जिंदगी की दूसरा किनारा पार्ट 36
और वहीं दूसरी तरफ मेघना के दुनिया में
मेघना पूरी बेहोशी में बिस्तर पर लेटी हुई है
और उसके साइड सर के पास एक सलाइन बोतल
सिलाईं स्टैंडस में टंगी हुई है
और सलाइन की आईवी कैनुला
मेघना की हाथों पर लगी हुई है
और वही
उसके सामने बिस्तर के पास हल्की गर्दन झुकाए
एक सफेद कोट पहने आधी उम्र की डॉक्टर खड़ा है
उसे देखते हुए
और उसकी हालत को चेक करते हुए
और वही पीछे उस कमरे में
डॉक्टर के 5। 6 कदम पीछे अपना हाथ बंधते हुए
रिया खड़ी है
अपनी बहन और डॉक्टर को देखते हुए
और वही उसके पीछे दो कदम दूर
वेदीही खड़ी है
गुस्से में चेहरे को सीकोड़ा कर
रिया को देखते हुए
और तभी अचानक वह डॉक्टर उठकर
सही से खड़े होते हुए
और मेघना की तरफ देखते हुए
हल्की आवाज में कहता है
चिंता की कोई बात नहीं
यह फिलहाल ठीक है
बस फिर से पहले की तरह कुछ भी
सुनने और सोचने के बाद इसकी एंजायटी बढ़ जाती है
और इसका दिमाग उस टॉपिक को वही स्टॉप करना चाहता है
पुराने टोर्मा बातो में भी दोहराना
इसके लिए बर्दाश्त से बाहर है
और तभी यह सुनते ही
वैदेही रिया पर नजरे हटाते हुए
पलके उठा कर डॉक्टर को देखती है
और वही यह कहते हुए डॉक्टर अचानक हल्के मुर कर
पीछे वैदिक और रिया की तरफ देखता है
और उन्हें देखते हुए हल्की ऊंची आवाज में कहता है
कितनी बार कहा है
जरा बातों का ध्यान रखा करो
औरों से यह थोड़ी ज्यादा सेंसिटिव है
और तभी वैदेही डॉक्टर के मुंह से यह बातें सुनते ही
अचानक अपराध बोद्ध में
दुखी होते हुए
अपनी हल्के पलके झुका लेती है
और वही रिया डॉक्टर की बातें सुनते हुए
अपनी बहन और डॉक्टर की तरफ
अब भी हाथ बंधे हुए देख रही है
और वही यह कहते हुए
डॉक्टर अचानक पलट कर फिर से मेघना की तरफ देखने लगता है
और वही वैदेही अचानक डॉक्टर के पलते ही
पलके उठाकर
डॉक्टर और अपनी बेटी की तरफ देखती है
और बस शांत रहते हुए
अपराध बोद्ध में दुखी होकर
मन ही मन मे खुद को कोसती हैं
और
तभी अचानक रिया अपनी बहन से पलके थोड़े उठा कर डॉक्टर कि तरफ देखते हुए
और अपने आगे बढ़े हुए हाथों को हल्के ढीला करते हुए
डॉक्टर को ठहेर हुए आवाज में कहता है
डॉक्टर वो कब तलक ठीक हो जाएंगे
और
तभी डॉक्टर मेघना को देखते हुए ही
हल्की आवाज में कहता है
चिंता की कोई बात नहीं
यह कुछ घंटे में होश में आ जाएगी
और तभी अचानक वैदेही डॉक्टर की बातें सुनते हुए
पीछे से हल्की ऊंची और गुस्से भरी आवाज में कहती है
ठीक है
और अचानक चलते हुए दो कदम आगे बढ़कर
अपने हाथ उठाकर बड़ते हुए
जल्दबाजी मे रिया की दाएं हाथ झट से पकड़ते हुए
रिया को पीछे खींचती है
और गंभीर चेहरे के साथ गुस्से भारी रूखी आवाज में कहती है
रीया मेरे साथ बाहर चलो
और तभी अचानक वैदेही की हाथ खींचते ही
रिया
की हाथ एक दूसरे से छूटकर नीचे हो जाती है
और वह सर घूमर पीछे मूरती है
अपनी मां की तरफ देखते हुए
और तभी अचानक वैदेही रिया के हाथ खींचते हुए
पलट कर आगे ले जाते हुए
चलते हुए कैमरे की दरवाजे की तरफ बढ़ती है
और वही रिया भी उसके साथ खींचते हुए
अपनी मां के पीछे-पीछे उस कमरे से बाहर जाने के लिए अपनी कदम आगे बढ़ाती है
और वही डॉक्टर मेघना की तरफ देखते हुए
उन दोनों की रिएक्ट को अनदेखा करके
बस अपने पेशेंट की तरफ देखते रहता है
बिना कुछ बोले बिना रिएक्ट किऐ
और वही वैदेही रिया को खींचते हुए कैमरे से बाहर लाती है
और कुछ देर के बाद वह दोनों बाहर आते हैं
और अचानक से वैदेही मुर कर
रिया को अपने सामने लाते हुए
झट से झटक कर उसके हाथ छोड़ते हुए
अपने चेहरे को सीकोड़ कर
हल्की अपने हाथ उठाकर हवा में लहरा कर रिएक्ट करते हुए
गुस्से में ऊंची आवाज में कहती है
तुम क्या कर रही थी
क्या तुम पागल हो गई हो
और तभी अचानक रीया अपनी मां की हाथ छोड़ने ही
अपने झटकर खाते हुए हाथ को नीचे करती है
पर अपनी मां की बातें सुनते हुए
अचानक उसे देखते हुए
और उसके चेहरे पर से अपनी नजर हटाते हुए
और हल्के नजरे घूम कर अपने हाथ की तरफ देखती है
और
वही वैदेही गुस्से में अपनी बातों को आगे बढ़ते हुए
और रिएक्ट करते हुए ऊंची आवाज में कहती है
बस उसे नॉर्मल रखने के लिए
तुम्हें पता है ना हमने कितना मेहनत किया है
तुम्हें जरा सी भी परवाह नहीं है
और तभी अचानक अपनी मां की बातें सुनते हुए
रिया पलके उठा कर
अपनी मां की तरफ देखती है
और शांत और हल्की आवाज में कहती है
मां यह उसके लिए सही है
जितना जल्दी वह एक्सेप्ट करेंगी
कि उसने क्या किया है
तो
उतना ही जल्दी वह सही होगी
और तभी वैदेही अपने चेहरे को सिकोड़ कर
गुस्से में अचानक बाएं हाथ को हल्के नीचे रखते हुए
और दाएं हाथ उठाकर हल्के माथे पर रखते हुए
झट से रिएक्ट करते हुए माथे पर से हाथ को
हटकर हवा में बजाते हुए
रिया पर चिल्लाते हुए कहती है
क्या तुम पागल हो
यह कहते हुए वह दोनों हाथ हवा में लहराते हुए
चिल्लाकर आगे कहती है
कितनी बार कहा है
उसके सामने पिछले बीते हुए बातें मत बोला करो
फिर भी बार-बार तुम वही क्यों दोहरा रही हो
और तभी रिया वैदेही की बातें सुनते हुए
अचानक उसकी आंखों को सिकोड़ जाती
और वो अचानक तंग आ कर
अपने चेहरे को सिकोड़ते हुए
अचानक दोनों हाथ उठाकर जल्दबाजी में हवा में बजाते हुए
रिएक्ट करते हुए
हल्की चिल्लर भरी आवाज में कहती है
मां समझती क्यों नहीं है
मुझे उससे कोई पर्सनल दुश्मनी नहीं है
और तभी अचानक रिया की बातें सुनते ही
वैदेही चौकते हुए गहरी सांस लेती है
और अचानक वो रिएक्ट करते हुए रुक जाती है
और उसके हाथ अपने आप नीचे हो जाती है
और वही रिया चेहरे को सीकोड़ कर गुस्से में आकर
अपने दोनों हाथों को हवा में इधर से-उधर बाजारते हुए
चिल्लाहट भरी आवाज में आगे कहती है
मैं बस चाहती हूं कि वह एक्सेप्ट करें
और अपनी ट्रॉमा से बाहर आए
और सचमुच में हमारे साथ अच्छी लाइफ जीऐ
और तभी अचानक वैदेही रिया की बातें सुनते हुए
अचानक अपने दाई हाथ उठाकर
जोर से हवा में बजते हुए
चेहरे को सिकोड़ते हुए आंखें चोड़ी करके
रिएक्ट करते हुए चिल्लाते हुए कहती है
बस कर बेवकूफ लड़की
यह कहते हुए वैदेही अपने हाथों बजाते हुए नीचे करती है
और चिल्लाते हुए कहती है
जो कहा सो कहा
और वही रिया अपनी मां की चिल्लाहट सुनकर
फिर से उसके सांस चढ़ जाती है
और जोर से इचकते हुए गुस्से में आकर अपने दोनों हाथ नीचे करते हुए
गुस्से में अपनी मां के तरफ देख रही है
और यह कहते हुए वैदेही
अचानक अपने हाथ उठाकर रिया की तरफ
हाथ बढ़ाते हुए
अपने हाथों की उंगलियों को पॉइंट करते हुए
चिल्लाते आगे कहती है
दोबारा यह बात मत बोलना कि उसने क्या किया
और
तभी कुछ सेकंड ठहरते हुए रिया
अचानक गुस्से में अपने दाएं हाथ हॉकी उठाकर
पलटते हुए ऊपर कर के
रिएक्ट करते हुए फिर से हाथों को नीचे हवा में बजते हुए
हल्की ऊंची आवाज में कहती है
पर मां उसे भी पता होना चाहिए
कि उसने क्या किया
और यह कहते हुए
वैसे ही चेहरे को सीकोड़ कर
अचानक वह अपने हाथ उठाकर
अपने सामने लाते हुए हल्के धीरे हाथों को घुमा कर
अपनी मां की तरफ पॉइंट करते हुए
आगे ठेहराऊ ऊंची आवाज में कहती है
आप कब तलक उसे छुपाएंगे
और वही बातें बातें में दोनों मां बेटी की बातें बहस में बदल जाती है
और वहीं दूसरी तरफ मेघना के कमरे में
खड़े रहते हुए डॉक्टर अब भी मेघना को ही देख रहे हैं
उन दोनों मां बेटी की बातें सुनते हुए
और उनके बातों पर बिना ध्यान दिए
और वही कमरे के बाहर
वैदेही चेहरे को सीकोड़ कर रिएक्ट करते हुए
अचानक फिर से रिया पर चिल्लाते हुए कहती है
यह सब उसे पता होना जरूरी नहीं है
तुम्हें पता है
ना वह मर सकती है
ऐसा ही चला रहा तो
उसे संभाल आशान नहीं है
तुम समझ क्यों नहीं रही है
रिएक्ट करते हुए हवा में हाथ बजाते हुए
कहते हुए
वैदेही की आंखें
अचानक उसकी भर आती है
और वो आगे अपनी बातों को कहते हुए
उसकी आवाज को थोड़ी धीमा हो जाती है
और वो ठहराऊ भरी लहजे में कहती है
उसे संभाल आशान नहीं है
तुम समझ क्यों नहीं रही
और वही अचानक रिया यह सब सुनते हुए
अचानक रिएक्ट करना छोड़
गुस्से में खुद को शांत करने की कोशिश करती है
और नजर उठाकर एकदम से अपनी मां की आंखों में देखते हुए
और अपनी ऊंची आवाज को थोड़ी धीमा करने की कोशिश करते हुए ठेहराऊ भरी लहजे मे करती है
फिर आप
उस से
कब तक छुपाएंगे की
उसने क्या किया
और तभी वैदेही यह सुनते हुए
अचानक से रिएक्ट करते हुए ठहर कर
दुख में उसकी भरते हुए आंखें
रिया की आंखों पर ठहर जाती है
और वही रिया अपनी मां को देखते हुए
अचानक दोनों हाथ उठाते हुए
दोनों हाथो को हवा में ऊपर नीचे फेंकते हुए
फिर से गुस्से में आकर
चेहरे को सीकोड़ कर भोओ को चड़ते हुए
रिएक्ट करते हुए हल्की ऊंची आवाज में कहती है
जरूरी नहीं कि
उस पेशेंट से सब कुछ छुपाया जाए
जिसके लिए वह अपराध बोद्ध है
यह कहते हुए रिया अपनी चेहरे के साथ आंखों को सीकोड़ कर
अपनी मां पर से नजर हटाकर
बार-बार पलके झपकाते हुए
और हवा में अपनी हाथो को लहराते हुए
और अपने हाथों की हाउ भाव के साथ
अपनी नजर भी इधर-उधर दोराते हुए
फिर से अपनी आवाज को धीमी करते हुए
ठेहराऊ भारी लहजे में कहती है
उसे ठीक करने के लिए
यह जरूरी है
कि उसे सब कुछ पता होना चाहिए
कि उसकी गलती क्या है
उसने क्या-क्या है मॉम
और तभी अचानक यह सुनते हुए ठहरी हुई वैदेही
दुख और पछतावे में अपने भरते हुए आंखों के साथ
अपने शिकायत से भरी चेहरे को सीकोड़ कर
अचानक अपने दोनो हाथ उठाकर अपने आगे लाते हुए
हवा में जोर से मारते हुए
चिल्ला कर कहती है
बस कर
और अचानक रिया यह कहते हुए
अपनी मां की चिल्लाना सुनकर
जोर से इचकते हुए सांस लेते हुए रुक जाती है
और उसकी होठों इचकते हुए खली की खुली रह जाती है
और अपने आप उसकी हाथ नीचे हो जाती है
और अचानक उसकी पलके उठाते हुए
अपनी मां पर टिक जाती है
और वही वैदेही अपने चिल्लाहट को हल्का करते हुए
और अचानक अपने बजाते हुए हाथों को नीचे करती
और अचानक अपनी दाएं हाथ उठाकर
रिया की तरफ हाथों की पंजा दिखाते हुए
उसे रुकने के लिए कहते हुए
आगे धीरे आवाज में कहती है
बस कर रिया
और वही रिया की होठ खली की खुली रह जाती है
और वह गहरी आंखों से अपनी मां की तरफ देखती रहती है
और वही यह कहते हुए
अचानक वैदेही अपने हाथों की पंजों की मुट्ठियां बांध लेती है
और आगे कहती है
बहुत हुआ मैं और नहीं सहे सकती
और यह कहते हुए
उसके आंखें बहने लगती है
और अचानक मुठिया बंधे हुए हाथों को
धीरे-धीरे मुट्ठियों को खोलते हुए
अपने हाथ हल्के हवा में लहराते हुए
धीरे-धीरे अपने पास लाकर
उठाते हुए अपने माथे के पास रखती है
और बहते हुए आंखों को बंद करते हुए
और हल्की गहरी सांस लेते हुए
हल्की आवाज में कहती है
मैं थक गई हूं
और यह कहते हुए वह
सेकंड ठहर जाती है
और वही रिया की आंखें भी भरने लगती है
अपनी मां को देखते हुए
दुखी होकर
और वही
अचानक वैदेही कुछ सेकेंड बाद
अपनी आंखों को खोलकर
अपने माथे के पास रखे हुए हाथों को माथे से धीरे-धीरे हटाते हुए
हल्की लहराते हुए नीचे करती है
और रोते हुए अजीब रिएक्ट करते हुए
आगे कांपते हुए
ठेहराउ हल्की आवाज में कहती है
और मैं बस उसे सही सलामत देखना चाहती हूं
हमेशा
और मैं नहीं चाहती कि
वह अपने पिता की मौत के गेट में जिंदगी भर खुद को दोस्त देते रहे
और उसकी हाल ऐसे ही रहे
और वही रिया अपनी मां की बातें सुनते हुए
अपने भरते हुए आंखों के साथ उन्हें देखते हुए
ठहर जाती है
और वही वैदेही रोते हुए अपने दुखी चेहरे को सीकोड़ कर
रिया को बिना देखे हल्की सर झुक कर
हल्की आगे देखते हुए
और हल्की हाथ उठाकर हवा में लहराते हुए
हल्के रिएक्ट करते हुए
सिसकते ठेहराउ भरी हल्की आवाज में आगे कहती है
मैं बस चाहती हूं
वह ठीक हो जाए
सारे अपराध बोद्ध से
वो आजाद हो जाए
और एक नॉर्मल लाइफ जीए
मैं बस चाहती हूं
कि वह आम इंसानों की तरह नॉर्मल हो जाए
और रिया अपनी मां की बातें सुन रही है
और
चुपचाप अपनी मां को रोते हुए देख रही है
अपनी भर्ती हुई आंखों से
और आगे कुछ नहीं कहा पा री
अंदर से उसकी सांसे भी भारी हो रही है
और तकलीफ से उसके मुंह के भी जबड़े दर्द हो रहे हैं
और वही वैदेही वैसे ही रिएक्ट करते हुए
दुख और तकलीफ से
रोते हुए सिसकते हुए आगे कहती है
मैं नहीं चाहती कि
वह हमेशा ऐसी दुनिया में जिए
जो सच ही नहीं ह
और
तभी अचानक कमरे के अंदर बेहोश पुरी मेघना की पलकें अचानक से जोर की सांस लेकर इसकते हुए
जोर से खुल जाती है
और उसके धड़कन भी जोर से धड़क पड़ता है
और उसके पलके खोलते हुए
वो सीधा ऊपर की तरफ देखती है
जैसे कि वह बाहर आवाज उसके कानों में गूंज परी हो
और वही वह डॉक्टर उसे अचानक आंखें खोलते हुए देख
थोड़ी हैरानी की नजरों के साथ
वहीं खड़े उसे देखता रहता है
और वही कमरे के बाहर खड़ी
रिया अपने मां के आगे
अपने बहते हुए आंखों के साथ खड़ी है
अपनी मां को रोते हुए देखते हुए
और वही खड़ी वैदेही रिएक्ट करते हुए
अपने दोनों हाथ को नीचे करते हुए
और दुखी होकर सिकोड़ते हुए चेहरो के साथ
रोते हुए शिशक शिशक कर
आगे हाल्की आवाज में कहती है
एक झूठ और फरेब। की दुनिया में जिए
मैं बस जाती हूं
कि वह हकीकत में लौट आए
और वहीं दूसरी तरफ असल दुनिया में
कुछ दर बाद
वैदेही अस्पताल से वापस जा रही है
वो टैक्सी पर बैठी हुई है
उसका चेहरा उतरा और गंभीर है
वह हाथों में पर्स लेते हुए
अपने गोद पर रखकर
वह दोनों हाथ मोड़ते हुए
उस पर्स पर रखी है
और वह अंदर ही अंदर
सच में डूबी हुई सोचती है
और अंदर ही अंदर खुद से कहती है
मैं बस चाहती हूं
वह वापस आ जाए हकीकत में लौट आए
मुझे तुमे इस तरह देखना
बिल्कुल पसंद नहीं है
तुम्हें भी यह पता है ना
पता है कि यह दुनिया बुरी हो जालिम है
पर अभी तलक तुम्हारी मां है
जो तुम्हारी इंतजार कर रही है
और वही रास्ते पर चलते हुए
धीरे-धीरे टैक्सी आगे बढ़ रही है
और वही टैक्सी में बैठी हुई
वैदेही अपनी बेटी को याद करते हुए
खुद से मन में कहती है
आई मिस यू
वापस आ जाओ मेघना
और वहीं और टैक्सी सड़क पर चलती हुई
आगे जा रही है
और सारी गाड़ियों के साथ
शहर के बीचो-बीच से चलते हुए
और वही डॉक्टर देव आईसीयू रूम में
अपने पेशेंट के पास बैठा हुआ है
हल्के पेशेंट की तरफ झुकते हुए
और उसे देखते हुए
मन में सोचता है
और उदास चेहरे के साथ हल्की आवाज में
अपने पेशेंट से कहता है
एक लंबी सपना में
क्या तुम्हें रहना अच्छा लग रहा है
तुम्हारी हालत को तो देखकर नहीं लगता कि
तुम वहां खुशियों भरी पल में हो
तो क्यों ना तुम वापस आ जाओ
बहुत सारे लोग हैं
जो तुम्हारे इंतजार कर रहे हैं
देव उसके चेहरे को गंभीरता से देखते हुए
मन में बहुत कुछ सोचते हुए
उस से हल्की और ठहेरे हुए आवाज में आगे कहता है
क्या हुआ सपना तुम्हें दर्द से दूर रख रहा है
यह दर्द की बिल्कुल करीब
अगर दूर होती तो
तुम कभी अपनी पलकें खोलती ही नहीं
और अगर तुम तकलीफों की करीब हो तो
मुझे डर लग रहा है
तुम्हें हमेशा के लिए खो देने से
और यह कहते हुए
चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए
आगे कहता है
क्या तुम सुन रही हो
क्या तुम बिना किसी से लड़े
सव कुछ छोड़कर खुद को नहीं चुन सकती
बस खुद को
और वापस नहीं
आ सकती
सब कुछ छोड़कर
और वही उसके पेशेंट कोई रिएक्ट नहीं कर रही
वह बस गहरी बिहोसी में है
उसकी बातें सुन रही है या नहीं पता नहीं
और वही डॉक्टर देव उसे देखते हुए
और उससे शिकायत करते हुए आगे कहता है
अगर वहां भी दर्द है तो
क्यों ना तुम वापस आ जाओ
और यहां सब कुछ ठीक करो जो
भी तुम कर सकती हो
क्या तुम्हें पसंद है
कोई तुम्हें से और कोई भी उम्मीद नहीं रख रहा
बस वापस आने की उम्मीद की इलावा
मुझे भी तुम्हारी वापस आने के इंतजार है
मिस यू
तुम्हें भागते हुए देखने का मन है
तुम्हें चिल्लाते हुए देखने का मन है
और तभी अचानक यह कहते हुए
डॉक्टर देव पलके उठा कर अपने पेशेंट के चेहरे की तरफ से देखते हुए
धीरे-धीरे उसकी पूरी बॉडी की तरफ देखा है
और आगे कहता है
पर युही हमेशा तुमे बिस्तर पर पड़े हुए
देखने का मन नहीं है
और वहीं दूसरी तरफ अभिराज अब भी
अपने अपार्टमेंट के लोभी में लगे हुए बिस्तर पर बैठा हुआ है कुछ सोचते हुए
उसके गर्दन हल्की झुकी हुई है
और उसके पालके बस आगे की तरफ देख रहा है
पर कहीं नहीं देख रहा
उसके दोनों हाथ उसके आगे उसके दोनों घुटनों पर है
वह कुछ सोतते हुए कल रात की बीती हुई
यादो में चला जाता है
और वही
अभिराज आधी रात को अपनी बेटी के आईसीयू रूम में अपनी बेटी के पास झुकते हुए
हल्की अपनी बाई हाथ बड़ा कर अपनी बेटी के सर पर रखते हुए उसके माथे पर किस करता है
और
वहीं कुछ कदम दूर
वैसे ही खड़ी वैदेही
अपने दोनों हाथों को मोर कर
अपने आगे कमर पर रखते हुए बंधी हुई
उनके तरफ देख रही है
और तभी अचानक अभिराज अपनी बेटी को किस करते हुए
हल्के सर उठाते हुए पीछे हटकर
अपनी बेटी के सर पर रखी हुई
अपनी दूसरे हाथों से हल्के अपनी बेटी को सर को सहलाते हुए
अचानक अपना हाथ भी पीछे लेकर
झुकते हुए उठ खड़ा होता है
और उदास आंखों से कुछ सेकेंड तक
अपनी बेटी को देखते हुए
अचानक कुछ सेकेंड बाद
मुड़ते हुए चलकर वहां से वापस लौटने लगते हैं
और वही वैदेही अचानक से उसे देखते हुए
अपने बंधे हुए हाथों को धीरे-धीरे खोल कर नीचे करती है और हल्के नजरे घूम कर
अभिराज की तरफ देखती है
और वही अभिराज वैदेही को बिना देखे
अपनी हल्के तेज कदम बढ़ाते हुए
वैदेही के पास से गुजरते हुए
कुछ देर में ही चलते हुए
उस रूम से बाहर निकलता है
और वही वैदेही हल्के नजरे घूमर वैसे ही खड़ी रहते हुए
अभिराज को जाते हुए देखती रहती है
अगर यह कहानी आप सबको अच्छी लगे
तो आगे पढ़ते रहिऐ
मिलते हैं नेक्स्ट एपिसोड में
मैं आपके प्रिय लेखक अभनिशा🦋❤️💯