अब तक
तभी उस आदमी ने उस के कपड़ों को उसके बदन से अलग कर दिया और बेड के नीचे फेंक दिया। उसने फ़ना के हाथों को बेल्ट से बांध दिया। वह अब कुछ भी नहीं कर पा रही थी। वह बस अपनी गर्दन ना में हिलाते हुए रोए जा रही थी। उस आदमी ने जैसे ही अपने शर्ट के बटन खोलने स्टार्ट किए, फ़ना को ऐसा लगा, जैसे आज वह कहीं की नहीं रह जाएगी। वह खुद की इज्जत को बचाने के लिए उस आदमी से भीख मांग रही थी।
लेकिन वह 6 फुट 3 इंच का आदमी 19 साल की फ़ना पर रहम नहीं खाता। उसने फ़ना के पैरों पर अपनी पकड़ इतनी टाइट कर रखी थी कि फ़ना हिल डुल भी नहीं पा रही थी। उसने फ़ना के मुंह को दूसरी तरफ कर दिया।
अब आगे-
उस आदमी ने फ़ना के था इस पर Grip tight कर दी थी।
फ़ना उस आदमी के कंट्रोल में आ गई थी। माइंड ब्लैक हो चुका था, शरीर सुन्न पड़ गया था और उस 6 फुट के आदमी के सामने, वह छोटी सी कुछ भी नहीं कर पा रही थी। उस आदमी ने फ़ना को अपने ओर करीब किया और उसके ऊपर झुकते हुए उसके आगोश में समा गया। फ़ना की दर्दनाक चीख पूरे कमरे में गूंजने लगी। उसके बाद यह सिलसिला सारी रात नहीं रुका था। उस कमरे में सिर्फ फ़ना के जोर-जोर से रोने की आवाज आ रही थी। दर्द से कराहने की आवाज आ रही थी। कुछ देर के बाद फ़ना बेजान सी हो गई थी और उसकी आंखों से सिर्फ आंसू बह रहे थे।
फ़ना ने आज नरक देख लिया था। फ़ना के शरीर पर इतने निशान थे कि कोई भी उन्हें देखकर अपनी आंखों से आंसू बहने से नहीं रोक सकता था। 19 साल की फ़ना समर्पित हो गई थी। आज उसने अपनी इज्जत के साथ-साथ सब कुछ खो दिया था।
उस आदमी ने फ़ना का चेहरा दोबारा नहीं देखा था। वह उसके साथ अपनी हैवानियत पर उतर आया था। उसकी हरकतों से साफ पता चल रहा था कि उसके सीने में दिल नहीं है। उसे फर्क नहीं पड़ रहा कि फ़ना पर क्या बीत रही है।
Plz छोड़. दो It's Hurting
अगली सुबह
उस होटल रूम के अंदर सन्नाटा था। फ़ना ने धीरे से अपनी आंखें खोली। उसके पूरे बदन में बहुत तेज दर्द हो रहा था। उसका शरीर काम ही नहीं कर रहा था। नाजुक सी फ़ना ने अपने हाथों की तरफ देखा, उसे चक्कर आ रहे थे। लेकिन कल रात का वह दर्दनाक किस्सा उसकी आंखों के सामने घूमने लगा। फ़ना जल्दी से उठकर बैठ गई। डर उस पर इतना हावी हो गया था कि वह उठकर यहां से भाग जाना चाहती थी।
फ़ना को फीवर आ गया था और उसे ब्लड भी दिखाई दे रहा था। सब कुछ हटा कर बेड की सफेद चादर को देखा, जो खून से रंगी हुई थी।
फ़ना के आंसू नहीं रुक रहे थे। फ़ना ने डरते हुए अपनी नजर चारों तरफ घुमाई तो उसे वह 6 फुट 3 इंच का आदमी विंडो के पास खड़ा दिखाई दिया। वह सिगरेट के कश भर रहा था। इस वक्त वह शर्टलेस था।
फ़ना ने अपनी सांस रोक ली। उसे डर लग रहा था कि अगर उसने थोड़ी सी भी आवाज की, तो यह आदमी वापस से उसके साथ वही सब कुछ करेगा।
फ़ना सिकुड़ गई। उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि यहां से हिले। उसने अपने पेट पर हाथ रखा हुआ था। क्योंकि उसे इतना पेन हो रहा था कि उसकी पेन की वजह से जान निकल रही थी।
फ़ना ने हिम्मत करके अपने कदम बेड के नीचे रखें और बेड के नीचे पड़े अपने फटे हुए कपड़ों को देखा और उसके पास में ही बेल्ट पड़ी हुई थी। जिसे देखकर एक पल के लिए फ़ना की आंखों में वापस से आंसू आ गए। उसन बेड के नीचे पड़े अपने उन कपड़ों को उठाकर, वह बिना किसी आवाज के पहनने लगी।
तभी, जो शख्स विंडो के पास खड़ा था, उसने अपना सर घूमाकर फ़ना की तरफ देखा। फ़ना के कपड़े फटे हुए थे। वह शख्स फ़ना की तरफ आया और उसने अपनी पैंट की पॉकेट से दो नोटों की गड्डी निकाली और फ़ना का हाथ पकड़ते हुए उसके हाथ में थमा दी। उसने फ़ना का हाथ लगभग मोड़ दिया था। फ़ना ने अपनी सांस रोक ली थी।
"यह है तुम्हारी कीमत, अब यहां से अपना यह मनहूस चेहरा लेकर दफा हो जाओ। तुम जैसी बाजरु औरत मुझे यहां नहीं चाहिए, तुम्हें देखकर मुझे उल्टी आ रही है।"
फ़ना ने जब उस शख्स के मुंह से यह जहरीले शब्द सुने, तो मानो जैसे किसी ने उसकी आत्मा को छलनी कर दिया हो। फ़ना उस शख्स से कुछ भी नहीं बोली और अब अपने धीरे-धीरे कदम दरवाजे की तरह बढ़ा रही थी।
उस शख्स ने फ़ना को दोबारा नहीं देखा और विंडो के पास जाकर खड़ा हो गया।
फ़ना रूम का डोर ओपन कर अपने तपते बदन के साथ बाहर जा रही थी। कॉरिडोर में जाते वक्त उसे बहुत शर्म आ रही थी, क्योंकि उसके शरीर पर इतने निशान थे और उसने जो ड्रेस पहनी हुई थी, वह भी फट चुकी थी।
वही बाहर से होटल के अंदर कुछ लेडिस आ रही थी। उन्होंने फ़ना की हालत देखी तो आपस में बातें करते हुए बोली, "इन जैसी लड़कियां अपना जिस्म बेचती है, इनको देखकर घिन आती है।" वह लड़कियां फ़ना को देखकर अजीब सा मुंह बना रही थी। अब ऐसे कपड़े पहन कर बाहर निकलेगी, तो जरूर ऊंच-नीच तो होगी ही ना, यह खुद की हालत की खुद ही जिम्मेदार होती है।
फ़ना, जो उन औरतों के शब्द सुन रही थी, उसके अंदर की आत्मा मर रही थी कि इसमें उसकी क्या गलती है। फ़ना को लंगड़ाते हुए देखकर एक औरत ने कहा, "इन जैसी लड़कियां पैसों के लिए कितना गिर जाती है। किसने कहा था इसे, ऐसे कपड़े पहन कर बाहर निकल, अब कर दिया ना किसी ने इसके साथ कुछ और बेशर्मों की तरह पैसे लेकर जा रही है। इन जैसी लड़कियां ओर कर भी क्या सकती हैं। यह गरीब लोग सिर्फ इसीलिए बने होते हैं, पैसों के भूखे. न जाने किसके साथ मुंह काला करके आई है और फिर अभी दूसरी लड़कों को फंसा कर उनकी जिंदगी बर्बाद करेगी।
देखो उसे, कैसे बेशर्म की तरह पैसों की गड्डियां लेकर जा रही है।" फ़ना उन औरतों के तीखे शब्द ओर बर्दाश्त नहीं कर पाई और रोते हुए वहां से भाग गई। बाहर जाकर फ़ना ने वह नोटों की गड्डियां देखी और उन्हें गुस्से में डस्टबिन में फेंक दिया और उसके बाद फ़ना वहां से चली गई।
वह 6 फुट 3 इंच का आदमी विंडो से बाहर देख रहा था और उसने फ़ना की हरकत को देख लिया था। फ़ना ने नोटों की गड्डी डस्टबिन में फेंक दी थी। यह देखकर उसकी आंखें तीखी हो गई। उस शख्स ने घूम कर बेड की तरफ देखा। बेड पर खून के धब्बे देखकर उसके भाव बदल गए।
रात का वक्त
फ़ना की रूममेट अपने काम से वापस आई। उसने कमरे की लाइट बंद देखी तो उसे ऑन किया। कमरे में कोई भी नहीं था। लेकिन अचानक से उसे किसी के जोर-जोर से रोने की आवाज सुनाई देने लगी।
पहले तो फ़ना की रूममेट निशा डर गई। फिर उसने गौर किया तो यह आवाज बाथरूम से आ रही थी। जिस कमरे में निशा और फ़ना रहती थी, वह कोई लग्जरियस कमरा नहीं था, बल्कि वह एक चोल का नार्मल कमरा था।डरते हुए निशा भी अपने कदम बाथरूम की तरह बढ़ा देती हैं।
जैसी ही उसने बाथरूम का नजारा देखा, वह दंग रह गई। फ़ना बाथरूम के अंदर शावर के नीचे बैठी हुई थी और फूट-फूट कर रो रही थी। वह जल्दी से भाग कर फ़ना के पास आई और उसने घबराते हुए कहा, "फ़ना, तुम रो क्यों रही हो?" जैसे ही उसने फ़ना को टच किया, उसने फील किया कि फ़ना को बहुत तेज बुखार है। उसने फ़ना की हालत देखी और उसके बदन पर मौजूद, जब उसने निशान देखे, तब उसे समझ में आया कि फ़ना के साथ क्या हुआ है।
फ़ना को उसने जोर से हक कर लिया। निशा को भी रोना आ गया था। उसने फ़ना का सफेद पड़ चुका चेहरा देखा। उसने जल्दी से फ़ना को अपने दुपट्टे से लपेट दिया और रोते हुए बोली, "यह सब तेरे साथ किसने किया, फ़ना।
अभी हमें पुलिस स्टेशन चलना चाहिए। हमें उस आदमी की कंप्लेंट करनी होगी।"
यह सुनते ही फ़ना चुप हो गई और उसने घबराते हुए कहा, "नो, नो, निशा, हम उसका कुछ भी नहीं कर सकते। वह बहुत स्ट्रॉन्ग है। सब उससे डरते हैं। भरी महफिल में जब वह मुझे घसीट कर ले जा रहा था। किसी एक भी शख्स ने मुझे उससे बचाने की कोशिश नहीं की। तू सोच भी नहीं सकती कि वह कितना पावरफुल है।"
फ़ना को ऐसे डरते हुए देखकर निशा ने गुस्से से कहा, "लेकिन हम उसे ऐसे तो नहीं छोड़ सकते, तुझे मालूम भी है कि तेरे साथ रेप हुआ है। तू एक रेप विक्टिम है। अगर हमने कंप्लेंट नहीं की तो तेरे साथ यह सब कुछ दोबारा भी हो सकता है।"
फ़ना ने निशा का हाथ पकड़ लिया। निशा फ़ना को रोते हुए बोली, "फ़ना, तुझे क्या हो गया है, क्या तुझे इंसाफ नहीं चाहिए। तेरे साथ गलत हुआ है, तेरे साथ उसने क्या किया है। तेरा मासूम सा चेहरा इस चीज की चीख कर गवाही दे रहा है।"
निशा को भी रोना आ रहा था, फ़ना को ऐसे देखकर। वह फ़ना का दर्द फील कर सकती थी। फ़ना ने निशा को जोर से हक कर लिया और जोर जोर से रोते हुए बोली, "मैं उसका कुछ भी नहीं कर सकती, पुलिस भी उसका ही साथ देगी। क्योंकि मैं एक गरीब लड़की हूं, मुझ पर ही इल्जाम लगाए जाएंगे।
हम उसका कुछ भी नहीं कर सकते।" "तो क्या तू उसे ऐसे जाने देगी" निशा गुस्से से बोली।
फ़ना कुछ भी नहीं बोलती तो निशा गुस्से से खड़ी होते हुए बोली, "तुझे जो करना है, कर, यह तेरी जिंदगी है, तुझे खुद के लिए स्टैंड नहीं लेना, तो मैं भी कुछ नहीं कर सकती।" फ़ना ने जब देखा कि निशा उससे नाराज हो गई, तो उसने निशा का हाथ पकड़ लिया और रोते हुए बोली, "निशा, तू भी मुझे छोड़ कर चली जाएगी। मॉम, डैड तो मुझे कब का छोड़ कर चले गए। कोई भी नहीं है, मेरा इस दुनिया में, तू तो कम से कम मेरे साथ रह, मुझे छोड़कर मत जाना, मैं तुझसे भीख मांगती हूं।"
फ़ना को ऐसे टूटा हुआ देखकर निशा ने फ़ना को जोर से हक कर लिया और वह अपनी दोस्त को ऐसे छोड़कर नहीं जा सकती थी। फ़ना काफी देर तक ऐसे ही निशा की गोद में सर रखकर रोती रही। कितना ही वक्त बीत गया था। दोनों दोस्तों के आंसू रुक ही नहीं रहे थे। फ़ना को इंसाफ ना दिला पाने का निशा को रिग्रेट था।
"मुझे छोड़कर कभी मत जाना निशा, तेरे सिवा कोई सहारा नहीं है मेरा, अगर तू भी चली गई, तो मैं क्या करूंगी।
मेरा जीने का दिल नहीं कर रहा निशा, मैं मरना चाहती हूं।"
निशा कुछ भी नहीं बोल रही थी। क्योंकि वह भी इतनी भावुक हो गई थी कि उसके भी गले से आवाज नहीं निकल रही थी।
निशा फ़ना के बारे में सब कुछ जानती थी। फ़ना की फैमिली में उसके मॉम डैड की डेथ के बाद उसके चाचा ने सारी प्रॉपर्टी हड़प ली और उस हादसे में उसके भाई का एक्सीडेंट हो गया था। फ़ना अपना सब कुछ खो चुकी थी। उसका भाई हॉस्पिटल में एडमिट था। फ़ना को पैसों की जरूरत थी। इसलिए वह बार क्लब गई थी। निशा भी फ़ना की कैसे ही मदद करती, क्योंकि वह भी तो एक गरीब लड़की थी। वह मुश्किल से 7000 रुपया महीना कमाती थी और ऐसे में वह कुछ भी कर लेती, लेकिन नामुमकिन था, फ़ना की हेल्प करना।
फ़ना ने डर की वजह से निशा को कसकर पकड़ रखा था। निशा ने फ़ना के बालों को सहलाते हुए कहा, "हमें हॉस्पिटल चलना होगा, तुझे बहुत तेज फीवर है।"
"मैं हॉस्पिटल नहीं जाऊंगी, वरना फिर से सब मेरा मजाक उड़ाएंगे। फिर से मेरे ही कैरेक्टर पर सवाल उठाया जाएगा। मैं कहीं नहीं जाऊंगी।" फ़ना इतना ज्यादा डर गई थी कि वह एक कमरे में बंद होकर अपनी पूरी जिंदगी बिताना चाहती थी। वह लोगों का सामना करने से डरने लगी थी।
निशा किसी तरह फ़ना को लेकर रूम में आई। फ़ना चल नहीं पा रही थी। उसके पेट में इतना तेज दर्द हो रहा था कि उसे सांस लेने में प्रॉब्लम हो रही थी। निशा ने किसी तरह उस को बेड पर लेटा दिया और उसके बाद उसने फ़ना को मेडिसिन दी और उसके पास में ही उसका हाथ पकड़ कर बैठी हुई थी। उसने उसके कपड़ों को धीरे-धीरे कर रिमूव किया और उससे भी फ़ना का जख्मी शरीर नहीं देखा गया। उसे जानवर ने फ़ना को मारा भी था। उसके हाथों में मौजूद निशान से साफ पता चल रहा था कि वह हैवान फ़ना के साथ क्या-क्या किया है।
फ़ना की हालत देखकर निशा के दिल में दर्द होने लगा था और वह भी फूट-फूट कर रोने लगी। लेकिन उसे खुद को संभालना होगा, वरना फ़ना को कौन संभालेगा।
निशा ने किसी तरह अपना रोना कंट्रोल किया और उसके बाद उसने फ़ना के ऊपर कंबल डाल दिया।
वह फ़ना के बगल में बैठी हुई थी। वह उसके सिर पर पट्टियां रख रही थी, ताकि उस का बुखार जल्दी उतर जाए।
अब धीरे-धीरे कर फ़ना का बुखार उतरने लगा। निशा ने उस को पलट दिया और फ़ना की पीठ पर वह अपने हल्के हाथों से मेडिसिन अप्लाई कर रही थी। बीच-बीच में फ़ना की चीख निकल जाती। निशा से वह जख्म देखे नहीं गए, इसलिए उसने अपने मुंह पर हाथ रख लिया।
फ़ना नींद में ही अपने मॉम डैड को बुला रही थी और उसका शरीर अभी भी कांप रहा था।
उसने फ़ना के चेहरे को देखा, जिस पर उंगलियों के काले निशान छपे हुए थे।
फ़ना का बुखार पूरी तरीके से उतर गया था। निशा अभी तक सदमे में थी। उसने देखा कि फ़ना सो गई। इसलिए वह जल्दी से फ़ना के लिए कुछ कुक करने लगी।
अचानक से ही फ़ना नींद में जोर-जोर से चिल्लाने लगी। "मुझे छोड़ दो, मुझे जाने दो, आई एम सॉरी, मैं कभी आपको अपनी शक्ल नहीं दिखाऊंगी, प्लीज, छोड़ दीजिए मुझे, हर्ट हो रहा है, दुख रहा है, आह्ह. मम्मा!"
Milte hai agle chapter me😊😊