"मैं उस चाँद को प्यार करता हूँ और वो चाँद मुझसे प्यार नहीं करता। क्या किसी किताब में ये लिखा है कि चाँद अगर ना मिले तो जिंदगी में रोशनी नहीं मिलती? अगर उस चाँद की खुशी के लिए उस रोशनी से भी मुँह मोड़ना पड़े, तो भी वो मुझे गवारा है। मैं उस चाँद को हमेशा रोशनी की तरह जगमगाता हुआ देखना चाहता हूँ।"
ये मेरी कहानी है। मैं महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव से ताल्लुक रखता हूँ। मेरी जिंदगी में वैसे कोई ऐसी बड़ी समस्या नहीं थी, और हम एक साधारण मध्यम वर्गीय परिवार से थे। मैंने दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में अच्छे खासे अंकों के साथ सफलता हासिल की, और फिर मुझे एक कॉलेज में छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) मिल गई।
महाराष्ट्र में इस तरह के मौकों की कमी थी, लेकिन मुझे चेन्नई के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में सीट मिल गई। जब मैंने अपने माता-पिता को बताया कि महाराष्ट्र में सीटें भर चुकी हैं और मुझे चेन्नई जाने का मौका मिल रहा है, तो उन्होंने बस इतना कहा—"बेटा, तू सिर्फ अच्छे से पढ़ाई कर, बाकी सब हम संभाल लेंगे।"
इसके बाद, चेन्नई के उस कॉलेज में मेरा दाखिला हो गया। वहाँ रहने की व्यवस्था और बाकी सारी चीजें इतनी बेहतरीन थीं कि ज्यादा खर्च भी नहीं हुआ, और मेरे माता-पिता तो हर कदम पर मेरा समर्थन कर रहे थे ही। फिर मैं चेन्नई आ गया।
वह कॉलेज इतना खूबसूरत था कि मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि दुनिया में ऐसी कोई जगह भी हो सकती है। जाहिर है, मैं एक छोटे गाँव से था, इसलिए ज्यादा बाहर जाना हुआ नहीं था। बारहवीं पूरी होने के बाद, अच्छे अंकों और छात्रवृत्ति के दम पर मुझे मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज (MCC) में प्रवेश मिला। सच कहूँ तो, वह कॉलेज किसी जन्नत से कम नहीं था।
जब मैं उसके प्रांगण में पहुँचा, तो वहाँ की हवा और हर तरफ फैली हरियाली का अहसास ही बिल्कुल अलग था। चारों तरफ घना जंगल, हिरण और प्रकृति के ऐसे नज़ारे देखकर मैं पूरी तरह सन्न रह गया कि क्या सच में ऐसा भी कुछ होता है? वहाँ की सबसे खास बात यह थी कि छात्र अपने जीवन के अधूरे सपनों को कागज़ पर उतारते थे, उन्हें पूरा करने के बारे में सोचते थे, और शांत कोनों में बैठकर अपने दिल की बातें टटोलते थे।
वह कॉलेज तीन सौ बीस एकड़ में फैला हुआ था, इतना विशाल और खूबसूरत कि ज्यादातर बच्चे या तो पैदल चलते थे या साइकिल का इस्तेमाल करते थे। पत्थर की बनी बेंचे और उस शिक्षण संस्थान का इतिहास बहुत गौरवशाली था। मैं यह सब देखकर इसलिए भी हैरान था क्योंकि मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं ऐसी किसी जगह को अपनी आँखों से देख पाऊँगा।
लेकिन, मुझे क्या पता था कि असली कहानी यहीं से शुरू होने वाली है। मुझे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि यही कॉलेज मुझे बेशुमार खुशियाँ तो देगा ही, साथ ही ऐसा गहरा दर्द भी दे जाएगा जिससे शायद मैं कभी उबर न पाऊँ। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि ये खूबसूरत सफर मेरे लिए किसी इम्तहान में बदल जाएगा।