(कमरे में हल्की रौशनी जल रही है। सिमरन खिड़की के पास बैठी है, उसकी आँखों से आँसू टपक रहे हैं। बाहर बारिश की हल्की बूँदें गिर रही हैं। हवा में दर्द और सन्नाटा घुला हुआ है।)
(तभी दरवाज़ा धीरे से खुलता है। अंदर से करन आता है। उसके हाथ में उसका टेडी बियर है। उसकी आँखों में चिंता और मासूमियत है।)
करन (धीरे से, काँपती आवाज़ में)बोला –
परी… तुम रो क्यों रही हो?
(सिमरन अपने आँसू पोंछती है, मुस्कुराने की कोशिश करती है।)
सिमरन (धीरे से) बोली —
कुछ नहीं करन… बस… आँखों में धूल चली गई थी।
(करन उसका चेहरा पकड़कर ऊपर उठाता है। उसकी बड़ी लाल आँखें आँसुओं से भरी हैं।)
करन (निराश होकर) बोला–
झूठ बोल रही हो परी… तुम रो रही थी।
(धीरे से सिसकने लगता है) —
अगर मेरी परी रोएगी… तो मैं भी रोऊँगा…
(वो अपनी हथेलियों से सिमरन के गालों से आँसू पोंछने की कोशिश करता है। लेकिन खुद की आँखों से आँसू बहने लगते हैं।)
सिमरन (थोड़ी घबरा कर)बोली –
अरे नहीं करन, प्लीज़ मत रो… मैं ठीक हूँ ना…
(वो करन को अपनी गोद में खींच लेती है, उसके बाल सहलाती है। करन धीरे-धीरे उसकी गोद में सिर रखकर सुबकने लगता है। सिमरन की आँखें भी भर आती हैं, लेकिन वो हिम्मत दिखाती है।)
सिमरन (मुस्कुराते हुए, धीरे-धीरे उसके बालों को सहलाते हुए)बोली– अब देखो, मैं रोई भी नहीं… और आप भी हँसो ज़रा…
(करन धीरे-धीरे मुस्कुराता है। सिमरन उसकी मासूम मुस्कान देखकर थोड़ा संभलती है। फिर वह अपने गले से एक छोटा सा सुनहरा लॉकेट निकालती है। उसमें एक चमकती हुई नीली रौशनी है।)
सिमरन (धीरे से) बोली–
ये लो करन… ये आपके लिए है।
करन (आश्चर्य से)बोला –
ये क्या है, परी?
सिमरन (मुस्कुराते हुए) बोली–
ये एक जादुई लॉकेट है… जब कभी आपको डर लगे, या आप उदास हो, बस इसे दिल से पकड़ लेना… ये आपको मदद करेगा।
(करन के चेहरे पर एक चमक आ जाती है। वो लॉकेट अपने हाथ में पकड़कर बड़ी श्रद्धा से देखता है।)
करन (खुश होकर)बोला –
सच में, परी? ये मेरी रक्षा करेगा?
सिमरन (धीरे से) बोली -
हाँ करन, हमेशा।
(करन के चेहरे पर मासूम खुशी है। वो एक पल के लिए सिमरन की ओर देखता है, फिर अचानक बिना सोचे समझे, बाल सुलभ सादगी से सिमरन के दोनों गालों पर हल्का सा किस करता है।)
(सिमरन का दिल एक पल को थम जाता है। उसकी साँसें तेज़ हो जाती हैं। वो कुछ कह नहीं पाती।)
सिमरन (धीरे से) बोली –
करन… ये क्या किया आपने?
करन (मासूमियत से मुस्कुराते हुए)बोला –
मेरी परी अब रोएगी नहीं ना? ये हैप्पी किस था… जिससे सारे दुख भाग जाते हैं।
(सिमरन हल्की सी हँसी हँसती है, पर उसके अंदर एक गहरी सिहरन दौड़ जाती है। वो जानती है — ये मासूमियत भरा चुंबन था… पर दिल के किसी कोने में पुराने करन की छाया जागी थी।)
(वो करन के माथे को चूमती है और धीरे से कहती है…)
सिमरन (धीरे से)बोली –
आप सदा ऐसे ही रहो करन… मासूम, सच्चे और मेरी परी के सबसे प्यारे दोस्त…
(करन उसके सीने से लग जाता है, और कुछ ही पलों में नींद में चला जाता है। सिमरन उसकी लाल आँखों को निहारती रहती है। उसकी आँखों में प्यार और डर — दोनों झलकते हैं।)
खिड़की के बाहर चाँदनी चमक रही है, और उस रोशनी में सिमरन का आँसू गिरता है —
जैसे कोई अनकही दुआ… करन की मासूमियत को बचाने की कोशिश कर रही हो।
(अँधेरा फैला है, स्ट्रीट लाइट्स टिमटिमा रही हैं। सिमरन और करन पार्क से लौट रहे हैं। करन अपने टेडी को बाँहों में दबाए हँसते हुए कुछ बोल रहा है।)
करन (मासूमियत से) बोला–
परी, आज तो बहुत मज़ा आया ना? मैंने झूला सबसे ऊँचा झुलाया!
सिमरन (मुस्कुराते हुए)बोली –
हाँ मेरे छोटे शैतान, पर अब जल्दी चलो… रात ज़्यादा हो गई है।
(दोनों सड़क पार करते हैं। ठंडी हवा चलती है। अचानक सिमरन को किसी की फुसफुसाहट सुनाई देती है। वो ठिठक जाती है। वहाँ एक काली परछाईं खड़ी है।)
अचानक एक डरावनी चुड़ैल आगे आती है — लंबे बाल, सफेद साड़ी, लाल आँखें। वो सिमरन का हाथ कसकर पकड़ लेती है।
सिमरन (चीखते हुए) बोली–
आऽऽह!! छोड़ो मुझे!!
(उसकी कलाई से खून टपकने लगता है। सिमरन दर्द से झुक जाती है।)
सिमरन (साँस टूटती हुई)बोली –
करन… भागो! जल्दी भागो यहाँ से!!
(करन डर से काँपने लगता है। उसकी लाल आँखें चमकने लगती हैं।
वो सिमरन की तरफ देखता है, फिर उस चुड़ैल की तरफ। उसकी साँसें तेज़ हो जाती हैं।)
करन (धीरे से, काँपती आवाज़ में) बोला–
मेरी… परी को… दर्द?
(वो अचानक ज़मीन पर झुकता है, सिर पकड़ लेता है। उसकी आँखों की लालिमा और गहरी हो जाती है। उसका मासूम चेहरा अब कठोर होने लगता है। आवाज़ भारी हो जाती है।)
करन (गुस्से से गरजते हुए)बोला –
कोई भी… मेरी सिमरन को छू नहीं सकता!
(चुड़ैल चौंकती है। करन अब बच्चा नहीं — वही पुराना, शक्तिशाली करन वैम्पायर रूप में खड़ा है। उसकी आँखें लाल आग की तरह जल रही हैं। हवा में बिजली सी दौड़ती है।)
करन (चीखते हुए)बोला –
भाग यहाँ से… वरना जला दूँगा तुझे!!
(वो चुड़ैल पर झपटता है। हवा का तेज़ झोंका आता है। कुछ सेकंड में सब अंधेरा हो जाता है। चुड़ैल चीखती है और राख बनकर उड़ जाती है।)
(सन्नाटा।)
सिमरन (हैरान होकर, धीरे से) बोली–
करन…?
(करन धीरे-धीरे उसकी ओर मुड़ता है। उसके चेहरे पर वही पुरानी तीव्रता है।)
करन (गहरी आवाज़ में)बोला –
सिमरन… तुम ठीक तो हो ना? मैंने कहा था ना… मैं कभी तुम्हें कुछ होने नहीं दूँगा।
(सिमरन के आँखों में आँसू हैं। उसे लगता है — करन को सब याद आ गया।।वो उसे गले लगाने बढ़ती है।)
सिमरन (रोते हुए) बोली –
करन… आपको सब याद आ गया ना?
(करन मुस्कुराता है। उसकी साँसें थमने लगती हैं। अचानक उसकी आँखें फिर फीकी पड़ने लगती हैं। वो सिर पकड़कर लड़खड़ाता है।)
करन (धीरे से, लड़खड़ाती आवाज़ में)बोला –
परी… मुझे नींद आ रही है…
(सिमरन घबरा जाती है, उसे पकड़कर सहारा देती है।)
सिमरन (रोते हुए)बोली –
करन! आँखें खोलो… प्लीज़!
(वो उसे गोद में उठाकर किसी तरह घर ले जाती है।)
(सिमरन करन को बिस्तर पर लिटाती है। उसका चेहरा अब फिर बच्चे जैसा हो गया है।।वो मासूम नींद में मुस्कुरा रहा है। सिमरन के चेहरे पर आँसू बह रहे हैं।)
सिमरन (धीरे से, खुद से)बोली –
जब भी मैं आपको खोने लगती हूँ… आप लौट आते हो… पर हर बार… किसी और रूप में।
(वो उसके बालों को सहलाती है। खिड़की से चाँद की रौशनी उन दोनों पर पड़ती है। कमरे में एक रहस्यमय शांति है। सिमरन उसके माथे पर चुंबन करती है और धीरे से फुसफुसाती है…)
सिमरन (धीरे से)बोली –
शायद ये आपकी सजा है करन… और मेरा इम्तिहान।
करन मासूम नींद में है, उसके गले में वही नीला लॉकेट चमक रहा है।
उस लॉकेट की रौशनी हल्की-हल्की बढ़ती जाती है… जैसे कोई नया रहस्य खुलने वाला हो।