Incomplete ink and the sea in Hindi Love Stories by sukhvinder Singh Rai books and stories PDF | अधूरी स्याही और समंदर

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अधूरी स्याही और समंदर

बांद्रा स्टेशन का वो अंतहीन और भारी शोर, हवा में घुली सिगरेट के धुएँ की महक, और बिना रुके कंधों से टकराते अजनबी मुसाफिरों का सैलाब। आर्यन की एकांत और सन्नाटे से भरी दुनिया इस लोकल ट्रेन के पहियों के नीचे कुचलकर कहीं बिखर चुकी थी। कॉर्पोरेट ऑफिस के उन ठंडे कांच वाले केबिन और नीरस कंप्यूटर स्क्रीन के बीच वह महज एक बेजान पुर्जा बनकर रह गया था। रात को अपने अंधेरे फ्लैट की बालकनी से जब वह मुंबई की अनगिनत जलती हुई खिड़कियों को घूरता, तो इस अंधी और अजनबी भीड़ में उसका अपना वजूद उसे बेहद धुंधला और अर्थहीन नजर आता। वह अपना ठंडा खाना बिना किसी स्वाद के हलक से नीचे उतारता, मखमली गद्दे पर तन्हाई में करवटें बदलते हुए रात गुजार देता और बिना एक पल भी चैन से सोए अगली सुबह का इंतजार करता। उसकी आँखें हर रात सूखी और लाल रहतीं, जहाँ नींद का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं था।

फिर उस घुटन भरे, सलेटी रंग वाले फ्लोर पर रिया की एंट्री हुई। किसी बंद, सीलन भरे कमरे में अचानक ताजी हवा का कोई झोंका आ गया हो। रिया इस शहर की धड़कन थी—तेज, बेबाक और ऊर्जा से पूरी तरह लबालब। जब वह मुस्कुराती, तो कीबोर्ड की उबाऊ खटपट के बीच उसकी वो खिलखिलाती हुई खनक पूरे फ्लोर का सन्नाटा चीर देती। आर्यन, जो कैंटीन में जाकर एक कप पानी मांगने से भी कतराता था, एक दिन लंच टेबल पर अपना टिफिन खोले खामोश बैठा था। तभी रिया ने अपनी कुर्सी खींची, उसके बिल्कुल सामने आकर बैठ गई और बिना किसी इजाजत के उसके डिब्बे से एक निवाला उठा लिया। उस दोपहर के बाद आर्यन का वो वीरान एकांत, इस महानगर की तेज और जीवंत धड़कन से हमेशा के लिए जुड़ गया।

रिया ने आर्यन को मुंबई अपनी खुली आँखों से महसूस करना सिखाया। विरार फास्ट लोकल के उस खचाखच भरे हुजूम में उसका हाथ पकड़कर अंदर धकेलना, मरीन ड्राइव की नम हवा में भुट्टे पर नींबू-नमक रगड़ते हुए अपने सुनहरे भविष्य के सपने बुनना, और ऑफिस की लंबी थकान के बाद मरीन ड्राइव के पत्थरों पर बैठकर समंदर की अनगिनत लहरें गिनना। शाम की हल्की कटिंग चाय के कुल्हड़ पर जब उन दोनों की नजरें आपस में मिलतीं, तो हवा के बीच किसी भी लफ्ज या जुबान की कोई जरूरत नहीं बचती थी। आर्यन के कांपते और ठंडे हाथों को रिया की हथेलियों में अपना स्थायी और सुरक्षित घर मिल गया था। अठारह महीने किसी रुई के फाहे की तरह हवा में उड़ गए। आर्यन की आँखों में अब एक ही तस्वीर बस चुकी थी—कि उसकी जिंदगी की हर मंजिल अब रिया के कदमों के पास आकर थम गई है।

लेकिन हकीकत की जमीन मरीन ड्राइव के उन खुरदरे और नुकीले पत्थरों से भी कहीं अधिक कठोर और बेरहम होती है।

उस शाम मरीन ड्राइव पर हवा में दिसंबर जैसी बर्फ सी चुभन थी। समंदर की लहरें पत्थरों से टकराकर कुछ अधिक ही शोर कर रही थीं। रिया, जो कभी एक पल के लिए भी चुपचाप शांत नहीं बैठती थी, आज अपने ही नाखूनों से उस गीले पत्थर पर जमी हुई काई को लगातार खुरच रही थी। उसकी चमकने वाली आँखों की कोरों पर काजल बुरी तरह फैल चुका था और आँखें समंदर के उस गहरे पानी से भी अधिक लाल और सूखी थीं।

"क्या हुआ रिया?" आर्यन ने जब उसके ठंडे पड़ चुके हाथ को अपनी गर्म हथेलियों में कसकर थाम लिया, तो रिया के अंदर के सब्र का पूरा बांध एक ही झटके में टूट गया।

उसने आर्यन का हाथ इतनी जोर से जकड़ लिया जैसे कोई डूबता हुआ इंसान अपनी आखिरी सांस के लिए तड़प रहा हो। उसकी कांपती हुई उंगलियों ने अपने लेदर बैग से एक मुड़ा हुआ कागज़ बाहर निकाला।

"आर्यन... मेरी फ्लाइट है। अगले हफ्ते। अमेरिका।" उसकी आवाज उसके ही सूखे गले में घुटकर रह गई।

आर्यन के कानों में समंदर की लहरों का शोर एकदम से सुन्न पड़ गया। चारों तरफ का सारा रंगीन मंजर एक पल में धुंधला पड़ गया। अमेरिका? पर क्यों? हमारा यहाँ का यह जीवन, हमारी ये शामें...

रिया के टूटते हुए आंसुओं ने आर्यन की पूरी दुनिया को एक ही पल में हमेशा के लिए डुबो दिया। उसके पिता के कारोबार की नीलामी के अदालती कागजात, घर के बाहर खड़े बेरहम कर्जदार और उसके पिता के चेहरे पर पसरी वो मौत जैसी खामोशी—सब कुछ सामने आ गया। रिया के पास ऑफिस का वो इकलौता विदेशी प्रोजेक्ट ही वो आखिरी रस्सी थी, जो उसके डूबते परिवार को उस दलदल से खींचकर बाहर निकाल सकती थी।

"मैं तुम्हें छोड़कर एक पल के लिए भी नहीं जाना चाहती आर्यन... मेरी सांसें रुक जाएंगी तुम्हारे बिना। लेकिन... मैं अपने प्यार का यह महल अपने पिता की अर्थी और चिता पर खड़ा नहीं कर सकती।" रिया आर्यन के चौड़े कंधे पर अपना सिर टिकाकर बुरी तरह फफक-फफक कर रो रही थी। आर्यन साफ महसूस कर सकता था कि उसकी शर्ट रिया के गर्म आंसुओं से पूरी तरह भीगकर भारी हो चुकी थी। "मुझे माफ कर देना आर्यन... कई बार जिंदगी में हमें उसी इंसान से बेइंतिहा इश्क होता है, जो हमारी किस्मत की लकीरों में लिखा ही नहीं होता।"

आर्यन का गला पूरी तरह रुंध चुका था। वो चीखना चाहता था, उसे अपनी बाहों में भींचकर हमेशा के लिए रोकना चाहता था। पर वह अंदर से जानता था कि अगर उसने आज रिया को रोक लिया, तो रिया अपने ही जमीर और अपने उसूलों की नजरों में हमेशा के लिए हार जाएगी। उसने अपनी पलकों के पीछे उमड़ते उस खारे समंदर को वहीं आखिरी हद तक रोक लिया। उसने बहुत ही कोमलता से रिया का चेहरा ऊपर उठाया, उसके माथे पर एक गहरा किस किया और उसे उन बेबसी के आंसुओं के साथ हमेशा के लिए आजाद कर दिया।

रिया चली गई। अमेरिका की उस तेज और अंधी चकाचौंध में अपनी पहचान और परिवार का वजूद बचाने के लिए कहीं बहुत दूर खो गई।

लेकिन आर्यन का दिल सिर्फ टूटा नहीं था, वह अंदर से पूरी तरह जलकर राख हो चुका था। लोग कहते हैं कि इश्क में इंसान चीखता है, चिल्लाता है, अपने कपड़े फाड़ता है। पर आर्यन का यह पागलपन पूरी तरह खामोश था। इतना भयानक खामोश कि उसकी चीखें सिर्फ उसके अपने दिल की दीवारों से टकराकर उसके भीतर ही दम तोड़ देती थीं।

उसका लैपटॉप अब उसके कमरे के कोने में बंद पड़ा धूल फांक रहा था। उसकी बढ़ी हुई उलझी दाढ़ी और बिखरे हुए बाल किसी को नजर नहीं आते थे। अब हर शाम, चाहे मुंबई की मूसलाधार तेज बारिश हो या कोहरे से भरा खौफनाक तूफान, आर्यन मरीन ड्राइव के उसी एक पुराने पत्थर पर जाकर खामोश बैठ जाता था। उसके हाथ में एक पुरानी डायरी और नीली स्याही वाला पेन होता था।

रातें उसके लिए किसी सजा जैसी थीं। वह अपने बिस्तर पर तन्हाई में करवटें बदल-बदल कर रात काटता। जब नींद की एक भी बूंद आँखों में नहीं टिकती, तो वह उठकर अपनी उस पुरानी डायरी के पन्ने पलटने लगता। वह उस डायरी पर एक-एक चीज लिखता—शुरुआत से लेकर आखिरी पल तक। रिया की वो पहली हँसी, ऑफिस की वो टेबल, लोकल ट्रेन के वो थका देने वाले सफर, मरीन ड्राइव पर भुट्टा खाते हुए उसकी बातें, उसकी परफ्यूम की वो भीनी-भीनी महक... सब कुछ अपनी उस नीली स्याही के जरिए कागजों पर जिंदा रखने की कोशिश करता।

कई बार रात के सन्नाटे में खिड़की से बाहर आसमान को देखते हुए जब उसे चांद नजर आता, तो उसके सीने में एक हूक उठती—रिया, इस चांद पर भी तो बदनुमा दाग हैं, पर तुम... तुम तो इतनी बेदाग और खूबसूरत थीं... फिर तुम इतनी दूर क्यों चली गईं?

वह समंदर की तरफ देखता, लहरों के शोर के बीच अपनी भीगी पलकों से आसमान को ताकता और मन ही मन सोचता—रिया... क्या इन अनंत समंदरों और इन सर्द हवाओं को चीरकर तुम कभी वापस मेरे पास लौटकर आओगे कि नहीं?

वह इस दुनिया के लिए नहीं, सिर्फ अपनी उस अधूरी मोहब्बत के लिए लिखता था, जिसके वापस लौटने की अब कोई उम्मीद शेष नहीं बची थी। राह चलते लोग उस एकांत में डायरी लिखते इस बेपरवाह नौजवान को एक 'अधूरा आशिक' कहकर गुजर जाते थे। पर आर्यन को इस बाहरी दुनिया की किसी बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था। क्योंकि अब सिर्फ वो नीली स्याही, वो पुरानी डायरी और सामने फैलता हुआ यह विशाल समंदर ही था, जो उसके और उसकी रिया के दरमियाँ इस वीरान दुनिया में बाकी बचा था।

— सुखविंदर की कलम से