Saat fere Hum tere - Secound in Hindi Love Stories by RACHNA ROY books and stories PDF | सात फेरे हम तेरे - सेकेंड सीजन - भाग - 66

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सात फेरे हम तेरे - सेकेंड सीजन - भाग - 66

अगले दिन सब थके हुए थे कि सब सोते और खाते ही रहे रुम में ही।
आज की शाम सब होटल के टेरिस में बिताने वाले थे।
क्या होगा वहां?
अरे भाई ये तो शेरों शायरी होने वाला है।।
क्या सच वाह क्या बात है।।
सब तैयार होने लगें।
कोई डैस कोड है क्या?
हां बिल्कुल है कुर्ता पायजामा या शेरवानी लड़कों के लिए।
और लड़कियों के लिए साड़ी है।
माया ने कहा हां ठीक है मैं लाई हुं साड़ी।।
सारा ने कहा अरे भाई मैं तो नहीं लाई हुं।
माया ने कहा मैं दे दूंगी।
फिर सब हंसने लगे।
फिर धीरे से नताशा ने कहा मैं नहीं आऊंगी।।
विक्की ने कहा अरे नताशा जी आप तो बोर हो जाएगी ना। होटल रूम में।।
नताशा ने कहा अरे नहीं मैं तो बस।
विक्की ने हंस कर कहा किसी से मिलने जाना है?
नताशा ने कहा नहीं सर, ऐसा कुछ नहीं है मैं तो बस।।
माया ने कहा अरे नताशा चलना होगा तुमको भी, पता है ना विक्की अपनी बेटी के बिना कहीं नहीं जाने वाला।
नताशा ने कहा ओके मैडम।।
फिर सब शाम की तैयारियां करने लगे।
बिमल ,अतुल भी अपना ,अपना इंतजाम करने लगे।
इधर सब साड़ी पहनने में लगी थी।
विक्की सबकी हेल्प कर रहा था।
इधर नताशा न्यारा को भी किसी तरह एक सुन्दर सा साड़ी पहना दिया।
विक्की ने देखते ही कहा अरे वाह क्या बात है मेरी गुड़िया रानी को तो मैं भूल गया था पर थैंक्स टू नताशा! कैसे समझ लेती है आप सब कुछ।।
ये साड़ी कहा से अरेंज किया?
नताशा ने हंस कर कहा अरे मेरे पास एक नई दुपट्टा थी तो उसी से बेबी को साड़ी पहना दिया।
विक्की ने कहा वाह!वाह! काबिले तारीफ है सच मैं जितना देख रहा हूं आपको उतना ही सोच रहा हूं।
नताशा ने कहा अरे कोई बात नहीं है ये तो मेरी डियूटी है और क्या।।
फिर नताशा तैयार होने चली गई।


फिर सब तैयार हो कर लिफ्ट से ऊपर की ओर जाने लगें।
बहुत भीड़ थी सब कुर्सी पर जाकर बैठ गए।
वाह माहौल इतना अच्छा होगा किसी ने सोचा नहीं था।
सबसे पहले अनाउंसमेंट हुआ कि कोई भी यहां आकर अपनी प्रतिभा दिखा सकता है।
फिर शुरू हुआ मुशायरा।
सब तालियों की आवाज गुंजने लगी थी।
विक्की से रहा नहीं गया वो भी अपना नाम दे दिया।
तीसरे नम्बर पर था विक्की का नाम।।

कुछ देर बाद ही विक्की का नाम लिया गया।
सब बिमल, अतुल और माया विक्की, विक्की, विक्की चिल्लाने लगे।
विक्की मुसकाराता हुआ स्टेज़ पर पहुंच गए।

और फिर नैना को याद करते हुए शुरू किया।


जानते हो... जब प्रेम हुआ था तुमसे 
तो अलग ही धुन में रहती थी 
संगीत के जैसे सातों सुर बज उठते हों
मस्तिष्क में ,मन मयूर सा नृत्य करता हो
मन में अंजान तरंगों की लहरे उठती हो 
जैसे एक अलग ही भाव उत्पन हो मन में 
हर क्षण उत्साहित,चहकती रहती थी 
पर जाने क्यों ?
तुम्हारे आने पर मौन धारण कर लेती थी 
अधरों से तो कुछ बोल ना पाती थी
किंतु ये मेरा प्रेम से भरा ह्रदय सबकुछ
नयनों से कह जाता था
कितना मुश्किल था खुद को और अपने 
प्रेम को बिखरने से पहले सम्हाल लेना
जाने किस धुन में रहती थी मैं तो 
तेरे मीठे शब्दो के पीछे का सच 
जरा भी ना देख पाती थी मैं तो....





इधर नताशा की आंखें नम हो गई थी वो किसी तरह से अपनी आंसु छुपाने लगी।
विक्की ने अपना दिल का दर्द बयान कर दिया उसका दिल भी रो रहा था बस एक आस बचा था कि काश नैना वापस आ जाएं पर उसे क्या पता कि नैना ही नताशा हैं जो अपने जख्मों को समेटे हुए आज भी अपने विक्की का इन्तजार कर रही थी पर उसे एक अनजान सा डर था कि कहीं विक्की उसका जला हुआ चहेरा देखेगा तो फिर क्या होगा।।


अगला नाम तो किसी अंग्रेज का था।
विक्की आकर अपने सीट पर बैठ गए और अपनी आंखें पोंछते हुए कहा कि अगर कोई जाना चाहता है 
तो जा सकता है।।।



सब एक दूसरे को देख कर हंस रहे थे।

अब बस एक नृत्य नाटिका होने वाला था।
नताशा अपनी सीट पर नहीं थी। और न्यारा तो रेखा के पास बहुत मज़े में थी।


फिर एक धुन ने सबका मन मोह लिया था कुछ देर बाद ही सुन्दर -सुन्दर सी बच्चियां स्टेज पर परफॉर्म करने लगीं ,और वही गाना शुरू हुआ जो कुछ ही देर बाद विक्की को विचलीत कर दिया था।
एक, एक शब्द और बोल वहीं थे।
विक्की भी गुनगुनाने लगा था।
वो पता नहीं कितनी बार इधर -उधर देखा और फिर किसी को ढुढने लगा।।।

फिर गाना शुरू हो गया था।।।।




हर जगह से हर चेहरा तुम्हारा वैसा ही दिखता है।
तुम भूल न जाओगे हमें ऐसा लगता है।


एक और बात जो आप जानते हैं वह है .
एक और बात जो आप जानते हैं वह है . 

कहीं-कहीं से हर चेहरा तुम जैसा/कहीं-कहीं से हर चेहरा तुम जैसा लगता है

कहीं-कहीं से हर चेहरा तुम जैसा गीत
कहीं कहीं से हर चेहरा तुम जैसा लगता है
तुम को भूल न पायेंगे हम ऐसा लगता है

ऐसा भी एक रंग है जो करता है बातें भी
जो भी इसको पहन ले वो अपना सा लगता है

और तो सब कुछ ठीक है लेकिन कभी कभी यूं ही
चलता फिरता शहर अचानक तन्हा लगता है

अब भी यूं मिलते हैं हमसे फुल चमेली के
जैसा इनसे अपना कोई रिश्ता लगता है...पसंद है मुझे आज भी वो हर एक जगह 
जहां मैंने तुमसे प्रेम भरे संवाद किए 
तुम्हारे अनुराग में मन मनुहार की 
फिर चाहे हल्की बारिश की बूंदों में 
लंबी शांत सड़क पर गाड़ी चलाते हुए 
तुमसे सोंधी,महकी बातें करना या 
पूरे उजले चांद की चांदनी में ठंडी 
सर्द रातों में छत पर तेरे कांधे पर 
सर रख ना जाने कितने शब्दो को
प्रेम में पिरो कर तुझसे कह देना 
जैसे हम सच में खुले आकाश में 
एक दूसरे के नजदीक बैठे आंखो में 
देखते हुए वो सब पढ़ ले रहे हो 
जो कभी नही कह सके 
सब सच ही तो लगता था
सिर्फ तेरी बातों से तो तेरे पास होने की 
कल्पना कर लिया करती थी 
मैं आज भी ठिठुरती रातों में छत पे बैठे 
घंटो चांद से तेरी बाते कर लिया करती हूं
फिर उसी की थपकी से ना जाने कब 
नींद केआगोश में सो जाया करती हूं...
तुमको भुल ना पाएंगे हम ऐसा लगता है।।




विक्की इधर उधर दौड़ने लगा और नैना को खोजने लगा।

वो सीधे स्टेज के बैंक साइड चला गया और जो नजारा देखा उसने वो हैरान रह गया था ,वहां पर नताशा माइक पर गाना गा रही थीं।

 ऐसे कैसे हो सकता है? मुझे क्यूं ऐसा लग रहा था कि नताशा ही नैना थी। ये विक्की मन में बरबरा रहा था।
कुछ देर बाद ही तालियों की आवाज गुंजने लगी और सब की आंख भी नम थी।
फिर विक्की किसी तरह से नताशा के पास पहुंचा पर नताशा वहां से सीधे ग्रीन हाउस चली गई और उसने दरवाजा बंद कर दिया।
विक्की ने बस धीरे से कहा नताशा मुझे कुछ बात करनी है।।
नताशा ने कहा मिस्टर शेखावत मैं चेंज कर के आ रही हुं।
नताशा भी बहुत डर गई थी उसे बस किसी तरह से सबकुछ सम्हालना था , उसने सोच लिया था कि उसे क्या करना है।

विक्की वहां पर इन्तजार करने लगा और बोलने लगा 
ये तो पहले भी सुना था मैंने पर ये नैना तो डायरी में लिखा करती थी।


कुछ देर बाद ही नताशा बाहर आई और उसके पैरों के पायल ऐसे ही छम छम करते हुए विक्की तक पहुंच गए और फिर यह तो कोई और हो ही नहीं सकता है ना।।
विक्की ने कहा नैना!
नताशा ने कहा मिस्टर शेखावत आप ठीक है?
नैना कहां है?
विक्की ने कहा किसे धोखा दे रही है नैना या नताशा?
नताशा ने खुद को सम्हाला और फिर बोली अरे क्या हो गया है आपको मिस्टर शेखावत में तो नताशा हुं।।
विक्की ने कहा ओके फिर कुछ सवालों के जबाब दे दो।
नताशा ने कहा हां, बिल्कुल।
विक्की ने कहा यह गाना आपको कैसे पता चला?
नताशा हंसते हुए बोली अरे मिस्टर शेखावत आप भी ना!
बुक लाइब्रेरी में नहीं गए आप वहां पर तो एक किताब थी पुरी गाने की ।
विक्की ने कहा मतलब?
नताशा हंसते हुए बोली अरे बाबा, ये गाना तो बहुत फेमस है और मैं थोड़ी बहुत गुनगुनाती हु । और यहां पर तो आरफोन के बच्चे परफार्म करने वाले थे ना उसकी टीचर की तबीयत खराब हो गई थी तो मैंने उनकी मदद कर दीं बस।
आप बहुत ज्यादा सोच रहे हैं।।
विक्की ने कहा पता नहीं क्यों ऐसा हो रहा है मेरे साथ?
नताशा ने कहा आप चाहें तो यहां कि कमीटी से पुछ सकते हो।।
विक्की ने कहा ओके।।
नताशा वहां से जाने लगी।
और पैरों मे बज रहे पायल कुछ और ही बयां कर रहे थे और तभी फिर से विक्की ने आवाज लगाई हे! नताशा।
नताशा मुड़ गई और बोली अरे अब क्या?
विक्की ने कहा काबिले तारीफ।।
नताशा ने हंस कर कहा शुक्रिया।

क्रमशः