दिल्ली की तेज, बर्फीली बारिश किसी को भी भिगो सकती थी, लेकिन आकाश के लिए यह सिर्फ पानी नहीं, बल्कि उसकी बेबसी के थपेड़े थे।
सड़क किनारे एक टूटी हुई टीन की छत के नीचे खड़े आकाश ने कांपते हाथों से अपना पुराना लेदर का बटुआ खोला। अंदर केवल मुड़ी-तुड़ी दो-चार बस की टिकटें और दस रुपये का एक भीगा हुआ नोट बचा था।
"दस रुपये... और आज पूरे दिन का खाना बाकी है," आकाश बुदबुदाया। उसके फटे जूतों में से गंदा पानी रिसकर मोज़ों को चुभ रहा था।
तभी उसकी जेब में पड़ा पुराना फोन जोर-जोर से थरथराया। स्क्रीन पर नाम चमक रहा था—रिया।
आकाश के चेहरे पर एक पल के लिए हल्की मुस्कान आई। उसने फोन उठाया, "हेलो रिया... तुम ठीक हो? मैं बस स्टेशन के पास ही खड़ा हूँ—"
"आकाश, मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है," उधर से रिया की आवाज़ बिल्कुल सपाट और ठंडी थी।
"हाँ, बोलो ना?"
"हम दोनों का अब कुछ नहीं हो सकता। तुम खुद को देखो और मुझे देखो। एक मामूली डिलीवरी बॉय, जिसके पास महीने का किराया देने के पैसे नहीं होते, वह मेरा खर्च क्या उठाएगा? मैं अब यह गरीबी का ड्रामा नहीं झेल सकती।"
आकाश के पैरों तले से ज़मीन खिसक गई। "रिया... सिर्फ कुछ दिन और। मैं दिन-रात मेहनत कर रहा हूँ। दो नौकरियाँ कर रहा हूँ ताकि—"
"ताकि क्या? मुझे फुटपाथ पर रख सको?" रिया की आवाज़ में साफ नफरत थी। "आज से मुझे कभी फोन मत करना। मैं विक्रम के साथ खुश हूँ। कम से कम उसके पास रोलेक्स घड़ी और बड़ी गाड़ी तो है!"
कॉल कट गई।
आकाश पत्थर की मूरत बना वहीं खड़ा रह गया। फोन कान से उतरकर नीचे लटक गया। विक्रम... वही कॉलेज का रईसज़ादा, जो हर दिन कॉलेज की कैंटीन में उसकी फटी कमीज़ देखकर उसका मज़ाक उड़ाता था। आज उसी ने उसकी तीन साल की मोहब्बत को छीन लिया था।
आसमान में जोर से बिजली कड़की। बादलों की उस गड़गड़ाहट के बीच आकाश की आँखों से आंसू बह निकले। किस्मत ने उसे अनाथ भी बनाया और लाचार भी।
उसने हताशा में दोनों मुट्ठियाँ भींच लीं और चीख पड़ा, "आखिर मेरी क्या गलती है?! क्या गरीब पैदा होना कोई गुनाह है भगवान?"
तभी उसके फोन पर एक 'बीप' हुई।
आकाश ने सोचा कि शायद रिया का कोई मैसेज होगा। उसने नम आँखों से स्क्रीन को पोंछा और देखा। लेकिन वह रिया का मैसेज नहीं था।
वह एक प्राइवेट ग्लोबल बैंकिंग नेटवर्क का ऑफिशियल नोटिफिकेशन था।
स्क्रीन पर चमक रहे काले और सुनहरे अक्षरों ने उसकी सांसें रोक दीं:
[ग्लोबल वेल्थ मैनेजमेंट - स्विस नेटवर्क]
खाता संख्या: **********8892
जमा राशि (Credit): ₹5,00,00,00,000 (पाँच अरब रुपये)
खाता शेष (Balance): ₹5,00,00,00,010
स्थिति: सक्रिय। 'रॉयल हेरिटेज ट्रस्ट' के इकलौते उत्तराधिकारी श्री आकाश शाक्य का स्वागत है।
आकाश की आंखें फटी की फटी रह गईं।
"पाँच... पाँच अरब रुपये? यह कोई फ्रॉड मैसेज है क्या?"
उसने कांपती उंगलियों से स्क्रीन को ज़ूम करके देखा। अभी वह इस मैसेज को समझ भी नहीं पाया था कि उसी अज्ञात विदेशी नंबर से एक कॉल आने लगी। स्क्रीन पर लिखा था—'पर्सनल सेक्रेटरी - मिस्टर सिंघानिया'। क्या होगा जब एक 10 रुपये वाले भिखारी के खाते में रातों-रात 5 अरब आ जाएं?
क्या आकाश ये 5 अरब वाला फोन उठाएगा? अगर उठाया तो उसकी गरीबी खत्म, अगर काटा तो शायद उसकी जान भी। जानने के लिए पढ़िए Episode 2 - सिर्फ कल रात 8:20