Bundeli Hanuman Chalisa (Review) in Hindi Book Reviews by नंदलाल मणि त्रिपाठी books and stories PDF | बुंदेली हनुमान चालीसा (समीक्षा )

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बुंदेली हनुमान चालीसा (समीक्षा )

सृजना कि पृष्ठभूमि --

महोबा आल्हा,उदल, मामा माहिल,डेबा कि धरती शारीरिक शौष्टव, शक्ति,पराक्रम कि भूमि जिसने भरतीय इतिहास कि कल्पना,यथार्थ के मध्य शोध 
बोध कि भूमि राजनीती राज्य नीति सामाजिक सम्बन्धों के बिभिन्न आयाम अध्याय मित्र, शत्रु,युद्ध, पराक्रम, पुरुषार्थ कि धरती धर्म समभाव मानवीय मूल्य कि धरती बुंदेली संस्कृति भाषा साहित्य सौर्य गर्व गरिमा कि भूमि जहाँ साहित्य के उपवन मे एक सुंदर सुगन्धित पुष्प पल्ल्वीत पुषपित होकर बुन्देल खंड ही नहीं भारत के बिभिन्न क्षेत्रो मे अपनी योग्यता, दक्षता, सृजन शीलता से विद्वत, समाज के साथ साथ साहित्यिक परिवार समाज पर प्रभाव छोड़ता आकर्षण बनता जा रहा है ऐसी ही प्रतिभा कि धनी #डॉ सलमा जमाल# जिन्होंने बुंदेली भाषा मे #बुंदेली #हनुमान चालीसा# कि सृजना कर हिंदी के साथ साथ भारत कि सभी क्षेत्रीय भाषा साहित्य हिंदी साहित्य के अतिरिक्त विदेशी अन्य भाषा के साहित्यिक समाज को डॉ सलमा जमाल को जानने समझने को बेबस प्रेरित किया है!

बुंदेली हनुमान चालीसा-----

डॉ सलमा जमाल द्वारा सृजित बुंदेली हनुमान चालीसा ऐसी कृति है जो सनातन धर्म मे भगवान और भक्त, स्वामी, सेवक के आदर्श शिवांश, रुद्रांश, हनुमान जी कि भक्ति सेवा मे किए गए अद्भुत कार्यों सेवाओं के साथ साथ उनकी बाल्यकाल लीलाओ का बुंदेली भाषा मे काव्य रूप संकलित किया गया है!
हिंदी,अवधि, भोजपूरी लगभग सभी भरतीय भाषाओ मे हनुमान चालीसा कि रचना बिभिन्न रचनाकरो द्वारा किया गया है भारतीय भाषाओ के अतिरिक्त अन्य कई विदेशी भाषाओ मे भी 
हनुमान चालीसा कि रचना कि गई है गोस्वामी तुलसी दास कि 
कल्पना से कही अधिक हनुमान भक्त है जो उनकी आराधना मे भिन्न भिन्न तरह से भिन्न भिन्न भाषा शैली मे हनुमान जी को 
अपनी श्रद्धा आस्था से अभिसिंचित करते है!
डॉ सलमा जमाल द्वारा सृजित बुंदेली हनुमान चालीसा कि विशिष्टता यह है कि इसकी रचना के लिए भावो का आवाहन नहीं किया गया है भावों कि उत्पति डॉ 
सलमा कि अंतर आत्मा कि सच्चाई कि ईमानदार प्रश्नफुटित तरंगो से निकली है जो अपनी बोली भाषा मे अभिव्यक्ति कि तूलिका से व्यक्त कि गई है!
हनुमान जी कि बाल लीलाओ 
एवं भगवान राम के प्रति निष्ठा सेवा भाव समर्पण कि भक्ति 
सेवा के सुंदर रंगीन छाया 
चित्रों ने बुंदेली हनुमान चालीसा को उत्कृष्ट बनाते हुए उत्कर्ष पर स्थापित किया है निश्चिंत रूप से रसखान कि प्रेरणा प्रकाश #डॉ सलमा जमाल #, कि अद्भुत अविस्मरणीय कृति बुंदेली हनुमान चालीसा को प्रासंगिक एवं भक्ति एवं सेवा के प्रसाद एवं आशीर्वाद के रूप मे आम जन को आकृष्ट करती है!

साहित्यिक व्यख्या --

आल्हा छंदो मे डॉ सलमा जमाल द्वारा सृजित बुंदेली हनुमान चालीसा साहित्यिक कसौटी पर पूरी तरह खरी एवं निखरी है शब्दों के सयोजन से लेकर मात्राओ के प्रयोग तक साहित्यिक नियमों सिद्धांतो का पालन किया गया है कही कही लय उतरे जरूर है जो रचना धार्मिता कि अपनी मर्यादाओ कि 
विशेषता बन गए है!
प्रकाशन --
मध्य प्रदेश तुलसी साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित डॉ सलमा जमाल कि कृति बुंदेली हनुमान चालीसा का प्रकाशन बहुत व्यवस्थित त्रुटि रहित करने कि सत्य निष्ठा से कोशिश कि गई है जिसकी निश्चिंत रूप से सराहनीय है और अतुलनीय है!!

आशीर्वाद कि पूंजी --

डॉ सलमा जमाल कि कृति बुंदेली हनुमान चालीसा मे विद्वत साहित्यकारों द्वारा अपने आशीष से उनकी कृति कि सफलता का मार्ग प्रशस्त किया गया है जिनमे प्रमुख रूप से मनोरमा तिवारी जी राष्ट्रीय गीतकार एवं राष्ट्रिय पुरस्कारो से सम्मानित शिक्षा विद, समाज सेवी, डॉ चंद्रा चतुर्वेदी "'कृष्ण प्रिया " पूर्व निदेशक वेद विज्ञान महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय जबलपुर (मध्य प्रदेश ), साध्वी ज्ञानेश्वरी (दीदी समाज सेविका ) प्रमुख है 
निश्चिंत रूप से विद्वत त्रय द्वारा बुंदेली हनुमान चालीसा के लिए 
मार्गदर्शन एवं ऊर्जा प्रदान करती है!!

 निष्कर्ष - 

बिना किसी संसय भ्र्म के बहुत स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि #डॉ सलमा जमाल #जी कि आत्मिक प्रेरणा पुंज से प्रश्नफुटित
बुंदेली हनुमान चालीसा भरतीय इतिहास कि गौरव शाली परम्परा 
रसखान कि कड़ी कि महत्वपूर्ण लड़ी है #डॉ सलमा जमाल # जिन्होंने अपनी मातृ भाषा बुंदेली को बहुत समझदारी से उसकी मिठास गुणवत्ता को जानने समझने अपनाने के लिए सम्पूर्ण मानवता के समक्ष बुंदेली हनुमान 
चालीसा के रुप मे प्रस्तुत किया है 
सलमा जमाल जी का यह प्रयास 
उन्हें बुन्देल खंड कि जन जन कि 
आवाज भारत कि नारी गौरव रानी लक्ष्मी बाई का पथ अनुगामी बनती है!!

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!!