episode3:mukhauta aur black card in Hindi Love Stories by aakash kumar books and stories PDF | इंस्टेंट मिलियनेयर - 3

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इंस्टेंट मिलियनेयर - 3

गाड़ी की पिछली सीट पर बैठे आकाश की आँखों में बदले की आग साफ जल रही थी। उसने होटल के कागज़ात को कसकर पकड़ते हुए कहा, "सिंघानिया, गाड़ी सीधा 'द ग्रैंड पैलेस' ले चलो। आज मुझे उस विक्रम और रिया के सामने उनकी असली औकात दिखानी है।"
​सिंघानिया ने रियर-व्यू मिरर में आकाश को देखा और धीमे से सिर हिलाया।
​"माफ कीजिएगा छोटे मालिक, लेकिन ऐसा करना इस वक्त आपके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।"
​आकाश चौंक गया। "क्या मतलब? जब ये सब कुछ मेरा है, तो मैं सामने क्यों नहीं आ सकता?"
​सिंघानिया ने गाड़ी के बीच का पार्टीशन बंद किया और बेहद गंभीर आवाज़ में बोला, "छोटे मालिक, आपके दादाजी की मौत कोई प्राकृतिक मौत नहीं थी... उनकी हत्या की गई थी।"
​यह सुनते ही आकाश के रोंगटे खड़े हो गए।
​"शाक्य ग्लोबल कॉर्पोरेशन के बोर्ड डायरेक्टर्स में कुछ ऐसे गद्दार छुपे हैं, जो पूरी सल्तनत हड़पना चाहते हैं," सिंघानिया ने समझाया। "अगर उन्हें भनक भी लगी कि स्वर्गीय सूर्यभान शाक्य का पोता ज़िंदा है और शहर में आ चुका है, तो वे आपको खत्म करने में एक पल भी नहीं लगाएंगे। जब तक हम उन गद्दारों की जड़ों तक नहीं पहुँचते, तब तक दुनिया के सामने आपका एक मामूली गरीब लड़का बने रहना ही आपकी सबसे बड़ी ढाल है।"
​आकाश ने अपनी मुट्ठियाँ भींच लीं। दिल में इंतकाम की आग और बढ़ गई, लेकिन उसने अपने गुस्से को काबू में किया।
​"तो फिर मैं क्या करूँ? तमाशा देखता रहूँ?" आकाश ने दाँत पीसते हुए पूछा।
​सिंघानिया के चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान उभरी। उसने अपनी जेब से एक चमकदार, टाइटेनियम से बना काले रंग का कार्ड निकाला और आकाश की तरफ बढ़ा दिया।
​"इसे देखिए सर। यह है 'अमेरिकन एक्सप्रेस सेंटूरियन ब्लैक कार्ड'। दुनिया का सबसे पावरफुल कार्ड, जिसमें खर्च करने की कोई लिमिट नहीं होती। आप जहाँ चाहें, जो चाहें खरीद सकते हैं। इस कार्ड के पीछे एक गुप्त कोड है, जिससे पूरी दुनिया में आपका नाम नहीं, सिर्फ 'मिस्टर एक्स' दिखाई देगा।"
​सिंघानिया की आँखों में चमक आ गई, "यानी सर... दुनिया के सामने आपका चेहरा भले ही एक आम डिलीवरी बॉय का रहेगा, लेकिन पर्दे के पीछे से पूरी दुनिया की लगाम आपके हाथों में होगी। अब आप बिना सामने आए भी खेल खेल सकते हैं।"
​आकाश ने वह भारी-भरकम ब्लैक कार्ड हाथ में लिया। उसकी उंगलियों में एक अजीब सी ताकत दौड़ गई।
​"द ग्रैंड पैलेस होटल के मालिक के रूप में आपका नाम दर्ज हो चुका है सर, लेकिन स्टाफ को सिर्फ इतना पता है कि नया मालिक गुप्त है," सिंघानिया ने कहा। "विक्रम मल्होत्रा ने आज रात जिस वीआईपी बैंक्वेट हॉल को बुक किया है, उसका फाइनल पेमेंट अभी बाकी है। विक्रम को लगता है कि उस हॉल में पैर रखने से वह शहर का सबसे बड़ा रईस बन जाएगा।"
​आकाश ने खिड़की से बाहर देखा। 'द ग्रैंड पैलेस' की गगनचुंबी इमारत सामने ही रोशनी से जगमगा रही थी। बाहर मर्सिडीज, ऑडी और बीएमडब्ल्यू की कतारें लगी थीं।
​आकाश ने अपनी वही फटी हुई भीगी जैकेट को ठीक किया और अपनी जेब से वह फटा हुआ दस का नोट निकालकर देखा।
​चेहरे पर एक ठंडी, बेखौफ मुस्कान लाते हुए आकाश ने कहा, "सिंघानिया... होटल के मैनेजर को कॉल लगाओ। कहो कि आज रात उस वीआईपी हॉल का किराया दस गुना बढ़ा दिया जाए, और अगर विक्रम मल्होत्रा एक सेकंड भी देर करे, तो उसे और रिया को धक्के मारकर सड़क पर फेंक दिया जाए!"
​गाड़ी होटल के पीछे वाले गेट पर रुकी। आकाश सादे लिबास में, जेब में अरबों की ताकत लिए कार से बाहर निकला।
​सामने मेन गेट पर विक्रम हाथ में शैंपेन का ग्लास लिए रिया की कमर में हाथ डाले मीडिया के सामने पोज़ दे रहा था। विक्रम ने अचानक गेट की तरफ देखा और उसकी नज़र फटे जूतों में खड़े आकाश पर पड़ी।
​विक्रम के चेहरे पर एक घिनौनी हंसी फैल गई, "अरे रिया, देखो तो ज़रा... तुम्हारा पुराना भिखारी आ गया! लगता है यहाँ मेहमानों की जूठन बटोरने आया है!"
​रिया ने नफरत से मुँह फेर लिया।
​लेकिन उन्हें नहीं पता था कि जिस ज़मीन पर वे खड़े थे, वह ज़मीन अब उस 'भिखारी' की मिल्कियत बन चुकी थी।
​तभी होटल का जनरल मैनेजर हाँफता हुआ दौड़ा आया, और उसने चिल्लाकर पूरे सिक्योरिटी स्टाफ को कुछ ऐसा आदेश दिया, जिसे सुनकर विक्रम के हाथ से शैंपेन का ग्लास छूटकर फर्श पर चकनाचूर हो गया...
​मैनेजर ने ऐसा क्या आदेश दिया? क्या विक्रम और रिया सबके सामने सड़क पर बेइज़्ज़त होने वाले हैं? या आकाश की असली पहचान पर कोई नया खतरा मंडराने लगेगा?
​आगे क्या हुआ जानने के लिए पढ़ते रहिए 'एपिसोड 4