Namumkin Ishq in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | नामुमकिन इश्क - एपिसोड 30

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नामुमकिन इश्क - एपिसोड 30

एपिसोड 30 – इल्ज़ाम और सच

स्टोर रूम के बाहर अचानक ऐसा सन्नाटा छा गया, जैसे पूरे हॉस्पिटल की आवाज़ किसी ने रोक दी हो।

स्क्रीन पर चल रही CCTV फुटेज में चेहरा साफ़ नहीं दिख रहा था, लेकिन उस व्यक्ति के हाथ में पहनी हुई घड़ी और जैकेट की आस्तीन साफ़ दिखाई दे रही थी।

अर्जुन की नज़र उसी पर टिक गई।

वही घड़ी...

वही काली जैकेट...

रोहन के पास बिल्कुल वैसी ही थी।

अर्जुन ने धीरे से रोहन की तरफ़ देखा।

रोहन ने भी उसकी आँखों में आँखें डाल दीं।

कुछ सेकंड तक दोनों के बीच कोई शब्द नहीं हुआ।

फिर रोहन ने ठंडी आवाज़ में कहा,

"क्या देख रहे हो?"

अर्जुन ने शांत स्वर में जवाब दिया,

"अभी कुछ नहीं।"

रोहन हल्का-सा मुस्कुराया।

"तो फिर ऐसे घूर क्यों रहे हो?"

अर्जुन उसके करीब आया।

"क्योंकि मुझे लगता है... मुझे बहुत जल्दी सब पता चल जाएगा।"

रोहन के चेहरे की मुस्कान एक पल के लिए गायब हुई, लेकिन अगले ही पल उसने खुद को संभाल लिया।

"तुम्हें हर बात में शक करने की आदत है, अर्जुन।"

"और तुम्हें हर बात छिपाने की।"

दोनों की आवाज़ सुनकर समर बीच में आ गया।

"बस करो दोनों। यहाँ हॉस्पिटल है।"

डॉ. कबीर ने भी सख्ती से कहा,

"कोई भी अपनी तरफ़ से फैसला नहीं करेगा। पुलिस को सूचना दी जा चुकी है। जाँच होने दीजिए।"

अर्जुन पीछे हट गया।

लेकिन उसकी नज़र रोहन से नहीं हटी।

आयत की बेचैनी

आयत थोड़ी दूर खड़ी पूरी बात सुन रही थी।

उसके मन में सिर्फ़ एक ही सवाल घूम रहा था—

"क्या रोहन सच में ऐसा कर सकता है?"

उसे याद आया कि कुछ दिन पहले रोहन ने कॉलेज में उसके साथ बदतमीज़ी की थी।

उसे अर्जुन और रोहन के बीच की पुरानी दुश्मनी भी पता थी।

लेकिन सिर्फ़ शक के आधार पर वह किसी को दोषी नहीं मानना चाहती थी।

रीवा उसके पास आई।

"क्या हुआ?"

आयत ने धीरे से कहा,

"मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्या सही है और क्या गलत।"

रीवा ने उसका हाथ पकड़ लिया।

"तुम परेशान मत हो। अर्जुन है ना। वह सब पता कर लेगा।"

आयत ने अनजाने में अर्जुन की तरफ़ देखा।

वह अब भी CCTV स्क्रीन के सामने खड़ा था।

और पता नहीं क्यों...

उसे अर्जुन पर भरोसा था।

पुलिस की एंट्री

करीब आधे घंटे बाद पुलिस की टीम हॉस्पिटल पहुँची।

इंस्पेक्टर ने CCTV फुटेज ध्यान से देखी।

"हमें कुछ और एंगल चाहिए। सिर्फ़ इस फुटेज के आधार पर किसी पर शक नहीं किया जा सकता।"

उन्होंने हॉस्पिटल के सुरक्षा कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की।

कुछ देर बाद एक गार्ड ने कहा,

"सर, कल रात करीब दो बजे एक लड़का इस तरफ़ गया था।"

इंस्पेक्टर ने पूछा,

"चेहरा देखा था?"

गार्ड ने सिर हिलाया।

"नहीं सर, चेहरा साफ़ नहीं दिखा। लेकिन उसके हाथ में मोबाइल था और वह जल्दी में था।"

"कपड़े?"

"ब्लैक जैकेट।"

सबकी नज़र फिर रोहन की तरफ़ चली गई।

रोहन तुरंत बोला,

"ब्लैक जैकेट तो यहाँ बहुत लोगों के पास है।"

इंस्पेक्टर ने उसकी तरफ़ देखा।

"हमने आपका नाम नहीं लिया।"

रोहन चुप हो गया।

अर्जुन ने हल्की साँस ली।

उसे लग रहा था कि रोहन कुछ छिपा रहा है।

लेकिन अभी उसके पास कोई ठोस सबूत नहीं था।

अर्जुन और आयत

रात में ड्यूटी खत्म होने के बाद आयत अस्पताल की बालकनी में खड़ी थी।

अर्जुन वहाँ पहुँचा।

"तुम अभी तक गई नहीं?"

आयत ने धीरे से कहा,

"मन नहीं हुआ।"

"क्यों?"

"आज जो हुआ... उससे थोड़ा डर लग रहा है।"

अर्जुन उसके पास आकर खड़ा हो गया।

"डरने की जरूरत नहीं है।"

आयत ने उसकी तरफ़ देखा।

"अगर सच में कोई हॉस्पिटल के अंदर ऐसी हरकत कर सकता है तो?"

अर्जुन ने कहा,

"तो उसे सामने आना ही पड़ेगा।"

आयत कुछ पल चुप रही।

फिर उसने पूछा,

"आपको रोहन पर शक है?"

अर्जुन ने सीधा जवाब नहीं दिया।

"मुझे किसी पर बिना सबूत के शक करना पसंद नहीं।"

आयत ने राहत की साँस ली।

"आप सही कहते हैं।"

कुछ पल दोनों शांत रहे।

फिर आयत ने धीरे से कहा,

"लेकिन एक बात कहूँ?"

"हूँ।"

"जब भी कोई परेशानी होती है... मुझे सबसे पहले आपकी याद आती है।"

अर्जुन जैसे कुछ पल के लिए बिल्कुल स्थिर हो गया।

उसने उसकी तरफ़ देखा।

"क्यों?"

आयत की आवाज़ धीमी हो गई।

"पता नहीं..."

उसने हल्की मुस्कान के साथ कहा,

"शायद... क्योंकि मुझे आप पर भरोसा है।"

अर्जुन के चेहरे पर भी एक नरम मुस्कान आ गई।

"तो फिर भरोसा बनाए रखना।"

आयत ने सिर हिलाया।

"हमेशा।"

दोनों कुछ पल एक-दूसरे को देखते रहे।

लेकिन तभी नीचे से गौरव की आवाज़ आई—

"अर्जुन! जल्दी नीचे आ!"

अर्जुन तुरंत नीचे चला गया।

एक नया सबूत

स्टोर रूम के पास एक छोटा-सा मेडिकल टैग मिला था।

गौरव ने वह अर्जुन को दिया।

"ये वहाँ मिला।"

अर्जुन ने टैग को ध्यान से देखा।

उस पर एक नंबर लिखा था।

R-17

अर्जुन ने तुरंत कहा,

"ये हॉस्पिटल स्टाफ का कोड नहीं है।"

गौरव ने पूछा,

"फिर?"

अर्जुन कुछ सोचने लगा।

तभी आरिफ बोला,

"ये हमारे ट्रॉमा ट्रेनिंग किट का नंबर हो सकता है।"

अर्जुन ने तुरंत रजिस्टर मंगवाया।

रजिस्टर में किट नंबर की सूची देखी गई।

R-17 — रोहन मेहरा के नाम पर जारी।

कमरे में फिर सन्नाटा छा गया।

गौरव ने अर्जुन की तरफ़ देखा।

"अब?"

अर्जुन ने शांत आवाज़ में कहा,

"अब रोहन से बात करनी पड़ेगी।"

आमना-सामना

अर्जुन सीधे रोहन के कमरे में पहुँचा।

दरवाज़ा खुला था।

रोहन अंदर बैठा मोबाइल चला रहा था।

अर्जुन को देखते ही उसने मोबाइल टेबल पर रख दिया।

"कहो।"

अर्जुन ने टैग उसकी तरफ़ बढ़ाया।

"ये तुम्हारा है?"

रोहन ने टैग देखा।

कुछ सेकंड तक वह चुप रहा।

फिर बोला,

"हाँ।"

"ये स्टोर रूम के बाहर मिला।"

रोहन की आँखें सिकुड़ गईं।

"तो?"

"तो मुझे जानना है कि कल रात तुम्हारी किट वहाँ कैसे पहुँची?"

रोहन कुर्सी से उठ गया।

"तुम मुझ पर चोरी का इल्ज़ाम लगा रहे हो?"

"मैं सिर्फ़ सवाल पूछ रहा हूँ।"

"तुम्हें हर जगह खुद को ही सही समझने की बीमारी है।"

अर्जुन ने शांत स्वर में कहा,

"अगर तुम निर्दोष हो तो डरने की जरूरत नहीं।"

रोहन उसके बिल्कुल सामने आ गया।

"और अगर मैं निर्दोष नहीं हुआ तो?"

अर्जुन की आँखें सख्त हो गईं।

"तो फिर इस बार बात सिर्फ़ कॉलेज की नहीं होगी।"

दोनों कुछ पल एक-दूसरे को देखते रहे।

तभी पीछे से इंस्पेक्टर की आवाज़ आई—

"मिस्टर रोहन मेहरा?"

रोहन ने पलटकर देखा।

इंस्पेक्टर हाथ में एक फाइल लिए खड़े थे।

"हमें आपसे कुछ सवाल करने हैं।"

रोहन का चेहरा पहली बार थोड़ा उतर गया।

लेकिन इंस्पेक्टर के अगले शब्दों ने सबको चौंका दिया—

"और हमें CCTV फुटेज में एक दूसरी चीज़ भी मिली है..."

उन्होंने फाइल खोली।

"...जिससे लग रहा है कि स्टोर रूम में जाने वाला व्यक्ति शायद रोहन नहीं था।"

अर्जुन हैरान रह गया।

रोहन भी चुप हो गया।

तो फिर...

अगर रोहन नहीं था...

CCTV में दिखाई देने वाला वह व्यक्ति कौन था?

और सबसे बड़ा सवाल—

किसने रोहन की किट का इस्तेमाल करके सारा शक उसके ऊपर डालने की कोशिश की थी?

कहीं यह सिर्फ़ मेडिकल सामान की चोरी नहीं...

बल्कि किसी बहुत बड़ी साज़िश की शुरुआत तो नहीं थी?