Shakti ke Shiv - 25 in Hindi Women Focused by sheetal books and stories PDF | Shakti ke Shiv - 25

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Shakti ke Shiv - 25



अगली सुबह...

बनारस की सड़कों पर रोज़ की तरह भीड़ थी, लेकिन शक्ति की नज़र उस भीड़ में किसी और को ढूँढ़ रही थी।
वह अपनी गाड़ी से अलग-अलग रास्तों पर घूम रही थी।
कल शाम पकड़े गए उन लोगों से पूछताछ में कुछ अहम जानकारी मिली थी।

उनका कहना था कि उन्हें फोन पर एक आदमी instructions देता था।

 वे लोग सुनसान रास्तों या बाज़ारों में अकेली लड़कियों को निशाना बनाते और फिर उन्हें एक बड़े network तक पहुँचाते थे।

सबसे बड़ी बात...

जिस आदमी से उन्हें orders मिलते थे, उसका network सिर्फ़ एक जगह तक सीमित नहीं था।

बनारस के कई इलाकों में उसके लोग फैले हुए थे।

शक्ति ने गाड़ी की रफ़्तार थोड़ी धीमी कर दी।

उसकी नज़र सड़क के दोनों तरफ घूम रही थी।

"आख़िर तुम लोग हो कहाँ..."

उसने धीमे से खुद से कहा।

कल उसका पीछा करने वाला आदमी भले ही हाथ नहीं आया था, लेकिन अब शक्ति के पास उसके network तक पहुँचने के लिए एक सुराग था।

उसे बस उस सुराग को सही जगह तक पहुँचाना था।

अचानक उसकी नज़र सड़क के किनारे खड़े दो आदमियों पर पड़ी।

दोनों किसी का इंतज़ार करते हुए बार-बार सड़क की तरफ देख रहे थे।

उसकी आँखें सिकुड़ गईं। कुछ तो गड़बड़ थी। शक्ति ने जैसे ही उस आदमी को देखा, उसकी नज़रें तुरंत उस पर टिक गईं।

वही आदमी था जो कल शाम से उसका पीछा कर रहा था।
शक्ति उसकी तरफ बढ़ी ही थी कि अचानक उसकी नज़र शक्ति पर पड़ गई।

एक पल के लिए दोनों की नज़रें मिलीं।
अगले ही पल वह आदमी पलटा और दौड़ पड़ा।

"रुको!"

शक्ति भी उसके पीछे दौड़ पड़ी।

वह आदमी गलियों से निकलकर मुख्य सड़क की तरफ भाग रहा था। शक्ति लगातार उसके पीछे थी।

भीड़ के बीच रास्ता बनाते हुए वह आदमी आगे निकल गया।

शक्ति ने उसकी तरफ हाथ बढ़ाया, लेकिन वह आख़िरी पल में बचकर निकल गया।

"रुको!"

वह फिर उसके पीछे दौड़ी। तभी सामने से एक कार तेज़ी से आती दिखाई दी।

शक्ति ने बिना देखे सड़क पार करने की कोशिश की और—

धड़ाम!

वह कार के आगे वाले हिस्से से टकरा गई।

शक्ति लड़खड़ाकर एक तरफ हो गई।

कार तुरंत रुक गई।

ड्राइविंग सीट का दरवाज़ा खुला।

"शक्ति!"
शिवाय तुरंत गाड़ी से बाहर निकला और शक्ति के पास आया।

शक्ति सड़क पर बैठी थी और अपने कंधे को सहला रही थी। आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई थी।

शिवाय उसके पास बैठते हुए बोला—

"शक्ति... तुम ठीक हो?"

शक्ति ने बिना उसकी तरफ देखे हल्का-सा सिर हिलाया।

"हम्म।"

"चलो मेरे साथ।"

शक्ति ने उसकी तरफ देखा।

"नहीं, आप जाइए। मैं ठीक हूँ।"

शिवाय ने इस बार उसकी बात नहीं मानी।

"शक्ति, चलो मेरे साथ।"

उसकी आवाज़ में चिंता साफ़ थी।

शक्ति कुछ पल उसे देखती रही, फिर आखिरकार उसकी बात मान गई।

वह उठी और शिवाय के साथ उसकी कार में जाकर बैठ गई।

कुछ ही देर बाद शिवाय ने गाड़ी चला दी।

शक्ति खिड़की से बाहर देखने लगी।

सड़कें पीछे छूटती जा रही थीं।

शिवाय ने एक नज़र उसकी तरफ डाली।

"By the way... तुम इतनी तेज़ भाग क्यों रही थीं?"

शक्ति ने बाहर देखते हुए बिल्कुल सहजता से कहा—

"बस... ऐसे ही मन कर रहा था।"

शिवाय ने झुंझलाकर उसकी तरफ देखा।

"कभी तो सीधा जवाब दे दिया करो।"

शक्ति चुप रही।

शिवाय ने भी कुछ नहीं कहा।

लेकिन उसके चेहरे से साफ़ था कि वह शक्ति के इस जवाब पर बिल्कुल विश्वास नहीं कर रहा था।

शिवाय शक्ति को पास के अस्पताल ले गया। वहाँ थोड़ी देर इलाज के बाद दोनों अस्पताल से बाहर निकल आए।


शक्ति को मामूली चोटें आई थीं, लेकिन कंधे में अभी भी हल्का दर्द था।
शिवाय ने कार का दरवाज़ा खोलते हुए कहा—
"तुम घर जाकर आराम करो। वैसे... तुम कहाँ ठहरी हुई हो?"
शक्ति ने जवाब दिया— “Kashi Grand में"

शिवाय ने सिर हिलाया और कार स्टार्ट कर दी।

कुछ ही देर बाद शक्ति के फोन की घंटी बजी।

स्क्रीन पर नाम देखकर उसने तुरंत कॉल उठा लिया—

ACP Vikram Calling...

"Hello?"

दूसरी तरफ से कुछ सुनते ही शक्ति के चेहरे के भाव बदल गए।

उसकी आवाज़ अचानक सख्त हो गई।

"I am just coming. Please send me the location."

दूसरी तरफ से फिर कुछ कहा गया।

शक्ति ने बिना कोई सवाल किए कहा—

"Okay. I am coming now."

उसने कॉल काट दिया।

शिवाय ने एक नज़र उसकी तरफ डाली।

"क्या हुआ?"

शक्ति ने उसकी तरफ देखते हुए कहा—

"गाड़ी उसी तरफ ले चलो... जहाँ कल आपको आपकी बहन मेरे साथ मिली थी।"

शिवाय के चेहरे पर चिंता आ गई।

"क्या हुआ? सब ठीक है?"

"बस वहाँ चलो। वहीं पहुँचकर सब पता चलेगा।"

शिवाय ने फिर पूछा— "मेरी बहन तो ठीक है ना?"

शक्ति ने तुरंत कहा— "वो ठीक है। उसे कुछ नहीं हुआ।"

शिवाय ने राहत की साँस ली और बिना कोई और सवाल किए कार उसी दिशा में मोड़ दी।

कुछ देर बाद दोनों उसी जगह पहुँच गए...

शक्ति ने कार से उतरते ही चारों तरफ नज़र दौड़ाई।

उसके चेहरे पर फिर वही गंभीरता लौट आई थी

उसकी नज़र पास जमा भीड़ पर पड़ी।

वह तुरंत उसी तरफ बढ़ गई।

कुछ constables ने पहले ही इलाके के चारों ओर घेरा बना रखा था।

"पीछे हटिए... कोई भी अंदर नहीं आएगा।"

एक constable भीड़ को पीछे कर रहा था, जबकि दूसरा आसपास की जगह की तस्वीरें ले रहा था।

ACP विक्रम तेजी से उसकी तरफ आया।

"मैडम..."

शक्ति ने उसकी तरफ देखा।

विक्रम का चेहरा गंभीर था।

"एक लड़की के साथ दुष्कर्म हुआ है। उसकी मौत हो चुकी है। Body को हमने postmortem के लिए भेज दिया है।"

एक पल के लिए शक्ति की आँखें स्थिर हो गईं।

विक्रम ने सामने एक पुराने shutter की तरफ इशारा किया।

"इसके अंदर। हमें information मिली थी, उसके बाद shutter खुलवाया गया। Body को postmortem के लिए भेज दिया है।"

शक्ति कुछ पल उस shutter को देखती रही।

शक्ति ने बिना कुछ कहे अंदर की तरफ कदम बढ़ाए।

अंदर का माहौल देखकर उसके चेहरे की गंभीरता और बढ़ गई।

उसने पूरे कमरे पर एक नज़र डाली।

फर्श पर कुछ सामान बिखरा हुआ था और आसपास के निशान बता रहे थे कि वहाँ कुछ हुआ था।

विक्रम उसके पीछे खड़ा था।

"मैडम, forensic team को बुला लिया है। अभी तक हमें इतना ही पता चला है कि लड़की को यहाँ लाया गया था।

बाकी details postmortem और forensic report के बाद ही clear होंगी।"

शक्ति कुछ पल चुप रही।

उसकी नज़र कमरे के एक-एक कोने पर घूम रही थी।

हाँ, इसे थोड़ा polished और natural flow में ऐसे रख सकते हैं:

शक्ति धीरे-धीरे पूरे crime scene की जाँच कर रही थी। उसकी नज़र कमरे की हर छोटी-बड़ी चीज़ पर जा रही थी।

ACP विक्रम कुछ दूरी पर खड़ा होकर बोला—

"मैडम... लड़की के साथ बहुत दरिंदगी हुई है। देखकर लगता है कि ये सब कल ही हुआ था।"

शक्ति के चेहरे पर कोई भाव नहीं आया।

उसने बस शांत आवाज़ में कहा—

"ठीक है। तुम मेरे साथ चलो। पहले Kashi Forensic & Postmortem Centre चलते हैं। देखना है report में क्या आया है।"

विक्रम ने सिर हिलाया।

"जी मैडम।"

शक्ति बाहर आई तो शिवाय अब भी अपनी कार के पास खड़ा उसका इंतज़ार कर रहा था।

शक्ति बिना कुछ कहे कार की तरफ बढ़ी और जाकर बैठ गई।

शिवाय ने एक नज़र उसकी तरफ देखा, लेकिन उसके चेहरे की गंभीरता देखकर कोई सवाल नहीं किया।

कुछ ही सेकंड बाद कार वहाँ से निकल गई।

पीछे ACP विक्रम अपनी police jeep में उनके पीछे चल पड़ा।

शक्ति खिड़की से बाहर देख रही थी।

उसके दिमाग में सिर्फ़ एक सवाल घूम रहा था—

क्या ये हत्या उसी network की अगली कड़ी थी, जिसकी तलाश वो इतने दिनों से कर रही थी?

कुछ देर बाद तीनों Kashi Forensic & Postmortem Centre पहुँच गए।

वे एक office के बाहर जाकर रुक गए।

ACP विक्रम ने दरवाज़े पर हल्की दस्तक दी।

"May I come in, madam?"

"Yes, come in."

अंदर से एक महिला की आवाज़ आई।

तीनों अंदर दाखिल हुए।

सामने एक लड़की desk के पास खड़ी कुछ reports पढ़ रही थी। वह reports में इतनी व्यस्त थी कि उसे ध्यान ही नहीं रहा कि कमरे में कौन आया है।

विक्रम ने मुस्कुराते हुए कहा—

"Hi, Doctor Pallavi."

पल्लवी ने तुरंत नज़रें उठाईं और हल्की मुस्कान के साथ बोली—

"Hi, ACP Vikram."

विक्रम ने शक्ति की तरफ इशारा किया।

"Ma'am, ये हैं Dr. Pallavi, forensic scientist."

फिर उसने पल्लवी की तरफ देखते हुए कहा—

"और Pallavi, ये हैं DIG Shakti, Crime Branch."

पल्लवी ने तुरंत शक्ति की तरफ देखकर कहा—

"Hello, ma'am."

शक्ति ने हल्का-सा सिर हिलाया।

"Hello."

तभी विक्रम ने शिवाय की तरफ इशारा करते हुए कहा—

"और ये..."

विक्रम अपनी बात पूरी कर पाता, उससे पहले ही पल्लवी की आँखें शिवाय पर टिक गईं।

"मैं इन्हें जानती हूँ।"

वह उत्साहित होकर बोली—

"ये Shivay Pratap Singh हैं ना? India के famous doctors में से एक। राजस्थान में इनका अपना medical institute भी है। मैंने इनकी कई speeches सुनी हैं।"

पल्लवी के चेहरे पर excitement साफ़ दिखाई दे रही थी।

"Hello, sir! I'm actually a big fan of yours. मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि मैं आपसे इस तरह मिलूँगी।"

शिवाय ने बस हल्की-सी मुस्कान के साथ कहा—

"Hello, Dr. Pallavi."

पल्लवी फिर अपनी reports की तरफ मुड़ गई।

लेकिन शक्ति चुपचाप शिवाय की तरफ आँखें फाड़े देख रही थी।

जैसे उसे पहली बार एहसास हुआ हो कि जिस आदमी को वो अब तक सिर्फ़ एक शांत और थोड़ा irritating इंसान समझती आई थी...

उसकी पहचान उससे कहीं बड़ी थी।

जानने के लिए पढ़ते रहिए Shakti Ke Shiv...