Avantika in Hindi Thriller by Aarti Garval books and stories PDF | अवंतिका: छलावा और हकीकत - 2

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अवंतिका: छलावा और हकीकत - 2

सूरज की पहली किरण जब रामपुर गाँव पर पड़ी, तो रोज़मर्रा की शांति एक खौफनाक चीख के साथ टूट गई। सुबह मवेशी चराने निकले कुछ ग्रामीणों की नज़र जब गाँव के बहार स्थित पुराने शिव मंदिर के खंडहर पर पड़ी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अंदर विक्रम की लहूलुहान लाश बेजान पड़ी थी।

​कुछ ही पलों में यह खबर पूरे गाँव में आग की तरह फैल गई। लोग खंडहर के बाहर इकट्ठा होने लगे। हर कोई सहमा हुआ था और आपस में फुसफुसा रहा था

— "अरे, ये तो विक्रम है!", "कल रात तक तो यह यहीं था, किसने इतनी बेरहमी से मार दिया इसे?"

​सूचना मिलते ही स्थानीय थाने की पुलिस जीप सायरन बजाती हुई धूल उड़ाते हुए मौके पर पहुँची। गाड़ी का दरवाजा खोलकर बाहर निकले इंस्पेक्टर करण राठौड़। करण अपने इलाके में अपनी सख्त और तेज-तर्रार जाँच के लिए जाने जाते थे। उन्होंने घटनास्थल पर पहुँचकर सबसे पहले भीड़ को दूर हटाया और मुआयना करना शुरू किया।

​विक्रम की लाश को देखकर साफ़ पता चल रहा था कि उसकी छाती पर किसी धारदार हथियार से गहरे वार किए गए थे।

​इंस्पेक्टर करण ने अपने जूते से ज़मीन का मुआयना किया। वहाँ संघर्ष के निशान साफ थे, लेकिन कातिल ने बहुत सफाई से अपने पैरों के निशान मिटा दिए थे। हालांकि, विक्रम के पास ही ज़मीन पर एक छोटी सी चीज़ गिरी हुई थी—एक पुराना, काले रंग का डिजिटल पेनड्राइव, जो शायद हाथापाई के दौरान किसी की जेब से छिटक कर दूर जा गिरा था।

​करण ने झुककर उस पेनड्राइव को उठाया, एक साफ रुमाल में लपेटा और अपने कनिष्ठ अधिकारी को सौंपते हुए बोले, "इसे सील कर लो। कातिल ने भले ही बहुत चालाकी से खुद को बचाने की कोशिश की हो, लेकिन यह छोटा सा पेनड्राइव ही हमें उसके गिरेबाँ तक पहुँचाएगा।ईसमे  हमें जरुर कुछ सुराग मीलेगा।

गाँव के नुक्कड़ों और चौपालों पर हर जुबान पर बस एक ही चर्चा थी—जो लड़का कल तक शहर की बड़ी-बड़ी डींगें हाँकता था और अपनी चाल-ढाल व रसूख का रौब झाड़ता था, वह आज इस बेजान हालत में कैसे पहुँच गया? लोगों की आँखों में हैरानी के साथ-साथ एक अनकहा खौफ भी तैर रहा था कि आखिर इस मौत के पीछे की असली कहानी क्या है।

​उधर, घटनास्थल पर शुरुआती मुआयना पूरा करने के बाद, इंस्पेक्टर करण राठौड़ ने कड़े निर्देशों के साथ विक्रम के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाया। इसके बाद उन्होंने अपनी खाकी वर्दी की जेब से एक पुरानी चमड़े की डायरी और पेन निकाला। आसपास फैली खामोशी के बीच, उन्होंने डायरी का एक नया पन्ना पलटा और उसमें सबसे ऊपर सख्त और गंभीर अक्षरों में पहला सवाल लिखा—

​"आखिर इस वीरान और बंजर खंडहर में विक्रम को किसने बुलाया था? और उस रात उसके पास ऐसा कौन सा खतरनाक राज़ या सामान था, जिसकी कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ी?

यह महज़ किसी कत्ल की अनसुलझी गुत्थी नहीं थी, बल्कि यह उस प्रलयंकारी बवंडर की पहली आहट थी, जो रामपुर गाँव की शांत दिखने वाली मिट्टी के नीचे दफ़्न हर सड़े-गले राज़ और खौफनाक सच को जड़ से उखाड़कर सतह पर लाने वाला था।"
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