regret in Hindi Anything by miss k books and stories PDF | काश........! एक अफसोस

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काश........! एक अफसोस

काश ........!
काश ये शब्द हर किसी कि जिंदगी में होता ही है। जब किसी व्यक्ति को किसी बात का अफसोस हो तो वह यही शब्द का प्रयोग करता है।
काश ! मेरे पास भी ऐसी चीजें होती।
काश! मेरे पास भी इतने ही पैसे होते।
काश! मेरे पास भी इतना ही बड़ा घर , गाड़ी और एशो-आराम होता।
सबकी जिंदगी में अलग अलग काश ! होते हैं पर ये तो जैसे मेरे का कोई भाग ही है। मेने जीवन में कई बार सोचा है कि 
काश! में इतनी भोली और बेवकुफ न होती तो शायद लोग मेरे साथ ज्यादा अच्छा व्यवहार करते ।
काश! मेरे पास भी कोई एक ऐसा दोस्त होता जिसे सचमे मेरी परवाह हो। जो मेरे साथ किसी मतलब से न हो ।
मेरे पास मे जितने भी लोग हैं आज तक मैंने कभी उन्हें किसी भी बिना वजह मेरे पास आते नहीं देखा ।
जब किसी को मदद की जरूरत होती है तब ही में उन्हें याद आती हूं।
आज तक किसी एक इंसान की किसी भी हरकत से मुझे ये कभी भी नहीं लगा उनकी जिंदगी में इतनी सी भी अहमियत है।
हां मेरे माता-पिता और मेरी बड़ी बहन के अलावा कोई एक ऐसा व्यक्ति है जो मुझसे बिना स्वार्थ के 
मेरे लिए कुछ भी किया हो ।
क्यू ? में ही 
क्यु हर बार मेरे साथ ही ऐसा होता है कि में किसी को अपना दोस्त मानती हूं तो वो मुझे कुछ समझता ही नहीं।
काश ! किसी को मेरी इतनी ही परवाह होती में ठीक हु या नहीं।

काश ! सब की तरह ही मतलबी होती कि मुझे भी किसी से कोई फर्क न पड़ता ।
इस दुनिया में अच्छा होना ही आपकी सबसे बड़ी ग़लती है और इससे भी बड़ी ग़लती की आप दुसरो से आशा रखें कि लोग मेरे बारे में सोचे मेरी परवाह करे। 
इस मतलबी दुनिया में कोई आप की परवाह भी करें तो शक होता है अब इसे क्या चाहिए।
मुझे पता है कि सभी लोग ऐसे नहीं होते पर ये सोचके चलना की सभी लोग बूरे नहीं होता ये ही तो सबसे बड़ी ग़लती है।
हर किसी इंसान के पास अपने अनुभव होते हैं अपने आसपास के लोगों के साथ उसी के कारण वह एक धारणा बना लेता है कि सब ऐसे ही होते हैं।
काश! मुझे ना कहना आता ।
आज तक किसी ने भी मुझसे मदद मांगी हो में किसी ना ही नहीं कह पाई ।
मुझे सच में इस बात का अफसोस है कि काश! में हमेशा अपने मन की बात किसी को बताती ही नहीं इसलिए लोगों की बदतमीजी पर भी लोगों को यही लगता है कि वह तो कुछ कहेगी ही नहीं इसलिए वो मुझे कुछ भी कहकर चले जाते हैं। 
पर अब उन लोगों को इतना महत्व ही नहीं देना चाहती की उनके कुछ भी कहने से मुझे फर्क पड़े ।
सबसे ज्यादा बुरा तब लगता है तुम्हारे साथ रहने वाला वो व्यक्ति किसी और के आने से तुम्हें भुल जाए । बचपन में यही सोचती थी दोस्ती तो एक ऐसा रिश्ता है जो एक निस्वार्थ भाव जो बिना किसी इच्छा से की जाए ।
अंत में बस यही कि
काश ! मेरा भी एक ऐसा दोस्त होता जो केवल मेरे लिए मेरे साथ हो ।