एपिसोड 30 – साज़िश का असली चेहरा
इंस्पेक्टर की बात सुनते ही कमरे में मौजूद हर शख्स के चेहरे पर हैरानी साफ दिखाई देने लगी।
रोहन, जो कुछ सेकंड पहले तक पूरे आत्मविश्वास के साथ अर्जुन के सामने खड़ा था, अब खुद इंस्पेक्टर की तरफ़ देख रहा था।
"क्या मतलब है आपका?" रोहन ने पूछा।
इंस्पेक्टर ने फाइल बंद करते हुए कहा,
"मतलब ये कि CCTV फुटेज को दोबारा चेक करने पर हमें एक और शख्स दिखाई दिया है।"
अर्जुन ने तुरंत पूछा,
"कौन?"
इंस्पेक्टर ने उसकी तरफ देखा।
"अभी चेहरा साफ नहीं है। लेकिन वो व्यक्ति रोहन मेहरा नहीं है।"
रोहन ने राहत की साँस ली, लेकिन अर्जुन के चेहरे पर कोई बदलाव नहीं आया।
वह अब भी सोच रहा था।
अगर रोहन नहीं था...
तो उसकी किट स्टोर रूम के बाहर कैसे पहुँची?
और कोई उसके सामान का इस्तेमाल क्यों करेगा?
इंस्पेक्टर ने आगे कहा,
"मिस्टर रोहन, आपकी किट कल शाम ट्रेनिंग के बाद कहाँ थी?"
रोहन ने कुछ सोचकर जवाब दिया,
"ट्रेनिंग के बाद मैंने उसे मेडिकल लैब में जमा कर दिया था।"
"क्या आप पक्के हैं?"
"हाँ।"
"किसके सामने जमा की थी?"
रोहन कुछ पल चुप रहा।
"मुझे याद नहीं।"
अर्जुन ने तुरंत उसकी तरफ देखा।
"अभी तो तुम कह रहे थे कि तुम्हें सब याद है।"
रोहन ने गुस्से से कहा,
"तुम बीच में मत बोलो।"
इंस्पेक्टर ने दोनों को शांत रहने का इशारा किया।
"हम यहाँ बहस करने नहीं आए हैं। हमें सिर्फ़ सच्चाई पता करनी है।"
आयत को मिली एक अजीब चीज़
इधर आयत और रीवा हॉस्पिटल के कॉरिडोर में खड़ी थीं।
आयत का ध्यान बार-बार उसी तरफ जा रहा था जहाँ अर्जुन और पुलिस खड़े थे।
रीवा ने उसे देखा और मुस्कुराते हुए कहा,
"तुम्हारी नज़र बार-बार वहीं क्यों जा रही है?"
आयत ने तुरंत कहा,
"मैं बस देख रही हूँ कि क्या हुआ।"
"हाँ... मुझे भी यही लग रहा है।"
आयत ने उसे घूरकर देखा।
"रीवा!"
रीवा हँसने लगी।
"अच्छा बाबा, नहीं चिढ़ाऊँगी।"
तभी आयत की नज़र नीचे पड़ी।
कॉरिडोर के कोने में एक छोटा-सा कार्ड पड़ा था।
उसने झुककर कार्ड उठा लिया।
वह हॉस्पिटल का एक्सेस कार्ड था।
आयत ने कार्ड को पलटकर देखा।
उस पर सिर्फ़ एक नंबर लिखा था—
B-24
"ये किसका होगा?" आयत ने धीरे से कहा।
रीवा ने पूछा,
"क्या हुआ?"
"कुछ नहीं... ये कार्ड मिला है।"
रीवा ने कार्ड देखा।
"किसी स्टाफ का होगा। रिसेप्शन पर दे देते हैं।"
आयत कार्ड लेकर आगे बढ़ने लगी, लेकिन अचानक रुक गई।
उसे कुछ याद आया।
कल रात जब स्टोर रूम के पास हलचल हुई थी, तभी उसने इसी तरह का कार्ड एक आदमी के हाथ में देखा था।
चेहरा उसे याद नहीं था।
लेकिन कार्ड...
उसे याद था।
आयत तुरंत अर्जुन के पास पहुँची।
"अर्जुन!"
अर्जुन ने पलटकर देखा।
"क्या हुआ?"
आयत ने कार्ड उसकी तरफ बढ़ा दिया।
"ये मुझे कॉरिडोर में मिला।"
अर्जुन ने कार्ड देखा।
उसका चेहरा गंभीर हो गया।
"तुम्हें ये कहाँ मिला?"
"स्टोर रूम से थोड़ी दूर।"
अर्जुन ने कार्ड को ध्यान से देखा।
"ये आम स्टूडेंट कार्ड नहीं है।"
इंस्पेक्टर ने भी कार्ड ले लिया।
"ये किसका है, हम पता करेंगे।"
नया नाम सामने आया
कुछ मिनट बाद हॉस्पिटल के रिकॉर्ड से जानकारी निकाली गई।
इंस्पेक्टर ने स्क्रीन देखते हुए कहा,
"ये कार्ड एक इंटर्न के नाम पर जारी हुआ है।"
सबकी निगाहें स्क्रीन पर टिक गईं।
नाम था—
आदित्य राठौर।
अर्जुन ने भौंहें सिकोड़ लीं।
"लेकिन हमारी टीम में तो आदित्य नहीं है।"
डॉ. कबीर ने कहा,
"नहीं। आदित्य दूसरे मेडिकल कॉलेज से आया हुआ ट्रेनी है।"
अर्जुन ने तुरंत पूछा,
"वह अभी कहाँ है?"
नर्स ने बताया,
"सुबह से दिखाई नहीं दिया।"
कमरे में फिर सन्नाटा छा गया।
इंस्पेक्टर ने तुरंत कहा,
"उससे संपर्क करो।"
लेकिन उसका फोन बंद था।
रोहन की बेचैनी
रोहन दूर खड़ा यह सब सुन रहा था।
उसका चेहरा अब पहले जैसा शांत नहीं था।
समर ने धीरे से उसके पास आकर पूछा,
"तुझे आदित्य के बारे में कुछ पता है?"
रोहन ने उसे घूरा।
"नहीं।"
"पक्का?"
"मैंने कहा ना, नहीं!"
समर चुप हो गया।
लेकिन तभी रोहन की नजर अर्जुन पर पड़ी।
अर्जुन भी उसे ही देख रहा था।
दोनों के बीच कुछ सेकंड तक खामोशी रही।
अर्जुन उसके पास आया।
"रोहन।"
"क्या?"
"अगर तू सच में इस मामले में शामिल नहीं है, तो मुझे उम्मीद है कि तू सच सामने आने देगा।"
रोहन हँस पड़ा।
"तुम्हें मुझ पर इतना भरोसा कब से होने लगा?"
"भरोसा नहीं है।"
"तो?"
अर्जुन की आवाज़ ठंडी हो गई।
"बस इतना चाहता हूँ कि इस बार किसी बेगुनाह को नुकसान न हो।"
रोहन ने कुछ नहीं कहा।
अर्जुन वहाँ से चला गया।
लेकिन उसके जाते ही रोहन ने अपनी मुट्ठी भींच ली।
उसके दिमाग में एक ही बात घूम रही थी—
"अगर आदित्य पकड़ा गया तो..."
उसने तुरंत मोबाइल निकाला।
स्क्रीन पर एक नंबर खुला।
वह कॉल करने ही वाला था कि पीछे से आवाज़ आई—
"किसे फोन कर रहे हो?"
रोहन ने झटके से मोबाइल बंद कर दिया।
सामने करण खड़ा था।
"किसी को नहीं।"
करण ने उसे गौर से देखा।
"आजकल तुम बहुत अजीब हरकतें कर रहे हो।"
रोहन ने मुस्कुराने की कोशिश की।
"तुम्हें हर चीज़ में शक करने की आदत है।"
करण कुछ बोलता, उससे पहले रोहन वहाँ से निकल गया।
लेकिन करण को अब यकीन हो चुका था—
कुछ तो गड़बड़ है।
अर्जुन और आयत की छोटी-सी बातचीत
शाम को हॉस्पिटल की कैंटीन में आयत अकेली बैठी थी।
अर्जुन उसके सामने आकर बैठ गया।
"आज बहुत परेशान लग रही हो।"
आयत ने धीमे से कहा,
"बस सोच रही थी कि ये सब हुआ कैसे।"
"तुम्हें डर लग रहा है?"
आयत ने कुछ पल सोचा।
"थोड़ा।"
अर्जुन ने कहा,
"डरो मत।"
आयत ने उसकी तरफ देखा।
"आप हर बार यही कहते हैं।"
"क्योंकि हर बार तुम्हें डरने की जरूरत नहीं होती।"
आयत मुस्कुराई।
"आप हमेशा मेरी चिंता क्यों करते हैं?"
अर्जुन कुछ पल चुप रहा।
उसके पास इस सवाल का कोई आसान जवाब नहीं था।
फिर उसने धीरे से कहा,
"शायद... क्योंकि तुम मेरे लिए बाकी लोगों से थोड़ी अलग हो।"
आयत की मुस्कान धीरे-धीरे गायब हो गई।
उसका दिल अचानक तेज़ धड़कने लगा।
"अलग... कैसे?"
अर्जुन उसकी आँखों में देखते हुए कुछ कहने ही वाला था कि अचानक उसके फोन की घंटी बज उठी।
गौरव का फोन था।
"हाँ?"
दूसरी तरफ़ से गौरव की घबराई हुई आवाज़ आई—
"अर्जुन! जल्दी आ। पुलिस को आदित्य के कमरे से कुछ मिला है।"
अर्जुन तुरंत खड़ा हो गया।
आयत ने पूछा,
"क्या हुआ?"
"मुझे जाना होगा।"
वह जल्दी से वहाँ से निकल गया।
आयत उसे जाते हुए देखती रही।
उसके मन में अर्जुन के अभी-अभी कहे शब्द गूंज रहे थे—
"तुम बाकी लोगों से थोड़ी अलग हो।"
कमरे से मिला राज़
आदित्य के कमरे की तलाशी ली जा रही थी।
इंस्पेक्टर ने एक छोटा-सा बैग टेबल पर रखा।
"ये हमें उसके कमरे से मिला है।"
बैग खोला गया।
अंदर कुछ मेडिकल दस्तावेज़, एक पेन ड्राइव और एक पुरानी डायरी थी।
अर्जुन ने डायरी उठाई।
पहले कुछ पन्ने सामान्य थे।
लेकिन आखिरी पन्ने पर एक नाम लिखा था।
रोहन मेहरा।
अर्जुन की आँखें सिकुड़ गईं।
रोहन भी वहीं खड़ा था।
उसका चेहरा देखते ही अर्जुन समझ गया कि यह नाम देखकर वह भी चौंक गया था।
इंस्पेक्टर ने पूछा,
"रोहन मेहरा... क्या आप आदित्य को जानते हैं?"
रोहन ने कुछ पल चुप रहने के बाद कहा,
"नहीं।"
अर्जुन ने तुरंत उसकी तरफ देखा।
"झूठ।"
रोहन ने गुस्से में कहा,
"मैंने कहा ना, मैं उसे नहीं जानता!"
इंस्पेक्टर ने डायरी अपने कब्जे में ले ली।
"अब ये पता लगाना जरूरी है कि इस डायरी में आपका नाम क्यों है।"
रोहन के पास कोई जवाब नहीं था।
उसी समय इंस्पेक्टर को पेन ड्राइव दिखाई दी।
उन्होंने उसे लैपटॉप में लगाया।
स्क्रीन पर कुछ फाइलें खुलीं।
एक वीडियो फाइल थी।
इंस्पेक्टर ने वीडियो चलाया।
कुछ सेकंड बाद स्क्रीन पर एक चेहरा दिखाई दिया।
वह था—
आदित्य।
और उसके सामने बैठा था...
रोहन।
कमरे में मौजूद हर व्यक्ति सन्न रह गया।
रोहन का चेहरा सफेद पड़ गया।
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा।
अब सवाल सिर्फ़ यह नहीं था कि चोरी किसने की थी।
सवाल यह था—
रोहन और आदित्य के बीच आखिर ऐसा कौन-सा राज़ था, जिसे दोनों छिपा रहे थे?
और क्या इस पूरे खेल का असली निशाना...
आयत थी?