना चेहरा दूसरी ओर कर लिया।

उसने कुछ नहीं कहा।

बस खिड़की से हटकर अंधेरे में चला गया।

सिया को इस बात का बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था…

कि जिस रहस्य को वह दूर से जानना चाहती थी…

वह रहस्य उसी जगह मौजूद था।

… “हुक्म और हसरत”। ❤️
जारी रहेगा... 💗✨
© Diksha 

प्रिय पाठकों,

यह भाग लिखने में मुझे बहुत समय, मेहनत और प्यार लगा है। यदि आपको यह अध्याय पसंद आया हो, तो कृपया इसे रेटिंग दें और अपने रिव्यू ज़रूर साझा करें।

Follow me for the next episode…

✨ मेरी रचनाएँ ✨

 1. अनुबंध (Anubandh) — ✅ Completed

 2. वो जो चुपके से देखा करता था — ✅ Completed

3. अनचाही मोहब्बत (Anchahi Mohabbat) — ✅ Completed

4. हुक्म और हसरत (Hukm Aur Hasarat) — ✍️ 
Running... 🌸