दिल्ली की तेज, बर्फीली बारिश किसी को भी भिगो सकती थी, लेकिन आकाश के लिए यह सिर्फ पानी नहीं, बल्कि उसकी बेबसी के थपेड़े थे।सड़क किनारे एक टूटी हुई टीन की छत के नीचे खड़े आकाश ने कांपते हाथों से अपना पुराना लेदर का बटुआ खोला। अंदर केवल मुड़ी-तुड़ी दो-चार बस की टिकटें और दस रुपये का एक भीगा हुआ नोट बचा था।"दस रुपये... और आज पूरे दिन का खाना बाकी है," आकाश बुदबुदाया। उसके फटे जूतों में से गंदा पानी रिसकर मोज़ों को चुभ रहा था।
इंस्टेंट मिलियनेयर - 1
दिल्ली की तेज, बर्फीली बारिश किसी को भी भिगो सकती थी, लेकिन आकाश के लिए यह सिर्फ पानी नहीं, उसकी बेबसी के थपेड़े थे।सड़क किनारे एक टूटी हुई टीन की छत के नीचे खड़े आकाश ने कांपते हाथों से अपना पुराना लेदर का बटुआ खोला। अंदर केवल मुड़ी-तुड़ी दो-चार बस की टिकटें और दस रुपये का एक भीगा हुआ नोट बचा था।"दस रुपये... और आज पूरे दिन का खाना बाकी है," आकाश बुदबुदाया। उसके फटे जूतों में से गंदा पानी रिसकर मोज़ों को चुभ रहा था।तभी उसकी जेब में पड़ा पुराना फोन जोर-जोर से थरथराया। स्क्रीन पर नाम चमक ...Read More
इंस्टेंट मिलियनेयर - 2
आकाश के हाथ बुरी तरह कांप रहे थे। बारिश की ठंडी बूंदें स्क्रीन पर गिर रही थीं और वाइब्रेशन साथ स्क्रीन पर चमक रहा नाम मानो उसे किसी दूसरी दुनिया में खींच रहा था—'पर्सनल सेक्रेटरी - मिस्टर सिंघानिया'।उसने लड़खड़ाती उंगलियों से कॉल रिसीव की और फोन कान से लगाया।"ह-हेलो?" आकाश की आवाज़ गले में ही अटक कर रह गई।दूसरी तरफ से एक बेहद भारी, सधी हुई और अदब से भरी आवाज़ आई, "प्रणाम, छोटे मालिक। मैं मिस्टर सिंघानिया बोल रहा हूँ... आपके दादाजी, स्वर्गीय सूर्यभान शाक्य का पर्सनल सेक्रेटरी और लीगल एडवाइज़र।"आकाश को अपनी ही धड़कनें कान के पर्दे ...Read More
इंस्टेंट मिलियनेयर - 3
गाड़ी की पिछली सीट पर बैठे आकाश की आँखों में बदले की आग साफ जल रही थी। उसने होटल कागज़ात को कसकर पकड़ते हुए कहा, "सिंघानिया, गाड़ी सीधा 'द ग्रैंड पैलेस' ले चलो। आज मुझे उस विक्रम और रिया के सामने उनकी असली औकात दिखानी है।"सिंघानिया ने रियर-व्यू मिरर में आकाश को देखा और धीमे से सिर हिलाया।"माफ कीजिएगा छोटे मालिक, लेकिन ऐसा करना इस वक्त आपके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।"आकाश चौंक गया। "क्या मतलब? जब ये सब कुछ मेरा है, तो मैं सामने क्यों नहीं आ सकता?"सिंघानिया ने गाड़ी के बीच का पार्टीशन बंद किया और ...Read More
इंस्टेंट मिलियनेयर - 4
होटल 'द इंपीरियल पैलेस' का भव्य संगमरमरी पोर्च रात की दुधिया रोशनी में नहाया हुआ था। शहर की नामी मीडिया के कैमरे और दौलत की नुमाइश करते रईसों का हुजूम वहां मौजूद था। उसी चमक-दमक के बीच, ऑटो स्टैंड के पास अपने पुराने घिसे हुए जूतों और सादे कपड़ों में आकाश शाक्य शांत खड़ा था। उसके चेहरे पर न कोई घबराहट थी, न ही कोई हीनभावना। उसकी पैंट की जेब में एक ऐसा राज़ छिपा था, जो उस पूरी इमारत की कीमत चुकता कर सकता था—अमेरिकन एक्सप्रेस का दुर्लभ ब्लैक टाइटेनियम सेंटूरियन कार्ड।होटल के विशाल शीशे के दरवाज़े अचानक ...Read More