रात के 9 बज रहे थे। ऑफिस की लाइटें एक-एक करके बंद हो रही थीं। 1 महीने का प्रोजेक्ट अब 5 दिन में पूरा करना था, इसलिए सब थक कर घर जा चुके थे।
सिर्फ एक चेयर पर अभी भी लाइट जल रही थी। वहाँ जैन बैठी थी। उसकी आँखें लैपटॉप पर थीं, पर मन कहीं और था। म्याओ की वो बात - "अपनी जिद त्याग दो" - उसके दिल में चुभ रही थी। उसे लग रहा था कि म्याओ उससे नाराज है।
तभी पीछे से किसी के कदमों की आवाज आई।
"तुम अभी तक घर नहीं गई?"
जैन ने चौंक कर पीछे देखा। सामने म्याओ खड़ी थी। उसके हाथ में अभी भी पट्टी बंधी हुई थी, जो उस कार एक्सीडेंट के बाद लगी थी। डॉक्टर ने उसे 15 दिन के आराम के लिए कहा था, पर वो ऑफिस आ गई थी।
जैन ने धीरे से कहा - "काम बहुत है, 5 दिन में कैसे होगा।"
म्याओ ने उसके सामने वाली चेयर खींची और बैठ गई। उसने टेबल पर दो कॉफी रखी।
म्याओ बोली - "इसीलिए मैं आई हूँ। मुझे पता था तुम यहीं मिलोगी।"
जैन ने कॉफी ली। दोनों के बीच कुछ देर खामोशी रही। बाहर तेज बारिश शुरू हो चुकी थी।
म्याओ ने बात शुरू की - "उस दिन के लिए सॉरी। कार में मैंने तुम पर गुस्सा किया। मुझे नहीं करना चाहिए था।"
जैन बोली - "कोई बात नहीं, तुम्हारा एक्सीडेंट मेरी वजह से ही हुआ। अगर मैं तुम्हारी कार में नहीं बैठती तो..."
म्याओ ने उसकी बात काट दी - "नहीं, मेरी गलती थी। मैं जल्दबाजी में थी।"
फिर म्याओ ने जैन की तरफ ध्यान से देखा। जैन आज भी अपने बालों से अपनी गर्दन को छुपा रही थी। वो पिंक निशान अभी भी हल्का-हल्का दिख रहा था, जो उस होटल वाली रात का था।
म्याओ ने मुस्कुरा कर कहा - "तुम अभी भी उसे छुपा रही हो?"
जैन का चेहरा लाल हो गया - "ऑफिस में सब देखेंगे तो क्या सोचेंगे।"
म्याओ ने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा - "प्यार छुपाने की चीज नहीं है जैन। वो निशान इस बात का सबूत है कि तुम मेरी हो।"
ये सुनते ही जैन की आँखों में आँसू आ गए। इतने महीनों से वो इसी एक लाइन का इंतजार कर रही थी।
जैन बोली - "तो तुमने कभी खुल कर क्यों नहीं बताया कि तुम मुझसे प्यार करती हो?"
म्याओ ने एक लंबी सांस ली - "डरती थी। अगर तुम मना कर देती तो? हमारी दोस्ती भी टूट जाती। उस दिन 5 स्टार होटल में मैंने हमारे सारे दोस्तों को इसीलिए बुलाया था। मैं सबके सामने तुम्हें प्रपोज करना चाहती थी। पर कॉल आ गया और फिर वो एक्सीडेंट... सब खराब हो गया।"
जैन अब रो रही थी।
म्याओ उठी और खिड़की के पास गई। बारिश और तेज हो गई थी, और अचानक ऑफिस की लाइट चली गई। पूरा ऑफिस अंधेरे में डूब गया।
जैन थोड़ा डर गई - "लाइट चली गई।"
म्याओ ने अपने फोन की टॉर्च जलाई और बोली - "डरो मत, मैं हूँ ना तुम्हारे साथ।"
उस हल्की रोशनी में दोनों का चेहरा साफ दिख रहा था।
म्याओ ने कहा - "चलो, अब घर चलते हैं। आज तुम बाइक भी नहीं लाई हो।"
दोनों ने अपने लैपटॉप बैग में रखे और नीचे पार्किंग में आए। म्याओ ने अपनी जैकेट उतार कर जैन के कंधे पर डाल दी।
जैन ने कहा - "तुम्हें ठंड लग जाएगी।"
म्याओ बोली - "तुम्हें ज्यादा ठंड लग रही है।"
कार में बैठते ही म्याओ ने हीटर चालू किया। बाहर बारिश की बूंदें शीशे पर गिर रही थीं। म्याओ ने कार स्टार्ट नहीं की।
जैन ने पूछा - "कार स्टार्ट क्यों नहीं कर रही हो?"
म्याओ ने जैन की तरफ देखा और बोली - "क्योंकि मुझे तुम्हें एक बार फिर से, बिना किसी डर के, कहना है - जैन, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। क्या तुम मेरी जिंदगी भर के लिए मेरी बनोगी?"
जैन ने बिना एक सेकंड सोचे म्याओ का हाथ पकड़ लिया और बोली - "हाँ म्याओ, मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ।"
उस बारिश वाली रात, कार के अंदर, दो दिल आखिरकार एक हो गए। प्रोजेक्ट अभी भी अधूरा था, कंपनी का प्रेशर था, पर अब उन्हें किसी बात का डर नहीं था क्योंकि वो दोनों साथ थे।
म्याओ ने कार स्टार्ट की और कहा - "चलो, अब इस प्रोजेक्ट को भी हम अपने प्यार की तरह ही पूरा करेंगे।"
कार धीरे-धीरे बारिश में आगे बढ़ने लगे।