(कमरे में घना अंधेरा है। टूटी हुई मोमबत्तियाँ, खून के छींटे और सन्नाटा। अचानक करन की उंगलियाँ हल्की-हल्की हिलती हैं। उसकी सांसें भारी और गहरी हो जाती हैं। धीरे-धीरे उसकी लाल आंखें खुलती हैं — अब उनमें इंसानियत का कोई नामोनिशान नहीं।
वो पूरी तरह वैंपायर बन चुका है।)
(संगीत – धीमी डरावनी धुन)
करन (धीरे से, गहरी आवाज़ में) बोला -
सिमरन... कहाँ हो तुम...?
(वो बिस्तर से उठता है, उसके होंठों पर एक भयावह मुस्कान।
सिमरन, डर के मारे कोने में सिमटी खड़ी है, आँखों में आँसू भरे हैं।)
सिमरन (काँपती आवाज़ में) बोली -
करन… ये आप क्या बन गए हो…?
कृपया… खुद पर काबू रखो…
करन (धीरे से हँसते हुए) बोला -
अब मैं वो नहीं जो पहले था…अब मुझे सिर्फ़ खून चाहिए… और वो खून सिर्फ़ तुम्हारा होगा…
(वो झटके से आगे बढ़ता है और सिमरन को बिस्तर पर गिरा देता है।
उसके हाथ सिमरन के कंधों पर कसकर जकड़े हुए हैं। सिमरन रो रही है, उसकी साँसें तेज़ हैं।)
सिमरन (रोते हुए) बोली -
करन, रुक जाओ… ये आप नहीं हो…आपका प्यार मुझे कभी चोट नहीं पहुँचा सकता…
करन (भयावह आवाज़ में) बोला -
प्यार...? अब वो सिर्फ़ एक ज़हर है…जो मुझे हर पल जलाता है…
(वो उसके चेहरे के बहुत करीब आता है। सिमरन डर के मारे आँखें बंद कर लेती है। अचानक उसे मौका मिलता है — वो पूरी ताकत से उसे धक्का देती है और बिस्तर से गिरा देती है।)
सिमरन (चिल्लाते हुए) बोली -
नहीं! मैं हार नहीं मानूँगी!
(वो दरवाजे की ओर भागती है। करन पीछे से गरजता हुआ उठता है, लेकिन तब तक सिमरन घर से बाहर निकल जाती है। बारिश शुरू हो चुकी है। सिमरन barefoot (नंगे पैर) सड़कों पर भाग रही है, आँखों से आँसू और बारिश एक साथ गिर रहे हैं।)
(सिमरन एक पुराने जंगल में पहुँचती है।
वहाँ एक टूटी झोपड़ी है — जिसके अंदर दीपक की हल्की लौ जल रही है। वो दरवाजा खटखटाती है, हाँफती हुई अंदर घुसती है।
अंदर एक बूढ़ा जादूगर बैठा है — सफ़ेद बाल, लंबी दाढ़ी, और रहस्यमयी आँखें।)
जादूगर (धीरे से) बोला -
कौन है तू, बेटी… और इतनी रात को यहाँ क्यों आई है?
सिमरन (रोते हुए, हाँफती आवाज़ में) बोली -
वो… वो मेरा पति करन…वो अब इंसान नहीं रहे… वो एक वैंपायर बन गए हैं…कृपया, उन्हें बचाइए…
(जादूगर चुपचाप उसकी आँखों में देखता है।)
जादूगर (गंभीर आवाज़ में) बोला -
करन पर पुराना श्राप है…जो इंसान के प्यार से जुड़ा था।
अब उसे बचा सकती है, तो सिर्फ़ प्यार की ताकत ही।
सिमरन (हैरान होकर) बोली -
प्यार…? पर कैसे…? वो तो अब मुझसे नफरत करते हैं…
जादूगर (धीरे से) बोला -
सच्चा प्यार कभी मरता नहीं, बेटी। तुझे बस उसके दिल को छूना होगा…न खून से, न जादू से…बल्कि अपनी रूह से।
(वो एक पुराना ताबीज़ निकालता है और सिमरन को देता है।
ताबीज़ में वही प्रतीक बना है जो पहले करन के लकेट पर था।)
जादूगर (धीरे से) बोला -
ये ताबीज़ उसके दिल के पास रखना…अगर वो तेरा नाम पुकार ले — तो समझ लेना, वो वापस लौट आया। वरना… वो सदा के लिए रात का हिस्सा बन जाएगा।
(सिमरन ताबीज़ को कसकर अपने सीने से लगाती है। आँखों में आँसू और हिम्मत दोनों हैं। वो वापस जाने के लिए मुड़ती है।)
सिमरन (धीरे से) बोली -
चाहे मुझे मरना पड़े… पर मैं उन्हें छोड़ूँगी नहीं।
“प्यार अगर सच्चा हो… तो वो मौत को भी मात दे सकता है…
लेकिन सवाल ये है — क्या सिमरन का प्यार इतना मज़बूत है…?”
(ठंडी हवाएँ चल रही हैं। आसमान में काले बादल गरज रहे हैं।
सिमरन अपने हाथ में ताबीज़ कसकर पकड़े हुए जंगल के रास्ते पर चल रही है। उसके कपड़े भीग चुके हैं, चेहरा थकावट और डर से भरा है।)
सिमरन (धीरे से, खुद से) बोली -
मुझे डर नहीं लग रहा…बस करन को वापस पाना है… किसी भी कीमत पर…
(वो आगे बढ़ती है, तभी पीछे से ठंडी हवा का झोंका आता है।
सिमरन रुकती है। उसके चारों ओर काली धुंध फैलने लगती है।
अचानक एक परछाई पीछे से आती है — एक भयानक वैंपायर।)
वैंपायर (भयावह आवाज़ में) बोला -
इतनी दूर… अकेली… और वो भी उस दानव के लिए जो तुझे ही निगल जाएगा?
(सिमरन पलटकर देखती है — उसके हाथ में ताबीज़ चमक रहा है।)
सिमरन (डरते हुए) बोली -
नहीं! पीछे हट जाओ! ये ताबीज़ मुझे बचाएगा!
वैंपायर (हँसते हुए) बोला -
वो ताबीज़ अब मेरा है!
(वो झपटता है और सिमरन के हाथ से ताबीज़ छीन लेता है।
सिमरन चिल्लाती है — ताबीज़ उसके हाथ से छूटकर सीधे समुद्र में गिर जाता है। लहरें उसे अपने अंदर निगल लेती हैं।)
सिमरन (रोते हुए) बोली -
नहीं!! मेरा ताबीज़…!
वैंपायर (गर्जना करते हुए) बोला -
अब देख, बिना जादू के तेरा क्या हाल होता है…
(वो सिमरन पर झपटता है। सिमरन पीछे हटने की कोशिश करती है पर गिर जाती है। वैंपायर अपने दाँत उसके गले के पास लाता ही है कि तभी आकाश से तेज़ चमकती लाल आँखें और काले पंखों वाला करन उतरता है!)
(तेज़ हवा का झोंका, बिजली की कड़क)
(करन सिमरन के सामने आकर खड़ा हो जाता है, अपनी बाँहों से उसे अपनी छाती से लगाता है, और अपने विशाल काले पंखों से उसे ढँक लेता है।)
करन (गहरी डरावनी आवाज़ में) बोला -
पीछे हट जा… ये लड़की मेरी है।
वैंपायर (मुस्कुराते हुए) बोला -
तेरी? तू तो अब अधमरा इंसान है, करन!
करन (गुस्से से गरजते हुए) बोला -
इस लड़की के ख़ून की एक-एक बूंद मेरी है…
इसका जिस्म… इसकी साँसें… सिर्फ़ मेरी हैं!
(वो वैंपायर की ओर झपटता है। दोनों के बीच हवा में भयंकर टकराव होता है। चमकदार बिजली, लहू की बूंदें, और दानवी चीखें हवा में गूंजती हैं।)
(आख़िरकार करन वैंपायर को पकड़कर दूर जंगल की ओर फेंक देता है। वो दानव चीखता हुआ धुएं में बदलकर गायब हो जाता है।)
(सन्नाटा छा जाता है। सिमरन ज़मीन पर गिरी हुई काँप रही है।
करन धीरे-धीरे उसके पास आता है और घुटनों के बल बैठकर उसके चेहरे को देखता है। अब उसकी आँखों में गुस्से की जगह दर्द है।)
करन (धीरे से, टूटी आवाज़ में) बोला -
तुम… ठीक हो ना, सिमरन?
सिमरन (आँखों में आँसू) बोली -
आप… आप आ गए…
(करन बिना जवाब दिए उसे अपनी बाँहों में उठा लेता है। अपने पंखों को फैलाकर उड़ता है। सिमरन उसके सीने से लगी हुई, काँपते हुए कहती है —)
सिमरन (धीरे से) बोली -
करन… मुझे डर नहीं लगता… जब आप साथ हो।
करन (धीरे से, आँखें बंद करते हुए) बोला -
मत डरना… अब कोई तुझे नहीं छू सकता…
(वो दोनों आसमान में गायब हो जाते हैं — हवेली की दिशा में उड़ते हुए। बारिश धीरे-धीरे थम जाती है… और चाँद फिर से निकल आता है।)
“प्यार और अंधकार की इस जंग में, सिमरन ने करन को बचाया…
पर सवाल अब भी बाकी था —
क्या करन सच में इंसान बन पाएगा,
या वो हमेशा के लिए रात का राजकुमार रहेगा?”