Devil ki Daastaan in Hindi Love Stories by Sonam Brijwasi books and stories PDF | चला गया करण

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चला गया करण

(कुछ दिन बीत गए थे। हवेली का माहौल अब वही नहीं रहा था जो पहले था। जहाँ कभी प्यार और हंसी गूंजती थी, अब एक अजीब सी दूरी और खामोशी छा गई थी।)

(करन बेचैन था। वह हमेशा की तरह शांत नहीं था। उसकी आँखों के नीचे गहरे काले घेरे थे, और वह अक्सर खिड़की से बाहर टकटकी लगाए देखता रहता था। उसके मन में एक ही ख्याल बार-बार कौंध रहा था—*अगर सिमरन गर्भवती है, तो?*

*एक इंसान और एक वैंपायर का बच्चा... क्या वह इंसान होगा? या वैंपायर? या कोई ऐसा राक्षस जिससे दुनिया कभी नहीं निपट पाई?*
*क्या यह बच्चा सिमरन को मार देगा? या मुझे?*
*यह श्राप अगली पीढ़ी में कैसे फैलेगा?*

ये सवाल उसे रातों को जगाए रखते थे। वह सिमरन से बात करने से कतराता था। जब भी सिमरन उसके पास आती, वह बहाने बनाकर कमरा छोड़ देता या अपनी किताबों में खो जाता।)

(सिमरन यह सब देख रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि करन क्यों बदल गया है। क्या वह फिर से उस श्राप के चंगुल में फंस रहा है? या क्या उसे उसके बारे में पता चल गया है?)

(एक शाम, सिमरन ने हिम्मत जुटाई और करन के स्टडी रूम में गई। करन मेज पर बैठा हुआ था, सामने कई पुरानी किताबें खुली हुई थीं। वह किसी चीज़ को बहुत गौर से पढ़ रहा था।)

सिमरन (धीमे स्वर में) बोली - 
करन जी... आप ठीक तो हैं?
आप पिछले कुछ दिनों से मुझसे बात नहीं कर रहे। क्या मैंने कोई गलती की है?

(करन चौंकता है। वह तुरंत किताब बंद कर देता है और सिमरन की ओर देखता है। उसकी आँखों में एक अजीब सा डर और दर्द है।)

करन (रूखे स्वर में) बोला - 
नहीं, सिमरन। तुमने कोई गलती नहीं की।
बस... मुझे कुछ काम है। कुछ शोध करना है।
तुम जाओ, आराम करो।

सिमरन (नाराजगी और चिंता के साथ) बोली - 
कौन सा शोध? आप मुझसे छिपा क्या रहे हैं?
क्या आपको फिर से वो लाल आँखें वाली समस्या हो रही है?

(करन उठता है और सिमरन से दूर खड़ा हो जाता है, जैसे उसे छूने से भी डर लग रहा हो।)

करन (गहरी सांस लेते हुए) बोला - 
सिमरन, कृपया... मुझसे दूर रहो।
अभी के लिए।
मुझे एकांत चाहिए।

सिमरन (आँखों में आंसू लिए) बोली - 
एकांत? हमारे बीच?
करन जी, हम पति-पत्नी हैं। अगर कोई समस्या है, तो हम मिलकर सुलझाएंगे।
आप मुझसे दूर क्यों भाग रहे हैं?

(करन मुड़ता है और सिमरन की आँखों में देखता है। उसकी नजरें सिमरन के पेट पर जाती हैं, भले ही अभी तक कोई बदलाव दिखाई नहीं दे रहा था। लेकिन उसे एक अजीब सी गंध महसूस होती है—एक नई, नाजुक, लेकिन शक्तिशाली ऊर्जा।)

करन (मन ही मन) सोचता है - 
*क्या यह सच है? क्या वह सच में...*

(वह अपने विचारों को झटकता है। वह नहीं चाहता कि सिमरन को पता चले कि वह जानता है या शक करता है। वह नहीं चाहता कि सिमरन डरे।)

करन (ठंडे स्वर में) बोला - 
मैंने कहा, जाओ सिमरन।
मुझे अकेले रहने दो।

(सिमरन स्तब्ध रह जाती है। करन का यह रवैया उसके लिए नया और चुभने वाला था। वह बिना कुछ कहे कमरे से बाहर निकल जाती है। आंसू उसकी आँखों से बहने लगते हैं।)

(बाहर निकलकर, सिमरन अपने पेट पर हाथ रखती है।)

सिमरन (फुसफुसाते हुए) बोली - 
देख रहे हो, छोटे से?
आपके पापा हमसे डर रहे हैं।
लेकिन मैं नहीं डरूंगी।
मैं उन्हें समझाऊंगी। चाहे कितना भी समय लगे।

(उधर, स्टडी रूम में, करन वापस अपनी कुर्सी पर बैठ जाता है। वह उस पुरानी किताब को फिर से खोलता है, जिसके पन्नों पर एक अधूरा मंत्र लिखा है—*"वैंपायर और मानव का संयोग... परिणाम: अनिश्चित।"*

(करन अपना सिर हाथों में दबा लेता है।)

करन (दर्द भरी आवाज़ में) बोला - 
अनिश्चित...
यही तो सबसे बड़ा खतरा है।

"दूरी ने प्रेम को नहीं, बल्कि डर को बढ़ाया था।
करन अपने अज्ञात भविष्य से डर रहा था।
और सिमरन... सिमरन अपने पति के दिल की दीवारों को तोड़ने की कोशिश कर रही थी।"

(रात का गहरा सन्नाटा। हवेली के मुख्य दरवाजे पर एक पुराना सूटकेस रखा हुआ है। बाहर मूसलाधार बारिश हो रही है, जैसे आसमान भी इस विछोड़ के लिए रो रहा हो।)

(करन अपने कमरे में खड़ा है। वह खिड़की से बाहर देख रहा है, लेकिन उसकी नजरें कहीं और हैं—सीधे सिमरन के कमरे की ओर, जहाँ की रोशनी अभी भी जल रही है। उसके हाथ कांप रहे हैं। उसने फैसला कर लिया है। वह जानता है कि अगर वह यहाँ रहा, और बच्चा पैदा हुआ... तो उसका वैंपायर स्वभाव जाग सकता है। वह बच्चे को 'शिकार' या 'प्रतिद्वंदी' समझ सकता है। यह जोखिम वह नहीं ले सकता।)

करन (खुद से, टूटी आवाज़ में) बोला - 
अगर मैं चला गया... तो वो सुरक्षित रहेगी।
बच्चा... चाहे वो कुछ भी हो... उसे एक इंसानी माँ मिलेगी, एक राक्षस पिता नहीं।
यही मेरा प्यार है... उसे छोड़ देना।

(वह सूटकेस उठाता है। उसके कदम भारी हैं, जैसे हर कदम उसके दिल को चीर रहा हो। वह सीढ़ियों से नीचे उतरता है। हवेली का हर कोना उसे पुकार रहा है—*मत जाओ, करन।* लेकिन वह अपने कानों पर हाथ रख लेता है।)

(वह मुख्य दरवाजे की ओर बढ़ता है। तभी, पीछे से एक आवाज़ आती है।)

सिमरन (कांपती हुई, लेकिन दृढ़ आवाज़ में) बोली - 
कहाँ जा रहे हैं आप, करन जी?

(करन रुक जाता है। वह पलटता नहीं। उसकी पीठ सिमरन की ओर है।)

करन (ठंडे स्वर में) बोला - 
जा रहा हूँ, सिमरन।
हमेशा के लिए।

सिमरन (दौड़कर उसके पास आती है, उसका हाथ पकड़ लेती है) बोली - 
हमेशा के लिए? क्यों?
क्या मैंने कुछ गलत किया? बताइए मुझे!

(करन धीरे से अपना हाथ छुड़ाता है। वह सिमरन की आँखों में देखने की हिम्मत नहीं जुटा पाता, क्यों कि अगर वह देखेगा, तो वह रुक जाएगा।)

करन (गहरी सांस लेते हुए) बोला - 
तुमने कुछ नहीं किया, सिमरन।
गलती मेरी है। मेरी प्रकृति की।
मैं एक वैंपायर हूँ। और तुम... तुम एक इंसान हो।
हमारा साथ असंभव है। खतरनाक है।

सिमरन (रोते हुए) बोली - 
खतरनाक? हमने दो साल बिताए हैं! आपने मुझे बचाया है!
आप कहते थे कि प्यार सब कुछ बदल सकता है!

करन (चीखते हुए, अचानक पलटकर) बोला - 
प्यार नहीं बदल सकता प्रकृति को, सिमरन!
मेरे अंदर का राक्षस सोया हुआ है, मरा हुआ नहीं!
और अगर... अगर कभी कोई नया जीवन... कोई नई जिम्मेदारी आई... तो मैं उसे संभाल नहीं पाऊंगा।
मैं तुम्हें और उस... उस मासूम को नुकसान पहुंचा सकता हूँ।

(सिमरन स्तब्ध रह जाती है। *"उस मासूम"* शब्द सुनकर उसका दिल ज़ोर से धड़कता है। क्या करन को पता चल गया है?)

सिमरन (फुसफुसाते हुए) बोली - 
आपको... आपको पता है?

(करन चुप रहता है। उसकी खामोशी ही जवाब है। वह जानता था। शायद उसकी वैंपायर इंद्रियों ने उसे सूंघ लिया था।)

करन (दर्द भरी आवाज़ में) बोला - 
मुझे नहीं पता कि वह बच्चा क्या होगा। इंसान? वैंपायर? या कुछ और?
लेकिन मैं जोखिम नहीं ले सकता।
इसलिए, मैं जा रहा हूँ। ताकि तुम सुरक्षित रह सको। ताकि वह बच्चा सुरक्षित रह सके।

(वह दरवाजा खोलता है। तेज हवा और बारिश अंदर आती है।)

सिमरन (चीखते हुए) बोली - 
नहीं करन! रुकिए!
अगर आप गए, तो मैं मर जाऊंगी!
मैं आपके बिना नहीं जी सकती!

करन (आँखों में आंसू लिए, लेकिन चेहरे पर पत्थर जैसी सख्ती के साथ) बोला - 
तुम जी सकती हो, सिमरन। तुम मजबूत हो।
और तुम्हें जीना होगा... उस बच्चे के लिए।

(वह बाहर कदम रखता है। बारिश उसे भीगा देती है। वह पीछे मुड़कर नहीं देखता। वह जानता है कि अगर एक बार भी पीछे मुड़ा, तो वह कभी नहीं जा पाएगा।)

(सिमरन दरवाजे पर गिर पड़ती है, रोते हुए।)

सिमरन (चीखते हुए) बोली - 
करन!!! वापस आइए!!!

(लेकिन करन अंधेरे में गायब हो जाता है। उसकी कार की हेडलाइट्स दूर जाती हुई दिखाई देती हैं, और फिर सब कुछ अंधेरा हो जाता है।)

(सिमरन वहीं जमीन पर बैठी रहती है, बारिश में भीगती हुई। उसके हाथ अपने पेट पर हैं।)

सिमरन (रोते हुए, फुसफुसाते हुए) बोली - 
आप गलत हैं, करन जी...
भागने से समस्या हल नहीं होती।
मैं आपको ढूंढूंगी। चाहे दुनिया के किसी भी कोने में जाएं।
और मैं साबित करूंगी कि हमारा प्यार, आपके श्राप से ज्यादा ताकतवर है।

(बाहर तूफान गरजता है, लेकिन सिमरन के दिल में अब डर नहीं, बल्कि एक नया संकल्प जाग उठा है।)

"प्यार ने त्याग का रूप ले लिया था।
करन ने सोचा कि वह बचा रहा है।
लेकिन सिमरन जानती थी... असली लड़ाई तो अब शुरू हुई थी।"