माहिरा को रेहान से बेइंतहा मोहब्बत थी। एक दिन उसने हिम्मत करके अपने दिल की बात रेहान को बता दी। मगर रेहान ने उसकी भावनाएँ समझने के बजाय सबके सामने उसका मज़ाक उड़ाया।
“तुम मेरे लायक नहीं हो,” उसने बेरुखी से कहा।
वहाँ मौजूद लोग हँसने लगे। माहिरा की आँखों में आँसू आ गए। उसने फैसला कर लिया कि अब रेहान के लिए उसके दिल में प्यार नहीं, सिर्फ़ नफ़रत रहेगी।
वक्त बीतता गया और दोनों अपनी-अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ गए। उनके परिवारों ने उनके लिए रिश्ते तलाशने शुरू कर दिए। माहिरा के घरवालों ने उसके लिए एक रिश्ता पसंद किया, तो उसने उनकी खुशी के लिए हाँ कर दी।
रेहान के परिवार ने भी उसके लिए एक लड़की पसंद की। उसने भी अपने घरवालों की खुशी के लिए शादी के लिए हामी भर दी। दोनों ने तस्वीर नहीं देखी; उन्हें अपने परिवार के फैसले पर भरोसा था और उन्होंने कोई सवाल नहीं किया। दोनों परिवार तैयारियों में जुट गए। माहिरा और रेहान को अंदाज़ा नहीं था कि उनकी शादी एक-दूसरे से तय हुई है।
शादी का दिन आ गया। रस्में पूरी हुईं और माहिरा अपने कमरे में बैठी रेहान का इंतज़ार कर रही थी।
कुछ देर बाद रेहान कमरे में आया। माहिरा को देखते ही उसके कदम रुक गए। माहिरा ने भी सिर उठाकर उसे देखा। दोनों कुछ देर खामोश रहे। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि उनकी शादी एक-दूसरे से हुई है।
माहिरा की आँखों में रेहान के लिए नफ़रत साफ़ दिखाई दे रही थी। वह अपनी किस्मत को कोस रही थी। उसे अफ़सोस था कि उसने बिना लड़के को देखे शादी के लिए हाँ क्यों की।
“मेरी किस्मत इतनी खराब कैसे हो सकती है कि मुझे तुमसे शादी करनी पड़ी?” माहिरा ने गुस्से में कहा।
रेहान ने भी गुस्से से जवाब दिया, “जैसे मैं तुमसे शादी करके बहुत खुश हूँ! मुझे भी नहीं पता था कि मेरी शादी तुमसे होगी।”
मुझे पहले पता होता, तो मैं कभी हाँ नहीं करती। तुमने सबके सामने मेरी मोहब्बत का मज़ाक उड़ाया था। मैं वो दिन कभी नहीं भूल सकती।”
रेहान झुँझला गया। “उस बात को इतने साल हो गए। अब भी उसी को लेकर बैठी हो?”
“तुम्हारे लिए वो सिर्फ़ एक बात थी, लेकिन मेरे लिए मेरी बेइज़्ज़ती थी। लोग मुझ पर हँस रहे थे और तुम खड़े होकर देख रहे थे।”
“मैंने जो कहा, कह दिया। अब उसे बदल नहीं सकता,” रेहान ने सख्ती से कहा।
“मुझे तुम्हारी सफ़ाई नहीं चाहिए। मेरे दिल में तुम्हारे लिए सिर्फ़ नफ़रत है,” माहिरा ने कहा।
रेहान ने जवाब दिया, “और मुझे भी तुमसे उम्मीद नहीं है।”
दोनों देर रात तक बहस करते रहे। आखिर थककर दोनों सो गए। सुबह रेहान ने कहा, “घरवालों के सामने कल रात की बात मत छेड़ना।”
माहिरा ने उसे घूरकर कहा, “तुम मेरी बेइज़्ज़ती भूल सकते हो, मैं नहीं।” तभी बाहर से नाश्ते के लिए आवाज़ आई। माहिरा ने मन में ठान लिया कि वह रेहान को कभी अपने दिल में जगह नहीं देगी।
क्या वक्त उन दोनों के बीच की दूरियों को मिटा पाएगा, या उनकी शादी सिर्फ़ नफ़रत और तकरार में ही गुज़र जाएगी? जानने के लिए पढ़ते रहिए “ये कैसी मोहब्बत?”