घूमने का शौक
आज भी वैसा ही था। बस फर्क इतना था कि अब जिंदगी में नौकरी और जिम्मेदारियाँ भी जुड़ गई थीं।
देहरादून में रहते हुए मैं कई जगह घूमने गया—एफआरआई, डाट काली मंदिर, ऋषिकेश, गंगा आरती और भी न जाने कितनी जगहें। दोस्तों के साथ घूमना भी अच्छा लगता था, लेकिन इन सब जगहों में मुझे सबसे ज्यादा पसंद एफआरआई था।
शायद इसलिए क्योंकि वहाँ जाकर मुझे गाँव जैसा सुकून मिलता था। चारों तरफ हरियाली, शांत माहौल और प्रकृति के करीब होने का एहसास… वहाँ पहुँचते ही मन कुछ देर के लिए अपनी सारी परेशानियाँ भूल जाता था।
एफआरआई की एक खास बात यह थी कि वहाँ हमेशा दोस्तों का साथ जरूरी नहीं था। कई बार मैं अकेला ही निकल जाता था। जहाँ तक मुझे याद है, मैं वहाँ दस बार से भी ज्यादा जा चुका हूँ।
शायद मुझे घूमने से ज्यादा उन जगहों का सुकून पसंद था।
फिर नौकरी पर आने के बाद जिंदगी में कुछ बड़े सफर भी आए। इन्हीं में मेरी सबसे लंबी यात्राओं में से एक थी वृंदावन और दूसरी थी रुद्रनाथ की यात्रा।
रुद्रनाथ की यात्रा मेरे लिए दूसरी बार थी। पहली यात्रा की यादें अभी भी मन में थीं, इसलिए दूसरी बार जाने का मन बना लिया।
लेकिन इस बार परिस्थिति थोड़ी अलग थी। इस बीच मेरा वजन काफी बढ़ चुका था और पहाड़ की चढ़ाई ने शरीर की असली परीक्षा लेनी शुरू कर दी। कुछ जगहों पर हालत इतनी खराब हो गई कि लगा अब शायद आगे नहीं जा पाऊँगा।
शरीर जवाब दे रहा था, लेकिन मन हारने को तैयार नहीं था।
हर कदम के साथ थकान बढ़ती जा रही थी, सांस फूल रही थी, शरीर भारी लग रहा था… लेकिन मन में एक ही बात थी—
जब चल ही पड़ा हूँ तो यात्रा पूरी करके ही लौटूँगा।
आखिरकार मैंने हार नहीं मानी और रुद्रनाथ की यात्रा पूरी की।
उस दिन समझ आया कि पहाड़ सिर्फ रास्ते की परीक्षा नहीं लेते, वे इंसान के हौसले की भी परीक्षा लेते हैं।
और शायद यही मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत बात रही है—
हालात चाहे जैसे भी रहे हों, मैंने रुकना कभी नहीं सीखा। ❤️
आखिरकार वो समय भी आ गया, जिसका शायद मुझे कभी अंदाजा नहीं था।
मुझे आज भी नहीं पता कि ऐसा क्यों हुआ। हम दोनों अलग हो गए। अलग होने के बहुत से कारण बताए गए।
पहला कारण मेरी नौकरी थी। मेरे पास सरकारी नौकरी नहीं थी और शायद उतने पैसे भी नहीं थे, जितने सामने वाले को चाहिए थे। सच कहूँ तो उस समय मुझे खुद नहीं पता था कि एक इंसान के पास कितने पैसे होने चाहिए और रिश्ते के लिए कितनी आर्थिक मजबूती जरूरी होती है।
इन सवालों के जवाब मेरे पास थे। मैं अपनी तरफ से हर चीज समझाने की कोशिश करता रहा।
लेकिन हद तो उस दिन हो गई, जब मुझे यह कहा गया कि मेरी मम्मी और भाभी ने मुझे कसम दी है कि मैं तुमसे बात न करूँ।
उस एक बात ने मुझे अंदर तक तोड़ दिया।
जिस इंसान से मैं इतने समय से जुड़ा हुआ था, उसने मुझसे बात करना बंद कर दिया और फिर दोस्तों से बात करना शुरू कर दिया। सबसे ज्यादा दुख इस बात का था कि उसे शायद इस रिश्ते के खत्म होने का जरा भी अफसोस नहीं था।
उस समय मेरे मन में बस यही सवाल था—
क्या मैंने इस रिश्ते को जितना अपना समझा था, उतना वह कभी था ही नहीं?
कभी-कभी मुझे लगता है कि शायद उसने मुझे अपनी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किया।
मैं यह भी नहीं कहता कि मैं बहुत अच्छा इंसान हूँ। मुझमें भी कमियाँ हैं, गलतियाँ हैं। लेकिन एक बात मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूँ कि मैंने कभी एक के अलावा दूसरे के बारे में नहीं सोचा।
मेरी एक लड़की दोस्त थी, जिससे मैं करीब 2018 से बात करता था। वह मुझे अच्छी लगती थी, लेकिन उस रिश्ते की वजह से मैंने उससे भी लगभग तीन साल तक बात नहीं की।
इस बात का प्रमाण कोई और नहीं, मैं खुद हूँ।
और छोड़ने की वजह सिर्फ इतनी ही नहीं थी। बहुत कुछ ऐसा था जिसे आज भी मैं लिख नहीं सकता। कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें इंसान दुनिया को नहीं बता सकता, बस अपने अंदर लेकर चलता रहता है।
उस दिन मुझे बहुत बड़ा धक्का लगा।
अगले दिन मैंने उसकी Instagram Story देखी। उसे देखकर लगा जैसे मेरी जिंदगी में कुछ हुआ ही नहीं था। उसे कोई फर्क नहीं पड़ा, कोई अफसोस नहीं था।
मैं सोचने लगा—
ऐसे कैसे लोग रहते हैं दुनिया में?
जिस लड़की के लिए मैं अपने घरवालों से लड़ता रहा, जिसके लिए मैंने बहुत कुछ छोड़ा, वही आज मुझे अनदेखा करके अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गई।
दो दिन बीत गए।
रात को मैं बिल्कुल अकेला था। उस रात मैंने शराब पी… बहुत ज्यादा पी। शायद मैं अपने अंदर के दर्द को कुछ देर के लिए चुप कराना चाहता था।
लेकिन मैं रोया नहीं।
उस समय अगर मेरी जगह कोई और होता, तो शायद वह कोई बहुत गलत कदम उठा लेता। लेकिन मैंने अपने परिवार के बारे में सोचा।
मुझे लगा कि मेरी जिंदगी सिर्फ मेरी नहीं है।
मेरे पीछे मेरा परिवार है, मेरे अपने लोग हैं। मेरे जाने से मेरा दर्द खत्म नहीं होगा, बल्कि मेरे अपनों की जिंदगी भर की तकलीफ शुरू हो जाएगी।
उसी रात मैंने अपने आप से एक फैसला किया।
वो मेरा एक सपना था।
अच्छा हुआ वो सपना टूट गया…
लेकिन मैं नहीं टूटा।
शायद उस रात मेरा एक रिश्ता खत्म हुआ था, लेकिन उसी रात मेरे अंदर का एक नया इंसान पैदा हुआ था।
जिसे अब किसी के जाने से अपनी जिंदगी खत्म नहीं करनी थी।
उसे बस अपनी जिंदगी फिर से शुरू करनी थी। ❤️
उस रात के बाद मैंने एक फैसला कर लिया था—अब उसे अपनी जिंदगी से निकालना है।
मैं जानता था कि किसी इंसान को भूलना इतना आसान नहीं होता, खासकर तब जब उसके साथ जिंदगी के कई साल और बहुत सारी यादें जुड़ी हों। इसलिए मैंने खुद को बदलने के बजाय खुद को व्यस्त रखना शुरू कर दिया।
कभी-कभी लगातार 48-48 घंटे तक ड्यूटी करता था। जब काम से थोड़ा खाली समय मिलता तो भजन सुनता, मोटिवेशनल वीडियो देखता और खुद को समझाता कि जिंदगी किसी एक इंसान के चले जाने से खत्म नहीं हो जाती।
शुरुआत में यह सब सिर्फ उसे भूलने के लिए कर रहा था।
लेकिन धीरे-धीरे यही मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गया।
काम, जिम्मेदारियाँ, मेरे मैनेजर और दिन-रात की भागदौड़ ने मुझे इतना व्यस्त कर दिया कि मुझे खुद पता ही नहीं चला कि कब उसके बारे में सोचना कम हो गया।
सच कहूँ तो एक महीने से पहले ही मैं उसे काफी हद तक भूल चुका था।
आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है कि शायद उस रिश्ते ने मुझे प्यार से ज्यादा दुनियादारी सिखाई।
मुझे असली दुनियादारी देहरादून आकर समझ आई।
तब समझ आया कि दुनिया में सिर्फ इंसान बड़ा नहीं होता… कई बार पैसा इंसान से भी बड़ा बना दिया जाता है।
लेकिन उस पूरे अनुभव ने मेरे अंदर एक नियम जरूर बना दिया।