ishq ya inteqam - 1 in Hindi Love Stories by Deepti Gurjar books and stories PDF | इश्क और इंतकाम - 1

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इश्क और इंतकाम - 1

                         Chapter 1

                        नफ़रत कि पहली चिंगारी 


"कार्यालय की इन भारी-भरकम दीवारों में सिर्फ कागजों की सरसराहट नहीं होती, यहाँ दो खानदानों की वो पुरानी आग सुलगती है, जो बरसों बाद भी ठंडी नहीं हुई।"

राजधानी के सबसे पॉश इलाके में स्थित 'ग्लोबल इंडस्ट्रीज' का विशाल कॉन्फ्रेंस रूम खामोश था, लेकिन उस खामोशी में एक अजीब सा तनाव तैर रहा था। कमरे की बड़ी कांच की खिड़की से बाहर ढलते सूरज की लालिमा साफ दिखाई दे रही थी, जो ठीक वैसी ही लाल थी जैसी पिछले बीस सालों से 'सिंहानिया' और 'राठौर' परिवार की आँखों में एक-दूसरे के लिए प्रतिशोध की आग थी।

दरवाजा खुला और अंदर कदम रखा आराध्या राठौर ने।

चेहरे पर गजब का आत्मविश्वास, आँखों में बिना किसी डर के चमक और सादगी से भरी एक ऐसी शान जो किसी को भी प्रभावित करने के लिए काफी थी। आराध्या आज सिर्फ एक कर्मचारी नहीं, बल्कि अपने पिता की उस प्रतिष्ठा को बचाने आई थी जिसे सिंहानिया ग्रुप पिछले एक हफ्ते से मिट्टी में मिलाने की कोशिश कर रहा था।

कॉन्फ्रेंस टेबल के ठीक दूसरी तरफ, ठीक बीच की कुर्सी पर बैठा था—रुद्र प्रताप सिंहानिया।

रुद्र, यानी शहर का वो नाम जिसे सुनते ही बड़े-बड़े उद्योगपतियों के पसीने छूट जाते थे। ठंडे दिमाग का शातिर इंसान, जिसकी नीली आँखों में कोई भाव नहीं था, सिवाय एक बेपरवाह क्रूरता के। उसने अपनी महंगी घड़ी पर नजर डाली और ठंडी मुस्कान के साथ सिर उठाया।

"लेट हो गई आप, मिस राठौर," रुद्र की भारी और कड़क आवाज पूरे कमरे में गूँजी। "या फिर राठौर खानदान को अब हार स्वीकार करने में थोड़ा वक्त लगता है?"

आराध्या ने बिना एक पल गँवाए, अपनी फाइल पूरी ताकत से टेबल पर रखी। कागजों के टकराने की उस आवाज ने कमरे का सस्पेंस और बढ़ा दिया। उसने सीधे रुद्र की आँखों में देखा और होंठों पर एक तीखी मुस्कान ले आई।

"हार और राठौर, ये दोनों शब्द एक साथ इस ब्रह्मांड में कभी फिट नहीं बैठते, मिस्टर सिंहानिया," आराध्या की आवाज में एक गजब की ठंडक और दृढ़ता थी। "और बात समय की है, तो सही वक्त पर सही जवाब देना अच्छे से जानती हूँ मैं।"

रुद्र के चेहरे की वह मखौल उड़ाने वाली मुस्कान पलभर के लिए ठिठक गई। उसने पहली बार किसी लड़की को इस तरह उसकी आँखों में आँखें डालकर बात करते देखा था। वरना आज तक उसके सामने किसी की भी नजरें मिलाने की हिम्मत नहीं हुई थी।

हवा में तनाव और बढ़ गया। दोनों के बीच की इस पहली ही टक्कर ने यह साबित कर दिया था कि आने वाले दिन इन दोनों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए किसी बड़े तूफान से कम नहीं होने वाले थे।

लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह नफरत की जो चिंगारी आज इस कॉन्फ्रेंस रूम में सुलग रही है, वही आगे चलकर एक ऐसे जूनून में बदलने वाली है, जिससे बच पाना दोनों के लिए नामुमकिन होगा।

क्या रुद्र सिंहानिया इस पहली हार को बर्दाश्त कर पाएगा? या फिर आराध्या को उसके ही जाल में फँसाने के लिए वो कोई नया षड्यंत्र रचेगा?

आपको ये अध्याय कैसा लगा कमेन्ट में जरूर बताएं?

Author name=Deepti Gurjar