New daughter-in-law in Hindi Women Focused by shilpi books and stories PDF | नई बहू

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नई बहू

आखिर वो बेला आ ही गयी जिसके लिये मां बाप कब से इंतज़ार करते हैं----अपने माता पिता और स्नेहजनों से बिछड़ कर नीलम अपने पिया राकेश के साथ विदा हो अपनी ससुराल की और चल दी।

मन में जहां नई उमंगे नए सपने थे वहीं एक अज़ीब सी घबराहट भी थी।---सखियों-सहेलियों से बहुत सुना था ससुराल और खास तौर से सास!और ननद के बारे में।

नई दुल्हन के चेहरे पर शर्म की लाली के साथ साथ एक डर और बेचैनी की परत साफ नजर आ रही थी।

गाड़ी में राकेश ने हल्का सा नीलम का हाथ पकड़ा---जो ये भरोसा दिला रहा था---मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।

थोड़ी देर बाद गाड़ी ससुराल की दहलीज पर आकर रुकी-----और चारों ओर शोर मच गया----"""बहु आ गयी """-------"""भैया --और भाभी आ गए"""-------आरती का थाल लाओ---- जल्दी करो----- चारों ओर एक अफरातफरी सी मच गई।

खैर आरती के बाद बेटे बहु को अंदर लाया गया----कुछ रस्मों के बाद राकेश तो अपने दोस्तों के पास चला गया------और नीलम उसे तो अभी मूहँ दिखाई की रस्म से दो-चार होना था।

बहु!!-----ये हैं आगरे वाली मौसी----सासु मां सरस्वती जी ने एक बुजुर्ग महिला की तरफ इशारा किया-----फिर तो पैर छूने---नीलम का घूंघट उठा कर आशीर्वाद स्वरूप पैसे या गिफ्ट देने बदले में नीलम द्वारा पैरों पडाई के रूप में कुछ पैसे वापिस कर देना------का चलन चल गया।

बहु सुंदर है!!!-------रंग भी साफ है--------काम -वाम आता है कि नहीं-----आजकल की लड़कियों से तो बस बात बनवा लो-------जैसे जुमले भी बार बार नीलम के कानों में पड़ रहे थे-------कभी वो मुस्कुराती तो कभी आंखों में आये आंसुओं को पी जाती----- क्योंकि मम्मी ने कहा था कि ससुराल में  ऊंचा नहीं बोलना है--- -और सबकी बातों को हंस कर टाल देना है।

दोपहर होने को आई-- - पर भारी साड़ी और गहनों से लदी नीलम शर्म के मारे न आंख उठा पा रही थी न कुछ बोल ही पा रही थी--    ------अब उसे बहुत  उलझन हो रही थी-----राकेश भी किसी न किसी बहाने बार बार आते और उसकी तरफ एक मीठी सी मुस्कान उछाल कर चले जाते।--    -----आस पास की औरतें अज़ीब तरहः से उसे देख हंसती और नीलम शर्म से गड़ी जा रही थी।

आखिर कुछ देर बाद सरस्वती जी और उसकी शादीशुदा ननद मीना आई--- -----भाभी !चलिये आप थोड़ा आराम कर लीजिए।

और वो सकुचाई सी आंखों में रंगीन और हसीन सपने लिये अपने कमरे में आ गयी।

राकेश एक बड़े बिज़नसमैन हैं-----भाई,बहन और मम्मी ----- छोटी सी दुनिया का अब वो भी हिस्सा थी।---  ------नीलम के पापा एक साधारण से सरकारी कर्मचारी हैं------उनकी हैसियत दूर दूर तक राकेश के बराबर नहीं है।-----किसी समारोह में राकेश ने नीलम को देखा-    -------और नीलम उसकी जीवनसाथी बन कर इस घर में आ गयी।----    -----नीलम की ननद मीना भी बहुत ऊंचे घराने में ब्याही है।

पता नहीं सब कैसे होंगे--   ------पता नहीं राकेश जी का व्यवहार कैसा होगा----------इसी सोच में गठरी सी बनी सकुचाई हुई नीलम अपने पैरों के नाखून से बेड की चादर पर निरंतर अत्याचार कर रही थी।

तभी साथ वाले कमरे से उसे कुछ आवाज़ें सुनाई दी।

सरस्वती!!----------बहु तो कुछ नहीं लायी अपने साथ------सुंदरता को क्या चाटेंगे??-------लग् रहा है-----इसके पापा ने ठग लिया तुम लोगों को-------सुंदरता दिखा कर बड़े घर का कमाऊ लड़का हथिया लिया------किसी औरत ने कहा।

आवाज़ें कान में पड़ते ही---नीलम की आंखों से पानी आ गया।

तब तक एक और औरत की आवाज़ आयी--  ----बच कर रहना सरस्वती जीजी!!------बहु सुंदर है-------कहीं राकेश इसकी बातों में आकर सब कुछ इसके नाम ही न कर दे-    ---- -कल को तेरी बेटी के और भी कारज आएंगे।

ह्म्म्म---------तेज़ ही होगी ------तभी तो इतने अमीर घर में रिश्ता हो गया--------एक और आवाज़ गूंजी-------और वहां हंसी का ठेला गूंज गया।

लूट गये ये माँ--बेटे-----मीना को नेंग  में भी ज्यादा कुछ नहीं दिया-----क्या इज़्ज़त रह जायेगी उसकी ससुराल में??-------मतलब औरतें सुनाए जा रही थीं।

नीलम की आंखों से आंसू रुक ही नहीं रहे थे----आते ही तानों से स्वागत------पता नहीं अब उसकी सासुमां क्या बोलने वाली हैं------वो तो हमेशा ही सिल्क की साड़ी और गहनों से सजी रहती हैं------बड़ा सौम्य और प्रभावशाली व्यक्तित्व है उनका-------पर सारी औरतें सच ही तो कह रही हैं------वो तो बहुत गरीब घर से है----और पापा ने दान दहेज भी  हालांकि अपनी हैसियत से ज्यादा ही दिया है-----पर यहां की शानोशौकत के सामने तो वो कुछभी नहींहै।

तभी सरस्वती जी की आवाज़ आयी-----मैं अपने घर के लिये बहु लायी हूँ----न कि कोई सोने-चांदी की दुकान------वो तो हमसे ज्यादा अमीर है-----गृहलक्ष्मी है वो!!!-------और मैं अपनी बहू के बारे में कुछ सुनना नहीं चाहती----आप हमारी खुशियों में  अच्छे मन से शामिल होंगे तो हमें अच्छा लगेगा-----वरना आपका यहां पधारने का धन्यवाद।

और मीना दीदी बोलीं-----उन्होंने तो मुझे दुनिया का सबसे अनमोल नेंग दिया है----अपने स्नेह की छत्रछाया----और हमेशा के लिये मेरा मायका खोल दिया-----लड़की को और क्या चाहिए----बस उसके भाई भाभी बने रहें----अब मैं कभी भी आ सकती हूं यहां-----मेरी सखी रूपी भाभी आ गईं हैं।

कमरे में बैठी नीलम ने सुना----तो उसकी आंखें भर आईं-----और सरस्वती जी और मीना दीदी जब उसके पास आयीं ----तो वो अपने को न रोक पाई और जाकर उनके पैर छू लिए-----सरस्वती जी  बोली-----बेटा!!!-----आप रो क्यों रहीं हैं---शुरू में होता है----पर मैं भी आपकी मम्मी ही हूँ------राकेश कभी तंग करे तो बताना----उसको खूब डाँट लगाउंगी।

और नीलम के चेहरे पर मुस्कान आ गयी।

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अगर सब घरों में बड़े ऐसे ही सोचने लगे तो घर स्वर्ग से भी सुंदर बन जाएं।

कैसी लगी रचना -----please !!-----फॉलो,कममेंट्स एंड लाइक

धन्यवाद----शिल्पी गुप्ता 🙏🙏